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Kaafila-e-Nau-Bahaar
- Author Name:
Vikas Sharma Raaz
- Book Type:

- Description:
क़ाफ़िला-ए-नौ-बहार' उर्दू की नई नस्ल के पुर-उम्मीद शोअरा के चुनिंदा कलाम का संग्रह है| किताब में कुल 17 नौ-जवान शोअरा का कलाम शामिल है जिनका संकलन जनाब विकास शर्मा 'राज़' ने किया है| इन शोअरा की अबतक कोई किताब प्रकाशित नहीं हुई है और ये इनका पहला काव्य-संग्रह है|
Kaafila-e-Nau-Bahaar
Vikas Sharma Raaz
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The Great Indian Novel
- Author Name:
Shashi Tharoor
- Book Type:

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In Shashi Tharoor's satirical masterpiece, the story of the Mahabharata is retold as recent Indian history, and renowned political personalities begin to resemble characters from the Mahabharata-all of whom have a curious and ambiguous relationship with Draupadi Mokrasi (D. Mokrasi for short) . . . Brimming with incisive wit and as enjoyable a read as it is cerebrally stimulating, The Great Indian Novel brilliantly retells reality as myth.
The Great Indian Novel
Shashi Tharoor
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Prakriti Aur Kriti
- Author Name:
Gyanendrapati
- Book Type:

- Description:
नरक्षेत्र के भीतर बद्ध रहने वाली काव्य-दृष्टि की अपेक्षा सम्पूर्ण जीवन-क्षेत्र और समस्त चराचर के क्षेत्र में मार्मिक तथ्यों का चयन करने वाली दृष्टि उत्तरोत्तर अधिक व्यापक और गम्भीर कही जाएगी। रामचन्द्र शुक्ल (रसात्मक बोध के विविध रूप : चिन्तामणि भाग-1 यह है वह दृष्टि-पथ जिस पर संचरण करते हुए ‘प्रकृति और कृति’ कविता-संग्रह का अस्तित्व आकृत हुआ है। ज्ञानेन्द्रपति के कवि-कर्म में अयात्रित जीवन-क्षेत्रों में परिभ्रमण की उत्सुकता आरम्भ से ही मौजूद रही है; सुगम लीक पर चलते रहने की जगह ऊबड़-खाबड़ में भटकते हुए एक तरह के कठिन आनन्द से उत्फुल्ल बने रहना उनके कवि का प्रकृत स्वभाव रहा है। सर्जना की इस प्रचेष्टा की परिणति ‘प्रकृति और कृति’ आपके हाथों में है। यहाँ एक तरफ मानवेतर प्राणियों की अन्यता नहीं, अनन्यता के एहसास के साथ प्रकृति के विविध प्रारूपों की जीवन्त उपस्थिति मिलेगी और मिलेंगे जीवन को पुनर्नव करते हुए ऋतु-चक्र के गति-लेख, तो दूसरी तरफ वे निर्मितियाँ जो मानवकृत होते हुए भी अपनी इयत्ता को जीती रहती हैं : अनेकरूपा सत्ता के संवेदना-पगे साक्षात्कार! यहाँ ईश्वर भी एक कृति है—सर्वोत्तम मानवीय रचना—जिसको अब अनकिया नहीं किया जा सकता। कविता की इस दुनिया में कुछ भी निर्जीव नहीं, जैव स्पंदन से रहित नहीं। चराचर जगत् के ओर-छोर तक प्रसृत हो जाना चाहने वाली इस काव्य-सृष्टि की केन्द्रकील, लेकिन, मनुष्यता का आत्मबोध ही है। भाव-प्रसार के क्षेत्र की व्यापकता मानव-आत्म की संवृद्धि के समरूप है। कविता इसी तरह हमारे लिए अपने अध्यात्म को अर्जित करती है। आशा है, इस पुस्तक से गुजरते हुए पाठक अपनी आँखों में नई आँखों का उन्मीलन महसूस करेंगे और कविता से उनकी प्रीति कुछ और गाढ़ी हो उठेगी।
Prakriti Aur Kriti
Gyanendrapati
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Bravehearts of Bharat: Vignettes from Indian History
- Author Name:
Vikram Sampath
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Fifteen Brave Men and Women of Bharat who Never Succumbed to the Challenges of Invaders But were Lost and Forgotten in the Annals of History. These are the stories of those Bravehearts who Fought to Protect their Rights, Faith and Freedom. History has always been the handmaiden of the victor. 'Until the lions have their own storytellers,' said Chinua Achebe, 'the history of the hunt will always glorify the hunter!' Exploring the lives, times and works of the fifteen long-forgotten and mostly neglected unsung heroes and heroines of our past, this book brings to light the contribution of the warriors who not only donned armour and burst forth into the battlefield but also kept the flame of hope alive under adverse circumstances. Narrating the tales of valour and success that India, as a nation and civilization, has borne witness to in its long and tumultuous past, the book opens a window to the stories of select men and women who valiantly fought against invaders for their rights, faith and freedom. Rajarshi Bhagyachandra Jai Singh of Manipur, Lalitaditya Muktapida of Kashmir, Chand Bibi of Ahmednagar, Lachit Barphukan of Assam, Begum Hazrat Mahal of Awadh, Rani Abbakka Chowta of Ullal, Martanda Varma of Travancore, Rani Rudrama Devi of Warangal, Rani Naiki Devi of Gujarat and Banda Singh Bahadur are some of the 'bravehearts' who fought to uphold the tradition and culture of their land. Pacy and unputdownable, Bravehearts of Bharat chronicles the stories of courage, determination and victory, which largely remained untold and therefore unknown for a long time.
Bravehearts of Bharat: Vignettes from Indian History
Vikram Sampath
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Main Boond Swayam, Khud Sagar Hoon
- Author Name:
Ashutosh Agnihotri
- Book Type:

- Description:
‘मैं बूंद स्वयं, खुद सागर हूँ’ कवि आशुतोष अग्निहोत्री का चौथा कविता-संग्रह है। इस कविता-पुस्तक में उन्होंने अपनी जिन कविताओं को प्रस्तुत किया है, वे एक सजग, संवेदनशील और संवादधर्मी सामाजिक मनुष्य के सम्पूर्ण संसार को प्रतिबिम्बित करती है। प्रकृति, ईश्वर, समाज, परिवार और देश ने कवि को जो दिया, यह संकलन उसका कृतज्ञता ज्ञापन है, कोई भी पाठक जिसे पढ़ते हुए अपने ही भावोद्गार समझेगा। ‘स्नेह’, ‘प्रेम’, ‘धर्म’, ‘देश’, ‘दर्शन’ और ‘प्रेरणा’—इन छह उपशीर्षकों के तहत कवि ने यहाँ उन तमाम स्रोतों को अपने भाव समर्पित किए हैं जो मनुष्य मात्र के जीवन का आधार हैं, जहाँ से वह जीने की, सिरजने की, आगे बढ़ने और स्वयं को सार्थक करने की प्रेरणा ग्रहण करता है।
ये कविताएँ हमें हमारी उन अनुभूतियों को व्यक्त करने का बहाना बनती हैं, जिन्हें हम अपने भीतर तो रखते हैं लेकिन उचित शब्दावली और सम्यक लय के साथ व्यक्त नहीं कर पाते। इसीलिए ये कविताएँ सबकी हैं—उनकी भी जो काव्य-आस्वाद के अनुभवी लोग हैं, और उनकी भी जो पहली बार इन्हें पढ़ेंगे, और सदैव के लिए अपने अन्तस में सँजो लेंगे। एक भाव सम्पन्न कविता-संग्रह जिसकी कविताओं का पाठ आप अपनों के बीच बैठकर बार-बार करना चाहेंगे।
Main Boond Swayam, Khud Sagar Hoon
Ashutosh Agnihotri
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Jhukna Kisi Ko Ropna Hai
- Author Name:
Shriprakash Shukla
- Book Type:

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नब्बे के बाद की हिन्दी कविता को कवियों की जिस पीढ़ी ने अपने सरोकारी एवं सतत लेखन से सँवारा-बनाया है उनमें श्रीप्रकाश शुक्ल एक महत्त्वपूर्ण कवि हैं। उनकी कविताई का विस्तार तीन दशकों में फैला हुआ है, लेकिन इसकी खासियत है इसका सातत्य। 1999 में श्रीप्रकाश शुक्ल का पहला संग्रह ‘अपनी तरह के लोग’ के आने से लेकर 2022 में सातवें संग्रह ‘वाया नई सदी’ तक की यात्रा में एक निरन्तरता है। ये कृतियाँ क्रमशः संस्कृति, दर्शन और राजनीतिक चेतना की धुरी पर अपने समय को कातती हैं। इनके पूरे परिस्पन्द के बीच एक चीज सर्वनिष्ठ है और वह है लोकभाषा और जनपदीयता। बनारस अंचल श्रीप्रकाश शुक्ल की कविताओं की शिराओं में रक्त बनकर दौड़ रहा है। सोनभद्र, मिर्जापुर, प्रयाग और गाजीपुर का ‘लोकेल’ उनकी कविता में बुनियाद की तरह बिछा हुआ है। उनकी कविताओं पर इस क्षेत्र की लोककथाओं, लोक धुनों और गीतों का गहरा असर है। आख्यान-परम्परा का तो सबसे गहरा और व्यापक। श्रीप्रकाश शुक्ल की आख्यान शैली में लोक और शास्त्र दोनों में मौजूद दन्तकथाओं, किंवदन्तियों और मिथकीयता के आधुनिक सन्दर्भों का काव्यमय सन्धान अद्भुत और व्यापक है। लोककथाओं व मिथकीय पृष्ठभूमि के साथ श्रीप्रकाश शुक्ल ने बहुत साभिप्राय लोक देवों-देवियों, लोकनायकों और अति साधारण किरदारों के साथ मामूली जगहों, पेशों, रिवाजों व चीजों को अपनी कविताओं का विषय बनाया है। प्रशस्त इतिहासबोध और जनपदीयता के भीतर से कविता में इतिवृत्त और प्रकृति के संश्लेष के कारण श्रीप्रकाश शुक्ल इस प्रवृत्ति के प्रतिनिधि कवि हैं।
Jhukna Kisi Ko Ropna Hai
Shriprakash Shukla
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Aurat Ki Janib
- Author Name:
Dhirendra Kumar Patel
- Book Type:

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इस संग्रह की कविताओं में ‘स्त्री’ को मानवीय पक्ष में उजागर करने के लिए उनके जीवन का चित्रण यथार्थ रूप में गहरे भावबोध से हुआ है। आज स्त्री विमर्श ने स्त्रियों के मौन को तोड़ा है। वे मुखर हुई हैं। उनका दबा क्रोध, आवेश पीड़ा स्वानुभूति के धरातल पर अभिव्यक्त हो रहा है, साथ ही स्त्री जीवन के लिए निर्धारित मानक और मूल्य भी बदलाव की सहज माँग करने लगे हैं। सबसे बड़ी बात ‘पैदा हुई औरत’ और ‘बनायी गयी औरत’ का भेद स्पष्ट होने लगा। इस स्पष्टता ने औरतों की एक नयी समझ विकसित की है। वे स्त्रीजनित तमाम समस्याओं, कुण्ठाओं और हिंसा को मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक स्तर पर समझने लगीं। वे समझने लगीं कि औरत के प्रेम की ताकत को वैसे शरीर के दायरे में सीमित कर दिया गया है। आख़िर पुरुष वर्ग ने शुरू से नारी के गुणों को लेकर उसकी इतनी सराहना कर दी है कि नारी उसी को अपना सर्वस्व मानने लगी। उसी के आधार पर जीवन जीती चली आ रही है। प्रस्तुत संग्रह की कविताएँ स्त्री के पक्ष में समाज से संवाद है।
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Dhirendra Kumar Patel
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Awaz-Beawaz
- Author Name:
Ashok Kumar Pandey
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‘आवाज़-बेआवाज़’ की कविताएँ मानवीय और राजनीतिक सरोकारों का एक विशाल वितान रचती हैं। ये एक ऐसे हस्सास मन का प्रतिबिम्ब हैं, जिसकी चिन्ताएँ अपने अध्ययन-कक्ष से लेकर संसार के हर उस कोने तक व्यापती हैं जहाँ मनुष्यता संकट में है, जहाँ सर्वसत्तावादी राजनीति मानव-जीवन को अपना चारा बनाने को उद्यत है। ये एक चिन्तनशील और सजग मस्तिष्क के वे हार्दिक उद्गार हैं जो केवल कविता में ही व्यक्त हो सकते थे। कश्मीर से लेकर फ़लस्तीन और प्रेम की सान्द्र अनुभूतियों से लेकर व्यक्ति के तीक्ष्ण व्यर्थताबोध तक ये कविताएँ अपने सघन शिल्प में एक लम्बी सड़क बनाती हैं जिस पर आप वर्तमान समय की वास्तविकताओं के एक बहुरूपदर्शी सफ़र पर निकलते हैं। राजनीति की मौजूदा भंगिमाओं को ये कविताएँ अकसर ही अचूक ढंग से निडरतापूर्वक रेखांकित करती हैं, और उनके फलितार्थों के प्रति हमें आगाह करती हैं। ‘आवाज़ें पहले से रिकॉर्ड हैं’—यह एक वाक्य ही हमारे इस काल की सर्वाधिक भयावह परिस्थिति को समझने के लिए पर्याप्त है, जहाँ वे तमाम चीज़ें जिनसे जनतंत्र को उम्मीद थी, भीतर से ख़ाली हो गई प्रतीत होती हैं। इन कविताओं के असंख्य बिम्ब और उनका आन्तरिक तनाव देर तक आपके साथ रहता है।
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Ashok Kumar Pandey
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Seepiyaan
- Author Name:
Javed Akhtar
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कबीर, तुलसी, वृंद, रहीम और बिहारी आदि कवियों ने सदियों पहले अपनी गहरी अन्तर्दृष्टि और मानव-स्वभाव की समझ की बुनियाद पर कुछ बातें कहीं, और इसके लिए उन्होंने कविता का जो रूप चुना, वह था—दोहा। दो पंक्तियों में गुँथी-गठी एक सम्पूर्ण कविता जो तीर की तरह जाकर हमारी चेतना में गड़ जाती है। सैकड़ों सालों से ये दोहे हमारे साथ रहते आए हैं, कभी ये हमें हमारी ख़ामियाँ दिखाते हैं, कभी हमारे रहबर बन जाते हैं, और कभी कोई ऐसा सच बता जाते हैं जिसे हमारी दुनियावी निगाह देखकर भी नहीं देखती। ‘सीपियाँ’ में जावेद अख़्तर ने ऐसे ही कुछ दोहों को चुनकर उनके भीतर छिपे सत्य को आमफ़हम ज़बान में हर किसी के लिए सुलभ कर दिया है। जो बातें इनसे निकलकर आई हैं वे आज भी उतनी ही सच हैं, आज भी उतनी ही उपयोगी हैं, जितनी उस समय थीं, और आगे भी उतनी ही सार्थक रहेंगी। जावेद अख़्तर हमारी आज की रोज़मर्रा ज़िन्दगी से उन्हें जोड़ते हैं और बताते हैं कि कैसे उन पर अमल करके, उनसे मिलनेवाली सीख को अपनाकर हम ख़ुद को बेहतर इनसान और अपनी दुनिया को एक बेहतर समाज बना सकते हैं।
Seepiyaan
Javed Akhtar
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Gungunaiye
- Author Name:
Gulzar
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वे अल्फ़ाज़ के दो कुनबों को जोड़ के ज़बान का एक नया ख़ानदान बना देते हैं, वे इमेजिन करते हैं तो धरती आसमान के और हवाएँ पानियों के आँगनों से घूम-टहल आते हैं...वे जब मुहब्बत की तरफ़ देखते हैं तो रूह धूप बनकर जिस्म को ढाँप लेती है और जिस्म के खुरदरे कोने पाकीज़ा मुलायमियत में पिघलने लगते हैं और जब समाजी मसायल की तरफ़, मुल्क और मुल्क की ख़लक़त की तरफ़ देखते हैं, रिश्तों और दिलों की कशमकश को, बेचैनी को देखते हैं तो उनके बोल हमारे लिए हमारी अपनी बात बन जाते हैं।
गुलज़ार ने फ़िल्मों के लिए गीत लिखे, अभी भी लिख रहे हैं, लेकिन उनके गीत कभी दी हुई सिचुएशन तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने सिचुएशन को एक अलग वुसूअत दी, नये मायने दिये, गहराई दी। उनके गीत, उनके अल्फ़ाज़ चीज़ों को देखने और ज़बान को इस्तेमाल करने की हमारी आदतों को बदल देते हैं, वही हमारे जाने-पहचाने अल्फ़ाज़ जब उनके तख़य्युल में नई तरतीब पाते हैं तो हमारे दिल की पुरानी बोसीदा स्लेटें भी सरककर नए सिरे से ताज़ा हो जाती हैं।
‘गुनगुनाइए...’ उनके गीतों का मजमूआ है। इसमें अलग-अलग मिज़ाज के गीतों को अलग-अलग उनवान के तहत इकट्ठा किया गया है ताकि पढ़नेवाले उनकी पूरी तासीर को महसूस कर सकें। एक बात और, जब हम गीतों को सुनते हैं तो अकसर कई सारे बोलों से महरूम रह जाते हैं; यहाँ वह बात नहीं; यहाँ ये गीत अपनी तमाम पोएटिक ख़ूबियों के साथ आपके सामने हैं।
तो आइए, गुनगुनाइए!
Gungunaiye
Gulzar
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Neem Ka Shahad
- Author Name:
Rajvardhan Azad
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हिन्दी कविता के क्षेत्र में राजवर्धन आज़ाद का प्रवेश एक सुखद संयोग है। एक कुशल नेत्र चिकित्सक यहाँ समर्थ कवि के रूप में प्रकट हुआ है। कवि कर्म का सम्बन्ध हृदय से भी है। जो व्यक्ति मनुष्य की आँखों की रोशनी लौटाता है, वह हृदय से कितना संवेदनशील होगा इसका प्रमाण यह कविता-संग्रह है।
‘नीम का शहद’ कवि डॉ. राजवर्धन आज़ाद के अनुसार एक नवीन प्रयोगधर्मिता का उदाहरण है। अपनी भावनाओं को सूत्रों में अभिव्यक्त करना या यूँ कहें कि कम शब्दों में अधिक भावों को व्यक्त करना है—‘ज़िन्दगी है उल्फ़त/जिनकी है क़िस्मत/जिनके हैं ख़ादिम/उनकी है जन्नत।’
मुक्त छंद के कवि डॉ. आज़ाद की भावनाएँ सूक्ष्म हैं। कविता के केन्द्र में मनुष्य का जीवन है। विभिन्न भाव-भंगिमाओं से परिपूर्ण डॉ. आज़ाद की कविताएँ पृथ्वी से जन्नत तक की उड़ान भरती हैं। व्यक्ति, परिवार, समाज, राज्य, देश-विदेश की गतिविधियाँ कविता के मुख्य सरोकारों में शामिल हैं। प्रकृति, प्रवृत्ति, परछाईं, पीढ़ियाँ, परिवार, परमेश्वर के साथ स्व से शिखर तक डॉ. आज़ाद की कविताओं में उपस्थित हैं। देश एवं देश की परिस्थितियों को लेकर डॉ. आज़ाद चिन्तित रहते हैं। उनकी चिन्ता यह भी है कि जिनके कंधों पर देश को विकसित करने की जिम्मेवारी है, वे स्वयं बीमार हैं। अर्थात अयोग्य हैं। ‘बीमार है मुल्क’ कविता में वे लिखते हैं—‘बीमार है मुल्क/बीमार हैं कुर्सियाँ/बीमार हकीम से/हम दवा पूछ रहे हैं।’
उनकी कविता दुनिया में हो रहे पल-पल बदलाव की ख़बर रखती है। साथ ही संस्कृति के अवमूल्यन के प्रति सचेत भी करती है। एक कवि संवेदनशील संस्कृतिकर्मी भी होता है, इसलिए संस्कृति के अवमूल्यन से उनका चिन्तित होना स्वाभाविक है। संस्कृति के विभिन्न केन्द्रों का विपरीत व्यवहार डॉ. आज़ाद जैसे संवेदनशील एवं कर्मशील कवि को सोचने पर विवश कर देता है। उन्हीं के अनुसार—‘रक्षक बने भक्षक/मित्र बने तक्षक/संस्कृति हुई तार-तार/तस्कर बने परीक्षक।’
डॉ. राजवर्धन आज़ाद हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेज़ी में भी कविता लिखते हैं। इनकी संवेदनशीलता तमाम विधाओं में मानवीयता के अत्यंत क़रीब है। ‘नीम का शहद’ कवि हृदय व्यक्तियों के लिए ‘नीम’ और ‘शहद’ के गुणों से परिपूर्ण फलदायी सिद्ध होगा।
—डॉ. कल्याण कुमार झा
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Cheentiyon Ke Paanv
- Author Name:
Satyamohan Verma
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आज कोई भी संवेदनशील प्राणी युग, देश की विसंगतियों से अछूता नहीं रह सकता। प्रतिक्रिया प्रायः व्यंग्यात्मक होती हैं—निर्ममता और क्रूरता लिये हुए। सत्यमोहन की प्रतिक्रिया व्यंग्यात्मक होकर भी कोमल है, उनके व्यक्तित्व—चरित्र के अनुकूल। उनसे जब भी मिला हूँ उनके मृदु स्वभावी होने की छाप मेरे मन पर पड़ी है।
—डॉ. हरिवंश राय बच्चन
सब पार्थिव और अपार्थिव दीवारों के ख़िलाफ़ हैं। सत्यमोहन भी इस ‘मुक्तिबोध’ के प्रति लापरवाह नहीं हैं। जीवन के प्रति यह स्वस्थ दृष्टिकोण है। वे ऐसा कुछ लिखते हैं, जो सबका जाना-समझा और अनुभूत होता है।
—पं. भवानी प्रसाद मिश्र
सत्यमोहन की प्रसन्न सकारात्मकता उनकी संक्रामक आत्मीयता का मूल है। दूब जैसे भीतर ही भीतर फैलती है वैसे ही उनकी रचनात्मकता विभिन्न विधाओं में फैलती है। वे जीवन के पात्र को कभी आधा ख़ाली नहीं देखते—आधा भरा हुआ देखते हैं। वे सफलता की तुलना में सार्थकता को श्रेयस्कर मानते हैं।
—प्रो. कांति कुमार जैन
सत्यमोहन से 'सर्जना-77' के दौरान पहचान हुई और 'गंगा' के प्रकाशन के समय प्रगाढ़ता बढ़ी। वे बेहद शालीन और प्रिय व्यक्तित्व के धनी हैं। उनकी रचनाएँ समय सापेक्ष हैं। छोटी-छोटी कविताओं में वे बड़ी बात कह जाते हैं। उनकी गजलें उद्वेलित करती हैं और उनका तरन्नुम बेहद प्रभावी है।
—कमलेश्वर
सत्यमोहन की साहित्य और रंगकर्म की गतिविधियों में उत्साही और सक्रिय सहभागिता रही है। उम्र के इस पड़ाव पर साहित्यिक जागरूकता और संलग्नता बनाए रखना प्रशंसनीय उपलब्धि है। उम्मीद है कि उनकी कल्पनाशील और आस्थावान रुचियाँ अभी भी जीवन्त रहेंगी।
—प्रो. मनोहर वर्मा
सत्यमोहन जी के लेखन में साफ़-सुथरी भाषा और सम्प्रेषण क्षमता है। उनकी रचनात्मकता की उड़ान काफ़ी ऊँची है। वे इस पड़ाव पर भी सक्रिय हैं यह क्या कम है, उनके जीवन की अपेक्षाएँ पूरी हों यही हमारी कामना है।
—डॉ. रमाकान्त श्रीवास्तव
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Agar Main Sher Na Kahta
- Author Name:
Abbas Tabish
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Awating description for this book
Agar Main Sher Na Kahta
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The Spiritual Poems of Rumi
- Author Name:
Rumi
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The Spiritual Poems of Rumi: A Special Collection of Spiritual Poems Discover the wisdom of Jalaluddin Muhammad Balkhi Rumi, the revered Persian mystic and Sufi master, in this beautifully illustrated edition. For over eight centuries, Rumi’s timeless poetry has captivated readers from all walks of life, offering profound insights into love, friendship, and spirituality. This carefully curated collection features – Brilliant translations that bring Rumi’s universal themes to life, inviting readers to embark on a spiritual journey toward self-discovery and a deeper connection to the world around them. With verses that transcend time and culture, Rumi’s words resonate with anyone seeking a greater understanding of the self and our collective oneness. In this exquisite edition, adorned with intricate, richly colored designs, reflecting the beauty and depth of Rumi’s words, this book is more than just a collection of poems—it is a cherished tool for self-reflection and spiritual growth. Whether you are new to Rumi’s work or a lifelong admirer, this series will serve as a meaningful companion on your journey of inner awakening.
The Spiritual Poems of Rumi
Rumi
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