Poetry

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The Infinite Forest

  • Author Name:

    Rashmi Kaushik +1

  • Book Type:
  • Description: The Infinite Forest welcomes you to break the rules, for it is a rule-breaker itself. Crafted in reverse, the art was born first, and only then did the words emerge-words that sought to honour the images. What you hold is not just a book, but a collaboration spanning generations, bound by blood, memory, and imagination. The Infinite Forest is more than a collection of poems paired with illustrations. It is a world unto itself-one that invites the reader to wander, to pause, and to listen. Here, the rain does not simply fall; it remembers. The moon does not merely shine; it conspires. In the midst of these mythic landscapes stand women who hold both ruin and creation in their breath. A woman walks through a forest that bends for her, bathes in a river that remembers her birth-cry, and carries within her the fire that once scorched the Gods. She is not here to be understood. She is here to be remembered. Through fragments of myth, poetry, and shadowed memory, the book traces the path of a woman who is both wound and blade, both destruction and divinity- an eternal return to power she never truly lost. - Rashmi Kaushik & Dr Surabhee Kaushik Saha
The Infinite Forest

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Rashmi Kaushik

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Paandaan | पानदान

  • Author Name:

    Mujtaba Khan

  • Book Type:
  • Description: पानदान’ — सिर्फ़ पान का सामान रखने की एक छोटी संदूक़ची नहीं, बल्कि एक ख़ानदानी विरासत है, जो पीढ़ियों से गुज़रते हुए मुमताज़ बेगम तक पहुँची है। यह अफ़साना एक औरत की उस नाज़ुक पर मज़बूत दुनिया की कहानी है, जो अपने हिस्से की इज़्ज़त, रुतबा और औलादों की परवरिश को उसी सलीके से सँभालती है, जैसे वह अपने पानदान को। मुमताज़ बेगम का जीवन उन तमाम औरतों का प्रतीक है, जो समय और हालात की मार झेलते हुए भी अपने भीतर की गरिमा और अपनापन नहीं खोतीं। मुज्तबा ख़ान ने इस दास्तान को उस दौर के पूरे सामाजिक परिवेश, उसकी भाषा और रवायतों समेत हमारे सामने ज्यों का त्यों रख दिया है। हर किरदार में मुहब्बत और इंसानियत की खुशबू है। भाषा में पुराने लखनऊ की नफ़ासत और क़िस्सागोई का ऐसा रंग है कि कहानी शुरू होते ही पाठक उस दुनिया में उतर जाता है — और आख़िरी पंक्ति तक वहीं ठहर जाना चाहता है। लेखक परिचय: मुज्तबा ख़ान प्रसिद्ध पटकथा लेखक और लोकप्रिय भाषा-शिक्षक हैं, जो अपनी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, इंसानी रिश्तों और सांस्कृतिक विरासत को बारीकी से पिरोते हैं।
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Paandaan | पानदान

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Mujtaba Khan

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Vidrohi Hoga Humara Kavi By Santosh Arsh

  • Author Name:

    Santosh Arsh

  • Book Type:
  • Description: विद्रोही का जीवन उनकी कविताओं की सम्पूर्ण संरचना में अंतस्थ है। अविभाज्य । उन्होंने कवि होने का कोई उपक्रम नहीं किया । वे कवि थे । उनके जीवन ने सिद्ध किया। वे जेएनयू कैंपस के कालजयी लीजेंड हिंदी कवि थे । - उदय प्रकाश विद्रोही बड़े सपनों के कवि हैं। छोटे क़द का बड़ा कवि । मनुष्यता उनमें कूट-कूटकर भरी हुई है। एक जनकवि की प्रतिबद्धता जीने वाले विद्रोही जनता के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं। वस्तुतः रमाशंकर विद्रोही संवेदनात्मक ज्ञान और ज्ञानात्मक संवेदना के लोकधर्मी कवि हैं । - चौथीराम यादव विद्रोही एक मलंग थे जो सभ्यता के जंगलों की ओर निकल आए। उन्होंने संतों की भावभूमि और मार्क्सय दृष्टिकोण को गूंथकर पीड़ा, आक्रोश और मोहब्बत की विलक्षण कविता हमें दी, जो क्रांति और समता के लिए हर लड़ाके की अपनी कविता है और पीढ़ियों तक हर सुख-दुख, जय-पराजय में हमारे साथ रहेगी । - प्रणय कृष्ण
Vidrohi Hoga Humara Kavi By Santosh Arsh

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Mai Behoshi Ka Ek Patthar Tha

  • Author Name:

    Veeru Sonkar

  • Book Type:
  • Description: अपने दूसरे कविता संग्रह में वीरू सोनकर थोड़ी अप्रत्याशित परिपक्वता के साथ सामने आ रहे हैं। उनकी कविता में अदम्य आवेग, अपने समय और सभ्यता के रूपों-विद्रूपों और सौन्दर्य और अन्याय की बेरहम शिनाख्त, भाषा और कविता में तेज़ी से फैल रहे रूमानों से अपने को अलग करने की सजगता, बाहर और भीतर के तादात्म्य की अवसन्न पहचान अब पूरी प्रखरता और नवाचार में जाहिर हैं। उनमें दुस्साहस है पर उनकी कविता को मार्मिक विलाप की तरह पढ़ा जा सकता है। अपनी कविता में वे अपनी और आज की सचाई का सामना करने से नहीं हिचकिचाते और कभी अपने क्षोभ में कविता को गाली तक बनाने की हद तक चले जाते हैं। जो भी हो, वे एक भरेपूरे कवि हैं जो उनके एक क्षुब्ध, संवेदनशील, साहसी, सजग आदमी होने का ही एक संस्करण है। वीरू के यहाँ सहना और भाषा दोनों जब-तब कलंक बन जाते हैं। ऐसा भी लग सकता है कि हमारे समय में लगातार हो रहे विध्वंस के बरक्स वे भग्नावशेष में भटकते कवि हैं । यह कविता हमें पुकारती है, हमारे और अपने किये धरे पर विलाप करती है, हमें अनेक विद्रूप और विडम्बनाओं की चिन्हार कराती है, हमें भाषा में नये इलाकों में ले जाती है और हमें आश्वस्त करती है कि इस अभागे समय में भी कविता कुछ कर सकती है। अशोक वाजपेयी प्रसिद्ध साहित्यकार
Mai Behoshi Ka Ek Patthar Tha

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Veeru Sonkar

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Aadat Hai Humko | आदत है हमको

  • Author Name:

    Goapl Datt

  • Book Type:
  • Description: गोपाल दत्त प्रसिद्ध अभिनेता और गीतकार गोपाल दत्त का यह कविता संग्रह उनके रचनात्मक संसार का एक नया और अनदेखा पक्ष सामने लाता है। मंच और परदे पर दिखाई देने वाले उनके व्यक्तित्व से परे, यह किताब उन भावनाओं, विचारों और अनुभवों को सहेजती है, जो अक्सर अभिनय की रोशनी में छूट जाते हैं। इस संग्रह में शामिल है उनकी लोकप्रिय और चर्चित कविता ‘और करो थिएटर’, साथ ही बड़े शहर के शोऑफ और कला की इंसाफ़ पसंदगी को दर्ज करती उनकी थोड़ी ड्रामैटिक लेकिन बेहद चर्चित कविता ‘बड़े शहर का स्क्रीनप्ले’। इसके अलावा, इसमें उनके कई ऐसे गीत भी हैं, जिन्हें आप पहले सुन चुके होंगे या जिनकी गूँज आपको जानी-पहचानी लगेगी। आदत है हमको गोपाल दत्त के बहुरंगी रचनात्मक व्यक्तित्व की सच्ची झलक है—जहाँ कविता, गीत और जीवन एक-दूसरे में घुलते नज़र आते हैं। कविता प्रेमियों और रंगमंच से जुड़े पाठकों के लिए यह संग्रह विशेष रूप से पठनीय है।
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Aadat Hai Humko | आदत है हमको

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Goapl Datt

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Maithilisharan Gupta: Baal Kavitaen

  • Author Name:

    Maithilisharan Gupta

  • Book Type:
  • Description: आप सरकस के बारे में कोई कविता पढ़ना चाहते हैं? और भगवान बुद्ध के बारे में? और अपने देश के किसानों के बारे में भी? ये सब कविताएं इस किताब में मिल जाएंगी। और ये कविताएं हैं जो सबको पसंद हैं। आपको भी पसंद आएंगी। कुछ कविताएं आपको अपने देश, समाज और राष्ट्रध्वज के बारे में बताएंगी तो कुछ को पढ़कर आनंद आएगा।
Maithilisharan Gupta: Baal Kavitaen

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Maithilisharan Gupta

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Us Se Muhabbat By Varun Anand

  • Author Name:

    Varun Anand

  • Book Type:
  • Description: उस से मुहब्बत' इस उन्वान से ही ज़ाहिर है कि वरुण आनंद की शायरी का ये मजमूआ, मुहब्बत की ग़ज़लों, नज़्मों और मसनवियों से सजा है । मुहब्बत की शायरी की इस किताब में महबूब से इजहार है, शिकायतें हैं और जुदाई के लम्हें दर्ज हैं। यहाँ मुहब्बत का हर रंग देखने को मिलेगा तो कहीं कहीं तंज़ का रंग इसे और दिलकश बनाता है । वरुण आनंद की शायरी आधुनिकता और परम्परा का अद्वितीय संगम है । एक ओर जहाँ आज की बातों को उनकी ग़ज़लों में जगह मिली है वहीं बड़ी बहर की पारम्परिक ग़ज़लें, नज़्में और मसनवियाँ इसे परम्परा का गाढ़ा रंग देती हैं ।
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Panchiyon Ka Sardar | पंछियों का सरदार

  • Author Name:

    Sadeep Dwivedi

  • Book Type:
  • Description: कौन है ‘पंछियों का सरदार' ‘पंछियों का सरदार’ इस संकलन की एक कविता का पात्र है, जो किसी जंगल के सारे पंछियों का नेता है, उनका मुखिया है। जिसका चरित्र कुछ ऐसा है कि वह किसी चुनौती से नही घबराता, उसे स्वीकारता है और डटकर सामना करता है। हिम्मत नहीं हारता । अब चूँकि मेरी यह पूरी पुस्तक चुनौतियों से लड़ने की, गिरकर उठने की और हार न मानने की पक्षधर है; यह हमारे भीतर इस पात्र की तरह दृष्टिकोण जागृत करने का प्रयास करती है तो मुझे लगा कि यह ‘पंछियों का सरदार’ इस पूरी पुस्तक का भी सरदार बन सकता है। इस विचार से मैंने पुस्तक के लिए यह शीर्षक चुना। तो यह थी ‘पंछियों का सरदार’ यह शीर्षक चुनने की कहानी। बाकी सार्थकता तो तब साबित होगी, जब यह 'पंछियों का सरदार आपके भीतर भी अपने जैसा साहस भर दे।
Panchiyon Ka Sardar | पंछियों का सरदार

Panchiyon Ka Sardar | पंछियों का सरदार

Sadeep Dwivedi

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Ghar Ke Vaaste

  • Author Name:

    Swayam Srivastava

  • Book Type:
  • Description: यह लोकप्रिय युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव का पहला काव्य संग्रह है। इसके हर गीत और नज़्में पहले ही लोगों की ज़ुबान पर हैं। स्वयं श्रीवास्तव अपने समय की असल समस्याओं को उठाते हैं। उनकी कविताओं में युवा मन की बेकरारी, बेकारी, प्रेम, असफलताबोध और सौन्दर्याकांक्षा मिलेगी। जब उनकी हिन्दुस्तानी जुबान में आप इन्हीं चीज़ों को सुनते हैं तो एक ही बात जेहन में कौंधती है— “देखना तक़रीर की लज़्ज़त कि जो उसने कहा मैं ने ये जाना कि गोया ये भी मेरे दिल में है”।
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Ghar Ke Vaaste

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Ashre

  • Author Name:

    Idrees Babar

  • Book Type:
  • Description: ‘अरबी ज़बान’ में ‘अशरा’ लफ़्ज़ के मानी होते हैं—'दस', इसी से ये बात समझ आनी चाहिए कि इदरीस बाबर ने उर्दू में एक ऐसी सिन्फ़ या फ़ॉर्म ईजाद की है, जिसमें सिर्फ़ दस मिसरे होते हैं। दिलचस्प बात ये है कि ‘अशरा’ किसी भी तरह लिखा जा सकता है। ग़ज़ल, नज़्म, आज़ाद नज़्म या फिर नसरी नज़्म के तौर पर भी। इसी लिए इस किताब में आपको ‘अशरे’ के ये सभी रूप दिखाई देंगे। ‘अशरे’ को किसी ख़ास मौज़ू का मोहताज भी नहीं बनाया गया है, एक अशरा जहाँ सियासी हो सकता है तो वहीं दूसरा ‘समाजी’ और 'इस्लाही' या फिर इश्क़-ओ-आशिक़ी से भी उसका तअल्लुक़ हो सकता है। ऐसा नहीं है कि क्लासिकल शायरी में दस मिसरों की ऐसी कोई सिन्फ़ मौजूद नहीं थी, दकन से लेकर शुमाली हिन्दुस्तान तक दस मिसरों की ऐसी नज़्मों को ‘मुअश्शर’ कहा जाता था। मगर इदरीस बाबर की इस नई सिन्फ़ ने ख़ुद को बहर और उस्लूब की क़ैद से आज़ाद करके इसमें कई नए इमकान पैदा कर दिए हैं, इस बात का सुबूत आपको ये किताब पढ़ कर मिल जाएगा। इदरीस बाबर नए शायरों में एक बेचैन और तज’रबा-पसन्द शायर हैं। वह किसी एक कल बैठने को तख़लीक़कार के लिए अच्छा नहीं मानते। इसी वजह से उनके यहाँ अलफ़ाज़ से लेकर अहसास तक हर क़दम पर नैरंगी दिखाई देती है। उर्दू अदब में इदरीस बाबर की ईजाद की हुई इस सिन्फ़ का इस्तक़बाल हुआ है और बहुत से लोग अशरे लिख रहे हैं। आप भी अगर उर्दू अदब में तेज़ी से पनपती इस नई सिन्फ़-ए-सुख़न से वाक़िफ़ होना चाहते हैं तो ये किताब ज़रूर पढ़िए।
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Idrees Babar

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Shahar Is Taraf Hai

  • Author Name:

    Shaheen Abbas

  • Book Type:
  • Description: शाहीन अब्बास को पढ़ते समय उनके यहाँ मौजूद मुश्किल ख़यालों को रवानी से बयान कर देने की ख़ूबी जिस तरह उजागर होती है, वह एक ख़ुशगवार हैरत से दो-चार करवाती है। उनके कलाम में रिवायत और जदीदियत का ऐसा मिलन है जो आम तौर पर शायरी करने वाले दूसरे शायरों के यहाँ इस ख़ूबसूरती से कम ही अपनी जगह बना पाता है। शाहीन अब्बास की ग़ज़ल को पढ़े बग़ैर इस दौर की शेरी समझ को पूरी तरह ख़ुद में उतार पाना ना-मुमकिन-सा काम है। वह अपनी शायरी में शहर के बदलते हुए इनसान, जज़्बों की टूट फूट और सियासत को भी कई बार उस बारीक ऐनक से देखते हैं, जिसकी वजह से उनकी ग़ज़ल में मौजूद इशारे पढ़ने वाले पर ज़्यादा आसानी से वाज़ेह होते चले जाते हैं। वह पिछले तीस-पैंतीस बरस से ग़ज़ल की दुनिया में अपने अनोखे उस्लूब का जादू जगा रहे हैं और उनकी आवाज़ वक़्त के साथ-साथ और मज़बूत होती जा रही है। आसान ज़बान और दुश्वार ख़यालात से बुनी गई उनकी ग़ज़ल ‘इश्क़-ओ-आशिक़ी’ के अलावा वुजूद और ज़हन से जुड़े मसलों की तरफ़ भी बख़ूबी इशारे करती है। वह हर लिहाज़ से एक ना-क़ाबिल-ए-फ़रामोश शायर हैं, जिन्होंने अपने ज़माने में ही अपनी बेहतरीन शेरी और फ़िक्री दुनियाओं के नक़्शे बना लिए हैं। उनको पढ़ कर शेर कहने का सच्चा सलीक़ा सीखा जा सकता है।
Shahar Is Taraf Hai

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Shaheen Abbas

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Hauz Mein Chand

  • Author Name:

    Ali Akbar Natik

  • Book Type:
  • Description: अली अकबर नातिक़ की नज़्म जितनी मुनफ़रिद और बाँकी है, उतनी ही उनकी ग़ज़ल में ताज़गी और नुदरत है। वह एक ऐसे अदीब हैं जो एक ही समय में नस्र और नज़्म पर एक जैसी क़ुदरत रखते हैं। ग़ज़ल में उनका रुझान ज़्यादातर फ़ितरत से फूटने वाली सुन्दरता की उन निशानियों को क़ैद करने की तरफ़ है, जिन पर अक्सर शायरों का ध्यान नहीं जाता। ज़बान का असर उनके यहाँ जादुई तरकीबों और नित-नए इस्तिआरों की दुनिया आबाद करता हुआ नज़र आता है। वह अपनी ग़ज़ल से कम पहचाने गए हैं, और उनके पढ़ने वालों के लिए ये एक ऐसा ज़ाविया है, जिस पर ध्यान दिए बिना आप अली अकबर नातिक़ की तख़्लीक़ी दुनिया का सुराग़ ठीक-ठीक नहीं लगा सकते। वह अपनी ग़ज़लों में निहायत मुश्किल और पथरीली ज़मीनों पर चलते हुए फ़िक्र और बयान के ऐसे ख़ूबसूरत फूल खिलाने का हुनर जानते हैं कि पढ़ते हुए उनके हुनर पर हज़ार हैरत होती है। उर्दू शायरी के मुआसिर शायरों में अली अकबर नातिक़ पहले भी किसी तार्रुफ़ के मोहताज नहीं रहे हैं, मगर ये किताब उनकी तारीफ़ के एक नए पहलू से पढ़ने वालों को रू-शनास कराती चलती है।
Hauz Mein Chand

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Ali Akbar Natik

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Sahitya Sangam : Bharat-Vietanam

  • Author Name:

    Geetesh Sharma

  • Book Type:
  • Description: Sahitya Sangam : Bharat-Vietanam
Sahitya Sangam : Bharat-Vietanam

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Geetesh Sharma

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Duniya Roz Banti Hai

  • Author Name:

    Alokdhanva

  • Book Type:
  • Description: हिन्दी साहित्य में आलोकधन्वा की कविता और काव्य-व्यक्तित्व एक अद् भुत सतत घटना, एक ‘फ़िनोमेनॅन’ की तरह हैं। वे पिछली चौथाई सदी से भी अधिक से कविताएँ लिख रहे हैं लेकिन बहुत संकोच और आत्म-संशय से उन्होंने अब यह अपना पहला संग्रह प्रकाशित करवाना स्वीकार किया है और इसमें भी रचना-स्फीति नहीं है। हिन्दी में जहाँ कई वरिष्ठ तथा युवतर कवि ज़रूरत से ज़्यादा उपजाऊ और साहिब-ए-किताब हैं, वहाँ आलोकधन्वा का यह संयम एक कठोर वग्रत या तपस्या से कम नहीं है और अपने-आप में एक काव्य-मूल्य है। दूसरी तरफ़ यह तथ्य भी हिन्दी तथा स्वयं आलोकधन्वा की आन्तरिक शक्ति का परिचायक है कि किसी संग्रह में न आने के बावजूद ‘जनता का आदमी’, ‘गोली दागो पोस्टर’, ‘भागी हुई लड़कियाँ’ और ‘ब्रूनो की बेटियाँ’ सरीखी कविताएँ मुक्तिबोध, नागार्जुन, रघुवीर सहाय तथा चन्द्रकान्त देवताले की काव्य-उपस्थितियों के समान्तर हिन्दी कविता तथा उसके आस्वादकों में कालजयी-जैसी स्वीकृत हो चुकी हैं। 1970 के दशक का एक दौर ऐसा था जब आलोकधन्वा की ग़ुस्से और बग़ावत से भरी रचनाएँ अनेक कवियों और श्रोताओं को कंठस्थ थीं तथा उस समय के परिवर्तनकामी आन्दोलन की सर्जनात्मक देन मानी गई थीं। आलोकधन्वा की ऐसी कविताओं ने हिन्दी कवियों तथा कविता को कितना प्रभावित किया है, इसका मूल्यांकन अभी ठीक से हुआ नहीं है। श्रोताओं और पाठकों के मन-मस्तिष्क में प्रवेश कर उन्होंने कौन-से रूप धारण किए होंगे, यह तो पता लगा पाना भी मुश्किल है। कवि आलोचक यदि चाहते तो अपना शेष जीवन इन बेहद प्रभावशाली तथा लोकप्रिय प्रारम्भिक रचनाओं पर काट सकते थे—कई रचनाकार इसी की खा रहे हैं—किन्तु उनकी सर्जनात्मक प्रतिभा को यह मंजूर न था तो नितान्त अप्रगल्भ तरीक़े से अपना निहायत दिलचस्प, चौंकानेवाला और दूरगामी विकास कर रही थी। उनकी शुरुआती विस्फोटक कविताओं के केन्द्र में जो इनसानी क़दरें थीं, वे ही परिष्कृत और सम्पृक्त होती हुई उनकी ‘किसने बचाया मेरी आत्मा को’, ‘एक ज़माने की कविता’, ‘कपड़े के जूते’ तथा ‘भूखा बच्चा’ जैसी मार्मिक रचनाओं में प्रवेश कर गईं। यों तो आलोकधन्वा हिन्दी के उन कुछ कवियों में से एक हैं जिनकी काव्य-दृष्टि तथा अभिव्यक्ति हमेशा युवा रहती हैं (और इसलिए वे युवतर कवियों के आदर तथा आदर्श बने रहते हैं), किन्तु लगभग अलक्षित ढंग से उन्होंने क्रमशः ऐसी प्रौढ़ता प्राप्त की है जो सायास और ओढ़ी हुई नहीं है और बुज़ुर्गियत की मुद्रा से अलग है। विषय-वस्तु, शिल्प, शैली तथा रुझानों में एक साथ सातत्य तथा विकास, सरलता तथा जटिलता, ताज़गी और परिपक्वता देखनी हों तो ‘छतों पर लड़कियाँ’, ‘भागी हुई लड़कियाँ’ और ‘ब्रूनो की बेटियाँ’ को इसी क्रम में पढ़ना दिलचस्प होगा जिनमें भारतीय किशोरियों/स्त्रियों के स्निग्ध और त्रासद जीवन-सोपान तो हैं ही, आलोकधन्वा के कवि-जीवन तथा काव्य-चेतना के अग्रसर चरण भी साफ़ नज़र आते हैं। अभिव्यक्ति के सभी ख़तरे उठाने की मुक्तिबोध की जिस जागरूक सर्जनात्मक प्रतिज्ञा को कुछ कवियों और अधिकांश आलोचकों ने एकांगी साहसिकता की पिष्टोक्ति बना डाला है, उसे आलोकधन्वा ने उसके सभी अर्थों में सही समझकर अपनी पिछली कविताओं से परे जाने का फ़ैसला किया है। किसी कवि के लिए अभिव्यक्ति का एक सबसे बड़ा जोखिम अपनी ही पिछली छवि में आगे या अलग जाने में रहता है और वह ऐसा किसी योजना या कार्यक्रम के तहत नहीं करता, बल्कि उसके द्वारा जिया तथा देखा जा रहा जीवन तथा उस जीवन की उसकी समझ उससे वैसा करवा ले जाते हैं। जब ‘गोली दागो पोस्टर’ और ‘जनता का आदमी’ का कवि एक असहायता जो कुचलती है और एक उम्मीद जो तकलीफ़ जैसी है तथा एक ऐसे अकेलेपन, एक ऐसे तनाव जिसमें रोने की भी इच्छा हुई लेकिन रुलाई फूटी नहीं की बात करता है तो वह दैन्य या पलायन नहीं, बल्कि उस विराट मानवता की इकाई होने का ही स्वीकार है जिसके ऐसी तकलीफ़ों से गुज़रे बिना कोई बदलाव सम्भव नहीं है, क्योंकि यही एहसास इस दुनिया को फिर से बनाने की संघर्ष-भरी अभिलाषा के केन्द्र में है। आलोकधन्वा ने शुरू नागार्जुन की परम्परा में किया था और जहाँ वे आज खड़े हैं वह नागार्जुन और शमशेर बहादुर सिंह की मिली-जुली ज़मीन लगती है जिसे उन्होंने दोनों वरिष्ठों की अलग-अलग उर्वरता से आगाह रहते हुए अपने समय और काव्य-समझ के मुताबिक़ अपने लिए तैयार किया है। आलोकधन्वा में एक वैश्विक तथा भारतीय दृष्टि तो हमेशा से थी, धीरे-धीरे वह अपने आसपास के तथा व्यापक सचराचर पर भी गई। हम कह सकते हैं कि यदि पहले वे मात्र सिंहावलोकन के कवि थे तो अब उनकी निगाह चीज़ों और ब्योरों में भी जाती है और उनके ज़रिए वे आदमी और व्यक्ति होने के गहरे एहसास तक पहुँचते हैं और उसे अपनी कविता में चरितार्थ करते हैं। उनके काव्य-संसार में अब इनसान और इनसानी सरोकार तो हैं ही, पेड़, पगडंडी, पतंग, पानी, रास्ते, रातें, सूर्यास्त, हवाएँ, बिकरियाँ, पक्षी, समुद्र, तारे, चाँद भी हैं। वे पगडंडी, चौक, रेल जंक्शन से निजी और सार्वजनिक दुनिया में पहुँचते हैं, थियेटर, मैटिनी शो और पहली फ़िल्म की रोशनी में स्मृतियों में जाकर अपनी संवेदना तथा सृजनशीलता के स्रोत खोजते-पाते हैं और समुद्र की आवाज़ उनके लिए किसी रहस्यमय अनादि-अनन्त की नहीं, आन्दोलन और गहराई की है। अति-मुखरता के लिए तो इसमें अवकाश ही नहीं है, आविष्ट भावातिरेक से भी वे अपनी ऐसी कविताओं में बचे हैं। आलोकधन्वा ने एक ऐसी भाषा और ऐसी तराशी हुई अभिव्यक्ति हासिल की है जिनमें सभी अतिरिक्त और अनावश्यक छीलकर अलग कर दिया गया है और तब ‘शरद की रातें/इतनी हलकी और खुली/जैसे पूरी की पूरी शामें हों सुबह तक/जैसे इन शामों की रातें होंगी/किसी और मौसम में’ या ‘समुद्र मुझे ले चला उस दोपहर में/जब पुकारना भी नहीं आता था/जब रोना ही पुकारना था’ सरीखी क्लासिकी रंगत की पंक्तियाँ प्राप्त होती हैं। यह अकारण नहीं है कि कवि मीर का ज़िक्र करता है। आलोकधन्वा ‘जो घट रहा है’ उसके कवि थे और रहेंगे लेकिन अब उसके भी प्रवक्ता हैं जिसका ‘होना’ सामान्यतः नहीं माना-पहचाना जाता। उन्हें उम्मीद है कि ‘कभी लिखेंगे कवि इसी देश में/इन्हें भी घटनाओं की तरह’ जबकि सच यह है कि वे स्वयं उस सबको घटना बनाने की क्षमता प्राप्त कर चुके हैं जो निश्चेष्ट, अमूर्त तथा अचल लगता है। चेतन में चेतना तो सभी देख लेते हैं, उसके साथ जड़ में चैतन्य को स्थापित कर पाना आलोकधन्वा जैसे अनन्य, दुस्साहसी सर्जक के बूते की ही बात है जो इस प्रक्रिया में अपनी प्रतिबद्धता को सम्पूर्ण बनाने की राह पर अग्रगामी नज़र आता है। —विष्णु खरे
Duniya Roz Banti Hai

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Aadmi Ki Zindagi

  • Author Name:

    Fahmida Riaz

  • Book Type:
  • Description: ज़िन्दगी से आदमी की दोस्ती मुमकिन नहीं आदमी से इस क़दर, मुख़्तलिफ़ है ज़िन्दगी ज़िन्दगी से वस्ल करना चाहता है आदमी आदमी गर ख़ुद को बदले, या बदल दे ज़िन्दगी ख़त्म हो जाएगी ख़्वाहिश जानता है आदमी.
Aadmi Ki Zindagi

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Fahmida Riaz

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Sanvali Ibaaratein

  • Author Name:

    Anupam Singh

  • Book Type:
  • Description: ‘साँवली इबारतें’ की कविताएँ एक ऐसे समय में लिखी गई हैं, जिसमें न्याय, सौन्दर्य और मनुष्य जीवन को सँवारने वाली कोमलता का विलोप हो रहा है। ऐसे में कविता लिखना मृत्यु पाने का निमंत्रण भी बन सकता है। समानता की लालसा रखने वाले लोगों पर रोज़ गोलियाँ चल रही हैं, फिर भी कवि अपने लिए इससे बेहतर काम नहीं खोजना चाहती। कविता ही उसका घर है; यहीं वह अपने मित्रों, शत्रुओं और मृत्यु को भी आने का निमंत्रण देती है। वह अपने शहर, मोहल्ले या देश से भी निष्कासित नहीं होना चाहती। वह इसी शहर में रहेगी जहाँ वह रहती है, जहाँ बसने में किसी ईश्वर ने उसकी मदद नहीं की बल्कि पड़ोसी, अजनबी लोग, यहाँ तक कि यहाँ के पेड़-पौधे ही ज़्यादा हितकारी रहे। इस जुझारू जीवन-अनुभव के कारण वह उन लोगों को सलाह देती है जो कविता को किसी तमग़े की तरह पहनना चाहते हैं, उसके जोखिम को नहीं उठाते। इस अन्धकार भरे समय में प्रेम करना भी जोखिम-भरा काम है, उतना ही जितना कविता लिखना लेकिन कवि की पूरी संलग्नता है इस पदार्थीय जीवन से। वह देखती और समझती है कि यह सारी प्रकृति, कायनात सारी, अपने जगरूप में बेहद सुन्दर है और मनुष्य के लिए कल्याणकारी भी। वह आश्वस्त है कि उसकी आँखों के जल में यह रोशनी-भरा संसार अपना जगरूप देख सकता है जैसे कि मनुष्य अपने सुन्दर विचारों की रूपरेखा अपने सामाजिक संघर्षों के ताप से बनते हुए देख सकता है। इस संग्रह की कविताएँ अपनी भाषा और कथ्य में इतनी सँवरी हुई हैं कि उन्हें परिपक्व कहना भी उनके कवित्व को संकुचित करने जैसा होगा। कवि अपनी राजनैतिक चेतना का विस्तार हवाओं को अपनी देह सौंपने का निर्णय लेकर करती है जो समकालीन अधिनायक तंत्र को नई चुनौती देने जैसा है। ये कविताएँ हमें नई राह पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। हमारे समय की इस स्त्री कवि में इतना आत्मविश्वास और मेधा है कि यदि वह सबको साथ लिये चले तो सब चल भी पड़ेंगे उजले भविष्य की ओर। —सविता सिंह
Sanvali Ibaaratein

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Anupam Singh

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Yoon Hee

  • Author Name:

    Idrees Babar

  • Book Type:
  • Description: इदरीस बाबर ने अपनी ग़ज़ल के ज़रिये नई शायरी को दरयाफ़्त किया है। उनकी किताब ‘यूँ ही’ की तमाम ग़ज़लों की ख़ासियत ये है कि वह ग़ज़ल के पुराने और घिसे-पिटे मज़ामीन को दोहराती नहीं हैं, बल्कि जदीद ज़िन्दगी से जुड़े इंसानी मामलात को अपना मौज़ू बनाती हैं। अपनी ग़ज़ल में वह उर्दू से वाबस्ता नफ़ासत और नज़ाकत को नज़र अन्दाज़ करते हुए ऐसे अलफ़ाज़ के इस्तेमाल करने में भी कोई बुराई महसूस नहीं करते, जिनको बहुत पहले मेयारी ज़बान के तसव्वुर ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उनके अन्दर का ग़ज़ल-गो हर तरह से समाज की बदलती हुई ज़हनी करवट, सियासी निज़ाम में धँसी हुई इनसानी चीख़ और रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इश्क़ करते, भटकते, बेरोज़गार और बा-सलाहियत नौजवान की बे-चैनी से वाक़िफ़ है। इदरीस बाबर के लिए कहा जा सकता है कि ग़ज़ल में ज़बान और बयान के जितने तज'रबे उन्होंने ज़फ़र इक़बाल के बाद किये हैं, वह अपने पहले शेरी मजमूए में किसी और शायर ने शायद ही किये हों। इस तरह वह जदीदतरीन ग़ज़ल में वाक़ई अनोखे लहजे के एक बा-कमाल शायर के तौर पर ख़ुद को मनवाने की भरपूर ताक़त रखते हैं। उनकी इस किताब से आपको उनके नएपन का महज़ कुछ पन्ने पलटते ही अन्दाज़ा हो जाएगा।
Yoon Hee

Yoon Hee

Idrees Babar

20% off

199

₹ 159.2

Door Se Dikh Jati Hai Barish

  • Author Name:

    Vijay Rahi

  • Book Type:
  • Description: हिन्दी कविता के अत्यन्त विस्तृत देश में अब तक शामिल न हो सके ढूँढाड़-माड़ जीवन को पूरी गरिमा और रागी आत्मीयता के साथ लेकर आए विजय राही मूलतः वृत्तान्त के कवि हैं। वे त्रिलोचन, केदारनाथ सिंह, भगवत रावत, ऋतुराज, अरुण कमल, प्रभात आदि कवियों की धारा में अपना कवि-कर्म कर रहे हैं। साधारण वृत्तान्त का कविता में बदलना इस बात पर निर्भर है कि कवि को मर्म की कितनी पहचान है और वह आम भाषा की माटी को मार्मिकता के जल से कैसे मिलाता है। कहना न होगा ‘बहन’ आदि कविताओं में विजय यह काम किसी सिद्ध कलावंत की तरह कर पाए हैं। मार्मिकता मूलत: और अन्ततः करुणा है। करुणा सार्वभौमिक, सार्वदेशीय और सार्वकालिक नहीं होती। समय, देश, वर्गीय सामाजिक अवस्थिति के अनुसार ही करुणा मनुष्य को छूती है। इनके परिवर्तन से करुणा के प्रति मनुष्य का बर्ताव बदलता जाता है। विजय राही जैसे युवा कवि को अपने देशज जीवनानुभवों से इसकी गहरी समझ है। ‘बहन’ कविता में इसका जटिल विडम्बनात्मक प्रकटीकरण, अतिपरिचित दिखने के बावजूद अचरज में डालता है। पुरुषवाचक के मन में ससुराल में नाख़ुश बहन के प्रति आक्रोश-भरी करुणा है परन्तु माँ दुखी होने के बावजूद उसे छुपाने और उसका उलट दिखाने के लिए विवश है। दुखद वास्तविकताओं पर परदा सामंती पितृसत्तात्मक समाज में गँवई स्त्री-जीवन की विडम्बनाओं की एक झलक-भर है। विजय राही की इन कविताओं में वृत्तान्त दो जीवनवृतों—गँवई जीवन और स्त्री जीवन—को विस्तार से प्रकट करता है। दोनों वृत्तों में कविताएँ एक प्रकार की पृथक शृंखला भी हैं और परस्पर सम्बद्ध भी। जैसे किसी एक ही महाख्यान के दो स्वतंत्र परन्तु सम्बद्ध अध्याय। वृत्तान्त यानी यथार्थ के प्रकटीकरण का सबसे सहज और पारम्परिक अस्त्र। अति पुरातन और अति नवीन। —आशीष त्रिपाठी
Door Se Dikh Jati Hai Barish

Door Se Dikh Jati Hai Barish

Vijay Rahi

20% off

250

₹ 200

Neela Phool

  • Author Name:

    Alokeshwar Chabdal

  • Book Type:
  • Description: सच्ची है या है यह कच्ची, कैसी अपनी प्रीत लिखो, उसने आज कहा है मुझसे, मुझ पर कोई गीत लिखो। ‘नीला फूल’ गीतों का ऐसा संग्रह है जिसमें पारिवारिक सम्बन्धों से लेकर देश, ईश्वर-भक्त‌ि, तीज-त्योहार और मनुष्य की भिन्न-भिन्न मनस्थ‌ित‌ियों को लेकर लिखे गए भावप्रवण गीत संकलित हैं। गीतों को कव‌िता का वह रूप समझा जाता है जो मन की सबसे कोमल भावनाओं को ऐसी शैली में व्यक्त करता है जिससे हमारी अभ‌िव्यक्त‌ि एक तरल और याद रह जानेवाले रूप में हमेशा के लिए हमारे पास रह जाती है। वे हमें याद रहते हैं और ऐसे अवसरों पर हमारा साथ देते हैं जब हम किसी निर्वचनीय भावना को व्यक्त करना चाहते हैं। इस पुस्तक में शामिल गीतों में सरल और प्रवहमान शब्दावली में अत्यन्त अर्थपूर्ण ढंग से ऐसे विषयों को भी गीत में ढाल दिया गया है जो सामान्यतः गीतों में स्थान नहीं पाते, ‘अदरक वाली चाय’ शीर्षक गीत की ये पंक्त‌ियाँ दृष्टव्य हैं— धीमी-धीमी लौ में हमने, मन की बात उबाली जनम-मरण की सौगन्धों की, ताजी तुलसी डाली दोनों मिलकर लिख दें आओ, एक नया अध्याय देखो तुमको बुला रही है, अदरक वाली चाय कव‌ि के अनुसार, ‘राम मेरे गीतों की प्रेरणा भी हैं, विषय भी और मेरे गीतों के अर्थ भी।’ इसलिए राम, उर्मिला, तुलसी, कृष्ण आदि को सम्बोधित-समर्पित गीत यहाँ हैं तो होली, दीवाली और ईद का उत्सव मनाने वाले गीत भी हैं। जब तक आँसू हिचकी सिसकी, दुख नैराश्य निराशा है जब तक मुस्कानें रूठी हैं, जब तक जग दुर्वासा है मैं घावों पर गीत लगाने, की सौगन्ध उठाता हूँ! गीत प्रेम के गाता हूँ मैं, गीत प्रेम के गाता हूँ!!
Neela Phool

Neela Phool

Alokeshwar Chabdal

20% off

350

₹ 280

Laanat Ka Pyala

  • Author Name:

    Adnan Kafeel Darwesh

  • Book Type:
  • Description: अदनान ‘शाम के पृष्ठ पर एक असम्भव की तरफ़’ खुलते क​वि हैं। कविता में ऐसी डूब विरल है। समकालीन संकटों के साये में यह कवि सिर्फ़ अपने देस, मुलुक और अपनी ज़बान का नहीं—अचम्भित और दबी-सहमी मनुष्यता का गहन पर्यवेक्षक और उसकी मरम्मत में मुस्तैद कारीगर भी है। अपने सन्ताप और अपनी घुटन को अदनान ने इतना कसा, इतना भुगता, इतना तपाया है कि उसकी निष्पत्ति में ही ऐसी कविता पैदा हो सकती है जिसमें ‘झाड़ियों सी जलती है रात।’ उस्ताद अमीर ख़ान कहते थे कि नग़्मा वही नग़्मा है जिसे रूह सुने और रूह सुनाए। अपने मर्म में संगीत का रुख़ करने वाली अदनान की कविता भी सच्चाई की इस असाधारण कसौटी पर खरा उतरती महसूस होती है। ‘लानत का प्याला’ संग्रह की कविताओं का शीर्षक—क्रम देखो तो वो भी मानो दूर तक खिंची चली आती एक लम्बी कविता है या अलग-अलग कविताओं की लड़ी। प्रेम और उदासियों से रची-बिंधी और नये-नये चक्कर बनाती कविताओं में नागरिक जीवन के तहस-नहस होने का दर्दनाक, ऐतिहासिक सिलसिला इस कदर बेकली और रुंधी हुई ख़ामोशी में दर्ज हुआ है कि पढ़ते हुए एक गहरी टूट, एक तीखी शर्मिंदगी दिल में पैबस्त हुई जाती हैं। उनकी चोटें हमारी याददिहानी हैं। आने वाली पीढ़ियाँ पढ़कर जानेंगी कि उनका कवि सिर्फ़ कविता नहीं कर रहा था। वह प्रकांडता और पांडित्य की धज से फूटने वाला कवि नहीं, सुदूर स्मृति के देहातों से टूटा-निकला एक कवि है जो यातना और दुष्चक्र का एक असाधारण बिंब बना रहा है, जिसे मालूम है प्रचंड आँधियाँ चल रही हैं और नयी गर्जनाएँ उसकी ओर लपकती आ रही हैं, वह कुछ-कुछ ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ़ सॉल्टियूड’ उपन्यास के आत्मनिर्वासित और अकेले, बूढ़े जिप्सी कीमियागर मेल्केदिएस जैसा है जिसे दुनिया के विकट यथार्थों जितना ही यक़ीन अपनी नाज़ुक, अपार कल्पनाओं पर है लेकिन वो अवश्यंभाविता के लिए नहीं मानवीय प्रयत्न और जिजीविषा के लिए खड़ा है। अदनान को यक़ीनन कविता से किसी सर्वकालिक महानता का तोहफ़ा नहीं चाहिए, जो चाहिए वो यहाँ पेश है! —शिवप्रसाद जोशी
Laanat Ka Pyala

Laanat Ka Pyala

Adnan Kafeel Darwesh

20% off

299

₹ 239.2

The Poetry category on Rachnaye brings together voices that compress emotion, thought, rhythm, and language into their most powerful form. This shelf spans classical poetry, modern verse, experimental forms, regional traditions, and contemporary poetic movements across India and the world.

What readers will discover here:

  • Classical Indian poetry: bhakti, sufi, riti, courtly verse

  • Modern and contemporary poetry addressing love, politics, caste, identity, migration, gender, and urban life

  • Regional poetry traditions in Hindi, Marathi, Bengali, Tamil, Malayalam, Urdu, Kannada, Odia, Punjabi, Assamese, and more

  • Ghazals, nazms, dohas, abhangs, vachanas, free verse, and prose poetry

  • Poetry anthologies, collected works, and debut collections

  • Translations of major Indian poets across languages

  • Poetry used in university syllabi and literary study

What types of poetry books are available on Rachnaye?

You’ll find classical poetry, modern verse, regional poetry, ghazals, free verse, poetry anthologies, and translated works across Indian languages.

Are poetry books available in Indian languages?

Yes. Hindi, Marathi, Bengali, Tamil, Malayalam, Urdu, Kannada, Odia, Punjabi, Assamese, and English poetry collections are available.

Are modern and contemporary poets included?

Absolutely. The category features both established poets and contemporary voices addressing current social and personal themes.

Do you offer translated poetry?

Yes. Many poetry books include translations that allow readers to explore poetic traditions across languages.

Is poetry suitable for new readers?

Yes. Poetry’s short forms make it accessible. Readers can begin with anthologies or modern, conversational verse.

Are these books used for academic study?

Many titles are part of school and university literature syllabi, especially in Indian languages.

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