Aahat Desh
(0)
Author:
Arundhati RoyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
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‘‘वह जंगल जो दण्डकारण्य के नाम से जाना जाता था और जो पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ से लेकर आन्ध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों को समेटता हुआ महाराष्ट्र तक फैला है, लाखों आदिवासियों का घर है। मीडिया ने इसे ‘लाल गलियारा’ या ‘माओवादी गलियारा’ कहना शुरू कर दिया है। लेकिन इसे उतने ही सटीक ढंग से ‘अनुबन्ध गलियारा’ कहा जा सकता है। इससे रत्ती-भर फ़र्क़ नहीं पड़ता कि संविधान की पाँचवीं सूची में आदिवासी लोगों के संरक्षण का प्रावधान है और उनकी भूमि के अधिग्रहण पर पाबन्दी लगाई गई है। लगता यही है कि वह धारा वहाँ महज़ संविधान की शोभा बढ़ाने के लिए रखी गई है—थोड़ा-सा मिस्सी-ग़ाज़ा, लिपस्टिक-काजल। अनगिनत निगम, छोटे अनजाने व्यापारी ही नहीं, दुनिया के दैत्याकार-से-दैत्याकार इस्पात और खनन निगम—मित्तल, जिन्दल, टाटा, एस्सार, पॉस्को, रिओ टिंटो, बीएचपी बिलिटन और हाँ, वेदान्त भी—आदिवासियों के घर-बार को हड़पने की फ़िराक़ में हैं।</p> <p>हर पहाड़ी, हर नदी और हर जंगल के लिए समझौता हो गया है। हम अकल्पनीय स्तर पर व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय कायाकल्प की बात कर रहे हैं। और इसमें से ज़्यादातर गुप्त है। मुझे क़तई नहीं लगता कि दुनिया के सबसे पुराने और दिव्य जंगल, परिवेश और आदिम समुदाय को नष्ट करने के लिए जो परियोजनाएँ शुरू हुई हैं, उनकी चर्चा भी कोपेनहेगेन में होनेवाले ‘जलवायु परिवर्तन सम्मेलन’ में होगी। माओवादी हिंसा की भयावह कहानियाँ खोजनेवाले (और न मिलने पर उन्हें गढ़ लेनेवाले) ख़बरिया चैनल लगता है, क़िस्से के इस पक्ष में बिलकुल दिलचस्पी नहीं रखते। मुझे अचरज है, ऐसा क्यों?’’</p> <p>युद्ध, भारत की सीमाओं से चलकर देश के हृदय-स्थल में मौजूद जंगलों तक फैल चुका है। भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठासम्पन्न लेखिका द्वारा लिखित यह पुस्तक ‘आहत देश’ कुशाग्र विश्लेषण और रिपोर्टों के संयोजन द्वारा उभरती हुई वैश्विक महाशक्तियों के समय में प्रगति और विकास का परीक्षण करती है और आधुनिक सभ्यता को लेकर कुछ मूलभूत सवाल उठाती है।
Read moreAbout the Book
‘‘वह जंगल जो दण्डकारण्य के नाम से जाना जाता था और जो पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ से लेकर आन्ध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों को समेटता हुआ महाराष्ट्र तक फैला है, लाखों आदिवासियों का घर है। मीडिया ने इसे ‘लाल गलियारा’ या ‘माओवादी गलियारा’ कहना शुरू कर दिया है। लेकिन इसे उतने ही सटीक ढंग से ‘अनुबन्ध गलियारा’ कहा जा सकता है। इससे रत्ती-भर फ़र्क़ नहीं पड़ता कि संविधान की पाँचवीं सूची में आदिवासी लोगों के संरक्षण का प्रावधान है और उनकी भूमि के अधिग्रहण पर पाबन्दी लगाई गई है। लगता यही है कि वह धारा वहाँ महज़ संविधान की शोभा बढ़ाने के लिए रखी गई है—थोड़ा-सा मिस्सी-ग़ाज़ा, लिपस्टिक-काजल। अनगिनत निगम, छोटे अनजाने व्यापारी ही नहीं, दुनिया के दैत्याकार-से-दैत्याकार इस्पात और खनन निगम—मित्तल, जिन्दल, टाटा, एस्सार, पॉस्को, रिओ टिंटो, बीएचपी बिलिटन और हाँ, वेदान्त भी—आदिवासियों के घर-बार को हड़पने की फ़िराक़ में हैं।</p>
<p>हर पहाड़ी, हर नदी और हर जंगल के लिए समझौता हो गया है। हम अकल्पनीय स्तर पर व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय कायाकल्प की बात कर रहे हैं। और इसमें से ज़्यादातर गुप्त है। मुझे क़तई नहीं लगता कि दुनिया के सबसे पुराने और दिव्य जंगल, परिवेश और आदिम समुदाय को नष्ट करने के लिए जो परियोजनाएँ शुरू हुई हैं, उनकी चर्चा भी कोपेनहेगेन में होनेवाले ‘जलवायु परिवर्तन सम्मेलन’ में होगी। माओवादी हिंसा की भयावह कहानियाँ खोजनेवाले (और न मिलने पर उन्हें गढ़ लेनेवाले) ख़बरिया चैनल लगता है, क़िस्से के इस पक्ष में बिलकुल दिलचस्पी नहीं रखते। मुझे अचरज है, ऐसा क्यों?’’</p>
<p>युद्ध, भारत की सीमाओं से चलकर देश के हृदय-स्थल में मौजूद जंगलों तक फैल चुका है। भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठासम्पन्न लेखिका द्वारा लिखित यह पुस्तक ‘आहत देश’ कुशाग्र विश्लेषण और रिपोर्टों के संयोजन द्वारा उभरती हुई वैश्विक महाशक्तियों के समय में प्रगति और विकास का परीक्षण करती है और आधुनिक सभ्यता को लेकर कुछ मूलभूत सवाल उठाती है।
Book Details
-
ISBN9788126722495
-
Pages183
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: सुप्रसिद्ध साहित्यकार और गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हाजी अपनी साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक जीवन-यात्रा के 75 वसंत पूर्ण करने जा रही हैं। उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन में भारतीय चिंतनधर्मिता, लोकधर्मिता एवं लेखकीय प्रतिबद्धता से भारतीय स्त्री-विमर्श और परिवार-सशक्तीकरण का शंखनाद किया है। जीवन में अनेक रचनात्मक एवं अभिनव विचार-कार्यों के द्वारा विकास का पथ प्रशस्त किया है। अपने राजनीतिक जीवन में कई संगठनात्मक दायित्वों का बड़ी निष्ठा से निर्वहण करते हुए गाँव की पगडंडी से गोवा के राजभवन तक पहुँची हैं। इतने उच्च संवैधानिक पद पर होकर भी वे बड़ी सहजता व सादगी से सभी लोगों से मिलती, बातें करती, उनके कार्यक्रमों में उपस्थित हो जाती हैं, उनके दुःख-सुख की परवाह करती हैं। मृदुला सिन्हा के आचार-विचार, हाव-भाव, जीवन के क्षण-क्षण में लोक विद्यमान है। लोक ही उनके जीवन की प्रेरणा-शक्ति है। वे अपने संभाषणों में बार-बार कहती हैं— ‘‘साहित्यकार को मधुमक्खी की भूमिका में होना चाहिए, मकड़ा के नहीं। जो साहित्यकार समाज के विभिन्न क्यारियों से पराग इकट्ठा करते हैं, उनका साहित्य (मधु) उसी समाज-जीवन के लिए स्वास्थ्यवर्धक होता है।’’ एक प्रख्यात लेखक, संवदेनशील पत्रकार, सर्वभूतहितेरता, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रखर चिंतक, कुशल गृहिणी और शिखर राजनेता जैसे कितने पदों और गुणों को समेटे श्रीमती सिन्हा के 75वें जन्मदिवस के असवर पर सात खंडों में उनके जीवन की विविध रंगी झाँकी समेटे हुए ग्रंथ सहजता की भव्यता का प्रकाशन किया गया है, जिसमें उनके निकटतम रहनेवाले ही नहीं, दूर से देखने वालों ने भी अपनी सद्भावनाएँ व्यक्त की हैं। श्रीमती सिन्हा के बहुआयामी व्यक्तित्व को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का यह ग्रंथ एक छोटा सा प्रयास है।
DGP Gupteshwar Pandey: Sangharsh Se Utkarsh Tak
- Author Name:
Savita Pandey
- Book Type:

- Description: रियल ‘सिंघम’, ‘रॉबिनहुड’, ‘दबंग’, ‘चुलबुल पांडेय’ जैसे नामों से नवाजे जाते रहे 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के डीजीपी हैं। बिहार में कम्युनिटी पुलिसिंग के अगुआ, डीजीपी पांडेय बहुत लोकप्रिय हैं। लोक जागरण के लिए सोशल मीडिया का बिंदास प्रयोग और अभिव्यक्ति का उनका अंदाज जनता, खासकर युवाओं को काफी पसंद है। वे बिहार में नशामुक्ति और शराबबंदी के ब्रांड अंबेसेडर भी हैं। उनकी जीवन-शैली इतनी साधारण, सादगीपूर्ण है कि लोग कहते हैं कि लगता ही नहीं कि वे डीजीपी हैं! इस पुस्तक में लेखिका ने श्री गुप्तेश्वर पांडेय के बतौर डीजीपी और डीजीपी बनने के क्रम में किए गए उनके प्रयासों को साझा किया है। युवाओं को समर्पित यह पुस्तक गुप्तेश्वर पांडेय की मित्र पुलिसिंग के साथ सख्त कार्य-शैली का वर्णन करती ही है, साथ-ही-साथ छात्रों व युवाओं को संदेश भी देती चलती है कि विषम और विकट परिस्थितियों में भी कैसे सफलता की मंजिल पाई जा सकती है और डीजीपी जैसे पद पर पहुँचकर भी कैसे अहंकार से पार पाया जा सकता है। आमजन में पुलिस के भय और अविश्वास को कम करने के लिए सतत क्रियाशील रहे एक समर्पित जनसेवक की प्रेरक जीवनगाथा।
1000 Computer-Internet Prashnottari
- Author Name:
Vinay Bhushan
- Book Type:

- Description: "15 फरवरी, 1946 को ' एनियाक ' नामक कंप्यूटर दुनिया के सामने पहली बार आया था । तब से लेकर आज तक हमारे जीवन में कंप्यूटर का महत्व बढ़ता ही जा रहा है । इसके आकर्षण से क्या बच्चे, क्या बड़े-कोई नहीं बच पा रहा है । गणना करनी हो, गीत-संगीत सुनना हो, गप करना हो या फिर शोध करना हो, सबके लिए अपनी सेवाएँ देने हेतु सदैव तत्पर रहता है कंप्यूटर । इस पुस्तक में 1000 प्रश्नों के माध्यम से कंप्यूटर से संबंधित अनेक जानकारियाँ दी गई हैं । कंप्यूटर का आविष्कार, कंप्यूटर की पीढ़ियाँ, डिजिटल कंप्यूटरों का वर्गीकरण, कंप्यूटर : एक परिचय, सेकेंडरी मेमोरी, इनपुट/आउटपुट उपकरण, इंटरफेस, सॉफ्टवेअर, ऑपरेटिंग सिस्टम, डाटा संचार (कम्यूनिकेशन), कंप्यूटर नेटवर्क व्यवस्था, कंप्यूटर वाइरस एवं सुरक्षा प्रबंधन, सुपर कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-मेल, एफ.टी.पी. और टेलनेट, कंप्यूटर और भारत तथा कंप्यूटर और कैरियर जैसे अध्यायों के द्वारा इस पुस्तक में कंप्यूटर की दुनिया की रोचक व रोमांचक यात्रा कराई गई है । यह पुस्तक कंप्यूटर के क्षेत्र से संबंध रखनेवालों, छात्रों, इंजीनियरों, शोधार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठनेवाले प्रतियोगियों के लिए अत्यंत उपयोगी है । "
Aansu Aur Raushani : Alok Dhanwa Se Samvad
- Author Name:
Pankaj Chaturvedi
- Book Type:

- Description: कवि-आलोचक पंकज चतुर्वेदी की पुस्तक ‘आँसू और रौशनी’ दरअस्ल दो कवियन की वार्ता है। यह रूखा-सूखा साक्षात्कार नहीं, वरन् दो संवेदनशील सृजनधर्मियों का संवाद है; जिसमें हम अपने प्रिय साथी कलाकार से वह सब बाँट लेना चाहते हैं, जो हमें रसज्ञ की तरह अभिभूत करता है। आलोकधन्वा जैसे ख़ामोश कवि को थोड़ा-बहुत खोलना भी धैर्य, धृति और साधना की माँग करता है। पंकज ने वे एकान्त क्षण पकड़े, जब आलोक संवाद की सृजन-चेतना में जाग्रत थे। उनकी वह भीगी भावप्रवण आवाज़ इस पुस्तक में सुनाई दे रही है, जो घास के एक तिनके का भी कम्पन पहचान लेती है। पंकज चतुर्वेदी आलोकधन्वा की विह्वलता, वाग्वैभव और तरलता को ज्यों-का-त्यों हम तक लेकर आए हैं इस अनूठी पुस्तक में। संवाद दो कवियों का परस्पर मिलना भी है और खुलना भी। वे जीवन-संग्राम से बच नहीं रहे, उसी में रहते हुए रच रहे हैं। पंकज चतुर्वेदी की युवा उत्कंठाओं को पहचानते हुए आलोकधन्वा उन्हें अपने सृजन-कक्ष की मेज़ तक ले जाकर दिखा देते हैं और कहते हैं, “अच्छे लोग वही हुए, जो अन्याय के ख़िलाफ़ लड़े, उनसे ख़ूबसूरत कोई नहीं है।” एक ऐसे समय में, जब संवाद मन्थर पड़ रहा है, ‘आँसू और रौशनी’ के प्रकाशन का स्वागत है। —ममता कालिया, कथाकार
Cyber Kathayein : Digital Suraksha Ki Raah
- Author Name:
Sushil Kumar
- Book Type:

- Description: साइबर-जगत यानी इंटरनेट ने बहुत सारी सहूलियतें दी हैं तो कई खतरे भी खड़े किये हैं। आए दिन लोगों के साइबर-अपराधियों से ठगे जाने की खबरें सुनने-देखने में आती हैं। और, उन अपराधियों की तरकीबें अक्सर इतनी अप्रत्याशित और अकल्पनीय होती हैं कि हैरत में डाल देती हैं। ऐसे में ‘साइबर कथाएँ : डिजिटल सुरक्षा की राह’ बतलाती है कि साइबर अपराध का शिकार बनने से कैसे बचा जा सकता है। इसके लेखक ने साइबर अपराध से सम्बन्धित प्रभाग का सात वर्ष तक नेतृत्व किया है और यह किताब उस दौरान प्राप्त अनुभवों और किए गये काम पर आधारित है। वे विभिन्न मंचों पर साइबर-सुरक्षा और साइबर-अपराध सम्बन्धी जागरूकता पर लगातार व्याख्यान और अनुभव साझा करते हैं। इस किताब में उन्होंने साइबर-अपराध के तौर-तरीकों के बारे में किस्सों के माध्यम से बताया है और उनसे बचने और मुकाबला करने के टिप्स भी दिये हैं। आज के डिजिटल हेराफेरी के दौर में एक आवश्यक किताब!
4 Baal Upanyas
- Author Name:
Prakash Manu
- Book Type:

- Description: साहित्य अकादेमी के पहले बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित प्रकाश मनु बच्चों के सुविख्यात कथाकार हैं। बच्चे और किशोर पाठक उनकी कहानियों और बाल उपन्यासों को खूब रस ले-लेकर पढ़ते, सराहते और जीवन भर अपनी यादों के पिटारे में सहेजकर रखते हैं। प्रकाश मनु उस्ताद किस्सागो हैं, इसीलिए देश के कोने-कोने में फैले हजारों बच्चे उनके मुरीद हैं, जिन्हें उनकी लिखी कहानी की नई पुस्तकों और उपन्यासों का इंतजार रहता है। मनुजी की कलम का जादू इस कदर बाल पाठकों के मन को बाँध लेता है कि उनके साथ बहते हुए, कब वे देश-दुनिया की नई-नई और रोमांचक जगहों की सैर करके आ गए, उन्हें खुद पता नहीं चलता। ‘चार बाल उपन्यास’ प्रकाश मनुजी के दिलचस्प और भावनापूर्ण बाल उपन्यासों की नई पुस्तक है, जिसे पढ़कर बच्चे रोमांचित हो उठेंगे और खेल-खेल में बहुत कुछ सीखेंगे भी। पुस्तक में मनुजी के चार बड़े ही कौतुकपूर्ण बाल उपन्यास शामिल हैं—‘चिंकू-मिंकू और दो दोस्त गधे’, ‘भोलू पढ़ता नई किताब’, ‘सांताक्लाज का पिटारा’ तथा ‘गोलू भागा घर से’। ये चारों ऐसे उपन्यास हैं, जिनका जादू बाल पाठकों के दिलों पर तारी हो जाएगा, और जब तक वे उन्हें पूरा पढ़ नहीं लेंगे, पुस्तक उनके हाथ से छूटेगी नहीं। निस्संदेह ‘चार बाल उपन्यास’ एक ऐसा बहुरंगी, मनमोहक उपहार है, जिसे बच्चे हमेशा सँजोकर रखेंगे और बार-बार पढ़ना चाहेंगे।
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