Language Linguistics
Bharatiy Bhashanchi Anokhi Kahani
- Author Name:
Meghana Bhuskute +1
-
Book Type:

- Description:
पेगी मोहन वाचकाला भारतीय भाषांच्या दुनियेतल्या विलक्षण सफरीवर घेऊन जातात. भाषाविज्ञान आणि इतिहास या दोहोंची सांगड घालतात आणि गेल्या सहस्रकांमध्ये होत राहिलेल्या स्थलांतरांचा आपल्या बोलण्यावर आणि आपल्या बोलण्याच्या तऱ्हांवर कसकसा परिणाम होत गेला आहे, याचा शोध घेतात. ‘भारतीय भाषांची अनोखी कहाणी` हे पुस्तक समजायला सोपं तर आहेच, पण ते वाचणं आपल्या सगळ्यांसाठी आवश्यकही आहे. - टोनी जोसेफ अत्यंत स्वागतार्ह भर... मानवी समूहांच्या भाषा त्या समूहांइतक्याच गतिशील असतात... पेगी मोहन हा भारतीय उपखंडात झालेल्या प्राचीन स्थलांतरांचा वृत्तान्त भाषांच्या बदलत्या रूपाशी जोडून घेतात. शिवाय त्यांची नेमकी भाषिक निरीक्षणं... त्यातून या पुस्तकाला एखाद्या सुरस गोष्टीचं रूप येतं. तो एक आनंददायी अनुभव ठरतो. - माधव देशपांडे स्थलांतरं, नवीन प्रदेशात केलेल्या वस्त्या, मिश्र विवाह, आणि लोकांच्या सरमिसळीतून झालेला विविध भाषांचा जन्म या सगळ्याभोवती हे अतिशय विलक्षण पुस्तक फिरतं... इंडो-आर्यन लोकांच्या वसाहतींच्या भूलभुलैयामधून हिंडताना पेगी थेट शरलॉक होम्सप्रमाणे सूक्ष्म पुरावे गोळा करत जाते... भाषावैज्ञानिक इतिहासाबद्दलच्या पुस्तकांमधल्या सर्वाधिक वाचनीय पुस्तकांपैकी हे एक आहे. - अन्विता अब्बी Bharatiy Bhashanchi Anokhi Kahani | Peggy Mohan Translated By : Meghana Bhuskute भारतीय भाषांची अनोखी कहाणी : पेगी मोहन अनुवादकाचे नाव : - मेघना भुस्कुटे
Bharatiy Bhashanchi Anokhi Kahani
Meghana Bhuskute
20% offAvailable
Rameshraaj Ke Kundaliya Chand
- Author Name:
Rameshraaj
-
Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में मैंने कुण्डलिया छंद के तीन प्रकारों में कविताएँ लिखी हैं, जो निम्नलिखित रूप में हैं- 'नव कुंडलिया 'राज' छंद' , छंद शास्त्र और साहित्य-क्षेत्र में मेरा एक अभिनव प्रयोग है | इस छंद की रचना करते हुए मैंने इसे 16-16 मात्राओं के 6 चरणों में बाँधा है, जिसके हर चरण में 8 मात्राओं के उपरांत सामान्यतः (कुछ अपवादों को छोडकर ) आयी 'यति' इसे गति प्रदान करती है | पूरे छंद के 6 चरणों में 96 मात्राओं का समावेश किया गया है | 'सर्प कुंडली 'राज' छंद' भी छंदशास्त्र और साहित्य-क्षेत्र में मेरा एक अभिनव प्रयोग है | इस छंद की रचना करते हुए मैंने इसे 13, 13 मात्राओं के दो चरणों से 26 मात्राओं की एक पंक्ति के रूप में बाँधा है, जिसके हर चरण में 13 मात्राओं के उपरांत सामान्यतः (कुछ अपवादों को छोडकर ) आयी 'यति' इसे गति प्रदान करती है | कुंडलिया दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के 6 चरण होते हैं तथा प्रत्येकचरण में 24 मात्राएँ होती है। कुंडलिया के पहले दो चरण दोहा तथा शेष चार चरण रोला से बने होते हैं। दोहा के प्रथम एवं तृतीय चरण में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।रोला का प्रथम चरण11मात्राओं तथा दूसरा चरण 13 मात्राओं का होता है।
Rameshraaj Ke Kundaliya Chand
Rameshraaj
15% offAvailable
Deshbhakti ke pavan teerth
- Author Name:
Rishi Raj
-
Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Deshbhakti ke pavan teerth
Rishi Raj
20% offAvailable
Hindi Natak
- Author Name:
Dr. Bachchan Singh
-
Book Type:

- Description:
नाटक एक श्रव्य-दृश्य काव्य है, अत: इसकी आलोचना के लिए उन व्यक्तियों की खोज जरूरी है जो इसके श्रव्यत्व और दृश्यत्व को एक साथ उद्घाटित कर सकें। वस्तु, नेता और रस के पिटे-पिटाए प्रतिमानों से इसका सही और नया मूल्यांकन सम्भव नहीं है और न ही कथा-साहित्य के लिए निर्धारित लोकप्रिय सिद्धान्तों–कथावस्तु, चरित्र, देशकाल, भाषा, उद्देश्य से ही इसका विवेचन सम्भव है। प्रसाद के नाटकों में कुछ लोगों ने अर्थ-प्रकृतियों, कार्यावस्थाओं और पंच सन्धियों को खोजकर नाट्यालोचन को विकृत कर रखा था। यह यंत्रगतिक प्रणाली किसी काम की नहीं है। इस पुस्तक में इन समीक्षा-पद्धतियों को अस्वीकार करते हुए पूर्व-पश्चिम की नवीनतम विकसित समीक्षा-सरणियों का आश्रय लिया गया है। लेखक का केन्द्रीय विवेच्य है नाटक की नाट्यमानता। नाटक की भाषा हरकत की भाषा होती है, क्रियात्मकता की भाषा होती है। इसी से नाटक को विशिष्ट रूप मिलता है और वह सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों को उजागर करती है। इसी से नाटककार की ऐतिहासिक विश्वदृष्टि का भी पता चलता है। हिन्दी के कुछ शिखरों–अंधेर नगरी, स्कन्दगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, अंधा-युग, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे पर विशेष ध्यान दिया गया है जो आज भी महत्त्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं।
Hindi Natak
Dr. Bachchan Singh
20% offAvailable
Urdu Shabdon Ka Guldasta
- Author Name:
Azra Naqvi
-
Book Type:

- Description:
Urdu is celebrated for its beauty, elegance, and rich vocabulary. “Urdu Shabdon ka Guldasta” is a unique initiative by Rekhta Foundation to help you learn Urdu words in an engaging and easy way. Instead of a traditional dictionary, this book presents Urdu words through stories, making vocabulary building more enjoyable. Words are categorised by context to enable learners to acquire related words from a single root. Each chapter ends with exercises for quick revision. This book serves as a valuable guide to mastering commonly used words in Urdu poetry and basic communication skills. Please share your feedback and comments about the book. Styled after ‘Word Power Made Easy, ’ it helps you quickly expand and improve your Urdu vocabulary. It covers a wide range of topics, including Greetings, Love, Knowledge, Relationships, People, Household Items, Clothing, Tastes, Colours, Body Parts, Markets, Travel, Professions, Poetry, Taverns, Gardens, and Nature. Throughout the chapters, you'll learn common mistakes, correct pronunciation and spelling, and understand word roots, forms, and pluralisation rules. Additionally, you will learn how to greet, host, and express gratitude on various occasions. With simple explanations, basic grammar, and chapter-wise exercises, the book boosts your confidence in speaking Urdu. Ultimately, this book will help you develop a refined understanding of the Urdu language and etiquette.
Urdu Shabdon Ka Guldasta
Azra Naqvi
20% offAvailable
Nagarjun : dabi doob ka roopak
- Author Name:
Kamlanand Jha
-
Book Type:

- Description:
आधुनिक हिन्दी कविता में निराला की पीढ़ी के बाद के प्रगतिशील कवियों में नागार्जुन सर्वाधिक लोकप्रिय रहे। उनकी लोकप्रियता ने हिन्दी के प्रबुद्ध जन में उन्हें परिचित तो बनाया लेकिन उनका अतिपरिचय ही उनकी गम्भीर विवेचना में बाधा बन गया। बहुभाषाविद नागार्जुन बौद्ध दर्शन की सर्वोच्च उपाधि से अलंकृत थे। उनकी रचनात्मकता इतनी प्रबल है कि उनका चिंतक अलग से नजर ही नहीं आता। कवि के बतौर वे प्रबल विद्रोही थे इसलिए अपनी कविता के लायक हिन्दी पाठक का भावबोध निर्मित करने में उन्हें कठिन परिश्रम करना पड़ा। यात्री उनका उपनाम ही नहीं था। देश और समाज के प्रत्यक्ष अनुभव से उनका लेखन विपुल समृद्ध हुआ। कमलानंद झा नागार्जुन की देसी संस्कृति के जानकार हैं। उनके विश्लेषण में इस जानकारी ने अतिरिक्त रोचकता पैदा की है। भाषा के समान ही नागार्जुन के लेखन की विधागत विविधता भी इसमें मुखर हुई है। नागार्जुन के भावबोध को लोकानुरागी प्रतिहिंसा कहकर लेखक ने उनकी विस्फोटक रचनात्मकता का असली स्रोत समझने का प्रयास किया है। नागार्जुन की रचना में अंतर्निहित विचार के साथ उसके सौंदर्य को उद्घाटित करना इस किताब का मुख्य सरोकार है। यथास्थिति की निर्मम और प्रचंड आलोचना साहित्य का अपना धर्म है। इस धर्म का पालन करने में साहित्य कलात्मक मार्ग अपनाता है। नागार्जुन के साहित्य के इस मार्ग की परख का यह गम्भीर प्रयास अत्यंत समयानुकूल है। नागार्जुन की सहजता का अनुगमन भी इस किताब में दिखायी देता है। —गोपाल प्रधान
Nagarjun : dabi doob ka roopak
Kamlanand Jha
18% offAvailable
Shabd Shuddh Uchcharan Avm Padbhar
- Author Name:
Dr. Azam
-
Book Type:

- Description:
Book
Shabd Shuddh Uchcharan Avm Padbhar
Dr. Azam
20% offAvailable
Kannada Literature - From Eleventh Century through the Nineteenth Century
- Author Name:
Ravichnadra P. Chittampalli +1
-
Book Type:

- Description:
he reader is surprised by the narrative's fracture of Kannada literary history, as it deliberately departs from the established taxonomy based on creed, caste, and esoteric affiliations. It is the only Kannada anthology of the middle period spanning over 9 centuries from the 11th to the 19th. There are translated selections refreshingly present, and the entire tradition of creative endeavours from the most fruitful and exciting period of condylar literature is presented in 4 formalistic sections. The texts, both popular and lesser-known literary compositions, successfully gathered in one place, offer insight into a significant shift in style, form, and theme. Its page is being written with a mnemonic episode from Devadatta and the end of the popular force key, Sangya Balya
Kannada Literature - From Eleventh Century through the Nineteenth Century
Ravichnadra P. Chittampalli
17% offAvailable
Rajbhasha Hindi Aur Asmitabodh
- Author Name:
Umesh Chaturvedi
-
Book Type:

- Description:
इस समय भाषा को लेकर बड़ा कोलाहल है। इसकी बड़ी वजह राजनीतिक पहचान की कामना में निहित जटिल संरचना है। जब-जब सत्ता का हिस्सा बंटने-बंटाने की गतिविधियां तेज होती हैं वे सारे तत्त्व खोजकर खड़े किए जाते हैं, जिनसे ‘अपने पक्ष’ का संघर्ष तेज हो सके। जैसे हिंदी को यों तो उर्दू के साथ मौसी की तरह कहते लोकप्रिय मंचों के मुहावरेकार तालियां लूटते हैं, लेकिन राजनीतिक लूट के वक्त यही वर्ग विशेष की पहचान निरूपित होने लगती है। चूंकि भाषा, मातृ भाषा, राष्ट्र भाषा जैसे प्रश्न भारत के संदर्भ में बहुत संवेदनशील रहे हैं, इसलिए हर कोई अपने अपने हिसाब से इन्हें सुलझाने का दावा करता है। क्षेत्रीय अस्मिताएं, स्थानीय राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं, अखिल भारतीय सांस्कृतिक स्वरूप, प्रशासनिक ताना बाना तथा इतिहास की छायाएं, सब मिलकर कभी कभी कारुणिक स्थिति बना देते हैं। ऐसे माहौल में जबकि राजा शिवप्रसाद और भारतेंदु से लेकर गांधी, लोहिया तक वैचारिक रूप से हमारे पास मौजूद हैं, फिलहाल कई तरह के वर्ग भाषा को लेकर सक्रिय हैं। एक वे हैं जो लुप्त होती भाषाओं के साथ उनकी सामाजिकी पर गहन शोध चिंतन कर रहे हैं। कुछ हैं जो ऊंची-ऊंची सभा-गोष्ठियों, मेलों, मंचों से शौर्यपूर्वक अपने पक्ष रेखांकित करते रहते हैं। कुछ वे हैं,जो समय-समय पर उठने वाले प्रश्नों को संबोधित कर उनकी जटिलताओं से आमजन को परिचित कराने की कोशिश करते हैं। उमेश चतुर्वेदी ने यह तीसरा रास्ता उचित ही चुना है। वे समय-समय पर हिंदी से जुड़ी ताजा हलचल का सत्य तलाशने की कोशिश करते हैं। इस तलाश में बड़ी स्थितियों के कारकों का परीक्षण हो जाता है और आम पाठक तक उलझी हुई रस्सी का सिरा भी खुल जाता है। जैसा कि सिद्ध है,आंदोलित कर देने वाली शब्दसेवा, आंदोलनकारी मुद्रा से हमेशा बेहतर होती है। उमेश चतुर्वेदी के हिंदी भाषा संबंधी आलेखों का यह संग्रह न सिर्फ इस उद्देश्य की पूर्ति करेगा, बल्कि उन सबको भी गहरा संतोष देगा जो आंदोलनकारी मुद्रा में नहीं, धरातल की सकर्मक क्रियाओं में आस्था रखते हैं। -यशवंत व्यास
Rajbhasha Hindi Aur Asmitabodh
Umesh Chaturvedi
18% offAvailable
Kannada Varnamale
- Author Name:
Anupama K Benachinamardi
-
Book Type:

- Description:
This book is tailored for individuals with an interest in mastering the Kannada alphabet. It elucidates the pronunciation of each Kannada letter using English phonetics. Moreover, the book incorporates sensory words that captivate children's interest. Another distinctive aspect of this book is its presentation of vowels and consonants within the context of natural phenomena. Our aim is for children to forge a deeper connection with nature through this book.
Kannada Varnamale
Anupama K Benachinamardi
17% offAvailable
Rasraaj Virodh
- Author Name:
Rameshraaj
-
Book Type:

- Description:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ‘काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था’ नामक निबन्ध में कहते हैं - ‘‘लोक में फैली दुःख की छाया को हटाने में ब्रह्म की आनंद-कला जो शक्तिमय रूप धारण करती है, उसकी भीषणता में भी अद्भुत मनोहरता, कटुता में भी अपूर्व मधुरता, प्रचण्डता में भी गहरी आद्रता साथ लगी रहती है---यदि किसी ओर उन्मुख ज्वलंत रोष है तो दूसरी ओर करुण दृष्टि फैली दिखायी पड़ती है। यदि किसी ओर ध्वंस और हाहाकार है तो और सब ओर उसका सहगामी रक्षा और कल्याण है।’’ आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबंध ‘काव्य में लोकमंगल की साधनावस्था’ के उपरोक्त कथन के आधार पर यह तथ्य, सत्य हो जाते हैं कि काव्य को रसनीय मात्र वे भाव ही नहीं बनाते हैं, जो मधुर और कोमल होते हैं। ध्वंस और अत्याचार के वातावरण में प्रतिकार का जो स्वर मुखर होता है, उसकी गति करुणा से उत्पन्न होकर रक्षा और कल्याण की ओर जाती है, जिसके भीतर प्राणी की हर क्रिया, प्रतिक्रिया या अनुक्रिया अधर्म के प्रति असहमति की ऊर्जा बनकर आक्रोश का रूप धारण करती है। आहत मन के भीतर जब ‘आक्रोश’ स्थायित्व ग्रहण करता है तो इस स्थायी भाव का अनुभावन ‘विरोध’ के रूप में सामने आता है। ‘विरोध’ को एक नये रस के रूप में प्रस्तुत करना माना एक नये अनुभव से गुजरना है। लेकिन यह कार्य अटपटा या अतार्किक इसलिए नहीं है क्योंकि ‘‘केवल परम्परागत स्थायी भाव ही रसत्व को प्राप्त हो सकते हों, ऐसी बात नहीं है, तथाकथित संचारी भी रसत्व को प्राप्त हो सकते हैं। रुद्रट, उद्भट, आनंदवर्धन आदि अनेक आचार्यों ने इस बात को स्वीकार किया था। आचार्य भोज ने एक और कदम आगे बढ़ाया और कहा कि उनचास भावों के अतिरिक्त भी जो कुछ रसनीय है या बनने की सामर्थ्य रखता है, उसे रस कहा जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने रसों की संख्या का विस्तार भी किया।’’ [रस-सिद्धांत , डा.ऋषि कुमार चतुर्वेदी, पृष्ठ 119-120] अस्तु! नये काव्यरस ‘विरोध’ का रस-रूप वर्तमान यथार्थोंन्मुखी काव्य में अनेक रूप व प्रकारों में दृष्टिगोचर होता है।
Rasraaj Virodh
Rameshraaj
15% offAvailable
Ajneya Ke Samajik-Sanskritik Sarokar
- Author Name:
Dr. Krishna Dutt Paliwal
-
Book Type:

- Description:
सप्रसिद्ध आलोचक प्रो. कृष्णदत्त पालीवाल की नई पुस्तक के आलोचनात्मक निबंधों में अज्ञेय के रचनाकर्म को लेकर हिंदी आलोचना में हुई तमाम साहित्यिक, गैर-साहित्यिक बहसों और साहित्य की, राजनीति की चर्चा करते हुए उस पर तर्कसंगत प्रश्न उठाए गए हैं। अज्ञेय के साहित्यिक-सांस्कृतिक अवदान को उद्घाटित करते हुए स्थापित किया गया है कि अज्ञेय के सृजन-चिंतन से किस तरह हिंदी आलोचना में बहसों की शुरुआत हुई तथा समकालीन साहित्य-संवेदना और साहित्यिक परंपरा के अध्ययन-मूल्यांकन की नई आलोचना-संस्कृति का विकास हुआ। अज्ञेय के निबंधों, भूमिकाओं, स्मरण-लेखों, यात्रा-साहित्य तथा उनके द्वारा आयोजित व्याख्यानमालाओं और यात्रा शिविरों में लेखकों, विद्वानों, कला-मर्मज्ञों के व्याख्यानों का अंतर्पाठ करते हुए इस पुस्तक में दिखाया गया है कि किस प्रकार उन्होंने भारतीय समाज, हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति को औपनिवेशिक आधुनिकता से मुक्त कराने और भारतीय आधुनिकता को दिशा प्रदान करने का प्रयास किया। अज्ञेय-साहित्य के अध्येताओं के लिए एक पठनीय पुस्तक।
Ajneya Ke Samajik-Sanskritik Sarokar
Dr. Krishna Dutt Paliwal
20% offAvailable
Rangmanch Ka Soundryashastra
- Author Name:
Devendra Raj Ankur
-
Book Type:

- Description:
साहित्य, चित्रकला, स्थापत्य और यहाँ तक कि संगीत और नृत्य के सन्दर्भ में भी सौन्दर्यशास्त्र की अवधारणा धीरे-धीरे विकसित होती गई है। जहाँ तक नाटक और रंगमंच का प्रश्न है, इस विषय में अभी तक किसी गम्भीर चर्चा अथवा विमर्श की शुरुआत नहीं हुई है। इसके कई कारण हो सकते हैं। एक तो यही कि रंगमंच को प्रायः दूसरे कला माध्यमों का मिश्रित रूप मानने के कारण उनके जो सौन्दर्यशास्त्रीय प्रतिमान रहे हैं, उन्हीं को कमोबेश रंगमंच पर भी आरोपित किया जाता रहा है। दूसरे, पिछले डेढ़ सौ वर्षों में आधुनिक भारतीय रंगमंच अपनी एक निजी शैली की खोज में इतना व्यस्त रहा कि शायद इस तरफ़ किसी का ध्यान ही नहीं गया। सवाल है कि नाटक और रंगमंच में लिखित आलेख और उसकी प्रस्तुति का क्या कोई अलग-अलग सौन्दर्यशास्त्र होना चाहिए अथवा दोनों के लिए एक शास्त्र से ही काम चल सकता है ? इन सारे कारणों से अलग और नाटक व उसकी प्रस्तुति से भी पहले रंगमंच के सौन्दर्यशास्त्र पर एक संवाद आरम्भ करने की एक कोशिश है यह पुस्तक।
Rangmanch Ka Soundryashastra
Devendra Raj Ankur
20% offAvailable
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
- Author Name:
Azra Naqvi
-
Book Type:

- Description:
उर्दू कई तहज़ीबों और भाषाओं के मेल से बनी है और शायरी की रिवायत (काव्य-परम्परा) में फ़ारसी, अरबी, संस्कृत और तुर्की के रंग शामिल हैं। ये किताब एक शब्दकोश न हो कर उर्दू शायरी में आने वाले विभिन्न विषयों पर ख़ूबसूरत शेरों के संकलन पर आधारित है। शायरी की दुनिया की सैर कराते हुए ये किताब आपको नए-नए शब्दों और उनके उपयोग की बारीकियों के बारे में बताती है और शायरी में इस्तेमाल होने वाले अहम लफ़्ज़ों, तरकीबों और तल्मीहात के मानी और उनके विभिन्न सन्दर्भों को विस्तार से समझाया गया है। ये किताब शायराना लफ़्ज़ों के कलात्मक इस्तेमाल और उनके गहरे अर्थों को समझने में मददगार होगी, और उर्दू शायरी के अथाह ख़ज़ाने का भरपूर लुत्फ़ उठाने का मौक़ा देगी।
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
Azra Naqvi
20% offAvailable
Sun Mere Bandhu re
- Author Name:
Narayan Singh
-
Book Type:

- Description:
'सुन मेरे बंधु रे' नारायण सिंह की नव्यतम कृति है। यहाँ उपस्थित अलग-अलग आलेख आपस में गुम्फित हैं, एक-दूसरे के साथ आबद्ध हैं। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है; क्योंकि लेखक किसी कहानी-उपन्यास में उपस्थित घटना, रंग-ढंग और दृष्टि को महज आलोचकीय दृष्टि से नहीं देख रहा, बल्कि तत्कालीन समय में उनकी उपस्थिति को, कहानी के पीछे मौजूद जीवन को भी देखना-दिखाना चाहता है। ये आलेख किसी कहानी, उपन्यास के ज़रिये शुरू तो होते हैं लेकिन उक्त कहानी उपन्यास या सिनेमा से बाहर आकर हमारी दृष्टि का आयतन विस्तारित करते मिलते हैं। एक दृष्टि सम्पन्न कथाकार अपने पूर्वज कथाकारों, सृजनशील व्यक्तित्वों के जीवन, उनके अन्तर्विरोध और मनुष्य के दुख को, सामाजिक विभेदकारी दृष्टि की जाँच-पड़ताल करते हुए उन मूल्यों को सामने लाने की कोशिश करता है जिन वजहों ने रचना को रचना बनाये रखा है। नारायण सिंह स्वयं एक कथाकार-उपन्यासकार हैं लेकिन यहाँ कथाकार अपने कथा प्रतिमान के आलोक में किसी रचना की व्याख्या नहीं करता, बल्कि रचना की केन्द्रीय समस्या को उठाते हुए सिंहावलोकन और विहंगावलोकन दोनों आयामों का भरपूर इस्तेमाल करता है। यह सिफत ही इन आलेखों को परंपरागत समीक्षकीय पद्धति से इतर पहचान लिये पाठकों से मुखातिब है। चेखव की कहानी के ज़रिये प्रेम को पुनर्परिभाषित करती बात हो या 'सुजाता' में उपस्थित अकुंठ प्रेम गीत में उपस्थित पुरुष बोध को सामने लाती आलोचकीय निगाह हो; हर जगह लेखक कलात्मकता, बुनावट और ध्वनि सौंदर्य के पीछे दबे जा रहे या दबाये जा रहे मनुष्य की पीड़ा से सहानुभूति प्रकट करता मिलता है। इसीलिए यहाँ उपस्थित रचनाओं का पाठ नये सिरे से पढ़े जाने की माँग करता मिलता है। —आशीष सिंह
Sun Mere Bandhu re
Narayan Singh
18% offAvailable
Saanchi Danam
- Author Name:
Motilal Alamchandra
-
Book Type:

- Description:
Book
Saanchi Danam
Motilal Alamchandra
20% offAvailable
Dakshina
- Author Name:
Sirpi Balasubramaniam
-
Book Type:

- Description:
A literary digest of South Indian Languages.
Dakshina
Sirpi Balasubramaniam
17% offAvailable
Samkalin Laghukatha ka Samiksha Saundharya
- Author Name:
Jitendra Jeetu
-
Book Type:

- Description:
लघुकथा लेखन को आसान सी विधा मानकर बहुत लोग इस विधा के लेखन की ओर मुड़े और जाने–अनजाने अपनी अधकचरी बौद्धिकता और अज्ञान के बूते इस विधा का अहित करते चले गए। इन बहुत से लोगों में वे भी थे जो खालिस पाठक थे और लेखक बनना चाहते थे। जो कुछ बनना चाहते हैं उन्हें कोई नहीं रोक सकता। वे बन गए। वे बिना पढ़े लेखक बन गए। उन्होंने बस उसी तरह की लघुकथाएं पढ़ी थीं और वे उसी तरह के लघुकथा लेखक बन गए। यह विराट स्तर पर धर्म परिवर्तन से भी अधिक संगीन मामला था जिसने साहित्य को बहुत बड़े पैमाने पर चोट पहुंचाई लेकिन इसकी कोई चर्चा नहीं हुई। इस पुस्तक में लघु कथा के सौन्दर्यशास्त्र पर चर्चा की गई है और इस विधा की महत्ता को स्थापित करने का प्रयास ही प्रधान है।
Samkalin Laghukatha ka Samiksha Saundharya
Jitendra Jeetu
18% offAvailable
Uth Naari Ab To Jaag Jaag
- Author Name:
Neeta Awasthi
-
Book Type:

- Description:
प्रस्तुत संग्रह में नीता जी की अनुक्रमानुसार दोहा छंद, सर्प कुंडली राज छंद, मुक्तक विन्यास, पद शैली,और नव कुण्डलिया राज छंद में लिखी गई इन तेवरियों में हर सामाजिक विकृति के के प्रति तीखी असहमति और क्षुब्धता है और तीखापन है। समाज में जहां भी क्रंदन है, अभाव है, व्यवस्था का दिया हुआ घाव है। वहां एक करुणा के भाव के साथ ये तेवरियां वंचित शोषित उत्पीड़ित के आंसू पोंछने को गहन संवेदना के साथ दिखलाई देती हैं।
Uth Naari Ab To Jaag Jaag
Neeta Awasthi
15% offAvailable
Bhatkav ke 67 Varsh
- Author Name:
Satish Chandra Mittal
-
Book Type:

- Description:
प्रस्तुत ग्रंथ ‘भटकाव के 67 वर्ष : कुछ मुद्दे’ भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् से 2014 ई. तक की कुछ प्रमुख घटनाओं तथा राष्ट्रीय समस्याओं का ऐतिहासिक संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक विवेचन है। इसमें भारतीय नेतृत्व तथा उसके विभिन्न क्रियाकलापों का वर्णन तथा उनकी सोच तथा उनके व्यावहारिक पक्ष पर प्रकाश डाला गया है। ग्रंथ में कुछ प्रमुख मुद्दों की आलोचनात्मक समीक्षा की गई है। इसमें मजहब के आधार पर निर्मित भारत विभाजन से अपनी असीम पीड़ा तथा उससे उत्पन्न अनेक समस्याओं, भारतीय संस्कृति तथा अतीत से कटकर पाश्चात्य मॉडल पर आपा-धापा में बने भारतीय संविधान, भारतीय संविधान सभा में उस पर विशद विवाद तथा चर्चा, पाश्चात्य दृष्टि पर बनी शिक्षा-नीति, देशीय भाषा के स्थान पर अंग्रेजी भाषा का वर्चस्व तथा पाठ्य पुस्तकों में विकृतियाँ, कश्मीर में की गई असभ्य भूलों के साथ, भारत-पाकिस्तान के चार प्रमुख युद्धों में भारतीय सेनाओं की शानदार विजयों के साथ, चीन के साथ युद्ध में शर्मनाक हार तथा भारतीय राजनीति के प्रमुख सूत्रों में भारतीय मुसलमानों को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने की बजाय, चुनाव की वोट की राजनीति से वशीभूत हो, मुसलिम तुष्टीकरण की नीति तथा उसके विभिन्न स्वरूपों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। निश्चय ही यह ग्रंथ गत 67 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई हलचलों तथा भारत के राजनैतिक नेतृत्व के भटकाव, अलगाव, परस्पर टकराव तथा ठहराव की अनिर्णायक स्थिति की अवस्था, अवलोकन करने में सहायक होगा।
Bhatkav ke 67 Varsh
Satish Chandra Mittal
20% offAvailable
The Language & Linguistics category explores how languages work—grammar, phonetics, semantics, dialects, etymology, translation, sociolinguistics, and the evolution of languages across India and the world. This shelf serves students, teachers, researchers, translators, writers, and anyone curious about how languages shape human thought and culture.
What readers will find here:
-
Grammar and usage guides for Indian languages
-
Dictionaries, thesauruses & vocabulary builders
-
Comparative linguistics and translation studies
-
Books on dialects, folklore languages, and endangered languages
-
Research in phonetics, syntax, semantics & pragmatics
-
Studies on Indian multilingualism and language politics
-
Writing systems, scripts, etymology, and language history
-
Linguistic textbooks for BA, MA, NET, SET & other academic exams
What types of books are included in language and linguistics?
This category includes grammar guides, dictionaries, phonetics, semantics, translation studies, dialect research, and books on the evolution and structure of languages.
Who should read language and linguistics books?
Students, teachers, translators, writers, researchers, and anyone interested in how languages function, change, and influence society.
Are these books useful for competitive exams?
Yes. Linguistics books support BA/MA programs, UGC NET, SET, TET, translation exams, and language-focused entrance tests.
Why are linguistics books important in India?
India’s linguistic diversity makes linguistics essential for understanding dialects, cultural identity, multilingual education, translation, and language policy.