किसी मुशायरे में एक अच्छा शेर पढ़ा जाता है। श्रोता उसके शब्दों का पूरा अर्थ समझें या न समझें, उनकी गर्दन हल्के से हिलने लगती है। कभी वे दूसरी पंक्ति आने से पहले ही उसके उतरने की जगह पहचान लेते हैं। कभी कोई मिसरा वर्षों तक स्मृति में बना रहता...
बचपन में हममें से अधिकतर लोगों ने कविता को तुक से पहचाना था। चंदा था तो मामा आना लगभग निश्चित था, मछली जल की रानी थी और फूल के आसपास भूल, धूल या शूल में से कोई शब्द देर-सबेर पहुँच ही जाता था।तुक कविता को याद रखने लायक बनाती है।...
A book can be printed without a critique. It can be sold without a critique. It can even become a bestseller without a critic.But can it truly enter literary memory without criticism?That is the harder question.In our time, books travel fast. A striking cover, a clever reel, a discount banner,...
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