Meri Maa Meri Gangster

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अठारह बरस की उम्र में अरुंधति रॉय जिस माँ को छोड़कर भागीं, उनकी मौत से जज़्बाती तौर पर वह इस क़दर बिखर गईं कि उनकी यादों को सहेजते हुए उन्होंने यह असाधारण आख्यान लिखना शुरू किया। यह शानदार संस्मरण अन्तरंग है और प्रेरक भी, बहुत बार परेशान करने वाला और हैरानी की हद तक दिलचस्प भी। बचपन से लेकर वर्तमान तक, आयमनम से लेकर दिल्ली तक के सफ़र की यह गाथा हमें उन हालात से भी रूबरू कराती है, जिसने उन्हें वह इनसान और लेखक बना दिया, जो वह आज हैं।

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ISBN
9789377370107
Pages
376
Avg Reading Time
13 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
IN

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About the Book

अठारह बरस की उम्र में अरुंधति रॉय जिस माँ को छोड़कर भागीं, उनकी मौत से जज़्बाती तौर पर वह इस क़दर बिखर गईं कि उनकी यादों को सहेजते हुए उन्होंने यह असाधारण आख्यान लिखना शुरू किया। यह शानदार संस्मरण अन्तरंग है और प्रेरक भी, बहुत बार परेशान करने वाला और हैरानी की हद तक दिलचस्प भी। बचपन से लेकर वर्तमान तक, आयमनम से लेकर दिल्ली तक के सफ़र की यह गाथा हमें उन हालात से भी रूबरू कराती है, जिसने उन्हें वह इनसान और लेखक बना दिया, जो वह आज हैं।

Book Details

  • ISBN
    9789377370107
  • Pages
    376
  • Avg Reading Time
    13 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    IN

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यह किताब क्‍यों पढ़ें

• 1997 में ‘मामूली चीज़ों का देवता’ (द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स) उपन्यास के लिए बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखक अरुंधति रॉय की यह स्मृति-कथा ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित Mother Mary Comes to Me का अनुवाद है।

• अब तक दुनिया की 45 भाषाओं में इस किताब का अनुवाद हो चुका है।

• यह किताब जितनी अरुंधति रॉय की माँ मिसेज रॉय के बारे में हैं, उतनी ही उनके अपने बारे में भी है। यह किताब उनके कठिन दिनों भरे बचपन से लेकर विश्‍व प्रसिद्ध लेखक बनने तक के सफर को सामने लाती है। 

• अपने पठनीय, प्रवाहपूर्ण अनुवादों के लिए चर्चित प्रभात सिंह का यह अनुवाद एक मिसाल की तरह है।

 

​​​विशेषज्ञों की राय

• ‘यह किताब मैं अपनी बेटियों को भेजूँगी। अपनी माँ को भेजूँगी। मैं अपने हर परिचित को यह किताब पढ़ने का मशविरा दूँगी।’—सोन्‍या दत्ता चौधरी, ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’

• ‘अनगढ़, कोमल, माँ-बेटी के उग्र रिश्तों और एक लेखक के उदय के बारे में भरपूर ईमानदार।’— ‘फ़ाइनेंशियल टाइम्स’

• ‘अरुंधति का संस्मरण एक जोखिम-भरा सफ़र है, जिसमें तीखे मोड़ और खड़ी चढ़ाइयाँ हैं; यह आपको अपनी चीख़ दबाने या ज़ोर की हँसी रोकने पर मजबूर कर देता है।’—संघमित्रा चक्रवर्ती, ‘स्क्रॉल इन’

• ‘रॉय की उदारता, बिना किसी पूर्वग्रह के अपने माता-पिता को समझने की यह कोशिश, शायद वही मरहम है जिसकी हम सबको ज़रूरत है।’—सुमना मुखर्जी, ‘द हिन्दू’

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