आपने अब तक पढ़ा, कथाकार, उपन्यासकार और पत्रकार में अंतर, और हिंदी में पत्रकार लेखक क्यों बन रहे हैं? , अब और आगे चलते हैं…हिंदी में एक परिचित दृश्य है। कॉलेज या उच्च विद्यालय के हिंदी विभाग में शिक्षक हैं। वे कविता पढ़ाते हैं, कहानी पढ़ाते हैं, आलोचना पढ़ाते हैं,...
आपने अब तक पढ़ा, कथाकार, उपन्यासकार और पत्रकार में अंतर, अब आगे चलते हैं...तो हिंदी में पत्रकारों का लेखक बनना कोई बिल्कुल नई घटना नहीं है। नई बात इसकी गति, दृश्यता और बाज़ार है।आज कोई पत्रकार टीवी पर दिखता है, यूट्यूब पर बोलता है, अख़बार या डिजिटल पोर्टल में लिखता...
किसी ने प्रश्न किया,क्या कारण है कि आज हिंदी में पत्रकार ही कहानीकार और उपन्यासकार हो रहे हैं?क्यों कहानीकार, उपन्यासकार और पत्रकार के भेद मिटते जा रहे हैं?पाठक कैसे चुनें कि किसे पढ़ना है?प्रश्नों को सुन कर एक बात तो अच्छी लगी की आनेवाली पीढ़ी में कुछ लोग सोच तो...
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