Sahare Ka Suryasta

Sahare Ka Suryasta

Language:

Hindi

Pages:

160

Country of Origin:

India

Age Range:

18-100

Average Reading Time

320 mins

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Book Description

सुमित्राजी भी घबरा गईं। कैलाश बाबू के पीछे-पीछे वे भी बहू के कमरे की तरफ चल पड़ीं। कैलाश बाबू कमरे में पहुँचकर पोते को देखते हैं। पोता एकटक सबको देख रहा है। चुपचाप पड़ा-पड़ा हाथ-पैर चला रहा है। फिर पोते के हाथ-पैर टटोलते हुए कैलाश बाबू बोले, 'यह तो बिल्कुल नॉर्मल है। ठीक-ठाक तो है।' 'नहीं पापाजी, यही तो इसकी बीमारी है। पहले मैं भी यही समझती थी। इसी नासमझी के चलते पहली बार 'सीरियस' हालत में डॉक्टर के पास ले गई थी। डॉक्टर ने ही यह बताया कि निमोनिया है। बच्चा इसमें गुमसुम रहेगा। पता भी नहीं चलेगा। इसमें सुई और सीरप काम नहीं करता है। इसमें इलेक्ट्रिक से भाप देनी पड़ती है। तभी यह ठीक होता है, पापाजी।' 'अरे तो चलो, पहले यहीं दिखा लेते हैं। यहाँ भी एक अच्छे डॉक्टर हैं। सब ठीक हो जाएगा।' —इसी पुस्तक से ग्रामीण जीवन की विसंगतियों, विद्रूपताओं और संघर्ष का सच उजागर करतीं मन को उद्वेलित करनेवाली रोचक कहानियों का संकलन।

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