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Author:
Alok Rai, Arundhati RoyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
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Book Details
-
ISBN9789392186257
-
Pages34
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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उर्दू अपनी खूबसूरती, नफ़ासत और बेहतरीन शब्द-भंडार के लिए जानी जाती है। "उर्दू शब्दों का गुलदस्ता" रेख़्ता फ़ाउंडेशन की एक अनोखी पहल है, जो आपको मज़ेदार और आसान तरीके से उर्दू शब्द सीखने में मदद करती है। पारंपरिक शब्दकोश के बजाय, यह किताब कहानियों के ज़रिए उर्दू शब्द पेश करती है, जिससे शब्द सीखना और भी मज़ेदार हो जाता है। शब्दों को संदर्भ के अनुसार बांटा गया है ताकि सीखने वाले एक ही मूल शब्द से जुड़े दूसरे शब्द भी सीख सकें। हर अध्याय के आखिर में जल्दी दोहराने के लिए अभ्यास दिए गए हैं। यह किताब उर्दू शायरी में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले शब्दों और बातचीत के बुनियादी हुनर में महारत हासिल करने के लिए एक बेहतरीन गाइड है। कृपया इस किताब के बारे में अपनी राय और सुझाव दें। 'वर्ड पावर मेड ईज़ी' की तर्ज़ पर बनी यह किताब आपको तेज़ी से अपना उर्दू शब्द-भंडार बढ़ाने और बेहतर बनाने में मदद करती है। इसमें कई तरह के विषय शामिल हैं, जैसे अभिवादन, प्यार, ज्ञान, रिश्ते, लोग, घर की चीज़ें, कपड़े, स्वाद, रंग, शरीर के अंग, बाज़ार, यात्रा, पेशे, शायरी, मयख़ाने, बाग़-बगीचे और प्रकृति। अध्यायों के दौरान, आप आम गलतियों, सही उच्चारण और वर्तनी के बारे में जानेंगे, और शब्दों के मूल रूप, उनके अलग-अलग रूप और बहुवचन बनाने के नियम समझेंगे। साथ ही, आप अलग-अलग मौकों पर अभिवादन करने, मेहमाननवाज़ी करने और आभार व्यक्त करने के तरीके भी सीखेंगे। आसान व्याख्या, बुनियादी व्याकरण और अध्याय-वार अभ्यास के साथ, यह किताब उर्दू बोलने में आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है। आखिर में, यह किताब आपको उर्दू भाषा और तहज़ीब की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेगी।
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
- Author Name:
Azra Naqvi
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उर्दू कई तहज़ीबों और भाषाओं के मेल से बनी है और शायरी की रिवायत (काव्य-परम्परा) में फ़ारसी, अरबी, संस्कृत और तुर्की के रंग शामिल हैं। ये किताब एक शब्दकोश न हो कर उर्दू शायरी में आने वाले विभिन्न विषयों पर ख़ूबसूरत शेरों के संकलन पर आधारित है। शायरी की दुनिया की सैर कराते हुए ये किताब आपको नए-नए शब्दों और उनके उपयोग की बारीकियों के बारे में बताती है और शायरी में इस्तेमाल होने वाले अहम लफ़्ज़ों, तरकीबों और तल्मीहात के मानी और उनके विभिन्न सन्दर्भों को विस्तार से समझाया गया है। ये किताब शायराना लफ़्ज़ों के कलात्मक इस्तेमाल और उनके गहरे अर्थों को समझने में मददगार होगी, और उर्दू शायरी के अथाह ख़ज़ाने का भरपूर लुत्फ़ उठाने का मौक़ा देगी।
Saat Bhumikayen
- Author Name:
Mahadevi Verma +1
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छायावाद की यशस्वी रचनाकार महादेवी वर्मा का लेखन किसी न किसी रूप में पाठकों व आलोचकों को आन्दोलित करता आया है। कभी उनकी रचनाओं में उनके जीवन के बिखरे सूत्र रेखांकित किए जाते हैं तो कभी उनके जीवन में रचनाओं के स्रोत खोजे जाते हैं। महादेवी द्वारा लिखित प्रत्येक शब्द स्वयं को ध्यान से पढ़े जाने का आग्रह करता है। सात भूमिकाएँ’ में ‘रश्मि’, ‘सांध्यगीत’, ‘आधुनिक कवि’, ‘दीपशिखा’, ‘बंग–दर्शन’, ‘सप्तपर्णा’ एवं ‘हिमालय’ कविता–संग्रहों की भूमिकाएँ हैं। महादेवी वर्मा लिखित इन भूमिकाओं का ऐतिहासिक महत्त्व है। ये भूमिकाएँ उनकी तत्कालीन मन:स्थिति को प्रकट करने के साथ उनके समग्र लेखन पर एक ‘अन्त:साक्ष्य’ की भाँति हैं। ‘सात भूमिकाओं’ के सम्पादक दूधनाथ सिंह का सम्पादकीय ‘छायावाद : व्यथा का सवेरा’ अत्यन्त विचारोत्तेजक है। अपनी विशिष्ट ‘तर्कसंगत पद्धति’ से दूधनाथ सिंह ने महादेवी के रचनाकर्म को विवेचित किया है—‘उनके वाक्य स्पष्ट, पारदर्शी व निर्भ्रान्त हैं, ‘महादेवी की आलोचनाएँ शब्द–अलंकृति अधिक हैं, आलोचनाएँ कम। उनका सारा वैचारिक गद्य–लेखन लगभग ऐसा ही है। उनमें तर्क और विश्लेषण का अभाव है। अपनी हर अगली बात के लिए महादेवी तर्क की जगह कोई प्रतीक–बिम्ब ढूँढ़ने लगती हैं।’ दूधनाथ सिंह के सम्पादकीय के प्रकाश में महादेवी की इन सात भूमिकाओं को पढ़ना एक आलोचनात्मक अनुभव है। तब और भी जब महादेवी के चुटीले ‘सुरक्षात्मक वाक्य’ उनकी प्रत्येक भूमिका में हैं। ‘रश्मि’ संग्रह की ‘अपनी बात’ का पहला ही वाक्य, ‘अपने विषय में कुछ कहना प्राय: बहुत कठिन हो जाता है, क्योंकि अपने दोष देखना अपने आपको अप्रिय लगता है और इनको अनदेखा कर जाना औरों को...।’ एक संग्रहणीय पुस्तक।
Shabd Purush Agyey
- Author Name:
Naresh Mehta
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आधुनिक हिन्दी साहित्य के लिए यह एक ऐतिहासिक संयोग था कि उसे ‘अज्ञेय’ जैसा विशिष्ट व्यक्ति मिला, जो न केवल अपने निजी लेखन से ही महत्त्वपूर्ण था, बल्कि साहित्य के सभी क्षेत्रों और विषयों पर भी चिन्तातुर था। शायद भारतेन्दु के बाद ऐसी प्रामाणिक साहित्यिक चिन्ता वात्स्यायन में ही दिखलाई देती है। वस्तुत: यह आलेख उनके लेखन और व्यक्ति का आकलन नहीं, बल्कि स्मरण है, और वह भी संस्मरणात्मक आत्मीय भूमि पर से ही किया गया है। साथ ही एक अग्रज समकालीन को जिस सम्यकता से देखा जाना चाहिए, की चेष्टा है।
Kavya Bhasha Par Teen Nibandh
- Author Name:
Ramswaroop Chaturvedi +1
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काव्य-भाषा सम्बन्धी चिन्तन समकालीन आलोचना के केन्द्र में आ गया है। हिन्दी में, इस विषय पर मौलिक दृष्टि से लिखी गई पुस्तकें बहुत कम हैं। प्रख्यात आलोचक डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी के आलोचनात्मक चिन्तन का प्रमुख प्रतिमान काव्य-भाषा रही है। इस पुस्तक में उन्हीं के लिखे हुए तीन निबन्ध संकलित हैं जिनकी हिन्दी आलोचना में प्रशंसा होती रही है। इस विषय पर इन निबन्धों का ऐतिहासिक और वैचारिक महत्त्व है।
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