Nyay Ka Ganit
About the book
किसी लेखक की दुनिया कितनी विशाल हो सकती है, इस संग्रह के लेखों से उसे समझा जा सकता है। ये लेख विशेषकर तीसरी दुनिया के समाज में एक लेखक की भूमिका का भी मानदंड कहे जा सकते हैं। अरुंधति रॉय भारतीय अंग्रेजी की उन विरल लेखकों में से हैं जिनका सारा रचनाकर्म अपने सामाजिक सरोकार से उपजा है। इन लेखों को पढ़ते हुए जो बात उभरकर आती है, वह यह कि वही लेखक वैश्विक दृष्टिवाला हो सकता है जिसकी जड़ें अपने समाज में हों। यही वह स्रोत है जो किसी लेखक की आवाज को मजबूती देता है और नैतिक बल से पुष्ट करता है। क्या यह अकारण है कि जिस दृढ़ता से मध्य प्रदेश के आदिवासियों के हक में हम अरुंधति की आवाज सुन सकते हैं, उसी बुलन्दी से वह रेड इंडियनों या आस्ट्रेलिया के आदिवासियों के पक्ष में भी सुनी जा सकती है। तात्पर्य यह है कि परमाणु बम हो या बोध का मसला, अफगानिस्तान हो या इराक, जब वह अपनी बात कह रही होती हैं, उसे अनसुना-अनदेखा नहीं किया जा सकता। वह ऐसी विश्व-मानव हैं जिसकी प्रतिबद्धता संस्कृति, धर्म, सम्प्रदाय, राष्ट्र और भूगोल की सीमाओं को लाँघती नजर आती है। ये लेख भारतीय सत्ता प्रतिष्ठान से लेकर सर्वशक्तिमान अमरीकी सत्ता प्रतिष्ठान तक के निहित स्वार्थों और क्रिया-कलापों पर समान ताकत से आक्रमण करते हुए उनके जन विरोधी कार्यों को उद्घाटित कर असली चेहरे को हमारे सामने रख देते हैं। एक रचनात्मक लेखक के चुटीलेपन, संवेदनशीलता, सघनता व दृष्टि-सम्पन्नता के अलावा इन लेखों में पत्रकारिता की रवानगी और उस शोधकर्ता का-सा परिश्रम और सजगता है जो अपने तर्क को प्रस्तुत करने के दौरान शायद ही किसी तथ्य का इस्तेमाल करने से चूकता हो। यह मात्र संयोग है कि संग्रह के लेख पिछली सदी के अन्त और नई सदी के शुरुआती वर्षों में लिखे गए हैं। ये सत्ताओं के दमन और शोषण की विश्वव्यापी प्रवृत्तियों, ताकतवर की मनमानी व हिंसा तथा नव-साम्राज्यवादी मंशाओं के उस बोझ की ओर पूरी तीव्रता से हमारा ध्यान खींचते हैं जो नई सदी के कन्धों पर जाते हुए और भारी होता नजर आ रहा है। अरुंधति रॉय इस अमानुषिक और बर्बर होते खतरनाक समय को मात्र चित्रित नहीं करती हैं, उसके प्रति हमें आगाह भी करती हैं : यह समय मूक दर्शक बने रहने का नहीं है। –पंकज बिष्ट
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About the Book
किसी लेखक की दुनिया कितनी विशाल हो सकती है, इस संग्रह के लेखों से उसे समझा जा सकता है। ये लेख विशेषकर तीसरी दुनिया के समाज में एक लेखक की भूमिका का भी मानदंड कहे जा सकते हैं। अरुंधति रॉय भारतीय अंग्रेजी की उन विरल लेखकों में से हैं जिनका सारा रचनाकर्म अपने सामाजिक सरोकार से उपजा है। इन लेखों को पढ़ते हुए जो बात उभरकर आती है, वह यह कि वही लेखक वैश्विक दृष्टिवाला हो सकता है जिसकी जड़ें अपने समाज में हों। यही वह स्रोत है जो किसी लेखक की आवाज को मजबूती देता है और नैतिक बल से पुष्ट करता है। क्या यह अकारण है कि जिस दृढ़ता से मध्य प्रदेश के आदिवासियों के हक में हम अरुंधति की आवाज सुन सकते हैं, उसी बुलन्दी से वह रेड इंडियनों या आस्ट्रेलिया के आदिवासियों के पक्ष में भी सुनी जा सकती है। तात्पर्य यह है कि परमाणु बम हो या बोध का मसला, अफगानिस्तान हो या इराक, जब वह अपनी बात कह रही होती हैं, उसे अनसुना-अनदेखा नहीं किया जा सकता। वह ऐसी विश्व-मानव हैं जिसकी प्रतिबद्धता संस्कृति, धर्म, सम्प्रदाय, राष्ट्र और भूगोल की सीमाओं को लाँघती नजर आती है। ये लेख भारतीय सत्ता प्रतिष्ठान से लेकर सर्वशक्तिमान अमरीकी सत्ता प्रतिष्ठान तक के निहित स्वार्थों और क्रिया-कलापों पर समान ताकत से आक्रमण करते हुए उनके जन विरोधी कार्यों को उद्घाटित कर असली चेहरे को हमारे सामने रख देते हैं। एक रचनात्मक लेखक के चुटीलेपन, संवेदनशीलता, सघनता व दृष्टि-सम्पन्नता के अलावा इन लेखों में पत्रकारिता की रवानगी और उस शोधकर्ता का-सा परिश्रम और सजगता है जो अपने तर्क को प्रस्तुत करने के दौरान शायद ही किसी तथ्य का इस्तेमाल करने से चूकता हो। यह मात्र संयोग है कि संग्रह के लेख पिछली सदी के अन्त और नई सदी के शुरुआती वर्षों में लिखे गए हैं। ये सत्ताओं के दमन और शोषण की विश्वव्यापी प्रवृत्तियों, ताकतवर की मनमानी व हिंसा तथा नव-साम्राज्यवादी मंशाओं के उस बोझ की ओर पूरी तीव्रता से हमारा ध्यान खींचते हैं जो नई सदी के कन्धों पर जाते हुए और भारी होता नजर आ रहा है। अरुंधति रॉय इस अमानुषिक और बर्बर होते खतरनाक समय को मात्र चित्रित नहीं करती हैं, उसके प्रति हमें आगाह भी करती हैं : यह समय मूक दर्शक बने रहने का नहीं है।
–पंकज बिष्ट
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 7th
- Publication year
- 2005
- Weight
- 254 grams
- ISBN-13
- 9788126711154
- Pages
- 227
- Reading time
- ~8 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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