Mansarovar Vol. 3 : Uddhar Aur Anya Kahaniyan
(1)
Author:
PremchandPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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स्पष्टता के मैदान में प्रेमचन्द बड़ी-से-बड़ी बात को बड़े उलझन के अवसर पर कुछ इस तरह सुलझा कर कह जाते हैं कि मुश्किल-से-मुश्किल बात हमारे रोजमर्रा के, घरेलू जीवन की जानी-पहचानी चीज हो जाती है। उनकी बातों में कुछ ऐसा अनुभव का मर्म भरा होता है कि आदमी उसे कंठस्थ कर लेना चाहता है। उनकी बात स्पष्ट, दो टूक निर्णय होती है। और उनकी कलम सब जगह पहुँचती है, अँधेरे में भी धोखा नहीं देती। —जैनेन्द्र कुमार
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स्पष्टता के मैदान में प्रेमचन्द बड़ी-से-बड़ी बात को बड़े उलझन के अवसर पर कुछ इस तरह सुलझा कर कह जाते हैं कि मुश्किल-से-मुश्किल बात हमारे रोजमर्रा के, घरेलू जीवन की जानी-पहचानी चीज हो जाती है। उनकी बातों में कुछ ऐसा अनुभव का मर्म भरा होता है कि आदमी उसे कंठस्थ कर लेना चाहता है। उनकी बात स्पष्ट, दो टूक निर्णय होती है। और उनकी कलम सब जगह पहुँचती है, अँधेरे में भी धोखा नहीं देती।
—जैनेन्द्र कुमार
Book Details
-
ISBN9789393603180
-
Pages216
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Description:
— अवध के क़िस्सों की लम्बी यात्राएँ हैं। ये भगवान राम के साथ वन-वन घूमे
हैं, तो प्रवासी भारतीयों के साथ मारीशस, फ़िजी, गयाना आदि सुदूर देशों तक जाकर आज भी वहाँ सुने-कहे जा रहे हैं। श्रमिकों ने इन्हें खुले आसमान व वृक्षों के नीचे सुनाया, तो ग़रीबों ने झोंपड़ियों में और धनवानों ने महलों में, ऋषियों-मुनियों ने इन्हें वेदों, पुराणों, आरण्यक ग्रन्थों उपनिषदों, ‘रामायण’, ‘महाभारत’ आदि में अपनी शैली में समावेशित किया।
लोक साहित्य में विश्वासों में कोई सुदृढ़ तर्क योजना भले न दिखे, लेकिन, इनमें प्रतीक या अन्योक्ति की कई छवियाँ दिख जाती हैं। क़िस्सों में भूत-प्रेत, जादू-टोना, चमत्कार आदि का उल्लेख होता रहता है। इनका आनन्द लेकर इनमें उलझे बिना पाठक अपना अर्थ प्राप्त कर लेता है।
क़िस्से अवध के में सामाजिक सम्बन्धों का पूरा भूगोल दिखता है। इसे स्त्री-विमर्श और अस्मिता-विमर्श के दृष्टिकोण से भी पढ़ा जा सकता है। यह भी जाना जा सकता है कि भारतीय समाज की आन्तरिक संरचना में जाति और वर्ण आदि की सकारात्मक या नकारात्मक धारणाएँ क्या हैं?
इन क़िस्सों में शाश्वत मान्यताओं की पुष्टि रोचक ढंग से हुई है। इनमें सन्देश और मनोरंजन का मिला-जुला आस्वाद है।
Pratinidhi Kahaniyan : Shivmurti
- Author Name:
Shivmurti
- Book Type:

- Description: शिवमूर्ति आम जन-मन को जीनेवाले, उनके बीच रचने-बसनेवाले, उन्हीं की दुनिया के एक ऐसे नागरिक हैं जो अपने समाज के लोगों की दशा-दुर्दशा की वास्तविक स्थितियों-परिस्थितियों को, बगैर किसी पर्दे या झालर-झूमर के सामने लाता है। उनकी कहानियों के पात्र पूरी ताकत के साथ सामाजिक अन्याय, पीड़ा, प्रताड़ना को जीते हुए भी, चुपचाप उसे सहन नहीं कर जाते। बल्कि उस यंत्रणा को भोगते हुए, उनसे लड़ते, पछाड़ खाते पर अन्ततः उन्हें पछाड़ते देखे जा सकते हैं। यही शिवमूर्ति की कहानियों की ताकत है। चित्रण में वही गँवई धूसरपन, विट, लोकोक्तियों से रची-पगी भाषा का सौन्दर्य। उनकी भाषा में किसी तरह की कोई चिकनाहट नहीं, कृत्रिमता नहीं, ठेठ सहज खुरदुरापन है। अगर शिवमूर्ति का कोई ‘शिवमूर्तियाना’ अन्दाज है तो इसी ‘कथाभाषा’ में है, जिसे उन्होंने अर्जित नहीं किया है, जिया है और कमाया है।
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