Rocket Ki Kahani
Author:
Gunakar MuleyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Science0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
आतिशबाज़ी में या त्योहारों के अवसरों पर जिन ‘राकेटों’ को उड़ाया जाता है, उनका आविष्कार सदियों पहले हुआ था। मनोरंजन करनेवाले इन छोटे राकेटों में और आदमी को चन्द्रमा तक पहुँचानेवाले आज के भीमकाय राकेटों में सिद्धान्तत: कोई अन्तर नहीं है। आतिशबाज़ी के ‘राकेट’ भी निर्वात में यात्रा कर सकते हैं लेकिन वह इतना शक्तिशाली नहीं होते, इसलिए कुछ मीटर ऊपर जाकर नीचे आ गिरते हैं, परन्तु अब ऐसे राकेट बन चुके हैं जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को लाँघते हुए बाह्य अन्तरिक्ष तक पहुँच जाते हैं। यही एक राकेट-यान है जो अन्तरिक्ष में यात्रा कर सकता है। इसी मानव-निर्मित यान ने अन्तरिक्ष-यात्रा के युग का उद्घाटन किया है।
राकेट-यान ने धरती के मानव को चन्द्रमा तक पहुँचाया है। निकट भविष्य में यह यान आदमी को सौर-मंडल के सभी ग्रहों तक पहुँचा देगा, और आगे यही यान आदमी को दूसरे तारों के ग्रहों तक या आकाशगंगाओं की दूरस्थ सीमाओं तक भी लेकर जा सकता है। श्री मुळे ने पी.एस.एल.वी. राकेट-यान शृंखला तक के विकास, निर्माण और उन्हें अन्तरिक्ष में छोड़े जाने की कहानी को इस पुस्तक में बड़ी ही रोचक और सरल भाषा में लिखा है और राकेट विज्ञान के तमाम सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक पहलुओं से पाठकों को अवगत कराया है।
ISBN: 9789381863350
Pages: 108
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Gunakar Muley
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- Description: विज्ञान की दृष्टि से प्राचीन भारत विश्व के अग्रणी देशों में रहा है। चिकित्सा के क्षेत्र में ‘चरक-संहिता’ और ‘सुश्रुत-संहिता’ के साथ-साथ संसार-भर में प्रचलित शून्य पर आधारित दाशमिक स्थानमान अंक-पद्धति इसका प्रमाण है। धातुकर्म के क्षेत्र में, दिल्ली में कुतुब मीनार के निकट स्थित सोलह सौ वर्ष पुराना लौह-स्तम्भ भी प्राचीन भारत की वैज्ञानिक चेतना का ज्वलन्त उदाहरण है। यह पुस्तक विज्ञान-विषयों के अग्रणी लेखक गुणाकर मुळे की ओर से भारतीय वैज्ञानिक चेतना के प्रति एक कृतज्ञता-ज्ञापन है। विज्ञान की जटिल गुत्थियों को सरल शब्दों में जन-जन तक पहुँचाने की मुहिम में जीवन-भर कटिबद्ध रहे श्री मुळे ने इस पुस्तक में वेदों में वैज्ञानिक अवधारणाओं से लेकर प्राचीन भारत में गणित के विकास, आयुर्वेद के उद्भव और उन्नयन के साथ-साथ वराहमिहिर और नागार्जुन आदि वैज्ञानिकों के अवदान पर प्रकाश डाला है। भारत में प्लास्टिक सर्जरी के इतिहास पर पुस्तक में एक स्वतंत्र अध्याय रखा गया है। इसके अलावा परिशिष्ट में प्राचीन भारत से सम्बन्धित प्रमुख तिथियों का संकलन किया गया है, जिनसे इस देश की वैज्ञानिक चेतना के विकास का एक समग्र मानचित्र हमारे सामने आ जाता है।
The Song Of The Cell
- Author Name:
Siddhartha Mukherjee
- Book Type:

- Description: From Pulitzer Prize-winning and #1 New York Times bestselling author of The Emperor of All Maladies and The Gene, The Song of The Cell is the third book in this extraordinary writer’s exploration of what it means to be human-rich with Siddhartha Mukherjee’s revelatory and exhilarating stories of scientists, doctors, and all the patients whose lives may be saved by their work. In the late 1600s, a distinguished English polymath, Robert Hooke, and an eccentric Dutch cloth merchant, Antonie van Leeuwenhoek, look down their handmade microscopes. What they see introduces a radical concept that sweeps through biology and medicine, touching virtually every aspect of the two sciences and altering both forever. It is the fact that complex living organisms are assemblages of tiny, self-contained, self-regulating units. Our organs, our physiology, our selves-hearts, blood, brains-are built from these compartments. Hooke christens them ‘cells’. The discovery of cells-and the reframing of the human body as a cellular ecosystem-announced the birth of a new kind of medicine based on the therapeutic manipulations of cells. A hip fracture, a cardiac arrest, Alzheimer’s, dementia, AIDS, pneumonia, lung cancer, kidney failure, arthritis, COVID-all could be viewed as the results of cells, or systems of cells, functioning abnormally. And all could be perceived as loci of cellular therapies. In The Song of the Cell, Mukherjee tells the story of how scientists discovered cells, began to understand them, and are now using that knowledge to create new humans. He seduces readers with writing so vivid, lucid, and suspenseful that complex science becomes thrilling. Told in six parts, laced with Mukherjee’s own experience as a researcher, doctor, and prolific reader,
Ganit Se Jhalakti Sanskriti
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: गणित और संस्कृति का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध रहा है। अतीत की कौन सी संस्कृति कितनी उन्नत रही है, यह उसकी गणितीय उपलब्धियों से पहचाना जा सकता है। किसी आदिम जनजाति की भौतिक अवस्था इस बात से भी जानी जा सकती है कि वह कहाँ तक गिनती कर सकती है। यूनानियों ने मिस्र से ज्यामितीय जानकारी हासिल करके उसका आगे विकास किया और उसे निगमनात्मक तर्कशास्त्र का इतना सुदृढ़ जामा पहनाया कि यूक्लिड (300 ई.पू.) की ज्यामिति आज भी सारी दुनिया के स्कूलों में पढ़ाई जाती है। ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में संसार को भारत की सबसे बड़ी देन है—शून्य सहित सिर्फ़ दस संकेतों से सारी संख्याएँ लिखने की अंक-पद्धति, जिसका आज सारी दुनिया में व्यवहार होता है। गणित अब एक व्यापक विषय बन गया है। आज गणित के बिना किसी भी विषय का गहन अध्ययन सम्भव नहीं है। भौतिकी, रसायन, आनुवंशिकी आदि अनेक वैज्ञानिक विषयों के लिए गणित का बुनियादी महत्त्व है। इस पुस्तक के लेखक गुणाकर मुळे आजीवन हिन्दी भाषा-भाषी समाज को वैज्ञानिक चेतना से सम्पन्न बनाने का सपना देखते रहे। इसी उद्देश्य को ध्यान में रख उन्होंने अनेकानेक ग्रन्थों की रचना की। गणित और संस्कृति के अन्तर्सम्बन्धों को रेखांकित करनेवाली यह पुस्तक भी उनकी इसी साधना का फल है जिसे पाठक निश्चय ही अत्यन्त उपयोगी पाएँगे।
Chemical Industry Futurity Myths
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Chemical Industry Futurity Myths is a book written by Dr. Sanjay Rout that examines the myths and realities of the chemical industry in today's world. The book focuses on how these myths can be used to shape policy decisions, business strategies, and public perceptions about this vital sector of our economy. The first chapter delves into common misconceptions about chemicals such as their potential for harm or usefulness as a resource for energy production or manufacturing processes. It also looks at how technological advances have changed the way we think about chemicals and their impact on society over time, including topics like nanotechnology, biotechnology, green chemistry initiatives, synthetic biology research projects etc.. Additionally it provides an overview of current regulations governing chemical use in different countries around the world - from environmental protection laws to product safety standards - which are essential pieces information when considering any new venture involving them . The second chapter explores various ways in which companies can capitalize on emerging technologies related to chemicals while minimizing risks associated with using them; such as investing heavily in research & development (R&D) efforts towards creating more efficient products that are safer for consumers , developing alternative sources of raw materials , engaging local stakeholders through community outreach programs etc., In addition it discusses some promising areas where advancements could lead us into future – including renewable energy resources based off organic compounds or advanced techniques aimed at reducing waste output from industrial processes . All-in-all Chemical Industry Futurity Myths offers readers valuable insight into understanding key issues impacting this field so they can make informed decisions going forward .
Aadhunik Bharat Ke Mahan Vaigyanik
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: हमारे प्राचीन वैज्ञानिकों ने अपने ग्रन्थ संस्कृत भाषा में लिखे। आधुनिक काल के वैज्ञानिक अपने शोध-निबन्ध अंग्रेज़ी में लिखते हैं। अत: इन वैज्ञानिकों के कृतित्व को आज की जनभाषा में प्रस्तुत करने में जो कठिनाइयाँ होती हैं, उनकी कल्पना करना कठिन नहीं है। पुराने संस्कृत ग्रन्थों के ज्ञान को आज की भारतीय भाषाओं में समझाना उतना कठिन नहीं हैं। परन्तु विरेशी भाषाओं में प्रस्तुत किए गए आधुनिक विज्ञान को जनभाषा में समझाने में अनेक कठिनाइयाँ हैं। आधुनिक विज्ञान अब विशेष सांकेतिक चिन्हों और पारिभाषिक शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है। आधुनिक भारत के दस वैज्ञानिकों को मैंने चुना है। दस को ही चुनना था, इसीलिए यह चुनाव। वरना, और भी कई वैज्ञानिकों को चुना जा सकता है। अक्सर यह होता है कि ‘प्रशासक-वैज्ञानिक’ को अधिक प्रसिद्ध मिल जाती है और अपने क्षेत्र में विशेष कार्य करनेवाले वैज्ञानिक जनसाधारण के लिए गुमनाम बने रहते हैं। आशा है, पाठक इस पुस्तक को पसन्द करेंगे। —‘अपनी बात’ से
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