Indragita
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Author:
Ashok Kumar SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
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आध्यात्मिक साहित्य में ‘इन्द्रगीता’ ऐसी एकमात्र गीता है जो धर्म, योग या मोक्ष का मार्ग नहीं दिखाती बल्कि मनुष्य को जीवन से पलायन के बजाय जीवन के प्रति प्रवृत्त करती है। यह गीता युद्ध के पूर्व, बाद में या युद्धभूमि में कही गई नहीं है। यह मनुष्य को आन्तरिक पराजय से लड़कर हर संघर्ष जीतने की शक्ति देनेवाली गीता है। यह उत्तर-वैदिक परम्परा का सम्भवतः सबसे प्राचीन मनोचिकित्सा उपदेश है। इसे धर्म, कर्म और चिन्तन की दृष्टि से बहुत मनोरंजक तथा व्यावहारिक स्वरूप दिया गया है, क्योंकि यह निराशा, आत्महीनता, अस्तित्व के संकट और घोर निराशा में पड़कर जीवन को ही व्यर्थ समझने की मानसिकता का बहुत सफलता से सामना करना सिखाती है। मूलरूप में यह गीता एक प्रामाणिक महाभारतकालीन कथा है, जब वैदिक चेतना का उत्तराधिकारी एक ब्राह्मण अपने जीवन से निराश होकर आत्महत्या करनेवाला था, तब देवराज इन्द्र को उसे बचाने आना पड़ा। इस पुस्तक में धरती का स्वर्ग कहलानेवाले राज्य कश्मीर के जन्म की प्राचीनतम और प्रामाणिक कहानी भी वर्णित है। वस्तुत: ‘इन्द्रगीता’ जीवन के अत्यन्त गहरे प्रश्नों का उत्तर देती है और कठिन समस्याओं का क्रमबद्ध, व्यावहारिक, आसान और रोचक समाधान प्रस्तुत करती है। यह गीता देवराज इन्द्र के बारे में व्यापक रूप से प्रचलित धारणा को भी बदलने में सक्षम है जिसमें स्वयं देवराज इन्द्र मोक्ष से पहले जीवन को महत्त्व देने की शिक्षा देते हैं।
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आध्यात्मिक साहित्य में ‘इन्द्रगीता’ ऐसी एकमात्र गीता है जो धर्म, योग या मोक्ष का मार्ग नहीं दिखाती बल्कि मनुष्य को जीवन से पलायन के बजाय जीवन के प्रति प्रवृत्त करती है। यह गीता युद्ध के पूर्व, बाद में या युद्धभूमि में कही गई नहीं है। यह मनुष्य को आन्तरिक पराजय से लड़कर हर संघर्ष जीतने की शक्ति देनेवाली गीता है। यह उत्तर-वैदिक परम्परा का सम्भवतः सबसे प्राचीन मनोचिकित्सा उपदेश है। इसे धर्म, कर्म और चिन्तन की दृष्टि से बहुत मनोरंजक तथा व्यावहारिक स्वरूप दिया गया है, क्योंकि यह निराशा, आत्महीनता, अस्तित्व के संकट और घोर निराशा में पड़कर जीवन को ही व्यर्थ समझने की मानसिकता का बहुत सफलता से सामना करना सिखाती है। मूलरूप में यह गीता एक प्रामाणिक महाभारतकालीन कथा है, जब वैदिक चेतना का उत्तराधिकारी एक ब्राह्मण अपने जीवन से निराश होकर आत्महत्या करनेवाला था, तब देवराज इन्द्र को उसे बचाने आना पड़ा। इस पुस्तक में धरती का स्वर्ग कहलानेवाले राज्य कश्मीर के जन्म की प्राचीनतम और प्रामाणिक कहानी भी वर्णित है।
वस्तुत: ‘इन्द्रगीता’ जीवन के अत्यन्त गहरे प्रश्नों का उत्तर देती है और कठिन समस्याओं का क्रमबद्ध, व्यावहारिक, आसान और रोचक समाधान प्रस्तुत करती है। यह गीता देवराज इन्द्र के बारे में व्यापक रूप से प्रचलित धारणा को भी बदलने में सक्षम है जिसमें स्वयं देवराज इन्द्र मोक्ष से पहले जीवन को महत्त्व देने की शिक्षा देते हैं।
Book Details
-
ISBN9789309020322
-
Pages158
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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