Dattatreyagita
Author:
Ashok Kumar SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Available
तत्त्वं क्षेत्रं व्योमातीतमहं क्षेत्रज्ञ उच्यते।
अहं कर्ता च भोक्ता च जीवन्मुक्तः स उच्यते॥
तत्त्व (सत्य) क्षेत्र (देह) से परे होता है और उसे क्षेत्रज्ञ (आत्मा) कहा जाता है। मैं कर्ता (क्रिया करनेवाला) और भोक्ता (भोग करनेवाला) हूँ। जो इस सत्य को जानता है, वही सच्चा जीवन्मुक्त कहलाता है।
ISBN: 9789349159020
Pages: 112
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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