A book can be printed without a critique. It can be sold without a critique. It can even become a bestseller without a critic.But can it truly enter literary memory without criticism?That is the harder question.In our time, books travel fast. A striking cover, a clever reel, a discount banner,...
किताब पढ़ना एक बात है। किताब पर राय देना, दूसरी। और किताब के भीतर से अपने समय, समाज, भाषा, स्मृति और मनुष्य की उलझनों को पढ़ लेना, यह आलोचना का काम है।हमारे यहाँ अक्सर आलोचक को लेकर दो तरह की गलतफहमियाँ साथ-साथ चलती हैं। एक तरफ उसे ऐसा कठोर न्यायाधीश...
आपने अब तक पढ़ा, कथाकार, उपन्यासकार और पत्रकार में अंतर, और हिंदी में पत्रकार लेखक क्यों बन रहे हैं? , अब और आगे चलते हैं…हिंदी में एक परिचित दृश्य है। कॉलेज या उच्च विद्यालय के हिंदी विभाग में शिक्षक हैं। वे कविता पढ़ाते हैं, कहानी पढ़ाते हैं, आलोचना पढ़ाते हैं,...
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