Media
Kuchh Panktiyan
- Author Name:
Gyanranjan
-
Book Type:

- Description:
‘कुछ पंक्तियाँ’ ‘पहल’ के सम्पादकीय एवं प्रकाशकीय आलेखों का संकलन है। समसामयिक राजनीति और साहित्य-समाज के प्रतिक्रियावादी तत्वों को लेकर इन आलेखों का जनपक्षधर स्टैंड अपने समय में जितना विचारोत्तेजक, बहस तलब और प्रासंगिक था आज भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है। इस सन्दर्भ में ज्ञानरंजन की ये पंक्तियाँ देखी जा सकती है जो उन्होंने पहल-2 के सम्पादकीय में लिखा था।— “‘पहल’ का प्रकाशन मुख्य रूप से लेखकों, बुद्धिजीवियों के लिए नहीं बल्कि पाठकों की उस बड़ी संख्या के लिए हुआ है जो एक ख़ास तरह की तैयारी के लिए तैयार होने को है। हम स्पष्ट घोषित करते हैं कि हमारा उद्देश्य क्रांतिकारी चेतना की व्यापक शिक्षा का है।” अगस्त 1973 में प्रकाशित अपने पहले अंक से लेकर पूरे पैंतीस साल ‘पहल’ अपनी इस प्रतिज्ञा पर क़ायम ही नहीं रही बल्कि तमाम आलोचनाओं और छिद्रान्वेषण के बावजूद पाठकों के बीच अपनी जगह बढ़ाती रही। और, लघु-पत्रिका आन्दोलन में अपनी वैचारिक धार और दृढ़ता के चलते एक प्रतिमान के रूप में पहचानी गई।
Kuchh Panktiyan
Gyanranjan
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Rajneeti Meri Jaan
- Author Name:
Punya Prasun Bajpai
-
Book Type:

- Description:
Book related to media politics and society.
Rajneeti Meri Jaan
Punya Prasun Bajpai
18% offAvailable
Mass Media Aur Sahafat
- Author Name:
Shakil Hasan Shamsi
-
Book Type:

- Description:
"Mass Media Aur Sahafat" Embark on a captivating journey into the realm of Urdu media with "Mass Media Aur Sahafat." This book serves as a comprehensive guide, meticulously crafted to provide a profound understanding of the intricacies and dynamics shaping Urdu media.
Mass Media Aur Sahafat
Shakil Hasan Shamsi
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Media : Mahila, Jati aur Jugad
- Author Name:
Sanjay Kumar
-
Book Type:

- Description:
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया आरोपों के घेरे में है। स्तंभ की जड़ में जाति, महिला व जुगाड़नुमा दीमक के लगने से यह भ्रष्टाचार के चंगुल में पूरी तरह से फँस चुका है। पत्रकारिता, मिशन से व्यवसाय और फिर सत्ता की गोद में बैठ गई है। सिद्धांतों को ताक पर रख जनता की भावनाओं से खुलेआम खेलने का काम जारी है। मीडिया पर जाति-प्रेम के साथ-साथ महिला-प्रेमी होने का आरोप लगता रहा है। मीडिया के अंदर महिलाओं के साथ होनेवाला व्यवहार चौंकाता है। भारतीय मीडिया कितना जातिवादी है, इसका खुलासा मीडिया के राष्ट्रीय सर्वे से साफ हो चुका है। 90 प्रतिशत से भी ज्यादा द्विजों के मीडिया पर काबिज होने के सर्वे ने भूचाल ला दिया था। भारतीय जीवन में ‘जुगाड़’ एक ऐसा शब्द है, जिससे हर कोई वाकिफ है। इस शब्द से मीडिया भी अछूता नहीं है। इसका प्रभाव यहाँ भी देखा जाता है। जुगाड़, यानी जान-पहचान या संबंध जोड़कर मीडिया में घुसपैठ। इससे योग्यता व अयोग्यता का सवाल खड़ा होता है। जुगाड़ के राजपथ पर योग्यता और अयोग्यता के पथ्य पीछे छूट जाते हैं।
Media : Mahila, Jati aur Jugad
Sanjay Kumar
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Social Media : Sidhant Prayog Aur Prabhav
- Author Name:
Ajay Kumar Singh +1
-
Book Type:

- Description:
आज का युग डिजिटल क्रांति का युग है, जहाँ सोशल मीडिया ने संचार, सूचना और अभिव्यक्ति के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। 'सोशल मीडिया सिद्धांत, प्रयोग और प्रभाव' पुस्तक इसी परिवर्तनशील डिजिटल दुनिया को समझने का एक समग्र प्रयास है। यह पुस्तक इंटरनेट के उद्भव और विकास से लेकर ब्लॉगिंग, सोशल मीडिया की अवधारणा, व्यवहार और रणनीतियों तक की विस्तृत चर्चा प्रस्तुत करती है। पुस्तक में सोशल मीडिया पत्रकारिता, सामग्री निर्माण, तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सूचना के प्रसार की प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक ढंग से समझाया गया है। साथ ही सोशल मीडिया से जुड़े जोखिम, नैतिकता और नियमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार किया गया है। वर्तमान तकनीकी परिवेश को ध्यान में रखते हुए इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), चैटबॉट्स, ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों के सोशल मीडिया में बढ़ते उपयोग, संभावनाओं और चुनौतियों का विश्लेषण भी शामिल है। इसके अतिरिक्त पुस्तक में सोशल मीडिया अनुसंधान की प्रविधियाँ, भविष्य की दिशा और प्रमुख शब्दावली को भी व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, पत्रकारिता एवं जनसंचार के अध्येताओं तथा डिजिटल मीडिया में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक उपयोगी और मार्गदर्शक ग्रंथ सिद्ध होगी।
Social Media : Sidhant Prayog Aur Prabhav
Ajay Kumar Singh
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Yaksha Prashna Barkarar
- Author Name:
Manikant Bajpai
-
Book Type:

- Description:
Media
Yaksha Prashna Barkarar
Manikant Bajpai
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Bhoomanadlikaran Aur Media
- Author Name:
Kumud Sharma
-
Book Type:

- Description:
तमाम व्यावसायिकता के नारों के बीच भारतीय मीडिया को यह समझना होगा कि वह लोकतंत्र का शक्तिशाली स्तंभ है और राष्ट्रीय संस्कारों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का संवाहक भी । वह दिशादर्शन के गहरे दायित्व-बोध से भी जुड़ा हुआ है । भारतीय मीडिया-चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो अथवा प्रिंट मीडिया-दोनों का ही सैद्धांतिक स्वरूप राष्ट्रीय समता, अखंडता और संप्रभुता बनाए रखने के उद्देश्य के साथ-साथ देश की जनता में सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से एक अनुकूल और प्रेरक सोच पैदा करने के उद्देश्य से गढ़ा गया है । शिक्षा तथा साक्षरता के माध्यम से समाज के विकास को गति देना भी उनका लक्ष्य है । उसके उद्देश्यों में जागृति पैदा करना, सूचना देना तथा व्यापक रूप से जनता के जीवन-स्तर को उठाना भी शामिल है । भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में मीडिया के सिद्धांत और व्यवहार के बीच की खाई बढ़ गई है । व्यावसायिकता से उपजी तमाम चुनौतियों के बीच भारतीय मीडिया को अपनी यह चमक पुन: कायम करनी होगी । उसे इन्हीं चुनौतियों से गुजरकर वह राह पकड़नी होगी, जिसपर चलकर वह देश के व्यापक फलक पर व्याप्त भ्रष्टता और विसंगति को चुनौती दे सके; ' साम्राज्यवादी सूचनाओं के इंद्रजाल ' से मुक्त होकर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का पाठ पढ़ा सके तथा ग्लैमर, चकाचौंध के आवरण को चीरकर समाज को स्वस्थ दिशा दे सके । -इसी पुस्तक से
Bhoomanadlikaran Aur Media
Kumud Sharma
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Hindi Patrakarita: Aitihasik, Sahityik Evam Vyavharik Pariprekshya
- Author Name:
Mushtak Ali
-
Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत से पूरी तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई है। एक ओर जहाँ 1826 से लेकर लगभग सन् 2000 तक हिंदी की पूरी राजनीतिक पत्रकारिता का विकास दिखाया गया है, वहीं दूसरी ओर 1867 ई. से शुरू होने वाली साहित्यिक पत्रकारिता को भी सम्मिलित किया गया है। पत्रकारिता में रुचि रखने वाले अध्येताओं के लिए इसमें भरपूर सामग्री तो है ही, पत्रकारिता के विद्यार्थियों की ज़रूरत के मुताबिक इसमें पत्रकारिता के व्यावहारिक पहलू पर भी प्रकाश डाला गया है, मसलन समाचार-निर्माण के तहत समाचारों के स्रोत सहित उसके संकलन-लेखन और संपादन की विधि तो बतायी ही गई है, शीर्षक लगाने, आमुख लिखने और कैप्शन लगाने का तरीका भी बताया गया है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदी पत्रकारिता किन प्रतिबंधों से गुजरी है और उस दौर के पत्रकारों ने कैसे उनका मुकाबला किया, इसका हवाला तो दिया ही गया है, पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वालों को आगाह करने के लिए भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों, मानवाधिकारों और सूचना के अधिकार की भी पूरी जानकारी दी गई है। प्रजातंत्र में चौथे खंभे के रूप में पत्रकारिता की अहमियत के साथ-साथ उसके दायित्व तथा उसको संरक्षण देने वाली प्रमुख संस्थाओं का भी इसमें उल्लेख किया गया है। मशहूर पत्रकारों के जीवन-संघर्षों से तो रूबरू कराया ही गया है, राष्ट्रीय महत्त्व के कुछेक ज्वलंत मुद्दों पर भी रोशनी डाली गयी है।
Hindi Patrakarita: Aitihasik, Sahityik Evam Vyavharik Pariprekshya
Mushtak Ali
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Yahan Mukhoute Bikate Hain
- Author Name:
Prabhat Shunglu
-
Book Type:

- Description:
Media, Thought Provoking Article
Yahan Mukhoute Bikate Hain
Prabhat Shunglu
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Aadhi Duniya Ki Poori Patrakarita
- Author Name:
Dr. Mangala Anuja
-
Book Type:

- Description:
हिंदी पत्रकारिता की मुख्यधारा में विविध भूमिकाओं में महिलाओं की सहभागिता स्वतंत्रता के बाद लगातार बढ़ती गई है। महिला पत्रकारिता का आरंभ महिलाओं को आदर्श माँ और आदर्श पत्नी बनाने की समझाइश भरे आलेखन के साथ हुआ। परंतु जैसे-जैसे समय बढ़ता और बदलता गया वैसे-वैसे समसामयिक संदर्भो से महिला पत्रकारिता जुड़ती गई। कोई विषय, कोई क्षेत्र उससे अछूता नहीं रहा। आज महिला पत्रकारिता उस मोड़ पर पहुँच गई है, जहाँ वह अपेक्षा करती है कि हम समाज में अपनी योग्यता, प्रतिभा, दक्षता, लगन और कृतित्व के बलबूते समान महत्त्व और अवसरों की अधिकारी हों। जरूरत इस बात की है कि महिला पत्रकारों को किन्हीं खास चौहद्दियों में न समेटकर कार्यक्षेत्र का विशाल फलक सहज उपलब्ध हो। मूल तत्त्व यह कि पत्रकारों के बीच ऐसी किसी विभाजक रेखा का कोई औचित्य नहीं होता, जिसे महिला पत्रकार अथवा पुरुष पत्रकार के रूप में चिह्नित किया जाए। महिला पत्रकारिता पर एकाग्र पहला विशद विवेचन।
Aadhi Duniya Ki Poori Patrakarita
Dr. Mangala Anuja
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Patrakarita Ka Yugdharm
- Author Name:
Prabhash Joshi +1
-
Book Type:

- Description:
‘पत्रकारिता का युगधर्म’ पुस्तक में हिन्दी-पत्रकारिता से जुड़े 41 लेख हैं। प्रभाष जोशी ने विभिन्न विषयों पर असंख्य लेख लिखे। उनके नियमित साप्ताहिक कॉलम ‘कागद कारे’ ने हिन्दी-पत्रकारिता में लोकप्रियता का मानक गढ़ा। उनका हर लेख खूब पढ़ा गया। इस पुस्तक में शामिल उनके लेखों में अपनी भाषा पर गर्व करने से लेकर पत्रकारिता की मर्यादा बचाए रखने तक के अनुरोध भी किये गए हैं। ‘सावधान, पुलिया संकीर्ण है’ लेख में उन्होंने अंग्रेजी की नकल करके हिन्दी को लाचार और आम बोलचाल की भाषा से दूर करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए हैं। ‘अपने लोगों के होने का बल’ लेख में उन्होंने लिखा है कि भारतीय भाषाओं के पत्रकार पाठकों से अपने संवाद और सम्बन्ध को अपनी ताकत मानकर नहीं चलते हैं इसीलिए वे अंग्रेजी की छाया में रहते हैं। ‘एक दिन प्रेस का हो या न हो’ में उन्होंने लिखा है कि अखबारों में इसकी चेतना ही नहीं है कि एक दिन प्रेस दिवस भी होता है। कोई मंच ऐसा नहीं है जो बाजार में प्रेस की भूमिका तय करे। जीवन के आखिरी सालों में प्रभाष जी ने पेड न्यूज के खिलाफ खूब बोला और जमकर लिखा। पत्रकारों को भ्रष्ट करने के प्रयासों पर उनका चर्चित लेख ‘मूरख जनम गमायो’ भी इस संग्रह में शामिल है। इन लेखों में एक पूरा दौर, उस दौर के तमाम अहम मसले और उन मसलों पर प्रभाष जी की प्रभावशाली विवेचना मौजूद है। वस्तुत: यह पुस्तक एक प्रतिनिधि पत्रकार का अपने समय से ऐसी बेलाग जिरह है जो आज भी अत्यन्त पठनीय और प्रासंगिक है। एक संग्रहणीय पुस्तक!
Patrakarita Ka Yugdharm
Prabhash Joshi
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Dizaster : Media And Politics
- Author Name:
Punya Prasun Bajpai
-
Book Type:

- Description:
based on print and electronic media by punya prasun bajpai
Dizaster : Media And Politics
Punya Prasun Bajpai
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Itna To Yaad Hai Mujhe
- Author Name:
Bobby Sing
-
Book Type:

- Description:
क्या आप हिंदी सिनेमा और हिंदी फिल्म संगीत से दीवानगी की हद तक प्रेम करते हैं? यदि हाँ, तो यह पुस्तक आपके लिए ही है। इस पुस्तक के 51 अध्याय तीन भागों में विभाजित किए गए हैं। पहले भाग में नब्बे के दशक से पहले की हिंदी फिल्मों के तथ्यों के बारे में विवरण दिया गया है अर्थात् भारत में केबल टीवी क्रांति से पहले। दूसरा भाग दोनों काल के मध्य की कड़ी/लिंक पर आधारित है और तीसरा नब्बे के दशक के बाद की फिल्मों और हमारे वर्तमान सिनेमा पर। पुस्तक के कुछ खास विषय हैं— ** चिरकालिक ‘गाइड’ और इसका अंग्रेजी संस्करण ** ‘डिस्को डांसर’ की अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के बारे में कुछ अनकहे तथ्य ** 1989 में म्यूजिक एलबम ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ से लिपटा रहस्य ** उत्पल दत्त—जो सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं थे ** ‘सिलसिला’ और ‘रब ने बना दी जोड़ी’ को जोड़नेवाला तथ्य ** हिंदी फिल्म संगीत से पहेली-आधारित गीतों की गुम हो चुकी कला।
Itna To Yaad Hai Mujhe
Bobby Sing
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Cinema Ke Mudde : Muddon Ka Cinema
- Author Name:
Shivani Rakesh
-
Book Type:

- Description:
सिनेमा विधा की जानकारी मुझे बहुत कम है लेकिन केवल इस किताब को पढ़ने से मैं कह सकता हूँ कि मैंने न केवल भारतीय सिनेमा, बल्कि प्रकारान्तर से विश्व सिनेमा की भी अत्यन्त मूल्यवान जानकारी हासिल कर ली। इस किताब को विषयवार भी वर्गीकृत किया गया है और कालक्रमवार भी। मेरा अनुमान है कि प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हज़ार फ़िल्मों का उल्लेख या सन्दर्भ तो मिल ही जाता है जिनमें हिन्दी सिनेमा किस प्रकार क्रमश: आमजन के मुद्दों से भटककर अभिजन वर्ग का हित करने का साधन बन गया, किस प्रकार जातिवाद को पोषित करने और उच्च जाति का गौरवगान करने का माध्यम बन गया, इसे सोदाहरण और विस्तार से बताया गया है। इसके साथ ही किताब में किसानों के, मजदूरों के, वेश्याओं के, दृष्टिबाधितों के, खिलाड़ियों के, डाकुओं, पत्रकारों और भूमाफ़िया के मुद्दों को विषय बनाकर बनाई गई फ़िल्मों का भी विशद विश्लेषण किया गया है। इस पुस्तक के लिए सामग्री का चयन करने और उसको संयोजित करने में जो अथक परिश्रम किया गया है वह अत्यन्त प्रशंसनीय है। हिन्दी में सिनेमा पर इतनी समृद्ध किताब मैंने दूसरी नहीं पढ़ी। इसकी भाषा इतनी सरल और सुगम है कि सामान्य पाठक और सिनेमा के शोधार्थियों—दोनों के लिए यह अत्यन्त उपयोगी है। —शिवमूर्ति
Cinema Ke Mudde : Muddon Ka Cinema
Shivani Rakesh
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ISIS Ka Aatank
- Author Name:
Patrick Cockburn
-
Book Type:

- Description:
"सीरिया और इराक लगभग विखंडन के कगार पर पहुँच गए, क्योंकि उनके विभिन्न समुदायों—शिया, सुन्नी, कुर्द, अलावाइट और ईसाई—को यह लगा कि वे अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं। इसलाम धर्म के कट्टरपंथी अनुपालन के लिए निष्ठुर इसलामिक स्टेट ऑफ इराक ऐंड सीरिया (ISIS) ने उन सभी को अपना निशाना बनाया, जिन्होंने इसके नियमों का विरोध भर किया। उन्हें या तो मार दिया या भाग जाने के लिए विवश कर दिया गया। 10 जून, 2014 इतिहास का एक काला दिन था, जब ISIS ने चार दिन की लड़ाई के बाद इराक की उत्तरी राजधानी मोसुल पर कब्जा कर लिया। भयाक्रांत करने में ISIS कुख्यात है। इसके द्वारा तैयार वीडियो क्लिपों में इसके लड़ाकों द्वारा शिया सैनिकों और ट्रक ड्राइवरों को फाँसी देते हुए दिखाया गया है, ऐसी कुत्सित घटनाओं ने मोसुल और टिकरित पर कब्जे के दौरान शिया सैनिकों को आतंकित करने और उनका मनोबल तोड़ने में प्रमुख भूमिका निभाई। मोसुल और इराक के अधिकांश उत्तरी भाग पर कब्जा करने के बाद ISIS नेता अबू बर्क अल-बगदादी को नई खिलाफत का मुखिया घोषित कर दिया गया, जो सभी मुसलमानों से अंधानुसरण की अपेक्षा करता है। मानवता के शत्रु और जेहादियों के जत्थे पैदा करनेवाली ISIS की काली करतूतों का सजीव लेखा-जोखा देती है यह पुस्तक, जो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी प्रभावी छाप छोड़नेवाले पैट्रिक कॉकबर्न ने अपनी जान जोखिम में डालकर तैयार की है।
ISIS Ka Aatank
Patrick Cockburn
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Patkatha Lekhan : Vyavaharik Nirdeshika
- Author Name:
Asghar Wajahat
-
Book Type:

- Description:
फ़िल्मों और टी.वी. के सर्वाधिक लोकप्रिय कार्यक्रम, धारावाहिक के लिए पटकथा अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त डाक्यूड्रामा और डाक्यूमेंट्री फ़िल्मों के लिए भी दृश्य-श्रव्य केन्द्रित लेखन आवश्यक है। फ़िल्म और टेलीविज़न के व्यापक होते क्षेत्र में शिक्षापरक/ज्ञानपरक मल्टीमीडिया कार्यक्रम भी आकर जुड़ गए हैं। ज्ञान और शिक्षा के अपार भंडार को दृश्य-श्रव्य माध्यम से उपलब्ध कराने की चुनौती भारत सरकार के मानव-संसाधन मंत्रालय के अतिरिक्त अनेक अन्य संगठनों ने ली है। प्रोग्राम प्रोडक्शन के क्षेत्र में यदि अभाव है तो पटकथा लेखकों का है। इसके कई कारण हैं। प्रोग्राम प्रोडक्शन सम्बन्धी तकनीकी प्रशिक्षण देने की तुलना में पटकथा-लेखन के पाठ्यक्रम बहुत कम हैं। जिन संस्थानों में पटकथा-लेखन के कार्यक्रम चलाए जाते हैं, वहाँ प्रायः अच्छे शिक्षकों की कमी बनी रहती है और यह भी ज़रूरी नहीं है कि अच्छा पटकथा लेखक अच्छा शिक्षक भी हो। प्रस्तुत पुस्तक में सिनेमा के इतिहास, सैद्धान्तिकी और समीक्षा इत्यादि पर कोई चर्चा नहीं की गई है, क्योंकि पुस्तक का उद्देश्य पटकथा के व्यावहारिक पक्ष को सामने लाना है। यह पुस्तक पटकथा-लेखन में रुचि लेनेवाले विद्यार्थियों तथा अन्य सभी पाठकों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। इस व्यावहारिक निर्देशिका में पटकथा के एक-एक बिन्दु की चर्चा की गई है। पुस्तक का उद्देश्य है कि इसके माध्यम से पटकथा-लेखन की तकनीक सीखी जा सके।
Patkatha Lekhan : Vyavaharik Nirdeshika
Asghar Wajahat
20% offAvailable
Photo Patrakarita
- Author Name:
Dhananjai Chopra
-
Book Type:

- Description:
हमारा समय विजुअल कम्युनिकेशन यानी दृश्य संचार का समय है। वास्तविक दुनिया हो या आभासी दुनिया, हर तरफ छवियां ही छवियां हैं। कास्टिंग के लगभग सारे उपक्रम यानी प्रिंटकास्ट, ब्रॉडकास्ट, टेलीकास्ट, वेबकास्ट और ह्यूमनकास्ट अनायास ही छवियों के अधिकाधिक प्रयोग की होड़ में शामिल हो गए हैं। संचार के क्षेत्र में छवियों यानी दृश्यों के इस तरह प्रयोग से जन-संप्रेषण की दुनिया में बड़ा बदलाव आया है। इस बदलाव का कारण बना, हमारे मोबाइल फोन में कैमरे का आ जाना। इक्वींसवीं सदी के प्रारंभ से ही लोगों ने अपने आसपास के दृश्यों को सहेजना शुरू कर दिया था। दृश्यों के माध्यम से जन इतिहास का लिखा जाना यह बता रहा था कि आने वाले समय में शब्दों से कहीं अधिक दृश्य पढ़े जाएंगे। हुआ भी यही, हमने एक ऐसे समाज की रचना कर ली है, जिसमें दृश्य संचार के बिना रह पाना मुश्किल हो रहा है। टेक्नोलॉजी के बलबूते बदलती दुनिया और बदलते समय में दृश्य संस्कृति विकसित हो रही है। दृश्य गढ़े जा रहे हैं, रचे जा रहे हैं, प्रस्तुत किए जा रहे हैं और पढ़े जा रहे हैं। अब से पहले इतने अधिक दृश्यों का आदान-प्रदान कभी नहीं हुआ था। दरअसल यह दृश्य विस्फोट यानी विजुअल एक्सप्लोजन का समय है। यह फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता को सीखने, समझने, सहेजने और संचरित करने का अप्रतिम समय है।
Photo Patrakarita
Dhananjai Chopra
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Hindi-patrakarita Ke Pratiman
- Author Name:
Satish Kumar Roy
-
Book Type:

- Description:
पुस्तक हिन्दी के चौदह उन सम्पादकों पर केन्द्रित है जिन्होंने हिन्दी-पत्रकारिता को दिशाबोध दिया है, उसकी विरासत को अग्रेषित किया है और सही अर्थों में प्रतिमान के रूप में मान्य हुए हैं। ऐसा नहीं है कि यह सूची इन्हीं तक सीमित है। वस्तुतः यह एक श्रृंखला की पहली कड़ी है। ये चौदह सम्पादक बिहार के विश्वविद्यालयों के एम.ए. के पाठ्यक्रमों में सम्मिलित किए गए हैं इसलिए सर्वप्रथम इन्हीं को केन्द्र में रखकर पुस्तक का पहला खंड प्रस्तुत किया जा रहा है। उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को इसमें अपेक्षित सूचनाएँ मिल पायेंगी, ऐसा विश्वास है।
Hindi-patrakarita Ke Pratiman
Satish Kumar Roy
20% offAvailable
Apne Gireban Mein
- Author Name:
Yashwant Vyas
-
Book Type:

- Description:
कोई जमाना था जब दिल्ली से निकलने वाले अखबार राष्ट्रीय और लखनऊ-लुधियाना से निकलने वाले अखबार क्षेत्रीय कहे जाते थे। हिंदी अखबारों की दुनिया इस बीच बहुत बदल चुकी है। सैटेलाइट संस्करणों ने जो महादृश्य उपस्थित किया है उसने हिंदी अखबारों की बाजार शक्ति की नए सिरे से पहचान कराई है। पारंपरिक अर्थ में गढ़ कहे जाने वाले, ध्वस्त हो रहे हैं। संपादक और स्वामी के पारस्परिक रिश्तों ने नई शक्ल ले ली है। जबर्दस्त पूँजी निवेश, आक्रामक बाजार नीति तथा पत्रकारिक फैशन परेड का नया पैकेज सामने आ रहा है। प्रसार की उछाल में पाठक के लिए नए विकल्प खुले हैं। लेकिन क्या यह नई दुनिया सचमुच एक अद्भुत दुनिया है?
एक रचनाकार होने के साथ-साथ, पत्रकारिता की उसी बदलती हुई दुनिया के अनुभव का हिस्सा होते हुए यशवंत व्यास जब क्षेत्रीय पत्रकारिता में बदलाव को आँकते हैं तो उनकी दृष्टि गहरी संवेदना से युक्त होती है। वे निरंतर हो रहे परिवर्तनों को गहन अनुभूतियों तथा स्पष्ट तथ्यों के बीच दर्ज करते हैं। इसके लिए वे न सिर्फ भाषा के स्तर पर बल्कि प्रस्तुति पर भी शोध को नया, ताज़गी-भरा आकार देते हैं। अंतर्विरोधों की पहचान के प्रति पैनी दृष्टि तथा क्षेत्रीय पत्रकारिता में सफलता असफलता की गंभीर पड़ताल करने की कोशिशों जैसी खूबियों के चलते ‘अपने गिरेबान’ में समकालीन क्षेत्रीय हिंदी पत्रकारिता पर एक विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है।
Apne Gireban Mein
Yashwant Vyas
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Vigyapan Aur Jansampark
- Author Name:
Mukti Nath Jha +1
-
Book Type:

- Description:
यह पुस्तक विज्ञापन और जनसम्पर्क संचार की विधा को रेखांकित करती है। इस पुस्तक में विज्ञापन के विविध स्वरूपों की विस्तार से चर्चा की गई है। विज्ञापन को परिभाषित करते हुए इसके विविध प्रकार, माध्यमों एवं लाभ की विस्तृत विवेचना की गई है। जनसम्पर्क की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए जनसम्पर्क की विविध विधाओं पर विस्तार से चर्चा की है। कारपोरेट जनसम्पर्क की आवश्यकता और उपयोगिता की विस्तृत विवेचना इस पुस्तक को और भी उपयोगी बनाती है।
भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के पाठ्यक्रमानुसार लिखित यह पुस्तक जहाँ एक ओर पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी वहीं दूसरी ओर विज्ञापन एवं जनसम्पर्क के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए भी मार्गदर्शक के रूप में लाभप्रद होगी।
Vigyapan Aur Jansampark
Mukti Nath Jha
20% offAvailable
The Media category on Rachnaye brings together books that explain how information, storytelling, journalism, broadcasting, cinema, advertising, and digital platforms shape public opinion and cultural life. These books help students, creators, journalists, filmmakers, researchers, and general readers understand the fast–changing media ecosystem in India and around the world.
What readers can explore:
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Journalism & reporting
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Mass communication theory
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Film studies & screenplay writing
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Digital media, social media culture & online influence
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Advertising, PR, persuasion & branding
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Media ethics, regulation & press freedom
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Visual communication, photography, documentary studies
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Indian media history & regional media ecosystems
-
Academic texts for BA/MA in Mass Communication, Journalism, Film Studies
What types of media books are available on Rachnaye?
You’ll find journalism guides, mass communication theory, film studies, digital media, advertising, PR, screenplay writing, and media ethics books.
Are these books useful for mass communication and journalism students?
Absolutely. Many titles align with BA/MA Journalism, Mass Communication, Film Studies, and Media Research syllabi.
Do these books cover digital media and social platforms?
Yes. The category includes books on social media culture, digital storytelling, online behaviour, and emerging media technologies.
Are there books on film studies and screenplay writing?
Yes. You’ll find books on cinema theory, Indian film history, scriptwriting, and visual communication.
Are media ethics and regulation covered?
Yes. Several titles explain media law, regulation, press freedom, and ethical reporting.