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Jyotish Vikas, Prakar Aur Jyotirvid

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ज्योतिष शब्द का नाम आते ही हमारा ध्यान भाग्यफल या फलित ज्योतिष की ओर जाता है। आज टी.वी. चैनलों और अख़बारों में ज्योतिष विद्या और ज्योतिषियों की बाढ़ आई हुई है। लोग सड़क पर, मन्दिर में बैठे ज्योतिषियों से अपने भविष्य और भाग्य का पता लगाते रहते हैं। इस तरह लोक-व्यवहार में, ज्योतिष का अर्थ हो गया है—फलित ज्योतिष, यानी ग्रह-नक्षत्रों के शुभाशुभ फल बतानेवाली विद्या। परन्तु आरम्भ में इस शब्द का यह अर्थ नहीं था। वस्तुत: ज्योतिष खगोल विज्ञान का हिस्सा है। यह सूर्यादि ग्रह और काल का बोध करानेवाला शास्त्र है। आदिमानव से लेकर आज तक मानव को काल-ज्ञान, स्थिति-ज्ञान और दिशा-ज्ञान की जिज्ञासा रही है। उसने इसी जिज्ञासा के समाधान के लिए प्रयत्न किया और इसी से ज्योतिष का उदय हुआ। आकाशीय ज्योतियों अर्थात् सूर्यादि नक्षत्रों तथा ग्रहों आदि की गतियों को जानना और उनकी गणना करना मुख्य रूप से इसके अन्तर्गत आता है। गुणाकर मुळे स्वयं खगोल विज्ञान के विद्यार्थी थे। नक्षत्रों और ग्रहों के बारे में उन्होंने गहन अध्ययन किया था। उन्होंने 'ज्योतिष : विकास, प्रकार और ज्योतिर्विद्’ पुस्तक में ज्योतिष के विकास-क्रम पर तो प्रकाश डाला ही है, ज्योतिष के वैज्ञानिक और तार्किक पक्ष को भी उभारा है। उन्होंने इस पुस्तक में यह भी स्थापित किया है कि फलित ज्योतिष अवैज्ञानिक और अभारतीय है।

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ज्योतिष शब्द का नाम आते ही हमारा ध्यान भाग्यफल या फलित ज्योतिष की ओर जाता है। आज टी.वी. चैनलों और अख़बारों में ज्योतिष विद्या और ज्योतिषियों की बाढ़ आई हुई है। लोग सड़क पर, मन्दिर में बैठे ज्योतिषियों से अपने भविष्य और भाग्य का पता लगाते रहते हैं। इस तरह लोक-व्यवहार में, ज्योतिष का अर्थ हो गया है—फलित ज्योतिष, यानी ग्रह-नक्षत्रों के शुभाशुभ फल बतानेवाली विद्या। परन्तु आरम्भ में इस शब्द का यह अर्थ नहीं था।
वस्तुत: ज्योतिष खगोल विज्ञान का हिस्सा है। यह सूर्यादि ग्रह और काल का बोध करानेवाला शास्त्र है। आदिमानव से लेकर आज तक मानव को काल-ज्ञान, स्थिति-ज्ञान और दिशा-ज्ञान की जिज्ञासा रही है। उसने इसी जिज्ञासा के समाधान के लिए प्रयत्न किया और इसी से ज्योतिष का उदय हुआ। आकाशीय ज्योतियों अर्थात् सूर्यादि नक्षत्रों तथा ग्रहों आदि की गतियों को जानना और उनकी गणना करना मुख्य रूप से इसके अन्तर्गत आता है।

गुणाकर मुळे स्वयं खगोल विज्ञान के विद्यार्थी थे। नक्षत्रों और ग्रहों के बारे में उन्होंने गहन अध्ययन किया था। उन्होंने 'ज्योतिष : विकास, प्रकार और ज्योतिर्विद्’ पुस्तक में ज्योतिष के विकास-क्रम पर तो प्रकाश डाला ही है, ज्योतिष के वैज्ञानिक और तार्किक पक्ष को भी उभारा है। उन्होंने इस पुस्तक में यह भी स्थापित किया है कि फलित ज्योतिष अवैज्ञानिक और अभारतीय है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2015
Weight
350 grams
ISBN-13
9788189444594
Pages
160
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

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