Language Linguistics
Urdu Shabdon Ka Guldasta
- Author Name:
Azra Naqvi
-
Book Type:

- Description:
उर्दू अपनी खूबसूरती, नफ़ासत और बेहतरीन शब्द-भंडार के लिए जानी जाती है। "उर्दू शब्दों का गुलदस्ता" रेख़्ता फ़ाउंडेशन की एक अनोखी पहल है, जो आपको मज़ेदार और आसान तरीके से उर्दू शब्द सीखने में मदद करती है। पारंपरिक शब्दकोश के बजाय, यह किताब कहानियों के ज़रिए उर्दू शब्द पेश करती है, जिससे शब्द सीखना और भी मज़ेदार हो जाता है। शब्दों को संदर्भ के अनुसार बांटा गया है ताकि सीखने वाले एक ही मूल शब्द से जुड़े दूसरे शब्द भी सीख सकें। हर अध्याय के आखिर में जल्दी दोहराने के लिए अभ्यास दिए गए हैं। यह किताब उर्दू शायरी में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले शब्दों और बातचीत के बुनियादी हुनर में महारत हासिल करने के लिए एक बेहतरीन गाइड है। कृपया इस किताब के बारे में अपनी राय और सुझाव दें। 'वर्ड पावर मेड ईज़ी' की तर्ज़ पर बनी यह किताब आपको तेज़ी से अपना उर्दू शब्द-भंडार बढ़ाने और बेहतर बनाने में मदद करती है। इसमें कई तरह के विषय शामिल हैं, जैसे अभिवादन, प्यार, ज्ञान, रिश्ते, लोग, घर की चीज़ें, कपड़े, स्वाद, रंग, शरीर के अंग, बाज़ार, यात्रा, पेशे, शायरी, मयख़ाने, बाग़-बगीचे और प्रकृति। अध्यायों के दौरान, आप आम गलतियों, सही उच्चारण और वर्तनी के बारे में जानेंगे, और शब्दों के मूल रूप, उनके अलग-अलग रूप और बहुवचन बनाने के नियम समझेंगे। साथ ही, आप अलग-अलग मौकों पर अभिवादन करने, मेहमाननवाज़ी करने और आभार व्यक्त करने के तरीके भी सीखेंगे। आसान व्याख्या, बुनियादी व्याकरण और अध्याय-वार अभ्यास के साथ, यह किताब उर्दू बोलने में आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है। आखिर में, यह किताब आपको उर्दू भाषा और तहज़ीब की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेगी।
Urdu Shabdon Ka Guldasta
Azra Naqvi
20% offAvailable
Shabd Shuddh Uchcharan Avm Padbhar
- Author Name:
Dr. Azam
-
Book Type:

- Description:
Book
Shabd Shuddh Uchcharan Avm Padbhar
Dr. Azam
20% offAvailable
Nagarjun : dabi doob ka roopak
- Author Name:
Kamlanand Jha
-
Book Type:

- Description:
आधुनिक हिन्दी कविता में निराला की पीढ़ी के बाद के प्रगतिशील कवियों में नागार्जुन सर्वाधिक लोकप्रिय रहे। उनकी लोकप्रियता ने हिन्दी के प्रबुद्ध जन में उन्हें परिचित तो बनाया लेकिन उनका अतिपरिचय ही उनकी गम्भीर विवेचना में बाधा बन गया। बहुभाषाविद नागार्जुन बौद्ध दर्शन की सर्वोच्च उपाधि से अलंकृत थे। उनकी रचनात्मकता इतनी प्रबल है कि उनका चिंतक अलग से नजर ही नहीं आता। कवि के बतौर वे प्रबल विद्रोही थे इसलिए अपनी कविता के लायक हिन्दी पाठक का भावबोध निर्मित करने में उन्हें कठिन परिश्रम करना पड़ा। यात्री उनका उपनाम ही नहीं था। देश और समाज के प्रत्यक्ष अनुभव से उनका लेखन विपुल समृद्ध हुआ। कमलानंद झा नागार्जुन की देसी संस्कृति के जानकार हैं। उनके विश्लेषण में इस जानकारी ने अतिरिक्त रोचकता पैदा की है। भाषा के समान ही नागार्जुन के लेखन की विधागत विविधता भी इसमें मुखर हुई है। नागार्जुन के भावबोध को लोकानुरागी प्रतिहिंसा कहकर लेखक ने उनकी विस्फोटक रचनात्मकता का असली स्रोत समझने का प्रयास किया है। नागार्जुन की रचना में अंतर्निहित विचार के साथ उसके सौंदर्य को उद्घाटित करना इस किताब का मुख्य सरोकार है। यथास्थिति की निर्मम और प्रचंड आलोचना साहित्य का अपना धर्म है। इस धर्म का पालन करने में साहित्य कलात्मक मार्ग अपनाता है। नागार्जुन के साहित्य के इस मार्ग की परख का यह गम्भीर प्रयास अत्यंत समयानुकूल है। नागार्जुन की सहजता का अनुगमन भी इस किताब में दिखायी देता है। —गोपाल प्रधान
Nagarjun : dabi doob ka roopak
Kamlanand Jha
18% offAvailable
Kannada Literature - From Eleventh Century through the Nineteenth Century
- Author Name:
Ravichnadra P. Chittampalli +1
-
Book Type:

- Description:
he reader is surprised by the narrative's fracture of Kannada literary history, as it deliberately departs from the established taxonomy based on creed, caste, and esoteric affiliations. It is the only Kannada anthology of the middle period spanning over 9 centuries from the 11th to the 19th. There are translated selections refreshingly present, and the entire tradition of creative endeavours from the most fruitful and exciting period of condylar literature is presented in 4 formalistic sections. The texts, both popular and lesser-known literary compositions, successfully gathered in one place, offer insight into a significant shift in style, form, and theme. Its page is being written with a mnemonic episode from Devadatta and the end of the popular force key, Sangya Balya
Kannada Literature - From Eleventh Century through the Nineteenth Century
Ravichnadra P. Chittampalli
17% offAvailable
Deshbhakti ke pavan teerth
- Author Name:
Rishi Raj
-
Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Deshbhakti ke pavan teerth
Rishi Raj
20% offAvailable
Rameshraaj Ke Kundaliya Chand
- Author Name:
Rameshraaj
-
Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में मैंने कुण्डलिया छंद के तीन प्रकारों में कविताएँ लिखी हैं, जो निम्नलिखित रूप में हैं- 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' , छंद शास्त्र और साहित्य-क्षेत्र में मेरा एक अभिनव प्रयोग है | इस छंद की रचना करते हुए मैंने इसे 16-16 मात्राओं के 6 चरणों में बाँधा है, जिसके हर चरण में 8 मात्राओं के उपरांत सामान्यतः (कुछ अपवादों को छोडकर ) आयी 'यति' इसे गति प्रदान करती है | पूरे छंद के 6 चरणों में 96 मात्राओं का समावेश किया गया है | 'सर्प कुंडली 'राज' छंद' भी छंदशास्त्र और साहित्य-क्षेत्र में मेरा एक अभिनव प्रयोग है | इस छंद की रचना करते हुए मैंने इसे 13, 13 मात्राओं के दो चरणों से 26 मात्राओं की एक पंक्ति के रूप में बाँधा है, जिसके हर चरण में 13 मात्राओं के उपरांत सामान्यतः (कुछ अपवादों को छोडकर ) आयी 'यति' इसे गति प्रदान करती है | कुंडलिया दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के 6 चरण होते हैं तथा प्रत्येकचरण में 24 मात्राएँ होती है। कुंडलिया के पहले दो चरण दोहा तथा शेष चार चरण रोला से बने होते हैं। दोहा के प्रथम एवं तृतीय चरण में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।रोला का प्रथम चरण11मात्राओं तथा दूसरा चरण 13 मात्राओं का होता है।
Rameshraaj Ke Kundaliya Chand
Rameshraaj
15% offAvailable
Bharatiy Bhashanchi Anokhi Kahani
- Author Name:
Meghana Bhuskute +1
-
Book Type:

- Description:
पेगी मोहन वाचकाला भारतीय भाषांच्या दुनियेतल्या विलक्षण सफरीवर घेऊन जातात. भाषाविज्ञान आणि इतिहास या दोहोंची सांगड घालतात आणि गेल्या सहस्रकांमध्ये होत राहिलेल्या स्थलांतरांचा आपल्या बोलण्यावर आणि आपल्या बोलण्याच्या तऱ्हांवर कसकसा परिणाम होत गेला आहे, याचा शोध घेतात. ‘भारतीय भाषांची अनोखी कहाणी` हे पुस्तक समजायला सोपं तर आहेच, पण ते वाचणं आपल्या सगळ्यांसाठी आवश्यकही आहे. - टोनी जोसेफ अत्यंत स्वागतार्ह भर... मानवी समूहांच्या भाषा त्या समूहांइतक्याच गतिशील असतात... पेगी मोहन हा भारतीय उपखंडात झालेल्या प्राचीन स्थलांतरांचा वृत्तान्त भाषांच्या बदलत्या रूपाशी जोडून घेतात. शिवाय त्यांची नेमकी भाषिक निरीक्षणं... त्यातून या पुस्तकाला एखाद्या सुरस गोष्टीचं रूप येतं. तो एक आनंददायी अनुभव ठरतो. - माधव देशपांडे स्थलांतरं, नवीन प्रदेशात केलेल्या वस्त्या, मिश्र विवाह, आणि लोकांच्या सरमिसळीतून झालेला विविध भाषांचा जन्म या सगळ्याभोवती हे अतिशय विलक्षण पुस्तक फिरतं... इंडो-आर्यन लोकांच्या वसाहतींच्या भूलभुलैयामधून हिंडताना पेगी थेट शरलॉक होम्सप्रमाणे सूक्ष्म पुरावे गोळा करत जाते... भाषावैज्ञानिक इतिहासाबद्दलच्या पुस्तकांमधल्या सर्वाधिक वाचनीय पुस्तकांपैकी हे एक आहे. - अन्विता अब्बी Bharatiy Bhashanchi Anokhi Kahani | Peggy Mohan Translated By : Meghana Bhuskute भारतीय भाषांची अनोखी कहाणी : पेगी मोहन अनुवादकाचे नाव : - मेघना भुस्कुटे
Bharatiy Bhashanchi Anokhi Kahani
Meghana Bhuskute
20% offAvailable
Kannada Varnamale
- Author Name:
Anupama K Benachinamardi
-
Book Type:

- Description:
This book is tailored for individuals with an interest in mastering the Kannada alphabet. It elucidates the pronunciation of each Kannada letter using English phonetics. Moreover, the book incorporates sensory words that captivate children's interest. Another distinctive aspect of this book is its presentation of vowels and consonants within the context of natural phenomena. Our aim is for children to forge a deeper connection with nature through this book.
Kannada Varnamale
Anupama K Benachinamardi
17% offAvailable
Paath : Kuchh Aur Kahaniyon Ka
- Author Name:
Vishwanath Tripathi
-
Book Type:

- Description:
विश्वनाथ त्रिपाठी की कहानी-केन्द्रित पुस्तक 'कुछ कहानियाँ : कुछ विचार' समकालीन कहानी पर एक लोकप्रिय और बहुपठित कृति है। 'पाठ : कुछ और कहानियों का' को हम उसी की अगली कड़ी कह सकते हैं। इस पुस्तक में शामिल आलेख मूलतः उन प्रवृत्तियों को रेखांकित करते हैं जो हिन्दी कहानियों में अलग-अलग समय पर प्रकट हुईं, और अब की कहानियों में नया रूप धारण कर रही हैं। इस विवेचन में वे अनेक कथाकारों और कहानियों का हवाला देते हुए उन तमाम घटकों का भी उल्लेख करते चलते हैं, जिनसे हिन्दी कहानी की दशा-दिशा निर्धारित हुई। पुरानी से पुरानी और इधर के नए रचनाकारों तक की कहानियाँ इस विवेचन का हिस्सा बनी हैं। ये आलेख सिर्फ कहानियों का नहीं, उस समय का भी विश्लेषण करते हैं, जिस समय में ये लिखी गईं। भूमंडलीकरण, नव-उपनिवेशवाद, उपभोक्तावाद और मौजूदा सांस्कृतिक दिशाहीनता-इनकी विवेचना भी साथ-साथ होती चली है। कहानी के पाठ में निहित आशयों को खोलते हुए वे कुछ प्रश्न भी उठाते हैं और सलाह भी देते हैं। मसलन, वे कहते हैं कि 'विचारधारा की लड़ाई और रचनाधर्मिता के बीच अपने पक्ष का दुराग्रह रचना को कमजोर करता है। एकांगी बनाता है। प्रगतिशीलता का साहित्यिक रूप वही नहीं होगा जो राजनीतिक या समाजशास्त्रीय होगा।' इस पुस्तक में एक लम्बी भूमिका के अलावा सोलह और लेख संकलित हैं जिनमें हम प्रेमचन्द से लेकर अब तक के कथाकारों और उनकी कहानियों को विश्वनाथ त्रिपाठी की अपनी अनूठी आस्वाद-धर्मी आलोचना-दृष्टि से नए ढंग से पढ़-समझ सकते हैं।
Paath : Kuchh Aur Kahaniyon Ka
Vishwanath Tripathi
20% offAvailable
Rajbhasha Hindi Aur Asmitabodh
- Author Name:
Umesh Chaturvedi
-
Book Type:

- Description:
इस समय भाषा को लेकर बड़ा कोलाहल है। इसकी बड़ी वजह राजनीतिक पहचान की कामना में निहित जटिल संरचना है। जब-जब सत्ता का हिस्सा बंटने-बंटाने की गतिविधियां तेज होती हैं वे सारे तत्त्व खोजकर खड़े किए जाते हैं, जिनसे ‘अपने पक्ष’ का संघर्ष तेज हो सके। जैसे हिंदी को यों तो उर्दू के साथ मौसी की तरह कहते लोकप्रिय मंचों के मुहावरेकार तालियां लूटते हैं, लेकिन राजनीतिक लूट के वक्त यही वर्ग विशेष की पहचान निरूपित होने लगती है। चूंकि भाषा, मातृ भाषा, राष्ट्र भाषा जैसे प्रश्न भारत के संदर्भ में बहुत संवेदनशील रहे हैं, इसलिए हर कोई अपने अपने हिसाब से इन्हें सुलझाने का दावा करता है। क्षेत्रीय अस्मिताएं, स्थानीय राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं, अखिल भारतीय सांस्कृतिक स्वरूप, प्रशासनिक ताना बाना तथा इतिहास की छायाएं, सब मिलकर कभी कभी कारुणिक स्थिति बना देते हैं। ऐसे माहौल में जबकि राजा शिवप्रसाद और भारतेंदु से लेकर गांधी, लोहिया तक वैचारिक रूप से हमारे पास मौजूद हैं, फिलहाल कई तरह के वर्ग भाषा को लेकर सक्रिय हैं। एक वे हैं जो लुप्त होती भाषाओं के साथ उनकी सामाजिकी पर गहन शोध चिंतन कर रहे हैं। कुछ हैं जो ऊंची-ऊंची सभा-गोष्ठियों, मेलों, मंचों से शौर्यपूर्वक अपने पक्ष रेखांकित करते रहते हैं। कुछ वे हैं,जो समय-समय पर उठने वाले प्रश्नों को संबोधित कर उनकी जटिलताओं से आमजन को परिचित कराने की कोशिश करते हैं। उमेश चतुर्वेदी ने यह तीसरा रास्ता उचित ही चुना है। वे समय-समय पर हिंदी से जुड़ी ताजा हलचल का सत्य तलाशने की कोशिश करते हैं। इस तलाश में बड़ी स्थितियों के कारकों का परीक्षण हो जाता है और आम पाठक तक उलझी हुई रस्सी का सिरा भी खुल जाता है। जैसा कि सिद्ध है,आंदोलित कर देने वाली शब्दसेवा, आंदोलनकारी मुद्रा से हमेशा बेहतर होती है। उमेश चतुर्वेदी के हिंदी भाषा संबंधी आलेखों का यह संग्रह न सिर्फ इस उद्देश्य की पूर्ति करेगा, बल्कि उन सबको भी गहरा संतोष देगा जो आंदोलनकारी मुद्रा में नहीं, धरातल की सकर्मक क्रियाओं में आस्था रखते हैं। -यशवंत व्यास
Rajbhasha Hindi Aur Asmitabodh
Umesh Chaturvedi
18% offAvailable
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
- Author Name:
Azra Naqvi
-
Book Type:

- Description:
उर्दू कई तहज़ीबों और भाषाओं के मेल से बनी है और शायरी की रिवायत (काव्य-परम्परा) में फ़ारसी, अरबी, संस्कृत और तुर्की के रंग शामिल हैं। ये किताब एक शब्दकोश न हो कर उर्दू शायरी में आने वाले विभिन्न विषयों पर ख़ूबसूरत शेरों के संकलन पर आधारित है। शायरी की दुनिया की सैर कराते हुए ये किताब आपको नए-नए शब्दों और उनके उपयोग की बारीकियों के बारे में बताती है और शायरी में इस्तेमाल होने वाले अहम लफ़्ज़ों, तरकीबों और तल्मीहात के मानी और उनके विभिन्न सन्दर्भों को विस्तार से समझाया गया है। ये किताब शायराना लफ़्ज़ों के कलात्मक इस्तेमाल और उनके गहरे अर्थों को समझने में मददगार होगी, और उर्दू शायरी के अथाह ख़ज़ाने का भरपूर लुत्फ़ उठाने का मौक़ा देगी।
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
Azra Naqvi
20% offAvailable
Saanchi Danam
- Author Name:
Motilal Alamchandra
-
Book Type:

- Description:
Book
Saanchi Danam
Motilal Alamchandra
20% offAvailable
Sun Mere Bandhu re
- Author Name:
Narayan Singh
-
Book Type:

- Description:
'सुन मेरे बंधु रे' नारायण सिंह की नव्यतम कृति है। यहाँ उपस्थित अलग-अलग आलेख आपस में गुम्फित हैं, एक-दूसरे के साथ आबद्ध हैं। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है; क्योंकि लेखक किसी कहानी-उपन्यास में उपस्थित घटना, रंग-ढंग और दृष्टि को महज आलोचकीय दृष्टि से नहीं देख रहा, बल्कि तत्कालीन समय में उनकी उपस्थिति को, कहानी के पीछे मौजूद जीवन को भी देखना-दिखाना चाहता है। ये आलेख किसी कहानी, उपन्यास के ज़रिये शुरू तो होते हैं लेकिन उक्त कहानी उपन्यास या सिनेमा से बाहर आकर हमारी दृष्टि का आयतन विस्तारित करते मिलते हैं। एक दृष्टि सम्पन्न कथाकार अपने पूर्वज कथाकारों, सृजनशील व्यक्तित्वों के जीवन, उनके अन्तर्विरोध और मनुष्य के दुख को, सामाजिक विभेदकारी दृष्टि की जाँच-पड़ताल करते हुए उन मूल्यों को सामने लाने की कोशिश करता है जिन वजहों ने रचना को रचना बनाये रखा है। नारायण सिंह स्वयं एक कथाकार-उपन्यासकार हैं लेकिन यहाँ कथाकार अपने कथा प्रतिमान के आलोक में किसी रचना की व्याख्या नहीं करता, बल्कि रचना की केन्द्रीय समस्या को उठाते हुए सिंहावलोकन और विहंगावलोकन दोनों आयामों का भरपूर इस्तेमाल करता है। यह सिफत ही इन आलेखों को परंपरागत समीक्षकीय पद्धति से इतर पहचान लिये पाठकों से मुखातिब है। चेखव की कहानी के ज़रिये प्रेम को पुनर्परिभाषित करती बात हो या 'सुजाता' में उपस्थित अकुंठ प्रेम गीत में उपस्थित पुरुष बोध को सामने लाती आलोचकीय निगाह हो; हर जगह लेखक कलात्मकता, बुनावट और ध्वनि सौंदर्य के पीछे दबे जा रहे या दबाये जा रहे मनुष्य की पीड़ा से सहानुभूति प्रकट करता मिलता है। इसीलिए यहाँ उपस्थित रचनाओं का पाठ नये सिरे से पढ़े जाने की माँग करता मिलता है। —आशीष सिंह
Sun Mere Bandhu re
Narayan Singh
18% offAvailable
Dakshina
- Author Name:
Sirpi Balasubramaniam
-
Book Type:

- Description:
A literary digest of South Indian Languages.
Dakshina
Sirpi Balasubramaniam
17% offAvailable
Ajneya Ke Samajik-Sanskritik Sarokar
- Author Name:
Dr. Krishna Dutt Paliwal
-
Book Type:

- Description:
सप्रसिद्ध आलोचक प्रो. कृष्णदत्त पालीवाल की नई पुस्तक के आलोचनात्मक निबंधों में अज्ञेय के रचनाकर्म को लेकर हिंदी आलोचना में हुई तमाम साहित्यिक, गैर-साहित्यिक बहसों और साहित्य की, राजनीति की चर्चा करते हुए उस पर तर्कसंगत प्रश्न उठाए गए हैं। अज्ञेय के साहित्यिक-सांस्कृतिक अवदान को उद्घाटित करते हुए स्थापित किया गया है कि अज्ञेय के सृजन-चिंतन से किस तरह हिंदी आलोचना में बहसों की शुरुआत हुई तथा समकालीन साहित्य-संवेदना और साहित्यिक परंपरा के अध्ययन-मूल्यांकन की नई आलोचना-संस्कृति का विकास हुआ। अज्ञेय के निबंधों, भूमिकाओं, स्मरण-लेखों, यात्रा-साहित्य तथा उनके द्वारा आयोजित व्याख्यानमालाओं और यात्रा शिविरों में लेखकों, विद्वानों, कला-मर्मज्ञों के व्याख्यानों का अंतर्पाठ करते हुए इस पुस्तक में दिखाया गया है कि किस प्रकार उन्होंने भारतीय समाज, हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति को औपनिवेशिक आधुनिकता से मुक्त कराने और भारतीय आधुनिकता को दिशा प्रदान करने का प्रयास किया। अज्ञेय-साहित्य के अध्येताओं के लिए एक पठनीय पुस्तक।
Ajneya Ke Samajik-Sanskritik Sarokar
Dr. Krishna Dutt Paliwal
20% offAvailable
Rasraaj Virodh
- Author Name:
Rameshraaj
-
Book Type:

- Description:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ‘काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था’ नामक निबन्ध में कहते हैं - ‘‘लोक में फैली दुःख की छाया को हटाने में ब्रह्म की आनंद-कला जो शक्तिमय रूप धारण करती है, उसकी भीषणता में भी अद्भुत मनोहरता, कटुता में भी अपूर्व मधुरता, प्रचण्डता में भी गहरी आद्रता साथ लगी रहती है---यदि किसी ओर उन्मुख ज्वलंत रोष है तो दूसरी ओर करुण दृष्टि फैली दिखायी पड़ती है। यदि किसी ओर ध्वंस और हाहाकार है तो और सब ओर उसका सहगामी रक्षा और कल्याण है।’’ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबंध ‘काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था’ के उपरोक्त कथन के आधार पर यह तथ्य, सत्य हो जाते हैं कि काव्य को रसनीय मात्र वे भाव ही नहीं बनाते हैं, जो मधुर और कोमल होते हैं। ध्वंस और अत्याचार के वातावरण में प्रतिकार का जो स्वर मुखर होता है, उसकी गति करुणा से उत्पन्न होकर रक्षा और कल्याण की ओर जाती है, जिसके भीतर प्राणी की हर क्रिया, प्रतिक्रिया या अनुक्रिया अधर्म के प्रति असहमति की ऊर्जा बनकर आक्रोश का रूप धारण करती है। आहत मन के भीतर जब ‘आक्रोश’ स्थायित्व ग्रहण करता है तो इस स्थायी भाव का अनुभावन ‘विरोध’ के रूप में सामने आता है। ‘विरोध’ को एक नये रस के रूप में प्रस्तुत करना माना एक नये अनुभव से गुजरना है। लेकिन यह कार्य अटपटा या अतार्किक इसलिए नहीं है क्योंकि ‘‘केवल परम्परागत स्थायी भाव ही रसत्व को प्राप्त हो सकते हों, ऐसी बात नहीं है, तथाकथित संचारी भी रसत्व को प्राप्त हो सकते हैं। रुद्रट, उद्भट, आनंदवर्धन आदि अनेक आचार्यों ने इस बात को स्वीकार किया था। आचार्य भोज ने एक और कदम आगे बढ़ाया और कहा कि उनचास भावों के अतिरिक्त भी जो कुछ रसनीय है या बनने की सामर्थ्य रखता है, उसे रस कहा जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने रसों की संख्या का विस्तार भी किया।’’ [रस-सिद्धांत , डा.ऋषि कुमार चतुर्वेदी, पृष्ठ 119-120] अस्तु! नये काव्यरस ‘विरोध’ का रस-रूप वर्तमान यथार्थोंन्मुखी काव्य में अनेक रूप व प्रकारों में दृष्टिगोचर होता है।
Rasraaj Virodh
Rameshraaj
15% offAvailable
Kabiyan Ki Vaarta
- Author Name:
Vishwanath Tripathi
-
Book Type:

- Description:
डॉ. रामविलास शर्मा को पंजा लड़ाने का शौक़ था, लेकिन वे इसमें बेईमानी करते थे जिसके चलते निराला का बलशाली हाथ भी उनका पंजा नहीं दबा पाता था, लेकिन त्रिलोचन ने उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी कि बेईमानी की तो चमड़ी उधेड़ लूँगा! निराला को फ़ोटो खिंचवाने का शौक़ था। एक बार रेडियो पर काव्यपाठ से पहले एक फ़ोटो सेशन होना था, लेकिन निराला को फ़ोटो खिंचवाने से पहले डंड-बैठक करना जरूरी लगा, ताकि चेहरे पर चमक रहे! ऐसे ही अनेक क़िस्से आपको इस किताब में मिलेंगे। हमारे साहित्य के मूर्धन्य व्यक्तित्वों के गुरु-गम्भीर व्यक्तित्व का वह पक्ष, जिसके बारे में हम ज़्यादा क्या, बिलकुल भी नहीं जानते, उसके बारे में यह किताब हमें काफ़ी कुछ बताती है। विश्वनाथ त्रिपाठी ने एक लम्बा समय उन दिग्गजों के साथ गुजारा है, उनका अपना अध्ययन भी विशाल रहा है साथ ही साहित्य-समाज में भी वे बहुत गहरे रचे-बसे रहे हैं, इस पुस्तक में उन्होंने अपनी स्मृति से अनेक ऐसे किस्से और कहानियाँ दर्ज की हैं, जो साहित्यकारों के साथ एक पूरे दौर के साहित्यिक और सामाजिक माहौल को हमारे सामने जीवन्त कर देती हैं।
Kabiyan Ki Vaarta
Vishwanath Tripathi
20% offAvailable
Samkalin Laghukatha ka Samiksha Saundharya
- Author Name:
Jitendra Jeetu
-
Book Type:

- Description:
लघुकथा लेखन को आसान सी विधा मानकर बहुत लोग इस विधा के लेखन की ओर मुड़े और जाने–अनजाने अपनी अधकचरी बौद्धिकता और अज्ञान के बूते इस विधा का अहित करते चले गए। इन बहुत से लोगों में वे भी थे जो खालिस पाठक थे और लेखक बनना चाहते थे। जो कुछ बनना चाहते हैं उन्हें कोई नहीं रोक सकता। वे बन गए। वे बिना पढ़े लेखक बन गए। उन्होंने बस उसी तरह की लघुकथाएं पढ़ी थीं और वे उसी तरह के लघुकथा लेखक बन गए। यह विराट स्तर पर धर्म परिवर्तन से भी अधिक संगीन मामला था जिसने साहित्य को बहुत बड़े पैमाने पर चोट पहुंचाई लेकिन इसकी कोई चर्चा नहीं हुई। इस पुस्तक में लघु कथा के सौन्दर्यशास्त्र पर चर्चा की गई है और इस विधा की महत्ता को स्थापित करने का प्रयास ही प्रधान है।
Samkalin Laghukatha ka Samiksha Saundharya
Jitendra Jeetu
18% offAvailable
Rekhta urdu Learning Guide
- Author Name:
Abdur Rasheed +2
-
Book Type:

- Description:
The Rekhta Urdu Learning Guide (Hindi Edition) is your ultimate companion for mastering the beautiful Urdu script. Whether you're a beginner or seeking to enhance your language skills, this comprehensive guide will empower you to read, write, and speak Urdu with confidence. Written by Prof. Abdur Rasheed and Sumaira Nawaz, this guide combines clear instructions and handpicked examples to facilitate a seamless learning experience. With a focus on simplicity, the Rekhta Urdu Learning Guide has been carefully designed to ensure easy comprehension of the script. Each lesson is structured in a step-by-step manner, allowing learners to progress at their own pace. Whether you're interested in poetry, literature, or simply connecting with the rich cultural heritage of Urdu, this guide provides the essential foundation. Key Features and Benefits: QUICK LEARNING: Step-by-step instructions and handpicked examples enable rapid progress in mastering the Urdu script. CLEAR INSTRUCTIONS: Prof. Abdur Rasheed and Sumaira Nawaz have meticulously crafted the guide with clarity in mind, making it accessible to learners of all levels. HOLISTIC APPROACH: In addition to learning the written language, the guide lays a strong foundation for spoken Urdu through enriching glossaries and practical exercises. SIMPLICITY AT ITS CORE: The book is written in the simplest possible way, ensuring an effortless learning experience for beginners. VERSATILITY: Whether you're a student, professional, or language enthusiast, this guide caters to your specific needs and goals. LANGUAGE IMMERSION: Immerse yourself in the beauty of Urdu poetry, literature, and cultural nuances as you navigate the guide. EXPERT AUTHORS: The guide is authored by Prof. Abdur Rasheed and Sumaira Nawaz, renowned experts in the Urdu language and literature.
Rekhta urdu Learning Guide
Abdur Rasheed
20% offAvailable
The Language & Linguistics category explores how languages work—grammar, phonetics, semantics, dialects, etymology, translation, sociolinguistics, and the evolution of languages across India and the world. This shelf serves students, teachers, researchers, translators, writers, and anyone curious about how languages shape human thought and culture.
What readers will find here:
-
Grammar and usage guides for Indian languages
-
Dictionaries, thesauruses & vocabulary builders
-
Comparative linguistics and translation studies
-
Books on dialects, folklore languages, and endangered languages
-
Research in phonetics, syntax, semantics & pragmatics
-
Studies on Indian multilingualism and language politics
-
Writing systems, scripts, etymology, and language history
-
Linguistic textbooks for BA, MA, NET, SET & other academic exams
What types of books are included in language and linguistics?
This category includes grammar guides, dictionaries, phonetics, semantics, translation studies, dialect research, and books on the evolution and structure of languages.
Who should read language and linguistics books?
Students, teachers, translators, writers, researchers, and anyone interested in how languages function, change, and influence society.
Are these books useful for competitive exams?
Yes. Linguistics books support BA/MA programs, UGC NET, SET, TET, translation exams, and language-focused entrance tests.
Why are linguistics books important in India?
India’s linguistic diversity makes linguistics essential for understanding dialects, cultural identity, multilingual education, translation, and language policy.