Rangbhoomi
(0)
₹
399
₹ 319.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘सूरदास’ एक चरित्र नहीं, नायक है और इसी नायकत्व की सृष्टि के लिए सूरदास और ज्ञानसेवक ने उपन्यास में अपनी-अपनी भूमिकाएँ अदा की हैं। ‘सूरदास’ चौतरफ़ा भौतिक दृष्टि से पराजित होने के बाद भी सदा सुखी रहता है। उसके मन में कभी भी मैल नहीं आता। जीत-हार में भी, इस समान स्थिति में कोई अन्तर नहीं आता। उसने नीति का मार्ग कभी भी नहीं छोड़ा। अपने प्रतिद्वन्द्वी पर कभी भी धोखे से वार नहीं किया। इतना दीन-हीन होते हुए भी उसमें क्षमाशीलता और उदारता सदा बनी रहती है। स्पष्ट लगता है कि प्रेमचन्द अपने समय के संग्राम के लिए शलाका पुरुष की सृष्टि कर रहे हैं जो लोगों के लिए एक आदर्श नायक बन सकेगा। यह भी स्पष्ट है कि प्रेमचन्द तत्कालीन परिस्थिति में अपने देश की जनता के जीवन की एक ऐसी व्याख्या प्रस्तुत कर रहे थे जो देश को आज़ाद करने का सही मार्ग था। वस्तुत: देश की आज़ादी के लिए उस समय चल रहे क्रान्तिकारी मार्ग के स्थान पर देश को सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर ले जाना चाहते थे। यही कारण है कि उन्होंने ‘रंगभूमि' को यह महाकाव्यात्मक रूप प्रदान किया। यही कारण है कि सूरदास किसान दृष्टि का प्रतिनिधि होने के बावजूद एक चरित्र नहीं वरन् प्रेमचन्द द्वारा सृजित उनकी आदर्शवादी दृष्टि का महानायक है। कथावाचन से लेकर चरित्रांकन तक रंगभूमि का सृजन जैसे एक लेखक का आत्मसंवाद है। प्रेमचन्द ने बड़ी महारत के साथ गांधी जी के सत्याग्रह और अहिंसा सम्बन्ध सोच को औपचारिक रूप देकर सचमुच एक महान सृजन किया है। ऐसा वही कथाकार कर सकता है जिसके प्राणों में उसके देश की धरती और आदर्श समाए हुए हों।
Read moreAbout the Book
‘सूरदास’ एक चरित्र नहीं, नायक है और इसी नायकत्व की सृष्टि के लिए सूरदास और ज्ञानसेवक ने उपन्यास में अपनी-अपनी भूमिकाएँ अदा की हैं। ‘सूरदास’ चौतरफ़ा भौतिक दृष्टि से पराजित होने के बाद भी सदा सुखी रहता है। उसके मन में कभी भी मैल नहीं आता। जीत-हार में भी, इस समान स्थिति में कोई अन्तर नहीं आता। उसने नीति का मार्ग कभी भी नहीं छोड़ा। अपने प्रतिद्वन्द्वी पर कभी भी धोखे से वार नहीं किया। इतना दीन-हीन होते हुए भी उसमें क्षमाशीलता और उदारता सदा बनी रहती है।
स्पष्ट लगता है कि प्रेमचन्द अपने समय के संग्राम के लिए शलाका पुरुष की सृष्टि कर रहे हैं जो लोगों के लिए एक आदर्श नायक बन सकेगा।
यह भी स्पष्ट है कि प्रेमचन्द तत्कालीन परिस्थिति में अपने देश की जनता के जीवन की एक ऐसी व्याख्या प्रस्तुत कर रहे थे जो देश को आज़ाद करने का सही मार्ग था। वस्तुत: देश की आज़ादी के लिए उस समय चल रहे क्रान्तिकारी मार्ग के स्थान पर देश को सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर ले जाना चाहते थे। यही कारण है कि उन्होंने ‘रंगभूमि' को यह महाकाव्यात्मक रूप प्रदान किया। यही कारण है कि सूरदास किसान दृष्टि का प्रतिनिधि होने के बावजूद एक चरित्र नहीं वरन् प्रेमचन्द द्वारा सृजित उनकी आदर्शवादी दृष्टि का महानायक है। कथावाचन से लेकर चरित्रांकन तक रंगभूमि का सृजन जैसे एक लेखक का आत्मसंवाद है। प्रेमचन्द ने बड़ी महारत के साथ गांधी जी के सत्याग्रह और अहिंसा सम्बन्ध सोच को औपचारिक रूप देकर सचमुच एक महान सृजन किया है। ऐसा वही कथाकार कर सकता है जिसके प्राणों में उसके देश की धरती और आदर्श समाए हुए हों।
Book Details
-
ISBN9788192434650
-
Pages448
-
Avg Reading Time15 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Arohan
- Author Name:
Sadhna Shankar
- Book Type:

-
Description:
कल्पना कीजिए कि पृथ्वी को छोड़कर मानव जाति किसी और ग्रह पर जा बसे। तकनीक इतनी विकसित हो जाए कि प्रजनन तथा उत्तरजीविता के लिए स्त्री और पुरुष एक-दूसरे पर निर्भर न हों, दोनों के दो अलग, एक-दूसरे से अनजान लोक बस जाएँ। जब जरूरत हो क्लोनिंग से नए प्राणी का सृजन कर लिए जाएँ और जब देह का कोई अंग असमर्थ लगे उसे एकदम नए अंग से और बुढ़ापे को युवावस्था से बदल लिया जाए!
इस उपन्यास में इस कल्पना को हमारी मौजूदा दुनिया के समानान्तर तमाम सम्भव उपादानों के साथ रचा गया है। विज्ञान कथाओं को जो पाठक अविश्वसनीय कल्पनाओं की उड़ान मानते हैं, और दूसरे ग्रहों से आनेवाले मनुष्य-विरोधी प्राणियों, एलियनों की विचित्र शक्लों से ऊब चुके हैं, उनके लिए यह उपन्यास एक ताजा हवा की तरह है।
उपन्यास की ताकत है कल्पना का सांगोपांग और तर्कसम्मत निरूपण और उसके भीतर पैठकर कहानी को इस तरह कहना कि जब तक आप उसमें रहते हैं, अपनी वर्तमान दुनिया से बरबस परे चले जाते हैं। एक वैश्विक दार्शनिक गल्प-यात्रा पर एक प्रति-सृष्टि में जहाँ वह सब कुछ है जिसे मनुष्य अपनी प्राकृतिक सीमाओं को लाँघकर, अपनी उत्तरजीविता की अन्तहीन आशा में रच सकता है।
Main Aur Main
- Author Name:
Mridula Garg
- Book Type:

-
Description:
रचनात्मकता का पल्लवन बेल की तरह आधार चाहता है, भले ही कैसा भी हो बस आकाश की ओर अवलम्बित, जिसके सहारे ऊँचाइयाँ पाई जा सकें। ‘मैं और मैं’ इन्हीं भटकाते आधारों का अन्तर्द्वन्द्व है। मृदुला गर्ग का यह उपन्यास अपने भीतर के जगत को सच की तपिश से बचाने की प्रवृत्ति को भी रेखांकित करता है, क्योंकि सत्य से साक्षात्कार करें तो भीतर अपराधबोध पनपता है और झूठ में शरण लेने की लालसा...।
‘मैं और मैं’ कहानी है मृदुला गर्ग के दो कलात्मक और सशक्त पात्रों—कौशल कुमार और माधवी—के बनते–टूटते सामाजिक और नैतिक आग्रहों की। लेखिका के अनुसार, “क्या था माधवी और उसके बीच?” उसके नहीं, माधवी और उसके पति के बीच? कौशल जैसे प्याले में गिरी मक्खी हो। उसे देखकर वे चीख़े नहीं थे, यह उनकी शालीनता थी। मक्खी पड़ा प्याला अलग हटाकर अपने–अपने प्यालों से चाय पीते रहे थे। लग रहा था वे अलग–अलग नहीं, एक ही प्याले से चाय पी रहे हैं और कौशल छटपटाकर बाहर निकल गया है। भिनभिन करके पूरी कोशिश कर रहा है कि उनके सामीप्य में अवरोध पैदा कर दे, पर उसकी भिनभिनाहट उनका मनोरंजन कर रही है, सामीप्य का गठबन्धन और मज़बूत कर रही है। जुगुप्सा, वितृष्णा, हिंसा कुछ भी तो नहीं था, जो उसके अस्तित्व–बोध को बनाए रखता।
एक ओर कौशल का अपने अतीत के लिए समाज को दोषी ठहराना और इस तर्क की बिना पर समाज की भरपूर अवहेलना, वहीं माधवी का समाज की खौफ़नाक होती शक्ल में अपनी चुप्पी को ज़िम्मेदार मानना। बाद में कौशल की नज़दीकी से वह स्वीकारती है कि सृजन के लिए सब कुछ जायज है, मानवीय रिश्तों का बेहिस्स इस्तेमाल भी...।
Dear Moon
- Author Name:
Soumi Dutta
- Rating:
- Book Type:

- Description: The story, written in an epistolary style, talks about attempts the narrator makes in order to erase the memories of her one true love, from her heart. But can such love be unremembered? Read on to find out.
Safed Ghora Kala Sawar
- Author Name:
Hrideyesh
- Book Type:

-
Description:
हृदयेश ने अपने इस उपन्यास ‘सफेद घोड़ा काला सवार’ में भारतीय न्याय–व्यवस्था की शव–परीक्षा की है। यह उपन्यास इस व्यवस्था के सारे अन्तर्विरोधों तथा छद्मों को केवल उजागर ही नहीं करता, सामान्य जन के लिए प्रचलित न्याय–प्रणाली की निरर्थकता पर तीव्र टिप्पणी भी करता है। उपन्यास का फलक इतना व्यापक है कि इसमें संगुम्फित छोटी–छोटी कहानियाँ इसे न्याय के नाम पर रचे गए चक्रव्यूह का वृहद् मार्मिक दस्तावेज़ बनाती हैं।
उपन्यास में विषयगत नवीनता है, शिल्पगत ताज़गी है और है सार्थक दृष्टि का कलात्मक उपयोग। वस्तुत: यह उपन्यास हिन्दी के उन कुछ श्रेष्ठ उपन्यासों में से है जो स्वतंत्रता के बाद के वर्षों में यथार्थवादी दृष्टि से लिखे गए हैं और जो पाठकों को समसामयिक परुष यथार्थ से परिचित कराने के साथ–साथ उनको बहुत कुछ सोचने को भी मजबूर करते हैं।
Ve Aankhen
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

-
Description:
इस संसार में कोई भी ऐसा नहीं है जो पूरे विश्वास के साथ कह सके, कि वह सुखी है। जो ऐसा कहता है, वह या तो जान-बूझकर झूठ बोलता है या फिर उसे समझ ही नहीं है कि सुख क्या होता है।
इस कथा-पुस्तक की केन्द्रीय विषयवस्तु यही है। अविनाश दा की कविताओं से शब्द की महत्ता का पाठ पढ़कर कथानायक जीवन की कथा कहने बैठता है जिसमें उसके पास-पड़ोस से लेकर दिल्ली-मुम्बई तक फैले पात्रों के दु:ख-कर्म शामिल हैं। इतिहास जिस तरह आगे बढ़ता है, आदमी का जीवन भी छोटे रूप में उसी तरह ऊपर-नीचे होता हुआ बढ़ता रहता है। उसमें तरह-तरह के बदलाव आते हैं, कई बार तो ऐसे कि कुछ अन्तराल के बाद उनसे मिलो तो जैसे पहचानना ही मुश्किल हो जाता है।
अलग-अलग कथा-सूत्रों के माध्यम से बिमल मित्र यहाँ जीवन और साहित्य के रिश्ते पर, मनुष्य की विचित्र नियति पर, समाज के मुखौटों पर अलग-अलग कोणों से दृष्टिपात करते हैं। अविनाश दा, सत्य सुन्दर और मिसेज राय, अशेष दत्त, मुकुल राय जैसे पात्रों की इन कहानियों में जीवन के कई चित्र ऐसे हैं जो इस संसार के प्रति प्रेम भी जगाते हैं, मोह भी और वितृष्णा भी।
Krishnavtar : Vol. 1 : Bansi Ki Dhun
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

-
Description:
परम पुरुष श्रीकृष्ण की जीवन-लीला पर देश की किसी भी भाषा में आधुनिक उपन्यास लिखने का शायद यह पहला प्रयास है। पौराणिक परम्पराओं, विविध भाषाओं के काव्य-ग्रन्थों और लोक-साहित्य ने श्रीकृष्ण का जो बहुविध व्यक्तित्व और रूप हमारे सामने प्रस्तुत कर रखा है, वह अनन्य है, लेकिन उसे उपन्यास की विधा में बाँध लेने का श्रेय गुजराती के प्रमुख कथाकार कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी को ही प्राप्त है।
‘बंसी की धुन’ श्रीकृष्ण-चरित्र के अनेक खंडों में सम्पूर्ण होनेवाले उपन्यास ‘कृष्णावतार’ का पहला खंड है, जिसमें श्रीकृष्ण के प्रारम्भिक जीवन की कथा कही गई है। अत्यन्त सरल और सरस भाषा-शैली में लिखे गए इस उपन्यास की विशेषता यह है कि श्रीमद्भगवत की अलौकिक घटनाओं को बीसवीं शताब्दी के परिप्रेक्ष्य में अत्यन्त विश्वासोत्पादक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि भक्त-हृदय और वैज्ञानिक दृष्टिसम्पन्न दोनों श्रेणियों के पाठकों में यह समान रूप से लोकप्रिय हुआ है। इसका प्रत्येक खंड अपने में सम्पूर्ण और पठनीय है।
Godan
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

-
Description:
‘गोदान’ का नायक होरी है।
ज़मींदार और महाजन में भेद करते हुए वह बताता है—“ज़मींदार तो एक ही है; मगर महाजन तीन-तीन हैं, सहुआइन अलग, मँगरू अलग और दातादीन पंडित अलग।” पाँच साल हुए होरी ने मँगरू साह से साठ रुपए उधार लिए थे बैल लाने के लिए। उसमें से वह साठ दे चुका था; परन्तु वह साठ रुपए अब भी बने हुए थे। दातादीन पंडित से उसने तीस रुपए लिए थे आलू बोने के लिए। दुर्भाग्य से आलू चोर खोद ले गए परन्तु उन तीस रुपयों के तीन सौ हो गए। दुलारी विधवा सहुआइन नोन-तेल-तमाखू की दुकान करती थी; इकन्नी रुपया का ब्याज लेती थीं। इनके भी सौ रुपए हो गए थे। फ़सल होते ही माल सब महाजनों को तौल देना पड़ता और ब्याज फिर बढ़ने लगता। तमाशा यह कि एक समय होरी ने भी महाजनी की थी जिससे लोग समझते थे कि उसके पास अब भी दबा हुआ रुपया है।...
—डॉ. रामविलास शर्मा
Gandi Baat
- Author Name:
Kshitiz Roy
- Book Type:

-
Description:
एक लड़का था—कुछ लोफर, लफुआ, दीवाना-सा! जिसका दिल था नए रैपर में वही पुराना—शहीदाना। शहर पटना पूरा अपना लगे उसे!
लड़की थी अलबेली-सी, सोचने का कारख़ाना, हिम्मत की एनीटाइम लोडेड गन जैसी, पुरानी जीन्स और एकदम नया गाना!
दिल्ली शहर में मौसम था अन्ना आन्दोलन का,
चुनाव के घुमड़ रहे थे बादल।
डेजी आई पढ़ने एलएसआर में। बन गई ड्रमर।
गोल्डन आया डेजी के पीछे बावला। बन गया ड्राइवर।
दोनों थे ख़ालिस ग़ैर-राजनीतिक युवा।
पढ़िए उन्हीं के घोर राजनीतिक रोमांस की दिलचस्प दास्ताँ, जिसमें उनकी निजता में शहर, समाज और परिस्थितियाँ दे रही हैं बराबरी से दख़ल...जहाँ कुछ भी नहीं है निश्चित और अनिश्चित ही है उनका
सबसे बड़ा रोमांस...
जिसे कहते हैं सब गंदी बात,
क्या होती है वाक़ई वह
गंदी-सी कोई बात!
Siyasat
- Author Name:
Shivani Sibbal
- Book Type:

-
Description:
निजी महत्त्वाकांक्षाओं, पारिवारिक सीमाओं और सामाजिक बदलावों की दिलचस्प कहानी!
एक ही घर में एक ही स्त्री के पाले अहान सिकन्द और राजेश कुमार बचपन के मित्र हैं लेकिन दोनों की दुनिया बहुत अलग है। अहान अमीर परिवार का इकलौता वारिस है जबकि राजेश उसी परिवार के ड्राइवर का लड़का। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, बचपन की उनकी दोस्ती बदलने लगती है। आहान से यह आशा की जाती है कि वह उत्तराधिकार में मिले विरासत को आगामी पीढ़ी के लिए बचाकर रखे जबकि वहीं राजेश से दुनिया की यही आशा है कि वह अधिक से अधिक अपने पिता की तरह घरेलू नौकर बनकर न जिये। लेकिन उसकी योजनाएँ बड़ी हैं।
सियासत एक नई प्रतिभाशाली कलम के आगमन का एलान है जो नई दिल्ली के व्यावसायिक एवं राजनीतिक परिवारों की गोपन दुनिया का परीक्षण करती है।
Panchwan Pahar
- Author Name:
Gurdayal Singh
- Book Type:

-
Description:
सुविख्यात पंजाबी कथाकार गुरदयाल सिंह का यह महत्त्वपूर्ण उपन्यास एक विधवा स्त्री के अनथक जीवन-संघर्ष को यथार्थवादी फलक पर उकेरता है। भारतीय समाज में सामन्ती संस्कारों का सबसे बड़ा शिकार नारी ही रही है। उसकी कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं, कोई पहचान नहीं, और अगर वह विधवा या पुनर्विवाहिता है तो न उसके जीवन में मानवीय भावनाओं का कोई स्थान है और न प्राणिक संवेदनाओं का। समाज में वह सिर्फ़ पाषाण-प्रतिमा की तरह जीवित रह सकती है अथवा ‘देवी’ की तरह मात्र पूजनीय बने रहकर। यही कारण है कि जब तक हीरा देवी समाज के इस जड़ परम्परावादी चौखटे में जड़ी रही, तब तक तो वह 'देवी' थी, पर जैसे ही उसने उसे तोड़ा, वैसे ही ‘कुलटा’ और ‘कुलबोरनी’ हो गई। इसके बावजूद, हीरा एक अपराजेय नारी-चरित्र है, और लेखक ने उसे अपनी गहरी प्रगतिशील जीवन-दृष्टि और पैने इतिहास-बोध के सहारे रचा है। हीरा देवी के अतिरिक्त केसरी, मदन मोहन और सुरेन्द्र इस कथाकृति के दूसरे ऐसे जीवन्त चरित्र हैं, जो कि हीरा के संघर्ष में प्रेरक और सहायक की भूमिका निभाते हैं।
पंजाबी से इस उपन्यास का हिन्दी अनुवाद स्वयं लेखक ने किया है, इसलिए मूल कृति का समूचा साहित्यिक और सांस्कृतिक वैभव इसमें सहज सुरक्षित है।
Salaam Bombay Via Versova Dongri
- Author Name:
Sarang Upadhyay
- Book Type:

-
Description:
ग्यारह किस्सों के जरिए, प्रेम की शक्ति और विश्वास की डोर तक पहुँचने वाला यह उपन्यास ‘यूनिक’ है, मुम्बई के निम्न-मध्यवर्गीय जीवन का मिनिएचर बनाते हुए हिन्दी कथा-साहित्य में एक दुर्लभ और विरल पाठकीय अनुभव की सर्जना करता है, राघव और सायरा जैसे दो यादगार किरदारों के जरिए रंग और बदरंग के बीच भावनात्मकता का उदास उत्सव मनाता है और सपनों का ताना-बाना बुनता है। यह सब करते हुए सारंग उपाध्याय का उपन्यास ‘सलाम बॉम्बे व्हाया वर्सोवा डोंगरी’ मुम्बई की आत्मा को एक कड़क कथात्मक सलाम ठोंकता है, वह आत्मा जिसका नाम ‘जिजीविषा’ है। साहित्य की आत्मा का नाम भी दरअसल यही है।
—गीत चतुर्वेदी
Shubh Sanyog
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: ...आज बीस साल बाद कहाँ है वह जयसुन्दर बोस और कहाँ है वह वरुणा चौधरी? कहाँ है वह कमला बोस और कहाँ वह राधेश्याम अग्रवाल? अजय बोस और विजय बोस दो भाई भी आज न जाने कहाँ हैं? सुनने में आता है कि एक भाई अमेरिका में है और दूसरा जर्मनी में। एक-एक मेमसाहब से शादी कर दोनों इंडिया को भूल चुके हैं। शायद वे वहाँ सुख-शान्ति से घर-गृहस्थी कर रहे हैं। उनमें से किसी का पता भी याद नहीं है। लेकिन उस सारे इतिहास का साक्षी बना वह मकान आज भी खड़ा है। उस बारह मंज़िले मकान में न जाने कितने दफ़्तर हैं और उन दफ़्तरों में सैकड़ों कर्मचारी काम करते हैं। मकान मालिक को उस मकान से हर महीने लगभग छह लाख रुपए किराए मिलते हैं। —छह लाख रुपए? और वह भी हर महीने? —हाँ। हर महीने नहीं तो क्या हर साल? पूछा—उसका मालिक कौन है? मेरे मित्र ने कहा—वही बताने के लिए तो वह कहानी सुनाई। शायद इसी को संयोग कहते हैं। यह संयोग कभी शुभ होता है तो कभी अशुभ। लेकिन इस मामले में कहना पड़ेगा कि संयोग शुभ ही था। नहीं तो उतना बड़ा मकान और उससे उतनी आमदनी किसके भाग्य में होती है?
Nano Tales
- Author Name:
Various Authors
- Rating:
- Book Type:

- Description: This book contains 38 Nano tales by different authors depicting life, motivation and inspiration. This is the world’s first book to be published on Nano tales. Nano tale is a small story written in little words with a strong message. The figure of speech used by the writers is at its best. Irony, rhetoric, sarcasm, pun, and satire are some essential tools of a Nano tale. The words are limited, but the message is loud and clear.
Romeo Juliet Aur Andhera(LOK)
- Author Name:
Kunal Singh
- Book Type:

- Description: भाषा, जाति, धर्म, नस्ल और क्षेत्र को दरकिनार करके किया गया प्रेम एक ताजी, भव्य, सम्मोहक और रोशन दुनिया की कोंपल अपने भीतर रखता है, पर जब हम भीतर और बाहर रोशनी से भर रहे होते हैं तो ठीक हमारे पीछे अँधेरा अपने ज़ंग लगे नाख़ूनों में धार दे रहा होता है। रोशनी और अँधेरे के बीच का यह आदिम खेल सभ्यता के कथित विकास के साथ और भी बर्बर होता गया है। ‘रोमियो जूलियट और अँधेरा’ पढ़ते हुए हम जानते हैं कि हमारे कोमलतम और सपनीले दिनों में बर्बरता सबसे अधिक हमारी ताक में रहती है। यहाँ दो युवा दिलों की मुहब्बत पर तमाम हत्यारी साज़िशों की भुतहा छायाएँ गिर रही हैं। यहाँ भाषा, नस्ल और स्थानीय बनाम बाहरी के द्वन्द्व हैं जिनकी शतरंजी बिसात पर राजनीतिक गोटियाँ सेंकी जा रही हैं, जिनकी गिरफ़्त में आने के बाद पीड़ित लोग अपने ही जैसे दूसरे पीड़ितों के प्रति ज़हर से भर रहे हैं। यहीं, इसी जगह से उपन्यास में अँधेरा प्रवेश करता है। असम की राजनीति में जो ताक़तें और तत्व आज निर्णायक होकर राज कर रहे हैं, उन सबकी गहरी पदचापें इस उपन्यास में सुनी और देखी जा सकती हैं। और यह सब यहाँ एक ऐसी सम्पन्न भाषा में दर्ज हो रहा है जो स्वाद, रंग, गन्ध, ध्वनियाँ, मौसम, रोशनी और अँधेरा सब कुछ को साकार कर देती है। जिसमें आप किसी कली का चटकना या फूल का मुरझाना सुन और देख सकते हैं। जिसमें असम की धरती का ताप दर्ज हुआ है। पढ़ते हुए एक भीषण आह के साथ हम जानते हैं कि हर भाषा के अपने दुख, मातम और अँधेरे हुआ करते हैं।
Honi Anhoni
- Author Name:
Balwant Singh
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक में हिन्दी जगत के मूर्धन्य उपन्यासकार बलवन्त सिंह ने मानवीय मनोविज्ञान से युक्त आधुनिक परिवेश में रची-बसी कहानी प्रस्तुत किया है, जो युवा हृदय में हलचल पैदा करने में सक्षम है।
इस उपन्यास में आधुनिक मनोभूमि का विराट चित्र प्रस्तुत किया गया है। जनजीवन के सामाजिक यथार्थ की ऐसी विश्वसनीयता विरल है। इस रचना में संवेदना का सरल प्रवाह विद्यमान है, यह उपन्यास बेजोड़ ही नहीं क्लासिक है जिसे पाठक जब पढ़ना शुरू करेंगे तो अन्त तक पढ़ने को विवश हो जाएँगे।
Inked Dew Drops
- Author Name:
Sri Sai Latha
- Book Type:

- Description: Many colours of beauteous nature blended with shades of reality many greys is this book – Inked dewdrops this micro poetry book has a selected collection of 200 poems. Each poem is Inked in 3 lines and possesses a fresh essence of nature and life. These poems’ beauty is in their brevity. This book, through its verses, takes the reader on a ride of experiencing various colours of nature and different shades of reality. Grab the book and enjoy your ride.
Baton Mein Beete Din
- Author Name:
Namvar Singh
- Book Type:

- Description: ‘बातों में बीते दिन’ पुस्तक नामवर सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है। इस किताब में शामिल साक्षात्कारों का विषय क्षेत्र अत्यन्त विस्तृत है। पेरेस्त्रोइका-ग्लासनोस्त और आधुनिकतावाद से लेकर कविता, कहानी, उपन्यास और निजी जीवन तक। साहित्य और देश-दुनिया की नामवर जी की समझ का एक स्पष्ट प्रतिबिम्ब यहाँ मिलता है। उनकी विश्व-दृष्टि का रूपायन इन साक्षात्कारों में हुआ है। पुस्तक तीन खंडों में बँटी हुई है। मध्यम आकार के और विषय केन्द्रित साक्षात्कार पहले खंड में हैं। दूसरे खंड में रचनाकारों और रचनाओं पर केन्द्रित बातचीत है। प्रेमचन्द, सुमित्रानन्दन पंत, त्रिलोचन और अमृतराय तथा सुमित्रानन्दन पंत की कृति ‘गुंजन’ और कृष्णा सोबती के उपन्यास ‘मित्रो मरजानी’—इन साक्षात्कारों के केन्द्र में है। तीसरे खंड में महावीर अग्रवाल द्वारा लिये गए नौ साक्षात्कार हैं जो उनके निजी जीवन से लेकर आलोचना और विविध विषयों से सम्बन्धित हैं। आलोचना लिखित हो या वाचिक—उसके पीछे बुनियादी प्रक्रिया है—पढ़ना, विवेचना, विचारना। तर्क और संवाद। नामवर जी के इन साक्षात्कारों में इसका व्यापक समावेश है। इनसे गुजरते हुए हम महसूस करते हैं कि वह किसी रचना को हमेशा नई और अपनी तरह से पढ़ने की कोशिश करते हैं और इस तरह ‘पढ़ते’ हुए वे लगातार नई तरह से ‘सोचते’ और ‘विचारते’ हुए सामने आते हैं। उनकी वाचिक आलोचना मूल्यांकन की ऊपरी सीढ़ी तक पहुँचती है। निकष बनाती है। प्रतिमानों पर बहस करती है। उसमें ‘लिखित’ की तरह की ‘कौंध’ मौजूद होती है। नहीं होता तो बस पूरापन।
Veerangana Jhalkari Bai
- Author Name:
Mohandas Naimisharay
- Book Type:

- Description: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वीरांगना झलकारी बाई का महत्त्वपूर्ण प्रसंग हमें 1857 के उन स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है, जो इतिहास में भूले-बिसरे हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि झलकारी बाई झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की प्रिय सहेलियों में से एक थी और झलकारी बाई ने समर्पित रूप में न सिर्फ रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया बल्कि झाँसी की रक्षा में अंग्रेजों का सामना भी किया। झलकारी बाई दलित-पिछड़े समाज से थीं और निस्वार्थ भाव से देश-सेवा में रहीं। ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना हमें जरूरी है। इस नाते भी कि जो जातियाँ उस समय हाशिये पर थीं, उन्होंने समय-समय पर देश पर आई विपत्ति में अपनी जान की परवाह न कर बढ़- चढ़कर साथ दिया। वीरांगना झलकारी बाई स्वतंत्रता सेनानियों की उसी शंृखला की महत्त्वपूर्ण कड़ी रही हैं। इस उपन्यास को लिखने के लिए लेखक ने सम्बन्धित ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियों पर शोध कार्य के साथ स्वयं झाँसी जाकर झलकारी बाई के परिवार के लोगों, रिश्तेदारों आदि से भी मुलाकात की है।
Tedhi Lakeer
- Author Name:
Ismat Chugtai
- Book Type:

-
Description:
इस्मत चुग़ताई का यह उपन्यास कई अर्थों में बहुत महत्त्व रखता है। पहला तो ये कि यह उपन्यास इस्मत के और सभी उपन्यासों में सबसे सशक्त है। दूसरे, इस्मत को क़रीब से जाननेवाले, इसे उनकी आपबीती भी मानते हैं। स्वयं इस्मत चुग़ताई ने भी इस बात को माना है। वह स्वयं लिखती हैं, ‘‘कुछ लोगों ने ये भी कहा कि ‘टेढ़ी लकीर’ मेरी आपबीती है—मुझे ख़ुद आपबीती लगती है। मैंने इस नाविल को लिखते वक़्त बहुत कुछ महसूस किया है। मैंने शम्मन के दिल में उतरने की कोशिश की है, इसके साथ आँसू बहाए हैं और क़हक़हे लगाए हैं। इसकी कमज़ोरियों से जल भी उठी हूँ। इसकी हिम्मत की दाद भी दी है। इसकी नादानियों पर रहम भी आया है, और शरारतों पर प्यार भी आया है। इसके इश्क़–मुहब्बत के कारनामों पर चटखारे भी लिए हैं, और हसरतों पर दु:ख भी हुआ है। ऐसी हालत में अगर मैं कहूँ कि मेरी आपबीती है तो कुछ ज़्यादा मुबालग़ा तो नहीं...’’
‘टेढ़ी लकीर’ एक किरदारी उपन्यास है जैसे ‘उमरावजान अदा’। ‘टेढ़ी लकीर’ की कहानी शम्मन के इर्द–गिर्द घूमती नज़र आती है। शम्मन को चूँकि अच्छा माहौल और अच्छी तरबीयत नहीं मिली, इसी वजह से उसके अन्दर इतना टेढ़ापन पैदा हो गया जहाँ उसकी नज़र में मुहब्बत मुहब्बत नहीं रही, रिश्ते रिश्ते नहीं रहे, जीवन जीवन नहीं रहा। सब कुछ मज़ाक़ बनकर रह गया। शम्मन के किरदार का विश्लेषण किया जाए तो वह मनोविकारों का गुलदस्ता नज़र आएगी। इस किरदार के बारे में इस्मत ने एक इंटरव्यू में कहा था ‘‘...ये नाविल जब मैंने लिखा तो बहुत बीमार थी, घर में पड़ी रहा करती थी। इस नाविल की हीरोइन ‘शम्मन’ क़रीब–क़रीब मैं ही हूँ। बहुत–सी बातें इसमें मेरी हैं। वैसे आठ–दस लड़कियों को मैंने इस किरदार में जमा किया है, और एक लड़की को ऊपर से डाल दिया है। जो मैं हूँ। इस नाविल के हिस्सों के बारे में मैं सिर्फ़ इतना बता सकती हूँ कि कौन–से हिस्से मेरे हैं और कौन–से दूसरों के !...’’
इस उपन्यास को इस्मत चुग़ताई ने उन यतीम बच्चों के नाम समर्पित किया है जिनके अभिभावक जीवित हैं। दरअसल यह व्यंग्य है उन माता–पिताओं पर जो बच्चे तो पैदा कर लेते हैं पर पालन–पोषण ठीक से नहीं करते। इन्हीं कारणों से यह उपन्यास उर्दू भाषा में जितना लोकप्रिय हुआ, उम्मीद है हिन्दी के पाठकों में भी लोकप्रिय होगा।
Matrichhabi
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

-
Description:
‘माँ’ सिर्फ़ एक सम्बन्धवाचक शब्द नहीं, बल्कि बरगद की वृक्ष की तरह इसकी विशालता है। जिसकी असंख्य जड़ें हैं, जो ज़मीन में मज़बूती से पैठकर अपने हर छोटे तने को पेड़ बनते देखती है। महाश्वेता देवी की ‘मातृछवि’ में माँ रूपी बरगद के अनेक तने हैं जिनमें उसके भिन्न-भिन्न रूप दिखाई देते हैं। इसमें कौशल्या है जो अपनी ज़मीन के लिए, अपने अधिकार के लिए हसुआ लेकर अकेले पूरे गाँव का नेतृत्व करती है और अपनी ज़िन्दगी न्योछावर कर देती है। वहीं जाह्नवी माँ हैं, जिन्हें जीते-जी देवी अवतार का रूप बताकर उनके पोते उनकी कमाई खाते रहते हैं और असल में उन्हें एक कोठी में बन्द कर खाने के लिए भी तरसाते हैं। ‘मातृछवि’ सिर्फ़ माँ के भिन्न रूपों को नहीं गढ़ती, बल्कि आज़ादी के बाद के बंगाल की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परतों को भी उधेड़ती है। परतों के खुलते ही जहाँ नक्सलबाड़ी आन्दोलन की रक्तरंजित भूमि दिखाई देती है तो वहीं समाजवाद के निर्माण के नाम पर यमुनावती की माँ और उसके जैसे तमाम लोग, जो अपने को फालतू और अनावश्यक समझने पर मजबूर किए जाते हैं। वहीं अपनी इज़्ज़त को बचाए रखने और अपने बच्चे को भरपेट चावल खिलाने के लिए जटी को सुबह-शाम की माँ बनना पड़ता है। और दिन देवी बनकर गुज़ारना पड़ता है।
महाश्वेता देवी की कहानियों में भले ही औरत का मातृ रूप आज से पचास साल पहले का ही क्यों न हो, लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी तब रही होगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book