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Hamari Pramukh Rashtriya Prayogshalayen

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वैज्ञानिक प्रयोगशालाएँ आधुनिक भारत की प्रगतिशील यात्रा के पड़ाव भी हैं और उसे बल देनेवाले शक्ति–केन्द्र भी। ये प्रयोगशालाएँ देश के विद्यार्थियों को बड़े पैमाने पर शोधकार्य करने की सहूलियतें देती हैं, उन्हें अपनी प्रतिभा का उपयोग करने का अवसर प्रदान करती हैं, और इस प्रकार देश के वैज्ञानिक व आर्थिक विकास को गति देती हैं। हमारी प्रमुख विज्ञान–संस्था ‘वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसन्धान परिषद’ (सी.एस.आई.आर.) के तहत तीस राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ और बारह सरकारी औद्योगिक संस्थाएँ कार्यरत हैं। इस पुस्तक के लेखक और वैज्ञानिक विषयों के विद्वान गुणाकर मुळे 1994–95 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सलाहकार समिति के सदस्य थे। उसी समय उन्होंने यह विचार प्रकट किया था कि इन प्रयोगशालाओं में क्या कार्य हो रहे हैं, और उनके प्रमुख शोध–क्षेत्र क्या–क्या हैं, इस विषय में जनसाधारण को बहुत ज्‍़यादा जानकारी नहीं है, जबकि इन प्रयोगशालाओं पर देश की जनता का ही पैसा खर्च होता है। परिषद द्वारा उनके विचार का अनुमोदन मिलने पर उन्होंने देश–भर की प्रयोगशालाओं में जाकर उनके कार्य को देखा और वहाँ हो रही शोध–प्रक्रियाओं को समझा। उनकी इन्हीं यात्राओं का नतीजा है यह पुस्तक। देश की विभिन्न प्रयोगशालाओं के इतिहास, उनके कार्यों, उपलब्धियों और सम्‍बन्धित विषयों की सम्पूर्ण जानकारी से लैस इस पुस्तक में गुणाकर मुळे ने अत्यन्त सरल भाषा में आधुनिक भारत के इन शक्तिपीठों का वर्णन किया है। निस्सन्देह, यह पुस्तक देश की वैज्ञानिक प्रगति में रुचि रखनेवाले जिज्ञासु पाठकों के लिए उपादेय और रुचिकर सिद्ध होगी।

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वैज्ञानिक प्रयोगशालाएँ आधुनिक भारत की प्रगतिशील यात्रा के पड़ाव भी हैं और उसे बल देनेवाले शक्ति–केन्द्र भी। ये प्रयोगशालाएँ देश के विद्यार्थियों को बड़े पैमाने पर शोधकार्य करने की सहूलियतें देती हैं, उन्हें अपनी प्रतिभा का उपयोग करने का अवसर प्रदान करती हैं, और इस प्रकार देश के वैज्ञानिक व आर्थिक विकास को गति देती हैं।

हमारी प्रमुख विज्ञान–संस्था ‘वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसन्धान परिषद’ (सी.एस.आई.आर.) के तहत तीस राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ और बारह सरकारी औद्योगिक संस्थाएँ कार्यरत हैं। इस पुस्तक के लेखक और वैज्ञानिक विषयों के विद्वान गुणाकर मुळे 1994–95 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सलाहकार समिति के सदस्य थे। उसी समय उन्होंने यह विचार प्रकट किया था कि इन प्रयोगशालाओं में क्या कार्य हो रहे हैं, और उनके प्रमुख शोध–क्षेत्र क्या–क्या हैं, इस विषय में जनसाधारण को बहुत ज्‍़यादा जानकारी नहीं है, जबकि इन प्रयोगशालाओं पर देश की जनता का ही पैसा खर्च होता है। परिषद द्वारा उनके विचार का अनुमोदन मिलने पर उन्होंने देश–भर की प्रयोगशालाओं में जाकर उनके कार्य को देखा और वहाँ हो रही शोध–प्रक्रियाओं को समझा।

उनकी इन्हीं यात्राओं का नतीजा है यह पुस्तक। देश की विभिन्न प्रयोगशालाओं के इतिहास, उनके कार्यों, उपलब्धियों और सम्‍बन्धित विषयों की सम्पूर्ण जानकारी से लैस इस पुस्तक में गुणाकर मुळे ने अत्यन्त सरल भाषा में आधुनिक भारत के इन शक्तिपीठों का वर्णन किया है।

निस्सन्देह, यह पुस्तक देश की वैज्ञानिक प्रगति में रुचि रखनेवाले जिज्ञासु पाठकों के लिए उपादेय और रुचिकर सिद्ध होगी।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2012
Weight
370 grams
ISBN-13
9788126722631
Pages
193
Reading time
~6 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22.5 cm
Language
Hindi

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