Shivgita
Author:
Ashok Kumar SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
वैष्णव तथा शैव विचारधाराओं के अपूर्व समन्वय की ज्योति है यह गीता। जिसमें सांसारिक उपलब्धियाँ दिलाने, संकट मिटाने एवं सामर्थ्य बढ़ाने के उपदेश हैं। यह गीता आत्मज्ञान, आध्यात्मिक प्रगति, जीवन संघर्ष में विजय, धर्म और कर्तव्य पालन में सफलता दिलाने की सीढ़ी है। शिवगीता की शिक्षाएँ जीवन में ध्यान और मानसिक शक्तियों के विकास का स्रोत बन सकती हैं। इस गीता से समस्याओं के समाधान तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने का भी मार्गदर्शन मिलता है। भगवान शिव ने कर्म, भक्ति और ज्ञान के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति के विभिन्न मार्गों की व्याख्या की है।
ISBN: 9789348157614
Pages: 200
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: हिंदू त्रिदेवों में भगवान शिव कई आयामों वाले देवता हैं। स्वभाव से उग्र एवं दयालु भगवान शिव जीवन की द्वैतता के प्रतीक हैं। शैव धर्म के केंद्र में शिव की पूजा ही है। शिवलिंग और बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं की इतनी अधिक आस्था है कि वे अनादि काल से ही इसे अपना तीर्थस्थल मानते आ रहे हैं। ये प्रतिष्ठित स्तंभ व्यक्तिगत कथाओं और विद्वतापूर्ण शोध का हिस्सा बन गए हैं। इस पुस्तक के लेखकों में अमित कपूर, बिबेक देबरॉय, विभव कपूर और कॉनर मार्टिन शामिल हैं। ये सभी लेखक इन ज्योतिर्लिंगों से जुड़ी कहानियों को संजोने के अलावा उनके सार और समय के साथ उनकी शाब्दिक और रूपक यात्राओं पर विचार करते हैं।
Main Arvind Bol Raha Hoon
- Author Name:
Giriraj Sharan Agrawal
- Book Type:

- Description: संसार को आध्यात्मिकता, राष्ट्र को राजनीतिक चेतना तथा समाज को समन्वय की संस्कृति का ज्ञान देकर जिसने हमारे सांस्कृतिक इतिहास तथा राजनीतिक चिंतनधारा को सबसे अधिक अलंकृत किया, उस व्यक्तित्व का नाम है—महर्षि अरविंद घोष। अरविंद ने भारत की आराधना माता के समान की। भारतमाता को स्वाधीन कराने के लिए उन्होंने निरंतर संघर्ष किया। भारत की स्वतंत्रता के माध्यम से वे विश्व-मानवता की सेवा करना चाहते थे। भारतीय स्वतंत्रता के संदर्भ में उन्होंने कहा था—‘किसी भी राष्ट्र के सुस्वास्थ्य तथा जीवंतता के लिए स्वतंत्रता पहली आवश्यकता है।’ राष्ट्रवाद को उन्होंने राष्ट्र तथा नागरिकों के लिए वरदान माना। उनका मत था कि स्वराज्य के बिना राष्ट्र समान है। अरविंद मूलत: अध्यात्म-पुरुष थे। वे प्रकांड पांडित्य और गहन अंतर्दृष्टि के व्यक्ति थे। ऐसे क्रांतिकारी विचारक, महान् योगी, विश्व-मानवता के उन्नायक, आध्यात्मिक महापुरुष महर्षि अरविंद घोष की चिंतनधारा से परिचित कराने के संकल्प के साथ यह संकलन प्रस्तुत है।
Islam Ke Dharmik Aayam
- Author Name:
Zafar Raza
- Book Type:

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Description:
इस्लाम के धार्मिक आयाम का समुचित संज्ञान हुसैनी क्रान्ति के परिप्रेक्ष्य में ही
सम्भव है, जिसके नायक इस्लामी पैग़म्बर के सगे नाती हज़रत इमाम हुसैन थे, जिन्होंने सत्य एवं न्याय की प्रतिरक्षा में जिहाद किया और अपने सहयोगियों तथा परिवारजनों सहित कर्बला में शहीद हुए। इमाम हुसैन की शहादत के सर्वव्यापी प्रभाव का अनुमान इससे किया जा सकता है कि हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी ने इमाम हुसैन के व्यक्तित्व को ही वास्तविक इस्लाम माना है—“दीन अस्त हुसैन व दीनपनाह अस्त हुसैन।”
हुसैनी क्रान्ति के अनेक आयाम हैं—धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक आदि। इस महत्त्वपूर्ण विषय पर हिन्दी भाषा में किसी पुस्तक का नितान्त अभाव रहा है। प्रस्तुत ग्रन्थ इस कमी
को पूरा ही नहीं करता, वरन् इस महत्त्वपूर्ण विषय पर यह एक प्रामाणिक दस्तावेज़ है। विद्वान लेखक प्रो. जाफ़र रज़ा ने जिस प्रकार हुसैनी क्रान्ति के उद्देश्यों, घटनाक्रमों एवं निष्कर्षों का वस्तुनिष्ठ एवं निष्पक्ष भाव से विश्लेषण किया है, वह अत्यन्त सराहनीय है। संवेदनशील विषयों पर उनका दृष्टिकोण सन्तुलित, सहज एवं उदार रहा है। जो बात भी कही है, वह ठोस आधार पर प्रामाणिक है। इस्लाम विषयक उनकी विशिष्ट कृतियों के अध्ययन से लगता है कि यही उनका अस्ल मैदान है। इस्लामी इतिहास, धर्म एवं संस्कृति पर उन्हें पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
हुसैनी क्रान्ति विषयक पुस्तकों में प्रस्तुत ग्रन्थ शोधपरक वैज्ञानिक दृष्टि के आधार पर अद्वितीय है। उर्दू ही नहीं, फ़ारसी, अरबी या अंग्रेज़ी में भी ऐसी कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं है। विश्वास है कि हिन्दी-
जगत् प्रस्तुत ग्रन्थ का स्वागत करेगा।
—प्रो. वहाब अशरफ़ी; 16 फरवरी, 2011
Kashmir 370 Ke Sath Aur Baad (Hindi Translation of Valley of Red Snow)
- Author Name:
Jitendra Dixit
- Book Type:

- Description: 5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देनेवाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया था। जम्मू-कश्मीर अब एक केंद्र शासित प्रदेश है। कश्मीर की इस ऐतिहासिक घटना से पहले आजादी के बाद के सात दशकों में सिलसिलेवार अनेक राजनीतिक और सामाजिक घटनाएँ हुई थीं। किन ताकतों की वजह से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की यह प्रक्रिया हुई? जम्मू-कश्मीर के लोगों पर इसके क्या परिणाम हुए? इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी? और सबसे महत्त्वपूर्ण बात, उनका भविष्य क्या है? वरिष्ठ पत्रकार जीतेंद्र दीक्षित लिखित ‘कश्मीर : 370 के साथ और बाद’ में इन सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई है। साथ ही एक निष्पक्ष, सही-गलत का फैसला सुनाए बिना तमाम पहलुओं को शामिल करनेवाली कहानी पेश करने का प्रयास भी किया गया है। यह पुस्तक अनुच्छेद 370 हटने की ऐतिहासिक घटना से पहले के वर्षों की घटनाओं, अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के समय कश्मीर की तात्कालिक स्थिति का वर्णन करती है और अनेक साक्षात्कारों के जरिए घाटी में विभिन्न हितधारकों की आवाज आप तक पहुँचाती है। यह पिछले दशक के दौरान घाटी में होनेवाली महत्त्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन करती है, जिन्हें लेखक ने कश्मीर की धरती पर जाकर देखा। यही नहीं, यह ‘न्यू कश्मीर’ पर गहरी जानकारी भी देती है। जम्मू-कश्मीर के भविष्य में रुचि रखनेवाले इसे अवश्य पढ़ें।
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