Jankigita
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भगवान श्रीराम की जीवनसंगिनी जानकी यानी सीताजी को आदिरामायण कही जानेवाली ‘काकभुशुंडि रामायण’ सहित विविध रामकथाओं में स्वयं परमेश्वर की आदि पराशक्ति बतलाया गया है। वह प्रभु की अवतार लीला का आधार बनकर उनके साथ ही आती और कार्य पूर्ण होने पर वापस जाती दिखाई गई हैं। स्वयं आदिमहादेव भगवान शिव शंकर, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा तथा सारे वैदिक देवता माता जानकी के आदि पराशक्ति स्वरूप की स्तुति करें; माता जानकी की महिमा का बखान सभी रामकथाओं में इस स्तर पर नहीं मिलता। रामायण के सभी प्रमुख संस्करणों में सीताजी की महत्ता तथा उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों में आये प्रमुख उपदेशों को एक साथ मिलाने पर दिव्य सहज ज्ञान का एक अद्भुत स्वरूप उत्पन्न होता है; इसे ही ‘जानकीगीता’ कहा गया है। वर्तमान युग में जब पति-पत्नी के पारस्परिक सम्बन्धों का समीकरण अनेक कारणों से बदलता जा रहा है, बेटियों, बहुओं और माताओं के साथ पुरुषों को यह ध्यान दिलाना बहुत आवश्यक है कि जिन्हें शास्त्रों ने आदि पराशक्ति माना, जो दो बड़े साम्राज्यों मिथिला और अयोध्या से सम्बन्धित थीं उन माता जानकी ने स्त्री-जीवन के उत्तरदायित्वों को किस रूप में समझा तथा समझाया है? संसार में सीताजी को आखिर किसलिए सर्वाधिक आदर्श बेटी, पत्नी और स्त्रीशक्ति माना जाता है? नन्हे बालकों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ‘जानकीगीता’ के इस ज्ञान का किस तरह उपयोग कर सकते हैं? यही इस ग्रन्थ का मूल आधार है।
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About the Book
भगवान श्रीराम की जीवनसंगिनी जानकी यानी सीताजी को आदिरामायण कही जानेवाली ‘काकभुशुंडि रामायण’ सहित विविध रामकथाओं में स्वयं परमेश्वर की आदि पराशक्ति बतलाया गया है। वह प्रभु की अवतार लीला का आधार बनकर उनके साथ ही आती और कार्य पूर्ण होने पर वापस जाती दिखाई गई हैं। स्वयं आदिमहादेव भगवान शिव शंकर, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा तथा सारे वैदिक देवता माता जानकी के आदि पराशक्ति स्वरूप की स्तुति करें; माता जानकी की महिमा का बखान सभी रामकथाओं में इस स्तर पर नहीं मिलता।
रामायण के सभी प्रमुख संस्करणों में सीताजी की महत्ता तथा उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों में आये प्रमुख उपदेशों को एक साथ मिलाने पर दिव्य सहज ज्ञान का एक अद्भुत स्वरूप उत्पन्न होता है; इसे ही ‘जानकीगीता’ कहा गया है। वर्तमान युग में जब पति-पत्नी के पारस्परिक सम्बन्धों का समीकरण अनेक कारणों से बदलता जा रहा है, बेटियों, बहुओं और माताओं के साथ पुरुषों को यह ध्यान दिलाना बहुत आवश्यक है कि जिन्हें शास्त्रों ने आदि पराशक्ति माना, जो दो बड़े साम्राज्यों मिथिला और अयोध्या से सम्बन्धित थीं उन माता जानकी ने स्त्री-जीवन के उत्तरदायित्वों को किस रूप में समझा तथा समझाया है?
संसार में सीताजी को आखिर किसलिए सर्वाधिक आदर्श बेटी, पत्नी और स्त्रीशक्ति माना जाता है? नन्हे बालकों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ‘जानकीगीता’ के इस ज्ञान का किस तरह उपयोग कर सकते हैं? यही इस ग्रन्थ का मूल आधार है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2026
- Weight
- 220 grams
- ISBN-13
- 9789309020346
- Pages
- 216
- Reading time
- ~7 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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