Shrikrishnacharitra
(0)
Author:
Bankim Chandra Chatterjee, Ashok Kumar Sharma, Bankimchandra Chattopadhyay, Jagannath Prasad ChaturvediPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
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श्रीकृष्णचरित्र बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की मूलतः बांग्ला में इसी नाम से रचित कालजयी कृति का अनुवाद है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के वास्तविक चरित्र को ऐतिहासिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। गहन शोध और तर्कपूर्ण विश्लेषण के साथ, बंकिमचन्द्र ने श्रीकृष्ण को केवल एक पौराणिक नायक के रूप में नहीं बल्कि एक आदर्श मानव, दूरद्रष्टा राजनयिक और अलौकिक ज्ञान-सम्पन्न दार्शनिक के रूप में चित्रित किया है। लगभग 130 वर्ष पहले रची गई इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को कालानुक्रम में प्रस्तुत किया गया है। महाभारत, प्रमुख पुराणों तथा अन्य धार्मिक सन्दर्भों के प्रामाणिक उद्धरणों से समृद्ध यह पुस्तक प्राचीन और मान्य ग्रन्थों के आधार पर श्रीकृष्ण के जीवन, व्यक्तित्व-कृतित्व और उनकी शिक्षाओं को पुनर्परिभाषित करती है, जो भारतीय संस्कृति और नैतिकता के मूल्यों को सहजता से स्पष्ट करती हैं। इस कालजयी रचना की सामग्री तथा मूल शैली को बनाए रख कर, अपरिहार्य संशोधनों के साथ, इस अनूदित संस्करण को आधुनिक पाठकों के लिए अधिक प्रासंगिक बनाया गया है। निस्सन्देह यह कृति साहित्य, इतिहास, अध्यात्म, दर्शन और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए नितान्त पठनीय और अवश्य संग्रहणीय है।
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श्रीकृष्णचरित्र बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की मूलतः बांग्ला में इसी नाम से रचित कालजयी कृति का अनुवाद है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के वास्तविक चरित्र को ऐतिहासिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। गहन शोध और तर्कपूर्ण विश्लेषण के साथ, बंकिमचन्द्र ने श्रीकृष्ण को केवल एक पौराणिक नायक के रूप में नहीं बल्कि एक आदर्श मानव, दूरद्रष्टा राजनयिक और अलौकिक ज्ञान-सम्पन्न दार्शनिक के रूप में चित्रित किया है।
लगभग 130 वर्ष पहले रची गई इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को कालानुक्रम में प्रस्तुत किया गया है। महाभारत, प्रमुख पुराणों तथा अन्य धार्मिक सन्दर्भों के प्रामाणिक उद्धरणों से समृद्ध यह पुस्तक प्राचीन और मान्य ग्रन्थों के आधार पर श्रीकृष्ण के जीवन, व्यक्तित्व-कृतित्व और उनकी शिक्षाओं को पुनर्परिभाषित करती है, जो भारतीय संस्कृति और नैतिकता के मूल्यों को सहजता से स्पष्ट करती हैं।
इस कालजयी रचना की सामग्री तथा मूल शैली को बनाए रख कर, अपरिहार्य संशोधनों के साथ, इस अनूदित संस्करण को आधुनिक पाठकों के लिए अधिक प्रासंगिक बनाया गया है।
निस्सन्देह यह कृति साहित्य, इतिहास, अध्यात्म, दर्शन और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए नितान्त पठनीय और अवश्य संग्रहणीय है।
Book Details
-
ISBN9789349159389
-
Pages320
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Literary Criticism on Feminism ‘चुप्पियाँ और दरारें’ भारत की अनेक भाषाओं में लिखी गई स्त्री आत्मकथाओं की न सिर्फ शिनाख्त करती है बल्कि इन आत्मकथाओं में विन्यस्त वैचारिकी का गहन विश्लेषण भी प्रस्तुत करती है। यह न सिर्फ हिन्दी बल्कि किसी भी भारतीय भाषा में अभूतपूर्व कही जाएगी। एक सर्वथा अनूठी पुस्तक। - अशोक वाजपेयी ध्वनि प्रदूषण पर तो आज बहुत चर्चा होती है, लेकिन चुप्पी के प्रदूषण पर नहीं। सच यह है कि जाति, लिंग और धर्म की बंदिशों से घिरे अवर्ण समाज और स्त्रियों की आत्माभिव्यक्ति बहुत कम सामने आती है। इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक में गरिमा श्रीवास्तव ने यह तथ्य पहचाना है और चुप्पी की कारा तोड़ते हुए लिखी गई विभिन्न वर्गों और जातियों से निकली औरतों की आपबीती के मर्म को एक गम्भीर अन्तर्दृष्टि से परखा है। पठनीय और सरस। —मृणाल पांडेय गरिमा श्रीवास्तव की यह किताब ‘चुप्पियाँ और दरारें’ हमारा ध्यान स्त्री आत्मकथाओं की ओर ले जाती है, जहाँ मनुष्य जाति के स्त्री पक्ष के तनिक भिन्न अनुभव से हमारा साक्षात्कार होता है। यह स्त्रियों की अपनी अनुभूति है, उनकी अपनी आत्मस्वीकृतियाँ, पीड़ा और उल्लास है। कभी सिमोन द बोउआर ने ‘द सेकंड सेक्स’ के माध्यम से जेंडर का हाल सुनाया था, कुछ उसी अन्दाज में गरिमा श्रीवास्तव की यह किताब हमें भारतीय स्त्रियों की अनसुनी कहानी बताती है। निःसंदेह पठनीय और संग्रहणीय। —प्रेमकुमार मणि >गरिमा श्रीवास्तव की निगाह हिन्दी पर तो है ही, वे इस बहुभाषी, बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुसामुदायिक महादेश में हिन्दू, मुसलमान, दलित, सवर्ण, बांग्ला, मलयालम और कन्नड़ दायरों में स्त्री आत्मकथाओं के एक ऐसे बहुलतावादी संसार में प्रवेश करती हैं जिसका संधान अभी तक एक साथ एक जगह नहीं किया गया है। अश्वेत स्त्री-आत्मकथाओं पर उनका काम इस बृहद कृति में पाठकों को बोनस की तरह उपलब्ध है। —अभय कुमार दुबे
Chuppiyaan Aur Daraarein : Stree Aatmakatha : Paath Aur Saiddhantiki
Garima Shrivastava
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