Poetry
Sampoorna Kavitayein : Vijaydev Narayan Sahi
- Author Name:
Vijaydev Narayan Sahi
-
Book Type:

- Description: विजयदेव नारायण साही निरपेक्ष और आत्मस्थ ब्रह्माण्ड में मनुष्य की लघुता को भली भांति देख सकते हैं, और काल के उस अग्निकमल को भी जिसमें सब भस्म हो जाता है। इस नश्वरता में अर्थ की सतत तलाश उनकी कविता के केन्द्र में है, चाहे वह अर्थ अपनी तलाश को पहचानने में ही निहित हो, सृष्टि के वास्तविक स्वरुप को देखने में हो, वर्तमान क्षण के सौन्दर्य को जी लेने में हो अथवा मूल्यों को परिभाषित करने तथा उनकी चौकीदारी करने में हो। इन सभी को वे सत्य के रूप में देखते हैं, और सत्य को पहचानने का यह सधा हुआ और सघन बौद्धिक प्रयास उनकी कविता को विलक्षण बनाता है। आन्तरिक और बाह्य लय उनकी कविता की विशेषता है जो गीत और ग़ज़ल से होते हुए काव्यात्मक एकालाप में भी व्यक्त होती है, और विराट शब्दावली से सटीक शब्द चुन लेने की उनकी क्षमता सूक्ष्म अभिव्यंजनाओं को गुंजरित कर सघनता को पुष्ट करती है। कहीं बहुत गहरे स्तर पर साही एक नागरिक हैं। मूल्यों की परिभाषा उनके लिए सामाजिक सन्दर्भ रखती है और बहुत हद तक उनकी कविता भी एक सामाजिक ज़िम्मेदारी का निर्वहन करती है। उनकी कविताओं की इस समग्र प्रस्तुति में कविताएँ लेखन-क्रम में व्यवस्थित हैं एवं पूर्व में अप्रकाशित कुछ कविताएँ भी इसमें शामिल हैं। पुस्तक में शामिल विस्तृत सम्पादकीय और उसके अलावा कुछ अन्य आलोचनात्मक लेख व परिशिष्ट में संकलित उनकी पुस्तकों से जुड़ी सामग्री इस संचयन को एक सम्पूर्ण अध्ययन बना देती है।
Sampoorna Kavitayein : Vijaydev Narayan Sahi
Vijaydev Narayan Sahi
Ek Charwahe Ka Geet
- Author Name:
Ketan Yadav
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Book Type:

- Description: वे न मनु थे न आदम/ग्रन्थों की गढ़ी हुई छवियों के बाहर/वे केवल और केवल चरवाहे थे। यह एक चरवाहे का गीत है जो सभ्यता के समानान्तर बजते हुए एक अपनी दुनिया का दावा पेश कर रहा है—उस सभ्यता के बरक्स जिसमें चारागाह दफ़्न होते जा रहे हैं। यह सभ्यता की आलोचना नहीं बल्कि प्रकृति के साहचर्य में जीती उस दुनिया का स्मरण है जो अगर अपने ही रास्ते आगे बढ़ती तो वैसी न होती जैसी आज हमारी यह दुनिया है। इन कविताओं को पढ़ते हुए अग्रगामिता की किसी वैकल्पिक सरणि का अभाव हमें लगातार विचलित करता है। हिंसा के नवीनतम दृश्यों की आदी होती आँखें जो कुछ भी देखने की तैयारी कर चुकी हैं, हमारे वर्तमान की आँखें हैं, जिनके लिए अद्यतित होने का अर्थ है और अधिक संवेदनशून्य होना, और भी भीषण को पचा लेने को प्रस्तुत रहना। ये कविताएँ इस प्रक्रिया को अलग-अलग कोणों से देखती हैं, और कहीं अपनी सावधानी को ढीला नहीं होने देतीं। तकनीक के आधुनिक युवा संसार की सत्ता को लेकर भी ये कविताएँ कम सजग नहीं हैं— मेरे मनुष्य के सामने तुमसे बड़ी चुनौतियाँ हैं, पुरखा कवियो!/यहाँ मनुष्य बनाम मनुष्य नहीं, मशीन है। ऐन्द्रीय स्पर्श के दिन-ब-दिन संकीर्ण और सपाट होते जाने के मुकाबले प्रेम यहाँ एक उम्मीद की तरह आता है, लेकिन क्या वह भी हमारी पहुँच में है, मशीनों की इस्पाती निस्पन्द धवल चौंध को चीरकर क्या उस तक हमारा वह आर्त स्वर पहुँच पाता है जिसके सामने ‘कभी सूर्योदय न होनेवाली रात’ किसी भी दिन आ खड़ी होगी! आशंका जो मौजूदा समय की निर्मिति के अभिन्न हिस्से के रूप में हमारे चारों ओर उपस्थित है, इन कविताओं में बार-बार लौटती है। यह इस युवा कवि की सूक्ष्म संवेदना का प्रमाण है और सामाजिक-राजनीतिक बोध का भी जिसका एक सिरा जरूरी तौर पर तकनीक के आतंक से जा जुड़ता है जो अब मनुष्य को सामने से नहीं, ऊपर से देख रही है—देवता की तरह। पेड़ों, पशुओं और पत्तियों की भाषा से लेकर मशीनों की चीख तक को सुनतीं ये कविताएँ पाठक को निःसन्देह एक भिन्न धरातल पर ले जाएँगी।
Ek Charwahe Ka Geet
Ketan Yadav
Hansi Aur Des
- Author Name:
Rupam Mishra
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Book Type:

- Description: रूपम मिश्र की कविताओं की ‘आत्मा का आयतन’ बड़ा है। इन कविताओं में समाज और राजनीति के फासीवादी दौर में संवेदनशील लोगों के भीषण अन्तर्द्वंद्व अंकित हुए हैं। यहाँ ‘न्याय के लिए तड़पता मन’ है तो अपनापन खोजते थकता-हारता मन भी है और उसी क्षण भाग जाने का भी एक मन है। यहाँ गाँव-क़स्बे में सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब का देशज मर्सिया है, मुसलमान जोगियों के डर ने उनके बिरहों और निर्गुण सारंगी को ख़ामोश किया है, वही ख़ामोशी इन कविताओं में गूँज उठी है। ‘हँसी और देस’ में जैसे कोई बड़ी ठेठ ज़िद्दी निगाहों से सूचना-संचार के मायाजाल और नफ़रत की बाज़ारू सियासत को बेध रहा है। यहाँ कितनी ही कहानियाँ हैं—बहुत सी तो ऐसी जो बिसरा दिए जाने की कगार पर हैं, लेकिन आदमीपने के अकाल में लड़ते हुए मनुष्यों के जीते रहने की तमन्ना भी है। लोक-रहन, माटी-पानी और हरियाली को मिटते देखना त्रासद है, इस त्रासदी में प्रेम मानो एक आपद्धर्म है, उनके पूरी तरह मिट जाने से पहले ही मिलन की चाह है क्योंकि उनसे विरहित दुनिया में प्रेम का कोई परिवेश न होगा। भले ही ‘नैतिकता की रंगदारी वसूलते लफुए’ हर कहीं दिखते हों लेकिन असम्भव समझ लिए गए प्रतिरोध की छवियाँ जो अभी भी वास्तव हैं, (बस हमने नज़रें फेर ली हैं), उन्हें इस संग्रह की कविताएँ आँख में उँगली डालकर दिखाती हैं। इन कविताओं में हिन्दी का बहुभाषिक वैभव चमकता है। यहाँ अवध के गँवई मुहावरों और शब्दों का भाषिक छिड़काव नहीं, बल्कि अनुभव और सोच की मातृभाषा का आत्मविश्वास है। रूपम की काव्यभाषा जनता की जनवादी राजनीति के संक्रामक हो उठने के क्षण में उससे गलबहियाँ को आतुर है। —प्रणय कृष्ण
Hansi Aur Des
Rupam Mishra
Patthar Ki Zaban
- Author Name:
Fahmida Riaz
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Book Type:

- Description: जिन पर मेरा दिल धड़का था वो सब बातें दोहराते हो वो जाने कैसी लड़की है तुम अब जिसके घर जाते हो मुझसे कहते थे : बिन काजल अच्छी लगती हैं मिरी आँखें तुम अब जिसके घर जाते हो कैसी होंगी उसकी आँखें
Patthar Ki Zaban
Fahmida Riaz
Raat Samundar Mein
- Author Name:
Amjad Islam Amjad
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Book Type:

- Description: कहाँ आ के रुकने थे रास्ते! कहाँ मोड़ था! उसे भूल जा वो जो मिल गया उसे याद रख, जो नहीं मिला, उसे भूल जा वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं दिल-ए-बेख़बर मिरी बात सुन, उसे भूल जा, उसे भूल जा मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में, तिरी आस तेरे गुमान मे सबा कह गई मिरे कान में, मिरे साथ आ, उसे भूल जा किसी आँख में नहीं अश्क-ए-ग़म तिरे बाद कुछ भी नहीं है कम तुझे ज़िन्दगी ने भुला दिया, तू भी मुस्कुरा, उसे भूल जा
Raat Samundar Mein
Amjad Islam Amjad
Udti Dhool
- Author Name:
Amjad Islam Amjad
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Book Type:

- Description: कौन आएगा! किसकी आहट पर मिट्टी के कान लगे हैं! ख़ुशबू किसको ढूँढ रही है! शबनम का आशोब समझ और देख कि उन फूलों की आँखें किस का रस्ता देख रही हैं किसकी ख़ातिर क़रया-क़रया जाग रहा है सूना रस्ता गूँज रहा है किसकी ख़ातिर!! तनहाई के हौल नगर मे शब-भर गिरते पत्तों की आवाज़ें चुनता रहता हूँ अपने सर पर तेज़ हवा के नौहे सुनता रहता हूँ
Udti Dhool
Amjad Islam Amjad
Yaad Ka Chehra
- Author Name:
Ambareen Haseeb Ambar
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Book Type:

- Description: अम्बरीन हसीब अम्बर की शायरी में एक अलग तरह का फ़िक्री जहान नज़र आता है। वह एक तरफ़ हुस्न की जानिब से शायरी में अपना मुक़द्दमा पेश करती नज़र आती हैं और नाज़ और अदा कही जाने वाली महबूबा की ज़िन्दगी के असली मसलों से हमें रू-ब-रू करवाती हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ वह इतिहास की धूल में दफ़नाई हुई औरत के सवालों को भी दौर-ए-हाज़िर के दामन पर सब्त करती हुई मालूम होती हैं। ‘याद का चेहरा’ ग़ज़ल और नज़्म का एक ऐसा गुलदस्ता है जिसमें सिर्फ़ तख़य्युल के फूल ही नहीं हैं, बल्कि आज की औरत के चुभते हुए तंज़ के काँटे भी हैं। वह ज़ुल्म और जब्र से आँखों में आँखें डाल कर मुकालमा करने की रवादार हैं। मोहब्बत में भी वह अगर एक तरफ़ ईसार और क़ुर्बानी के जज़्बे को अहम तस्लीम करती हैं तो वहीं अपना हक़ माँगने से भी पीछे नहीं हटती हैं। वफ़ा उनके लिए मर्द को तन्हाई से जहान-ए-रंगीं तक लाती है, मगर ख़ुद के जहान-ए-रंगीं से तन्हाई तक पहुँचने को नज़रअन्दाज़ नहीं करती। उनकी शायरी की इस ख़ूबसूरत किताब को उन्हीं के अल्फ़ाज़ में कुछ यूँ पेश किया जा सकता है— तंज़ रुसवाई सितम शिकवे गिले हैं यही शायद वफ़ाओं के सिले मुझको दुनिया की नहीं है आरज़ू मेरे होने की ख़बर मुझको मिले
Yaad Ka Chehra
Ambareen Haseeb Ambar
Dard Aashob
- Author Name:
Ahmed Faraz
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Book Type:

- Description: आज फिर करते हो किस ज़ोम प’ ज़ख़्मों का शुमार सरफिरो! वादी-ए-पुरख़ार में ये तो होगा क्यूँ निगाहों में है अफ़सुर्दा चराग़ों का धुवाँ आरज़ू-ए-लबो-रुख़्सार में ये तो होगा एक से एक कड़ी मंज़िले-जाँ आएगी रहगुज़ारे-तलबे-यार में ये तो होगा होंठ सिल जाएँ मगर जुरअते-इज़्हार रहे दिल की आवाज़ को मद्धम न करो दीवानो! ढल चुकी रात तो अब कुहर भी छट जाएगी अब भी उम्मीद की लौ कम न करो दीवानो! आँधियाँ आया ही करती हैं हरिक हब्स के बाद गुलशुदा शम्ओं का मातम न करो दीवानो!
Dard Aashob
Ahmed Faraz
Varaq
- Author Name:
Zehra Nigah
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Book Type:

- Description: वो लकड़ी के तख़्ते पे ऐसे खड़ी है कि हर पोर कीलों से जैसे जड़ी है अभी उस का बेटा, अभी उस का शौहर चलाएँगे ख़ंजर की बौछार उस पर कभी हाथ के रुख़, कभी पीठ पीछे कभी सिर के ऊपर तो कंधे के नीचे तमाशाई साँसों को रोके हुए हैं तमाशा हर इक बार यूँ देखते हैं कि जैसे वो पहले-पहल देखते हों
Varaq
Zehra Nigah
Sipi Mein Shankhnad
- Author Name:
Sangeeta Mishra
-
Book Type:

- Description: ‘सीपी में शंखनाद’ की कविताओं को आधुनिक स्त्री-विमर्श में एक भारतीय हस्तक्षेप की तरह देखा जा सकता है। इन कविताओं में उस स्त्री के दुःख और संघर्ष व्यक्त हुए हैं जो परम्परा से विच्छिन्न होकर नहीं, उसमें परिवर्तन करते हुए आगे बढ़ना चाहती है, पुरुष को एक नए रूप में ढालना चाहती है, एक ऐसी इकाई के रूप में जो स्त्री होने के अर्थ को समझ सके। अपने समय, समाज और परिवेश की देखी-जानी स्थितियों को नई दृष्टि से देखने की क्षमता प्रदान करने वाली ये कविताएँ उन स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करती हैं जो पुरुष द्वारा रचे गए भेद-विभेद को अपने सूक्ष्म प्रयासों से अनहुआ कर देना चाहती हैं। इन कविताओं से पाँच वर्ष की वह बच्ची भी झाँकती है जिसकी कटोरी में चावल का पानी और उसके भाई के सामने दूध का कटोरा है, वह किशोरी भी जिसकी पढ़ाई छुड़ाकर उसे किसी पुरुष को सौंप दिया जाता है, वह वयस्क स्त्री भी जिसकी कोख को पाँचवीं बेटी को जन्म देते ही कलुषित घोषित कर दिया जाता है, वह पचास वर्षीय प्रौढ़ा भी जिसके बच्चे बूढ़ी कहकर उसका मखौल उड़ाते हैं। यह काव्य-गाथा पूछती है कि क्या स्त्री होना दोयम दर्जे का मनुष्य होना है? स्त्री-विमर्श इस कविता का आधार है लेकिन थोड़ा भिन्न रूप में। स्त्री यहाँ प्रकृति है जो पुरुष के साथ अभिन्न होकर जुड़ी है। ये कविताएँ स्त्री की उस सोच को भी स्वर देती हैं जो बदल रही है, जो पुरुष जैसी होकर नहीं बल्कि स्त्री होकर ही उस अन्याय को ग़ैर-ज़रूरी बना देती है जो बरसों से ज़ारी है।
Sipi Mein Shankhnad
Sangeeta Mishra
Pratinidhi Kavitayen : Kunwar Narayan
- Author Name:
Kunwar Narayan
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Book Type:

- Description:
शुरू से लेकर अब तक की कविताएँ सिलसिलेवार पढ़ी जाएँ तो कुँवर नारायण की भाषा में बदलते मिज़ाज को लक्ष्य किया जा सकता है। आरम्भिक कविताओं पर नई कविता के दौर की काव्य-भाषा की स्वाभाविक छाप स्पष्ट है। इस छाप के बावजूद छटपटाहट है—कविता के वाक्य-विन्यास को आरोपित सजावट से मुक्त कर सहज वाक्य-विन्यास के निकट लाने की। आगे चलकर यह वाक्य-विन्यास कुँवर नारायण की कविता के लिए स्वभाव-सिद्ध हो गया है। लेकिन उनकी विशेषता यह है कि उन्होंने सहज वाक्य-विन्यास को बोध के सरलीकरण का पर्याय अधिकांशत: नहीं बनने दिया। सहज रहते हुए सरलीकरण से बचे रहना, साधना के कठिन अभ्यास की माँग करता है। 'सहज-सहज सब कोई कहै—सहज न चीन्हे कोय!' बाल-भाषा में 'प्रौढ़ व्यक्तित्व को अभिव्यक्ति' देने की चुनौती को कुँवर नारायण ने बहुत गहरे में लिया और जिया है। परम्परा की स्मृति और 'सैकड़ों नए-नए' पहलुओं को धारण करनेवाली काव्य-भाषा सम्भव करने के लिए जो साधना उन्होंने की होगी, उसका अनुमान ही किया जा सकता है। कुँवर नारायण इस महत्त्वपूर्ण सचाई के प्रति सजग हैं कि ‘कलाकार-वैज्ञानिक के लिए कुछ भी असाध्य नहीं।’ वे इस गहरी सचाई से भी वाक़िफ़ हैं कि चिन्तन चाहे दार्शनिक प्रश्नों पर किया जाए चाहे वैज्ञानिक तथ्यों पर, काव्यात्मक भाषा ही प्रत्यक्ष दिखने वाले विरोधों के परे जाकर मूलभूत सत्यों को धारण करने का हौसला कर पाती है।
—पुरुषोत्तम अग्रवाल
Pratinidhi Kavitayen : Kunwar Narayan
Kunwar Narayan
Bhai Tu Aisi Kavita Kyun Karta Hai
- Author Name:
Sushil Shukla +1
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Book Type:

- Description: A collection of short poems by Sushil Shukla would surprise you with its simplicity. Things we see and live with every day quickly become a part of you and arouse the poet in you. If these poems do that to you, don’t forget to send us a few samples! Vandana Bisht’s illustrations have a character of their own and a story to tell. When you look at them, you begin to imagine what the bird must be saying, so expressive is each character! These individual artworks make you wonder about the use of colour and space. An appreciation for art comes naturally to you as you savour these artworks. Age group 6-8 years
Bhai Tu Aisi Kavita Kyun Karta Hai
Sushil Shukla
Kitabon mein Billi ne Bachche Diye Hain
- Author Name:
Sarveshwardayal Saxena +1
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Book Type:

- Description: इब्न बतूता पहन के जूता, निकल पड़े तूफान में थोड़ी हवा नाक में घुस गई, घुस गई थोड़ी कान में Only a great poet such as Sarveshwar Dayal Saxena can write a poem for children about going into a storm. Not a regular storm, but a storm that can break you into two. Stopping only to repair his shoes, Ibn Batuta enters storm after storm. The poem rekindles memories of Ibn Battuta's courageous travels from Morocco to India as it brings life to the rhymes for children. All poems in this collection are equally remarkable. For instance, read the following poem, crisp composition with a breezy rhyme: महँगू ने महँगाई में, पैसे फूँके टाई में While poems' temperament rises and falls, Debabrata Ghosh's illustrations are quiet and serene. The green in these illustrations is at its quietest, and so is the colour blue. Age group 6-8 years
Kitabon mein Billi ne Bachche Diye Hain
Sarveshwardayal Saxena
Eelam Deel
- Author Name:
Habib Ali +1
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Book Type:

- Description: Nirankardev Sevak's poems are read by every Hindi-speaking child. He is one of the foremost voices in the Hindi-speaking belt. Nirankardev Sevak writes with an unparalleled simplicity, which is reflected in the following lines: अगर मगर दो भाई थे लड़ते खूब लड़ाई थे, अगर मगर से छोटा था, मगर अगर से खोटा था। or पैसा पास होता तो चार चने लाते, चार में से एक चना तोते को खिलाते It is rare to find a poet who has imagined such an individual. This collection of poems has 35 such poems. These wonderfully witty poems are accompanied by equally beautiful illustrations by Habib Ali. Readers will find his compositions, colour schemes, and detailing engaging. Age group 6-8 years
Eelam Deel
Habib Ali
Char Chatore
- Author Name:
Nabrina Singh +1
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Book Type:

- Description: 22 poems. Funny, witty poems from our everyday life. You wouldn't find a poem without humour. This is the most neglected province of Hindi poetry. Children will not only read this but also transcend its boundaries, writing their own poems and humming them. Another quality of these poems is their simplicity. These poems play with language by taking it away from its prevalent meaning. At times, you will find poems that build on the commonly used play songs. All poems would easily become your own...you would hear them once and find yourself humming soon after. The book also has beautiful illustrations with playful lines, shapes and colours. Age group 9-12 years
Char Chatore
Nabrina Singh
Gul-E-Nagma
- Author Name:
Firaq Gorakhpuri
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Book Type:

- Description: ‘आने वाली नस्लें तुम पर रश्क करेंगी हम-असरो जब ये ध्यान आएगा उनको, तुमने ‘फ़िराक़’ को देखा था।’ ‘फ़िराक़’ की शायरी इस धरती की सोंधी-सुगन्ध, नदियों की मदमाती चाल, हवाओं की नशे में डूबी मस्ती में ढूँढ़ी जा सकती है। ‘फ़िराक़’ प्रायः कहा करते थे कि कलाकार का मात्र भारतवासी होना पर्याप्त नहीं है, वरन् उसके भीतर भारत को निवास करना चाहिए। भारत की शायरी की पहचान भारतीयता से होनी चाहिए। भारतीयता का एक विशिष्ट काव्य प्रतिमान है। ‘फ़िराक़’ की शायरी ने जीवन पर अमृत वर्षा कर दी और उसे ऐसा मधुर संगीत प्रदान किया, जिससे देवताओं के पवित्र नेत्र भीग जाएँ। ‘फ़िराक़’ की शायरी जीवन के लिए पाकीज़ा दुआ बन गई। 'फ़िराक़' ने उर्दू शायरी को एक बिलकुल नया आशिक़ दिया है और उसी तरह बिलकुल नया माशूक़ भी। इस नए आशिक़ की एक बड़ी स्पष्ट विशेषता यह है कि इसके भीतर एक ऐसी गम्भीरता पाई जाती है जो उर्दू शायरी में पहले नज़र नहीं आती थी। ‘फ़िराक़’ के काव्य में मानवता की वही आधारभूमि है और उसी स्तर की है जैसे ‘मीर’ के यहाँ उनके काव्य में ऐसी तीव्र प्रबुद्धता है, जो उर्दू के किसी शायर से दब के नहीं रहती। अतएव, उनके आशिक़ में एक तरफ़ तो आत्मनिष्ठ मानव की गम्भीरता है, दूसरी तरफ़ प्रबुद्ध मानव की गरिमा है।
Gul-E-Nagma
Firaq Gorakhpuri
Udho Kahiyo Jay
- Author Name:
Rameshraaj
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Book Type:

- Description: गोपियों को आमजन का प्रतिनिधि और उद्धव को कृष्णरूप में गद्दी पर बैठे कंस जैसे हर शासक का संदेशवाहक मानकर पुराने प्रसंग को नये सन्दर्भों में पिरोकर रची गयी तेवरीकार रमेशराज नयी कृति “ऊधौ कहियो जाय“ तेवरी-शतक में पाठकों के समक्ष है | शतकों की परम्परा में प्रस्तुत यह तेवरी-शतक पठनीय ही नहीं, इस कारण भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उद्धव जो कृष्ण के दूत बनकर गोपियों के समक्ष आते हैं तो गोपियाँ उनसे कोई विरह या प्रेम-प्रसंग नहीं रखतीं बल्कि उनकी पीड़ा तो उस सिस्टम की बखिया उधेड़ती है जो जाने-अनजाने आमजन का सुख-चैन लीलने को आतुर है |
Udho Kahiyo Jay
Rameshraaj
Aadhi Pankti
- Author Name:
Anchit
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Book Type:

- Description: Aadhi Pankti Poetry
Aadhi Pankti
Anchit
Jab Aadivasi Gata Hai
- Author Name:
Jamuna Bini
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Book Type:

- Description: जब आदिवासी गाता है की कविताओं में आदिम और आधुनिक, परम्परा और परिवर्तन, प्यार और प्रतिरोध तथा संगीत और सिसकी एक साथ उपस्थित हैं। पूर्वोत्तर के अरुणाचली-आदिवासी समाज और संस्कृति की नैसर्गिक धड़कन इन कविताओं में आसानी से महसूस की जा सकती है, साथ ही वह सोच भी जो कथित मुख्यधारा से परे, अब तक अलक्षित-उपेक्षित पड़े हाशिये के समाजों में अस्मिता की बढ़ती चेतना के साथ मुखर होती गई है। इन कविताओं का एक छोर प्रकृति से सुदीर्घ साहचर्य, और सहस्राब्दियों के अनुभव और यत्न से निर्मित संस्कृति के प्रति कवि के सहज गौरवबोध से बना है, जबकि दूसरा छोर उन सवालों से जो पूरी दुनिया को केवल मुनाफ़े की नज़र से देखने वाली शक्तियों को सम्बोधित हैं। जमुना बीनी की रचनात्मकता का यह वितान, वस्तुतः समकालीन हिन्दी कविता का एक नया प्रस्थान है।
Jab Aadivasi Gata Hai
Jamuna Bini
Uski Ichchhaon Mein Baarish Thi
- Author Name:
Devyani Bhardwaj
-
Book Type:

- Description: ‘उसकी इच्छाओं में बारिश थी’ स्त्री-कविता का एक नया दस्तावेज़ है जिसमें जीवन की सच्चाइयाँ आक के पौधे-सी दिख रही हैं, खेजड़ी के पेड़-सी। जून महीने की दोपहर, निर्जन किसी इलाक़े में चलती जाती हुई यह कवि समझ चुकी है कि प्रेम की कामना प्रेम से बड़ी सच्चाई है। ऐसी कई सच्चाइयों को वह समझ चुकी है—वह न्याय माँगती है समाज से, जानती हुई कि इस पितृसत्ता में उसके लिए ऐसी कोई सुनवाई सम्भव नहीं। वह याद करती है अपनी रिश्तेदार औरतों को—बुआ को, मामी को, मौसी, दादी, नानी को—सबका जीवन इसी पितृसत्ता के विष में लिथड़ा हुआ मिलता है। वह अपनी भाषा में कविता को अपनी सहेली बनाकर लाती है, समझती हुई कि वह भी स्त्री की आदिम यात्रा में एक घायल राहगीर है। देवयानी की कविताओं की परिपक्वता उनकी अपनी ही संवेदना के परिष्कार का प्रतिफल है। कवि ने अपने हृदय में प्रेम के टूटने की आवाज़ सुनी है, कपास में किसान की मेहनत देखी है, बेटी को पितृसत्ता का पाठ पढ़ाते एक माँ को सुना है, एक स्त्री को इच्छा के पुल पर खड़ी देखा है जो कहीं जाना चाहती है। यह सबकुछ देखते हुए उनकी कविता उनके पास आती है, इसलिए उनकी कविता निराश नहीं है बल्कि विवेकसंगत ढंग से आशावान है। उसके सपनों में बादल आते हैं, न कि बसा-बसाया कोई घर जिसमें उस पर हुकूमत करने वाले लोग रहते हों। स्त्री का इन्तज़ार कितना बदल गया है इन कविताओं से पता चलता है! ये कविताएँ एक जागी हुई स्त्री की कविताएँ हैं जिसके सपने प्रौढ़ हो गए हैं, जिसकी आँखें अब कोई भ्रम नहीं पालतीं। जिस स्त्री ने बारिश का इन्तज़ार करना सीख लिया, जिसका दमन अब मुश्किल है। उसकी इच्छाओं में बारिश थी संग्रह एक शाम हो रही सुखद बारिश की तरह है जिसमें ठंडी हवाएँ चल रही हों और जो असमानता और अन्याय से उपजी भीषण उमस-भरी किसी दोपहर से निजात दिलाती हों। साथ में यह उम्मीद भी जगाती हों कि स्त्री अपनी नई संवेदना को प्रकट करने में अब हिचकिचाएगी नहीं बल्कि देवयानी की ही तरह कविता को भी साथ-साथ नया करती चलेगी। —सविता सिंह
Uski Ichchhaon Mein Baarish Thi
Devyani Bhardwaj
The Poetry category on Rachnaye brings together voices that compress emotion, thought, rhythm, and language into their most powerful form. This shelf spans classical poetry, modern verse, experimental forms, regional traditions, and contemporary poetic movements across India and the world.
What readers will discover here:
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Classical Indian poetry: bhakti, sufi, riti, courtly verse
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Modern and contemporary poetry addressing love, politics, caste, identity, migration, gender, and urban life
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Regional poetry traditions in Hindi, Marathi, Bengali, Tamil, Malayalam, Urdu, Kannada, Odia, Punjabi, Assamese, and more
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Ghazals, nazms, dohas, abhangs, vachanas, free verse, and prose poetry
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Poetry anthologies, collected works, and debut collections
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Translations of major Indian poets across languages
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Poetry used in university syllabi and literary study
What types of poetry books are available on Rachnaye?
You’ll find classical poetry, modern verse, regional poetry, ghazals, free verse, poetry anthologies, and translated works across Indian languages.
Are poetry books available in Indian languages?
Yes. Hindi, Marathi, Bengali, Tamil, Malayalam, Urdu, Kannada, Odia, Punjabi, Assamese, and English poetry collections are available.
Are modern and contemporary poets included?
Absolutely. The category features both established poets and contemporary voices addressing current social and personal themes.
Do you offer translated poetry?
Yes. Many poetry books include translations that allow readers to explore poetic traditions across languages.
Is poetry suitable for new readers?
Yes. Poetry’s short forms make it accessible. Readers can begin with anthologies or modern, conversational verse.
Are these books used for academic study?
Many titles are part of school and university literature syllabi, especially in Indian languages.