Contemporary Fiction

Contemporary Fiction

Kamkaji Mahila Hostel

  • Author Name:

    Kalpna Varma

  • Book Type:
  • Description: जरूरी नहीं कि तूफान से सब कुछ अस्त-व्यस्त ही हो जाए। तूफान से रास्ता साफ भी होता है। यह सकारात्मकता मेरे भीतर उठते तूफानों से दृश्यों को साफ करने का काम करती है, शब्दों की ताकत से परिचय कराती है। शब्द घाव भी करते हैं और घाव को भरते भी हैं, क्योंकि शब्दों का अपना तापमान होता है, उनमें कू​लिंग और हीटिंग का सन्तुलन बनाना लेखकीय दायित्व होता है। इसलिए जब भी मैं कहने के लिए उतावली हुई हूँ शब्दों का चयन मैंने संभल कर किया है। भावनाओं, संवेदनाओं और अनुभवों ने जो तानाबाना बुना उससे कहानी को आकार दिया है। कहानियों में ठहरे हुए पलों की कहानी है, उम्र से परे वैचारिक मित्रता है, जिन्दगी के बदलते हुए दृश्य हैं, जानने-मानने-चाहने जैसे विरोधाभास हैं। गलत दिशा में भाग रही भीड़ का हिस्सा न बनकर मैंने सही दिशा मे अकेले चलने को बेहतर माना है।
Kamkaji Mahila Hostel

Kamkaji Mahila Hostel

Kalpna Varma

250

₹ 200

Jalti Hui Basti

  • Author Name:

    Basudev Sunani

  • Book Type:
  • Description: ओड़िशा के एक गाँव में उच्च जाति के लोग दलितों की बस्ती में आग लगा देते हैं। नतीजतन चालीस परिवार अपनी ज़मीन से एक झटके में उखड़ जाते हैं। इस तरह एक तरफ़ जहाँ सदियों से जड़ जमाए बैठी जाति-व्यवस्था का क्रूर चेहरा झलक उठता है वहीं दूसरी तरफ़ बेघर हो चुके दलितों का कठिन-कठोर जीवन-संघर्ष शुरू हो जाता है। ‘जलती हुई बस्ती’ उपन्यास इन्हीं दोनों छोरों के बीच पसरे यथार्थ को आधार बनाकर भारतीय समाज के भविष्य की सम्भावनाओं की तलाश करता है।

    गाँव से विस्थापित होकर एक शहर में ठौर पाने वाला मकारू बरसों बाद जब अपने पुश्तैनी गाँव की यात्रा पर निकलता है तो पीढ़ी-दर-पीढ़ी भुगते गए भेदभाव, अपमान और उत्पीड़न की स्मृतियाँ सजीव होने लगती हैं। वह उस पीड़ा और सदमे को फिर से महसूस करता है जिन्हें वह हमेशा बिसरा देना चाहता था। इस तरह उसकी यह यात्रा महज अपनी जड़ों की तलाश नहीं, जातिगत हिंसा और उसकी गहरी जड़ों की पड़ताल बन जाती है— और, उस गतिशीलता का संकेतक भी जिस पर मकारू और उस जैसे दूसरों का स्वप्न निर्भर है।

    उपन्यास आगाह करता है कि जब तक जाति रहेगी, तब तक उसकी आग हमारे इतिहास और भविष्य को खत्म करती रहेगी। इसका सन्देश स्पष्ट है—जाति के दायरे से बाहर होकर ख़ुद को जानना आज़ादी की दिशा में पहला क़दम है।

    ओड़िया दलित साहित्य की एक प्रतिनिधि कृति! अवश्य पठनीय!  

Jalti Hui Basti

Jalti Hui Basti

Basudev Sunani

350

₹ 280

Bhoolana

  • Author Name:

    Chandan Pandey

  • Book Type:
  • Description: दिनोंदिन भीषण होते समय को भाषा में अंकित करने के संघर्ष को जीनेवाली, चन्दन पाण्डेय की कहानियों का बहुचर्चित संग्रह है—भूलना। हम भूल जाने लगे हैं, बिलकुल सामने बैठे को, जरा-सी दूरी पर वहाँ मरते हुए आदमी को। हमारी आँखें खुली हैं, पर उनके भीतर जो दृश्य नाच रहे हैं वे हमारे भीतर चल रहे विध्वंस के हैं, वे हमें किसी तक ले नहीं जाते, अपने अलावा किसी और का नहीं बनाते, और अपना भी कितना! संग्रह की शीर्षक कहानी उस विनाश का दस्तावेज़ है जिसके बीच हम कुछ भी न देखते, कुछ भी न याद रखते हुए आज आ खड़े हैं। यह अकारण नहीं कि चन्दन पाण्डेय की कथा-भाषा रस का सृजन नहीं करती। एक रचनाकार के रूप में वह इस विनाश को देख पा रहे हैं और उसे पूरा का पूरा इस तरह हम तक पहुँचा देना चाहते हैं कि उसकी निर्णायक भयावहता को हम समझ सकें। संग्रह की पहली कहानी प्रेम की हत्या के बारे में है—एक योजनाबद्ध हत्या—ख़बरिया अर्थ में योजनाबद्ध नहीं—संस्कृति की ज़मीन में दबी प्रेम-विरोध की सुरंगों की योजना जिसको अचूक बनाने पर यह समाज लगातार काम करता रहता है, और अर्थव्यवस्था के हिलते पाये जिसमें अपनी मददगार भूमिका निभाते हैं। इनके अलावा ‘नकार’, ‘परिन्दगी है या नाकामयाब है’, ‘सुनो’ और ‘सिटी पब्लिक स्कूल, वाराणसी’ शीर्षक कहानियाँ पुनः जीवन के किसी हलक़े या उम्र के किसी पड़ाव पर समाज की संरचना में स्वीकृति पातीं विसंगतियों को उनके सभी आयामों के साथ चिन्हित करती हैं। अपने कथाकार की क्षमता को रेखांकित करता यह संग्रह अविस्मरणीय है।
Bhoolana

Bhoolana

Chandan Pandey

299

₹ 239.2

Yuddh Aur Shanti (1-4)

  • Author Name:

    Leo Tolstoy

  • Book Type:
  • Description: ‘युद्ध और शान्ति’ को अनेक विद्वानों ने दुनिया का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास माना है। इसमें तोल्स्तोय ने नेपोलियन के रूस पर आक्रमण को आधार बनाकर रूसी जनजीवन का महाकाव्य रचा है। नेपोलियन का आक्रमण न सिर्फ शासक और सैनिकों को आलोड़ित करता है बल्कि किसानों, अभिजातों, सामान्य नागरिकों आदि विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को उनके इतिहास, वर्तमान और संस्कृति की समस्याओं के सामने खड़ा कर देता है। युद्ध के बहाने तोल्स्तोय एक ऐसी त्रासदी को रेखांकित करते हैं जो किसी एक देश अथवा समाज की नहीं बल्कि पूरी मानवजाति की समस्या है।
Yuddh Aur Shanti (1-4)

Yuddh Aur Shanti (1-4)

Leo Tolstoy

1499

₹ 1199.2

Bansava Phoole Ujiyaar

  • Author Name:

    Soni Pandey

  • Book Type:
  • Description: ‘बँसवा फूले उजियार’ एक सपने की जिन्दा तफसील है। यहाँ आपको स्त्री सशक्तता की जमीनी हकीकत मिलेगी, जिसमें गाँव और कस्बाई समाज की स्त्री अवहेलना और दमन की कहानियाँ हैं। उपन्यास में मौजूद स्त्रियों की चेतना संघर्ष की राह चल हाशिए के समाज का दम-खम बनकर निखर गई है। सामाजिक बेहतरी के राजनीतिक आर्थिक फार्मूलों में छिपी सत्ताओं की नीयत के मुकाबले खड़ी हुई स्त्रियों में तारा है, ज्योति है, एक कामयाब झलक में राजकुमारी भी है। इन स्त्रियों के साहस का पक्ष बनकर खड़ा होने वाला समाज बेशक नहीं है, क्योंकि कोई भी दुनिया सहसा नहीं बदलती मगर धीरे-धीरे ही सही अपने नाभिक में वह परिवर्तन की आग जलाए रखती है। लेखिका ने बाँसफोड़ जैसी तिरस्कृत जाति के हुनर से जुड़कर एक सर्वव्यापी रूपान्तरण की हाइपोथीसिस को बड़े एहतियात से प्रस्तुत किया है। कथा में बदले हुए पुरुष भी हैं, इसलिए मुक्ति कभी अकेले में नहीं मिलती जैसे मुक्तिबोधीय निष्कर्ष की भी दखल यहाँ है और है अछूती प्रकृति की सुन्दरता का विस्तार जिससे जुड़कर फूले हुए बाँस नई और आज़ाद दुनिया का रूपक बन जाते हैं। इस कथा के मार्मिक पहलू असरदार हैं। जीवन्त सुखान्त की कथा है यह। —चन्द्रकला त्रिपाठी
Bansava Phoole Ujiyaar

Bansava Phoole Ujiyaar

Soni Pandey

250

₹ 200

Sharbat

  • Author Name:

    Lucky Rajeev

  • Book Type:
  • Description: रज़िया ने चन्द्रप्रभा से आखिर में बस यही कहा, “न जाने समय और तारीख हमें कैसे मूल्यांकित करेगी क्रूर, ख़ुदगर्ज़ अमीरों या दकियानूसी उलेमा के नज़रिए से...या आम आदमी की हिफाज़त, ख़ुशी और ख़ुशहाली के लिए काम करने वाली सुलतान के रूप में...” अभी वह इतना कह ही पाई थी कि एक ज़बरदस्त वार तलवार का हुआ और ख़ून का ऊँचा फव्वारा फूट गया...देखते ही देखते रज़िया का सर धड़ से अलग हो गया...जैसे ही चन्द्रप्रभा के मुँह से हाय राम निकला हिन्दू भीड़ एकदम से सकते में आ गई और जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मरने वाली रज़िया सुल्तान थी तब वे अफ़सोस में डूब गए...मगर अफ़सोस के अलावा अब कर भी क्या सकते थे? राजसत्ता शायद किसी की भी सगी नहीं होती और न जाने क्यों जाने-अनजाने ही कैसे-कैसे लोगों की शत्रुता आमंत्रित कर लेती है?

     

Sharbat

Sharbat

Lucky Rajeev

299

₹ 239.2

Sanyasi Ke Naam Patra

  • Author Name:

    Neela Prasad

  • Book Type:
  • Description: पत्र अन्त:करण की ओर खुलने वाली खिड़कियाँ होते हैं। उनसे किसी व्यक्ति के जीवन और संसार के उस हिस्से का साक्षात्कार होता है जो उसके इतर जाहिर जीवन-संसार की ओट में रह गया होता है। इस तरह वे अज्ञात-अलक्षित को उद्घाटित करने का जरिया बनते हैं जो सम्बद्ध व्यक्ति के व्यक्तित्व और कृतित्व को समग्रता में समझने में सहायक होता है। ‘संन्यासी के नाम पत्र’ ऐसी ही एक पुस्तक है जिसके केन्द्र में हैं फ़ादर कामिल बुल्के। समर्पित मिशनरी और रामकथा और तुलसीदास के मान्य विशेषज्ञ ही नहीं, अंगरेजी-हिन्दी शब्दकोश के प्रणेता के रूप में भी उनकी कीर्ति से प्राय: लोग परिचित होंगे, लेकिन एक पुत्र, एक भाई, एक शिष्य और एक मित्र के रूप में उनके व्यक्तित्व की विशिष्टता से अधिकतर लोगों का परिचय नहीं होगा। कारण, भारत भूमि पर फ़ादर का आगमन ही तब हुआ जब वे मिशनरी हो चुके थे और उसके लिए आवश्यक नियम—परिवार से विदाई—का पालन कर चुके थे। यह संग्रह फ़ादर के संन्यासी बनने के बाद उनके परिजनों द्वारा उनको लिखे गए पत्रों का है जिसमें उनका पारिवारिक इतिहास और संन्यासी जीवन, दोनों के ऐसे प्रसंग सामने आते हैं जिनसे उनके दृढ़ और उदात्त व्यक्तित्व की झलक बार-बार मिलती है। इन पत्रों से यह भी पता चलता है कि फ़ादर के संन्यास ग्रहण करने का ‘दुख’ सहकर उनके परिवार ने किस प्रकार उनका सहयोग किया। जैसा कि उनकी माँ ने उन्हें सम्बोधित पत्र में लिखा है—हम लोगों के लिए जितना दुख मसीह ने उठाया था, उसकी तुलना में यह तो एक छोटी बात थी। (9 सितम्बर, 1931)
Sanyasi Ke Naam Patra

Sanyasi Ke Naam Patra

Neela Prasad

399

₹ 319.2

Meghdoot Ki Raah Ke Pathik

  • Author Name:

    Manisha Kulshreshtha

  • Book Type:
  • Description: ‘मेघदूत की राह के पथिक’ कालिदास की अमर कृति मेघदूत के साथ एक सघन रचनात्मक सम्वाद है—प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक जैकब एल मोरेनो की उस स्थापना के संदर्भ में जो रचनात्मकता को शारीरिक-मानसिक सक्रियता और सामुदायिक पारस्परिकता के साथ जोड़ती है। यानी रचनात्मकता वह जो हर तरह की जड़ता का भंजन करे। इस दृष्टिकोण से देखें तो यह कृति बन्द कमरे का विशुद्ध मानसिक और किताबी सम्वाद नहीं, जीवन और प्रकृति के प्रकट और प्रच्छन्न के रमता योगी कालिदास के साथ एक जीवन्त यात्रात्मक जुगलबन्दी है। जिन मार्गों पर चलकर कालिदास ने मेघदूत का भौगोलिक आधार पाया होगा और कथा और जीवन के जिन धुँधलकों में बिखरे उच्छ्वासों को अन्तर्भूत कर ‘कविताया’ होगा, मनीषा रामगिरि और अलकापुरी के बीच उच्छ्वसित धुँधलके में बिखरे उन सारे सम्भावित मार्गों पर चलीं और आज के कण्ठ में अवशिष्ट धुनें और लोककथाएँ सुनते-चुनते लौटीं; तब कहीं जाकर इस सम्वाद को सम्भव किया। जब आप प्रकाशित पृष्ठों से गुज़रेंगे तो पाएँगे कि यहाँ भौगोलिक ही नहीं ज्ञानमार्ग की यात्रा से हासिल निधियाँ भी हैं। कालिदास की ही तरह यहाँ भी मिथक और यथार्थ के बीच विश्वसनीय आवाजाही की गई है और पार्थिव और प्राकृतिक पता वाला साहित्य और इतिहास का एक सुन्दर साझा लोक भी रचा गया है। भौगोलिक मेघ-मार्ग और सांस्कृतिक मेघदृष्टि को समझने के लिए यह एक पुस्तक एक रम्य और रोचक शाहकार है। —डॉ. विनय कुमार
Meghdoot Ki Raah Ke Pathik

Meghdoot Ki Raah Ke Pathik

Manisha Kulshreshtha

399

₹ 319.2

Koi Ek Syeda

  • Author Name:

    Neha Dixit

  • Book Type:
  • Description: ‘कोई एक सईदा’ किताब में नेहा दीक्षित ने एक साधारण और बेनाम भारतीय मह‌िला की कहानी असाधारण ढंग से लिखी है। बाबरी मस्ज‌िद ध्वंस के चलते हुए दंगों के बाद सईदा अपने छोटे बच्चों और पति के साथ बनारस को छोड़कर दिल्ली आ जाती है। एक ग़रीब विस्थापित मज़दूर के रूप में वह दिल्ली में अनेक कामों को आज़माती है—जींस के धागों की तुरपाई से लेकर नमकीन बनाने तक, बादामों से गिरी निकालने से लेकर चाय की छलनी बनाने तक—पचास से ज़्यादा काम, ताकि उसकी घरेलू ज़रूरतें पूरी होती रहें। ऐसे काम जिनमें एक दिन की छुट्टी लेने का मतलब है काम से हाथ धो बैठना। एक दशक के शोध और लगभग नौ सौ लोगों से साक्षात्कारों के बाद तैयार हुई इस किताब में हमें अनेक तरह के लोग मिलते हैं—चाँदनी चौक का एक रिक्शेवाला जिसकी ज़िन्दगी एक आतंकी हमले की भेंट चढ़ जाती है, एक डॉक्टर जिसे ‌लिंग निर्धारण टेस्ट के लिए गिरफ़्तार किया जाता है, एक गोरक्षक जिसकी बहन सईदा के बेटे के साथ भाग जाती है और पुलिसवाले जिन्हें मुस्ल‌िम‌‌ युवकों को पीटने में बहुत ज़्यादा मज़ा आता है। दिल्ली में हुए 2020 के दंगों के साथ सईदा की ज़िन्दगी का जैसे एक चक्र पूरा हो जाता है। उसे फिर उखड़ना पड़ता है। लेकिन वह अब इसकी अभ्यस्त हो गई है। उसे पता है कि एक ग़रीब, एक मुस्ल‌िम और एक औरत होने के नाते उसे क्या झेलना है। गहन अन्तर्दृष्ट‌ि से युक्त यह किताब उस कठोर, कड़वे यथार्थ की अक्कासी करती है जो भारत के अभ‌िजात तबक़े की आँखों से बहुत दूर रहता है। यह उन लाखों लोगों की कहानी है जिनकी कहानी कभी नहीं कही जाती। यह ‘नये भारत’ के शहरी जीवन का ऐसा चित्र है जो किसी भी संवेदनशील मन को चीरकर रख देता है।
Koi Ek Syeda

Koi Ek Syeda

Neha Dixit

499

₹ 399.2

Gadiwalon Ka Katra

  • Author Name:

    Aleksandr Kuprin

  • Book Type:
  • Description: गाड़ीवालों का कटरा जारकालीन रूस की पृष्ठभूमि में वेश्यावृत्ति की ज्वलन्त समस्या का हृदयविदारक चित्र प्रस्तुत करता है। कुप्रिन सामाजिक बीमारियों को छिपाने में विश्वास नहीं रखते थे और मानते थे कि भयंकर से भयंकर सत्य को उजागर करना मनुष्य के हित में है। इसी कारण उन्होंने इस उपन्यास में वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर स्त्रियों की दारुण कथा के जरिये मानव-समाज के अकल्पनीय पतन का ऐसा हाल बयान किया जिसे वेश्यावृत्ति के विषय पर पहला और अन्तिम ईमानदार काम माना जाता है। इस उपन्यास ने प्रेमचन्द को भी गहरे प्रभावित किया था।
Gadiwalon Ka Katra

Gadiwalon Ka Katra

Aleksandr Kuprin

399

₹ 319.2

Main Ladi Aur Udi

  • Author Name:

    Ruchira Gupta

  • Book Type:
  • Description: बिहार में रेड-लाइट एरिया के बाहरी इलाक़े में, हीरा एक उधार की ज़िन्दगी जी रही है, तभी तक जब तक कि उसके पिता अपना कर्ज़ चुकाने के लिए उसे सेक्स ट्रेड में बेचने का फ़ैसला नहीं कर लेते। जैसा कि उसे बताया गया है, उस बाज़ार की सभी लड़कियों का यही हश्र होता है। लेकिन क्या हो अगर वह "क़िस्मत" के ख़िलाफ़ लड़ना सीख ले? एक लोकल हॉस्टल मालिक उसे कुंग फू सीखने का मौक़ा देता है, तो हीरा यह जानना शुरू करती है कि उसका शरीर कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिस पर कोई भी हमला करे, बल्कि यह एक ऐसा ज़रिया है जिससे वह खुद की रक्षा कर सकती है। उसे अकल्पनीय मुश्किलों का सामना करना पड़ता है—स्कूल से निकाली जाती है, प्रकृति की बेरहम ताक़तों, और एक लोकल तस्कर से निबटना पड़ता है जो उस पर से अपनी नज़र नहीं हटाता। लेकिन किस्मत बदल भी सकती है, बहादुरी संक्रामक होती है, एक से दूसरे तक जाने वाली। जैसे ही हीरा यूनाइटेड स्टेट्स में एक पेन पाल के ज़रिए अपनी लापता दोस्त का पता लगाने की कोशिश करती है, और एक प्रतियोगिता उसे न्यूयॉर्क ले जाती है, अपनी दोस्त की जान बचाने की चाहत उसे सबसे बड़ा जोखिम उठाने पर मजबूर कर देती है। ‘मैं लड़ी और उड़ी’ में एक्टिविस्ट और एमी अवॉर्ड विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर रुचिरा गुप्ता साहस, आज़ादी और बदलाव लाने की हमारी क्षमता की एक एक्शन-पैक, चौंकाने वाली और विजयी कहानी बुनाती हैं जो महाद्वीपों को पार कर जाती है।
Main Ladi Aur Udi

Main Ladi Aur Udi

Ruchira Gupta

499

₹ 399.2

Joothi Gali

  • Author Name:

    Hrishikesh Sulabh

  • Book Type:
  • Description: ‘जूठी गली’ जीवनानुभव का एक ऐसा लोक है जिसके भीतर वर्तमान की आँधी में इतिहास की धूल और राख उड़ती रहती है। जब अठारहवीं सदी के आरम्भ में पटना का नाम अज़ीमाबाद हुआ, उन्हीं दिनों जूठी गली की नींव पड़ी थी। उन दिनों से अब तक यह गली ज़िन्दा है। लोग जनमते और विदा होते रहे, मकान बिकते-ढहते-बनते रहे, जूठी गली अपना रूप बदलती रही और किसी ज़िन्दा इनसान की तरह धड़कती रही। इसके बाशिन्दे ख़बरों के रसिया हैं। ख़बरें इस गली में हवा के पर लगाकर उड़ती हैं। जन्म और मृत्यु दोनों के लिए यहाँ समान भाव से सुख-दुःख उपजता है। प्रेम और नफ़रत एक ही बटुए में रखकर लोग आपस में मिलते-जुलते हैं। जो ज़ुबान प्रशंसा करते नहीं थकती वह पीठ फेरते ही निन्दा रस उड़ेलने लगती है। इस गली में मध्यवर्गीय प्रपंचों के कीचड़ में लिथड़कर जीती स्त्रियों के साथ ऐसी स्त्रियाँ भी हैं जो पुरुषों के वर्चस्व को चुनौती देती हैं और परिदृश्य बदल जाता है। राजनीति ने अपने नाख़ूनों के खरोचों से जूठी गली को जो घाव दिए हैं, लोग उन्हें सहलाते हुए जीते हैं। इस गली में जाति-दंश की ज़हरीली हवा बहती है। प्रेम करनेवाले यहाँ सम्मान नहीं, हँसी के पात्र हैं। हृषीकेश सुलभ अपनी रचनाओं में स्वयं नहीं बोलते बल्कि उनके पात्रों का जीवन-व्यापार और परिवेश कथ्य को सघनता से प्रकट करता है। अपनी सहज भाषा की मार्मिकता और आत्मीय कहन के हुनर के सहारे वे कथा के बीहड़ में उतरते हैं और जीवन के ऐसे क्षणों को रचते हैं जो मानवीय गरिमा की रक्षा करते हैं। जूठी गली हमारे समय का जीवन्त दस्तावेज़ है।
Joothi Gali

Joothi Gali

Hrishikesh Sulabh

399

₹ 319.2

Daryaganj Via Bazaar Fatte Khan

  • Author Name:

    Sujata

  • Book Type:
  • Description: नीनो फ़त्ते ख़ाँ बाज़ार, बहावलपुर ही रह गई होती, तो शायद वैसी ही होती जैसी अब भी वहाँ रह रही हज़ारों औरते हैं। एक हवेली से दूसरी हवेली में दुल्हन बन कर जाती और ढेर सारे पोते-पोतियों की विरासत छोड़ कर दुनिया को विदा कहती। लेकिन 1947 में नीनो दरयागंज पहुँच गई। बसना चाहा। बिखर गई। एक औरत की यह उजड़न सिर्फ़ उसकी कहानी न रह सकी, राजनीति और इतिहास की अनुगूँजों से भरी हुई वह उसकी सन्तानों में, पोते-पोतियों में रिसती चली गई—तीन पीढ़ियाँ एक अन्तहीन अजनबियत के सिलसिले में बँधी हुईं। दिल्ली वाले मुल्तानी मिट्टी तो जानते हैं। मुल्तान के लोग भी थे, उनकी ज़बान भी थी, उनकी तहज़ीब भी थी—यह कोई नहीं जानता। वह सब दिल्लीवाला बनने की जल्दबाज़ी में, पाकिस्तान से आए पंजाबी न कहलाने के डर में धीरे-धीरे खोता जा रहा है। तीन पीढ़ियों का यह आख्यान विभाजन की उस महात्रासदी से आगे बढ़ता है जिसे हम सब जानते हैं। यह उस अनकही दास्तान को खोलता है जिसमें रिफ़्यूजी दिल्ली में बसे और दिल्ली ख़ुद रिफ़्यूजियों से बसी। दोनों ने एक-दूसरे को नया चेहरा दिया—धीरे-धीरे, दर्द के साथ। मुल्तान की खोई गलियों से दिल्ली के ज़ख़्मी दिल तक, कश्मीर की ख़ामोश, बेचैन वादियों से बॉम्बे की धड़कन तक—यह एक विस्तृत और मार्मिक गाथा है ज़बान की, भूगोल की, और कभी न थमने वाली भटकन की। यह कहानी बताती है कि जब वह सब कुछ जो घर कहलाता है, राख हो जाए, तब भी क्या है जो बचा रह जाता है। एक बड़े जमाने और उसे जीने वाले बड़ी कद-काठी के लोगों और इत‌िहास की शक्ल बदलने वाली बड़ी घटनाओं का आख्यान है यह उपन्यास जो एक तरफ अगर क़िस्सागोई की नई उठान को संभव करता है, तो दूसरी ओर भाषा के संयम और सामर्थ्य को एक नई ऊँचाई देता है।
Daryaganj Via Bazaar Fatte Khan

Daryaganj Via Bazaar Fatte Khan

Sujata

550

₹ 440

Is Shahar Mein Ik Shahar Tha

  • Author Name:

    Jaya Jadwani

  • Book Type:
  • Description: विभाजन भारतीय उपमहाद्वीप का ऐसा दारुण जख़्म है जो न जाने कितने दिलों के भीतर मुसलसल टीस रहा है। जया जादवानी का उपन्यास ‘इस शहर में इक शहर था’ विभाजित सिन्ध और उसके लोगों की कसक और पीड़ा का आख्यान है। यह एक जगह से उजड़ और बिखर कर दूसरी जगहों पर जड़ें जमाने की संघर्ष भरी दास्तान भी है जहाँ ऊपरी तौर पर भले ही सब‌ कुछ सहज लगता हो पर उनकी रूह का एक हिस्सा कहीं बहुत पीछे के शहर में फंसा रह गया है। अपनी रूह के इसी गुम हिस्से की तलाश में उपन्यास का वाचक ‘नन्द’ कराची पहुँचता है जहाँ से उसे शिकारपुर जाना है, जहाँ जाने की उसे अनुमति नहीं है। जहाँ उसे अपने ही जैसे बिखरे हुए लोगों से मिलना है, जिन्हें उसकी तलाश में इस तरह से मद‌द‌गार होना है जैसे वे अपनी ही मदद कर रहे हों। शिकारपुर—जहाँ उसका बचपन बीता है, जहाँ से निकलकर वह बम्बई में रहते हुए दुनिया भर में भटक रहा है। यह स्मृति में धँसी हुई एक ऐसी विलक्षण यात्रा है जहाँ एक बूढ़ा आईने के सामने अपने आपसे सिन्धी में बतिया रहा है; कोई बरसों बाद मिली एक बूढ़ी औरत के साथ रोटी खाते हुए उसकी गोद में रो रहा है, वह श्मशान जहाँ नन्द के लोग जलाए गए, वह गलियाँ जहाँ वे चले, उनमें ठहरते और चलते हुए नन्द अपने पुरखों के तलवों का दुख-दर्द जी रहा है। जहाँ से अपने बचपन के प्यार की एक झलक भर देखकर बिना कुछ कहे वह वापस चला आता है कि बार-बार आने की एक वजह यह भी बनी रहे।
Is Shahar Mein Ik Shahar Tha

Is Shahar Mein Ik Shahar Tha

Jaya Jadwani

250

₹ 200

Door Desh Ke Parinde

  • Author Name:

    Anamika

  • Book Type:
  • Description: यह आवश्यक नहीं कि स्त्री-पुरुष का सम्बन्ध नर-मादा का ही हो; एक स्तर ऊपर उठकर वह दो व्यक्तियों, दो मनुष्यों, दो सखाओं का भी हो सकता है। सार्वजनिक स्पेस में एक स्वस्थ सन्तुलन भी तभी साधा जा सकता है जब सम्बन्धों में एक अहैतुक सजगता मौजूद रहे, और स्त्री की सहज सकारात्मकता इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकती है। ‘दूर देश के परिन्दे’ उपन्यास बीसवीं सदी में, स्वतंत्रता-प्राप्ति के आसपास के वर्षों में दीप्तिमान ऐसे विश्व-प्रसिद्ध लोगों के जीवन में आईं स्त्रियों की कथा कहता है जो अपने समय की स्त्रियों के विशेष प्रिय रहे; कुछ था उनमें जिसके चलते स्त्री-मन उन्हें उम्मीद से देखता था कि उनकी अगुवाई में जो समाज बनेगा उसमें धैर्य, ममता, सहिष्णुता और त्याग जैसे गुण स्त्री और पुरुष दोनों में बराबर बँटेगे; दोनों साहचर्य का एक अधिक सृजनात्मक मॉडल विकसित करेंगे। टैगोर, निराला, गांधी, रोमां रोलां आदि इनमें से कुछ थे। कई स्त्रियाँ इनके जीवन में आयीं, विवाद भी उठे। इनका ज्यादा त्रास तो स्त्रियों ने ही अनुभव किया जिसके विवरण इस उपन्यास के दृश्यबन्धों और संवादों में अनुस्यूत हैं। उपन्यास का पहला खंड निराला पर केन्द्रित है जहाँ नायिका उनकी अपनी ही बेटी सरोज है; दूसरे खंड की नायिका है ज्याँ क्रिस्तोफ की माँ डोरोथी जिनके विषय में कल्पना की गई है कि वे रोमां रोलां की केयरटेकर टाइपिस्ट थीं, तीसरे खंड की नायिकाएँ गांधी के ब्रह्मचर्य-विषयक प्रयोगों की साक्षी और सहचर रहीं मीरा बेन और कस्तूरबा हैं। चौथे खंड के केन्द्र में है भारत में ग्रामोफ़ोन की प्रथम गायिका गौहर जान और पाँचवाँ खंड समर्पित है टैगोर की प्रेरणा कही जाने वाली रानू को। यहाँ वे सब अपनी कथा कहती हैं और दोस्त-समाज की इस संकल्पना को बल देती हैं कि जिस आत्म-परिवर्तन की उम्मीद स्त्रियाँ पुरुषों से करती रही हैं, संसार के सुदीर्घ, स्थायी और ऊर्ध्वमुखी बदलाव के लिए भी वह एक आधारभूत शर्त है।
Door Desh Ke Parinde

Door Desh Ke Parinde

Anamika

499

₹ 399.2

Sarakfanda

  • Author Name:

    Vandana Rag

  • Book Type:
  • Description: बिट्टो अपनी माँ लाजो के जीवन और समय को समझने की यात्रा पर निकली है, जिनकी पत्थर मारकर हत्या कर दी गई है। बिट्टो के स्कूली दोस्तों का एक समूह है जहाँ भिन्न धार्मिक पहचान रखनेवाले ‘दोस्त’ समूह से बाहर खदेड़ दिए गए हैं; और बिट्टो जो इस बँटवारे के ख़िलाफ़ है, उससे पूछा जा रहा है कि “सू, हमेशा गुस्से में क्यों रहती है आजकल तू?” यह रोमान के ख़त्म होने और उसके कॉम्प्लिकेटेड होते जाने का भी आख्यान है। ‘सरकफंदा’ विभाजन की डरावनी निरन्तरता के बारे में है, जहाँ लोग देश से प्यार का दम तो भरते हैं लेकिन आपसी बन्धुत्व की भावना को ख़त्म करने में लगे हैं। ‘सरकफंदा’ का एक सिरा गुलाम भारत में खुलता है दूसरा निपट वर्तमान में। दोनों के बीच वह भविष्य है जिस पर यह कसता ही जा रहा है। इस उपन्यास में बिल्ला उर्फ़ लाइब्रेरियन एक अद्भुत रूपक और रिलीफ़ की तरह उपस्थित है जो अतीत और वर्तमान, भ्रम और ज्ञान के सरकफंदे के बीच निर्लिप्त आवाजाही रखता है और वर्तमान पर क़ाबिज़ घातक परछाइयों के बीच अपने खेल से जीवन की स्वाभाविकता को राह दिखलाता चलता है। लाजो और बिट्टो का सिनेमची होना भी वह दूरी सम्भव करता है कि घट रहे को उसके घटाटोप से ज़रा दूर होकर देखा जा सके। हमारे समय के यथार्थ की सघन, आवेग-भरी, कलात्मक दुनिया।
Sarakfanda

Sarakfanda

Vandana Rag

399

₹ 319.2

Shisha Ghar

  • Author Name:

    Pratyaksha

  • Book Type:
  • Description: ‘शीशाघर’ के केन्द्र में एक परिवार है जो सन् सैंतालिस में बिखरना शुरू होता है तो बिखरता ही जाता है। और जब हम एक मुल्क के, एक भरी-पूरी दुनिया के विभाजित होते जाने की त्रासदी से गुज़र रहे होते हैं तब एक इलहाम की तरह यह बात भीतर प्रकट होती है कि यह उपन्यास विभाजन और बिखराव से ज़्यादा उस अन्दरूनी इनसानी एकता के बारे में है जो इसके चरित्रों को बिखरकर भी बिखरने नहीं देती और वे एक-दूसरे से हज़ारों किलोमीटर दूर, दूसरे देशों में अपना रोज़मर्रा का जीवन जीते हुए भी एक-दूसरे से गहरे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस उपन्यास के केन्द्र में है प्रेम, जिसका प्रवाह धर्म, नस्ल, राष्ट्र और भूगोल के सिरों को धूमिल करता, साथ ही लोगों के बसने, उजड़ने और फिर बसने की यादों को सहेजता चलता है। केन्द्रीय कथा से इतर भी इसमें बहुतेरे ऐसे चरित्र हैं जो प्रेम की आग में झुलसकर बन और बिगड़ रहे हैं या कि उनका व्यक्तित्व उस प्रेम की याद से बन रहा है। कभी न भूलनेवाले यादगार किरदारों, उनके द्वन्द्व और चाहनाओं, ज़िद और लापरवाहियों से बुनी हुई, देखी-जानी दुनिया के समानान्तर उतनी ही ज़िन्दा, सम्मोहक और मानीख़ेज़ एक दूसरी दुनिया।
Shisha Ghar

Shisha Ghar

Pratyaksha

450

₹ 360

Jahaz Paanch Paal Wala

  • Author Name:

    Savita Bhargav

  • Book Type:
  • Description: ‘जहाज़ पाँच पाल वाला’ के केन्द्र में तीन ख़ुद-मुख़्तार स्त्रियाँ—वर्तिका, चारुचित्रा और एमिली— हैं जिन्होंने लीक तोड़ते हुए, अपने घर-परिवार, परम्परा और आसपास की पितृसत्तात्मक दुनिया के द्वारा आरोपित तमाम अवरोधों से जूझते हुए अपने लिए अलग राह चुनी और रंगमंच और जीवन दोनों ही इलाकों में एक क़ाबिले-रश्क जगह बनाई। यहाँ परदे के पीछे से समय और घटनाओं के दबाव के बीच रंगमंच की राजनीति है तो मंच पर इन नायिकाओं का हलचल पैदा करनेवाला बिन्दास जीवन, जहाँ जीवन और रंगमंच एक दूसरे का आईना बनते जा रहे हैं और बरसों पहले खेले गए नाटकों के अनेक प्रसंगों की त्रासद छायाएँ उनके वास्तविक जीवन में एक उदास निरन्तरता में गिर रही हैं। अपने निजी सम्बन्धों में ये कई बार ऐसे विरोधाभासों से युक्त दिखाई पड़ती हैं जो बताते हैं कि मुक्ति और बराबरी की यह लड़ाई कितनी मुश्किल होनेवाली है। असल में खोजे जा रहे रास्ते और दुनिया उनके लिए इतनी नई है कि यह नितान्त स्वाभाविक है कि इस खोज में कई बार भटकाव भी दिखें। चारुचित्रा और उसकी बेटी का पहाड़ी बाबा के सम्मोहन में फँसकर जान गँवाना त्रासद है लेकिन यही बात इन्हें एक वास्तविक दुनिया की रहवासी भी बनाती है। यह उपन्यास सांस्कृतिक रूप से उर्वर शहर भोपाल में घटित होता है। भोपाली हिन्दी का प्रयोग इसे एक गाढ़ा स्थानीय रंग और विश्वसनीयता देता है जहाँ से यह उन सारी स्त्रियों की गाथा बन जाता है जो अपने-अपने शहरों में अपने मन का जीवन जीने की लड़ाई लड़ रही हैं।
Jahaz Paanch Paal Wala

Jahaz Paanch Paal Wala

Savita Bhargav

499

₹ 399.2

Calcutta Cosmopolitan : Dil Aur Dararein

  • Author Name:

    Alka Saraogi

  • Book Type:
  • Description: अलका सरावगी अपने उपन्यासों में कॉस्मोपॉलिटन कलकत्ता की नई-नई गाथाएँ लेकर आती रही हैं। कलकत्ता के अलग-अलग काल-खंडों का, एक ही काल में रह रही अलग-अलग जीवन-स्थितियों का, अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के टकराव और सामंजस्य का, उसके नए-नए कोणों और रहस्यों का, उसके दिल की दरारों का उत्खनन ‘कलकत्ता कॉस्मोपॉलिटन : दिल और दरारें’ में भी जारी है। यह ‘सुनील बोस’ की गाथा है जो एक मुस्लिम लड़की ‘दीबा’ से निकाह के लिए धर्मान्तरण करके ‘मोहम्मद दानियाल’ बन गया है। एक निम्नवर्गीय जीवन-स्थिति में बहुत सारे भीतरी और बाहरी संघर्षों के बीच नौकरियाँ और मकान बदलते हुए अपनी पहचान छुपाते या दूसरी पहचान ओढ़ते हुए उनका जीवन आगे बढ़ रहा है। इसी जीवन में ‘सुनील बोस’ और ‘मोहम्मद दानियाल’ के द्वन्द्व और द्वैत के रास्ते उपन्यास में सच और झूठ के बीच का फ़रेब भी मारक और मार्मिक होता जाता है। उपन्यास में इस मुख्य कथा के समानान्तर कलकत्ता की अँधेरी और उमस-भरी गलियों में रहनेवाले लड़ते-जूझते लोगों की कथाएँ भी चलती रहती हैं, जिनके जीवन में ग़लत और सही का हिसाब कब जीवन के अभावों और सपनों, यथार्थ और लालसाओं के बीच के तनाव का हिसाब बन जाता है, यह पता ही नहीं चलता। इसके बीच तमाम चरित्रों के ओढ़े हुए व्यक्तित्व जहाँ तार-तार होते हैं और हम उनके भीतर का ग़लीज़ देख पाते हैं वहीं अनेक चरित्रों में इनसानी गरिमा और ऊँचाई भी बारम्बार प्रकट होती है।
Calcutta Cosmopolitan : Dil Aur Dararein

Calcutta Cosmopolitan : Dil Aur Dararein

Alka Saraogi

399

₹ 319.2

Black Soil

  • Author Name:

    Ponneelan +1

  • Book Type:
  • Description: Kannappan is posted to Perumalpuram as the new schoolteacher. The village lies in the black soil region of Tamil Nadu where the river Tamirabarani flows. He's an outsider in this village with Veerayyan, a local farmer, as his only guide and friend. Once settled in his role, Kannappan observes the everyday brutality faced by the farmers at the hands of the sadistic, all-powerful landlord-the Master. Child marriage is common in the village and so is the appalling practice of marrying young lads to older women who then serve as their father-in-law's consort. Through his gentle yet probing conversations with the villagers, Kannappan tries his best to show the villagers a better way of life. The farmers who had begun protesting the excesses meted out to them by the upper-caste landlord soon find an ally in Kannappan. The schoolteacher's sympathies for their cause bolster their waning spirits and replenishes their resolve to fight back. Ponneelan's first novel is a tour de force. Now translated for the first time, Black Soil lays bare the atrocities faced by the farmers and the human cost of building a better tomorrow.
Black Soil

Black Soil

Ponneelan

399

₹ 331.17

Contemporary fiction captures the pulse of the present—stories shaped by today’s relationships, politics, cities, technology, migration, identity, and everyday life. This category brings together powerful voices from India and the world, across English, Hindi, Marathi, Bengali, Tamil, Malayalam, and more.

Readers can explore realism, urban novels, character-driven stories, minimalist writing, social commentary, and experiments with form. Many titles come directly from Indian publishers, presenting fresh, diverse narratives without piracy distortions.

What is contemporary fiction?

Contemporary fiction includes stories set in the modern world, reflecting current social, cultural, and personal themes.

How is contemporary fiction different from literary fiction?

Contemporary fiction focuses on present-day narratives, while literary fiction places more emphasis on style, depth, and thematic complexity.

Do you have contemporary Indian fiction books?

Yes. The category includes modern Indian novels across languages—Hindi, Marathi, Bengali, Tamil, English, and more.

Is contemporary fiction good for new readers?

Yes. It offers relatable themes, engaging narratives, and real-world settings that suit both beginners and seasoned readers.

Are contemporary fiction books available in Indian regional languages?

Absolutely. You’ll find contemporary stories originally written in Indian languages, along with translated editions.

What genres fall under contemporary fiction?

Realistic fiction, modern romance, urban narratives, social drama, coming-of-age stories, and slice-of-life novels are all part of contemporary fiction.

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