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Nirmala

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Unbound Script

In category

Literary Fiction

Language

Hindi

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About the book

मुंशी प्रेमचंद हिन्दी उपन्यास को जासूसी, अय्यारी और पौराणिक कथानकों से निकालकर वास्तविक सामाजिक विषयों तक ले आये। इसमें उनका केन्द्रीय प्रश्न हमारे समाज की आधारी आबादी, यानी की स्त्रियों की समस्याएं थीं। आज आपको शायद यह बात उतनी बड़ी न लगती हो, लेकिन साहित्य में यह एक बड़ा प्रस्थान है। इसके बाद हिन्दी उपन्यास पीछे नहीं लौट सकता था । कथाकार सामाजिक और व्यक्तिमन की हलचलों से मुख नहीं मोड़ सकते थे। निर्मला में प्रेमचंद अनमेल विवाह को विषय बनाते हैं और उसे करुणा की जिस जमीन तक ले जाते हैं, उससे गुजरते हुए आँखें गीली होने लगती हैं । वह मनुष्य के संदेह, संशय और मनोसंघर्ष को जितनी सहजता से भाषा में प्रत्यक्ष करते हैं, इससे पाठक न सिर्फ़ कथा पत्रों से जुड़ता है बल्कि खुद के भीतर भी उतरता है ।

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मुंशी प्रेमचंद हिन्दी उपन्यास को जासूसी, अय्यारी और पौराणिक कथानकों से निकालकर वास्तविक सामाजिक विषयों तक ले आये। इसमें उनका केन्द्रीय प्रश्न हमारे समाज की आधारी आबादी, यानी की स्त्रियों की समस्याएं थीं। आज आपको शायद यह बात उतनी बड़ी न लगती हो, लेकिन साहित्य में यह एक बड़ा प्रस्थान है। इसके बाद हिन्दी उपन्यास पीछे नहीं लौट सकता था । कथाकार सामाजिक और व्यक्तिमन की हलचलों से मुख नहीं मोड़ सकते थे। निर्मला में प्रेमचंद अनमेल विवाह को विषय बनाते हैं और उसे करुणा की जिस जमीन तक ले जाते हैं, उससे गुजरते हुए आँखें गीली होने लगती हैं । वह मनुष्य के संदेह, संशय और मनोसंघर्ष को जितनी सहजता से भाषा में प्रत्यक्ष करते हैं, इससे पाठक न सिर्फ़ कथा पत्रों से जुड़ता है बल्कि खुद के भीतर भी उतरता है ।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Unbound Script
Format
Paperback
Publisher
Unbound Script
Publication year
2026
Weight
100 grams
ISBN-13
9788119745685
Pages
192
Reading time
~6 hrs
Age
0-11
Country of origin
India
Dimensions
5.1 × 5.1 cm
Language
Hindi

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