EK SHAM PARIVAR KE NAAM
(0)
Author:
Pt. Vijay Shankar MehtaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789351864844
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Pitamaha Bhishma
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
यह नाटक ‘महाभारत’ या भीष्म पर आधारित ऐतिहासिक कथा-चिंतन ही नहीं, वरन् भीष्म के माध्यम से हमारे स्वविवेक, उसकी महत्त्वाकांक्षा एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सीधे जीवन व चिंतन पर पड़नेवाले प्रभाव की व्याख्या है। वहीं सृष्टि के आरंभ से अब तक के सबसे जटिल मानवीय संबंध ‘स्त्री-पुरुष’ के संदर्भ में इस नाटक को मिथकीय रूपाकारों के माध्यम से आधुनिक चेतना-बोध एवं प्रश्नों को जोड़ने का यत्न है। इस नाटक में भीष्म को दो रूपों में प्रस्तुत किया गया है—देह और अंतर्मन। इसलिए प्रस्तुति में देह कभी अंतर्मन हो सकता है तो अंतर्मन कभी देहाकार हो सकता है। इस नाटक के पात्रों में कहीं-न-कहीं हम अपने आप को पा सकते हैं। कुछ घटनाएँ हमारे जीवन से होकर भी इसी रूप में गुजरती हैं। पढ़ें तो विचार है, निहारें तो नाटक है और देखें तो दर्पण।
Jeena Sikhati hai Ramkatha
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
रामचरितमानस का दर्शन, इसकी फिलॉसफी, इसके विचार, सिद्धांत, नीति, शब्दों का गठन सबकुछ अद्भुत है। कहते हैं, जिस समय तुलसीदासजी ने रामचरितमानस लिखी, उनके दो ही सहारे थे—एक राम और दूसरे हनुमान। हनुमानजी उनका प्रमुख सहारा थे, गुरु थे उनके। जब रामचरितमानस लिखना आरंभ किया तो कहते हैं, रामचरितमानस के प्रत्येक दृश्य, प्रत्येक चौपाई, दोहा, सोरठा, छंद को तुलसीदासजी ने लिखा था। हनुमानजी रामकथा का एक-एक दिव्य दृश्य दिखाते और तुलसीदासजी लिखते चले जाते। कोई रचनाकार, सृजनकार, साहित्यकार पूरे घटनाक्रम को इस प्रकार अपने सामने देखे और लिखे, तभी उन पंक्तियों में प्राण आते हैं। तुलसीदासजी ने जिया है रामकथा को। इसीलिए रामायण हमें जीना सिखाती है। देश-काल, परिस्थिति के अनुसार पूरी रामकथा को सात भागों में बाँटते हुए इन्हें सात सोपान या सात कांड कहा जाता है। रामायण में सात कांड हैं—बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर कांड। प्रत्येक कांड में उत्तम जीवन के सूत्र समाए हैं। इस पुस्तक में उन्हें क्रमशः व्याख्यायित किया गया है। हर आम और खास की सहज समझ में आनेवाली शैली में लिखी सर्वथा नवीन रामकथा, जो हमारे जीवन को एक नई दिशा देगी, नए आयाम खोलेगी।
Purushottam Parashuram
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
पृथ्वी पर जब-जब अधर्म ने अपना अधिक प्रभाव दिखाया, तब-तब कुछ दिव्यात्माओं ने अपनी लीला दिखाई। भगवान् विष्णु के दस अवतारों में भगवान् परशुराम को भी एक माना जाता है। वे महर्षि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे। राजा कार्तवीर्य, जिसे सहस्रार्जुन भी कहा गया है, ने एक बार जमदग्निजी के आश्रम पर आक्रमण करके कामधेनु गाय का अपहरण किया। परशुरामजी ने सहस्रार्जुन से युद्ध किया और दंड-स्वरूप उसका वध कर दिया। सहस्रार्जुन के पुत्रों ने परशुरामजी की अनुपस्थिति में आश्रम पर आक्रमण कर उनके पिता जमदग्निजी की हत्या कर दी थी। इस विराट् व्यक्तित्व पर यह नाटक इसीलिए तैयार किया जा रहा है कि उनके उद्देश्यों को हम आज भी अपने निजी, पारिवारिक और राष्ट्रीय जीवन में उतार सकें। प्रयास यही किया गया है कि इनके चरित्र से संबंधित घटनाएँ शास्त्रों के आधार पर प्रामाणिक रहें। किंतु अलग-अलग शास्त्रों और साहित्य में घटनाओं के वर्णन में भिन्नता है। यह नाट्य-साहित्य केवल शोध की दृष्टि से तैयार नहीं किया गया है वरन् इसका उद्देश्य है, परशुरामजी के अद्भुत व्यक्तित्व को आज के हमारे जीवन से जोड़ना। पुरुषोत्तम परशुराम के अनुपमेय जीवन का सांगोपांग दर्शन कराती पठनीय पुस्तक।
Jeene Ki Raah Ke 125 Sootra
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में निरूपित 125 सूत्र आपको ‘जीने की राह’ दिखा सकते हैं। यह शब्दों में व्यक्त विचार मात्र नहीं, बल्कि मानव जीवन के पूरे दर्शन और परंपराओं का निचोड़ प्रस्तुत करते हैं। वैसे तो किसी भी समस्या को ठीक से समझ लेना ही उसका सबसे बड़ा निदान है। जीने की राह का मतलब ही है कि हर कदम पर समस्या आएगी, लेकिन साथ में समाधान भी लाएगी। कितना ही बड़ा दुःख या परेशानी आए, जीवन रुकना नहीं चाहिए। यह पुस्तक अपने भीतर के आत्मबल को जाग्रत् कर, सेवा, सत्य, परोपकार और अहिंसा आदि जीवनमूल्यों को जगाने की सामर्थ्य रखती है। इसके अध्ययन से सद्प्रवृत्ति विकसित होगी, सद्विचार मुखर होंगे और हम आनंद, संतोष और सार्थक जीवन जी पाएँगे। जीवन को सरल-सहज बनाने के व्यावहारिक सूत्र बताती पठनीय पुस्तक।
Kamyab Hona Hi Hai
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
‘कामयाब होना ही है’ विद्यार्थियों के लिए एक अत्यंत प्रेरक और मार्गदर्शक पुस्तक है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है; बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है क्योंकि इन्हीं में सारे सांसारिक ज्ञान निहित हैं। इनका अनुसरण और अनुपालन कर प्रत्येक व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, व्यावहारिक—हर स्तर पर मनचाही सफलता हासिल कर सकता है। इस पुस्तक में विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास के साथ-साथ मानसिक व भावनात्मक विकास हेतु छोटे-छोटे रोचक व प्रेरक प्रसंग दिए गए हैं, जो कथा-किस्सों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी और संग्रहणीय पुस्तक, जो जीवन के प्रत्येक कदम पर उनकी सभी समस्याओं व कठिनाइयों का त्वरित हल प्रस्तुत करने को सदैव तत्पर रहेगी। सफलता के नए सोपान खोलनेवाली पठनीय प्रेरक पुस्तक।
Jeevan Prabandhan : Kripa Karahu Guru Dev Ki Naain
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta +1
- Book Type:

- Description:
करोड़ों लोगों के लिए ‘श्रीहनुमान चालीसा’ नित्य परायण का साधन है। कइयों को यह कण्ठस्थ है पर अधिकांश ने यह जानने का प्रयत्न नहीं किया होगा कि इन पंक्तियों का गूढ़ अर्थ क्या है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपना सारा साहित्य प्रभु को साक्षात् सामने रखकर लिखा है। उनका सारा सृजन एक तरह से वार्तालाप है। श्रीहनुमान जी से उनकी ऐसी ही एक निजी बातचीत का एक लोकप्रिय जनस्वीकृत नाम है ‘श्रीहनुमान चालीसा।' आज के मानव के लिए अच्छा, सहज, सरल और सफल जीवन जीने के सारे संकेत हैं इस चालीसा में। ज्ञान के सागर में डुबकी लगाकर, भक्ति के मार्ग पर चलते हुए, निष्काम कार्य–योग को कैसे साधा जाए, जीवन में इसका सन्तुलन बनाती है ‘श्रीहनुमान चालीसा’। जिसे पढ़ने के बाद यह समझ में आ जाता है कि श्रीहनुमान जीवन–प्रबन्धन के गुरु हैं। जीवन–प्रबन्धन का आधार है स्वभाव और व्यवहार। आज के समय में बच्चों को जो सिखाया जा रहा है, युवा जिस पर चल रहे हैं, प्रौढ़ जिसे जी रहे हैं और वृद्धावस्था जिसमें अपना जीवन काट रही है, वह समूचा प्रबन्धन ‘व्यवहार’ पर आधारित है। जबकि जीवन–प्रबन्धन के मामले में ‘श्रीहनुमान चालीसा’ ‘स्वभाव’ पर जोर देती है।
व्यवहार से स्वभाव बनना आज के समय की रीत है, जबकि होना चाहिए स्वभाव से व्यवहार बने। जिसका स्वभाव सधा है, उसका हर व्यवहार सर्वप्रिय और सर्वस्वीकृत होता है। स्वभाव को कैसे साधा जाए, ऐसे जीवन–प्रबन्धन के सारे सूत्र हैं ‘श्रीहनुमान चालीसा’ की प्रत्येक पंक्ति में...
Jeevan Prabandhan : Kripa Karahu Guru Dev Ki Naain
Pt. Vijay Shankar Mehta
20% off₹ 299
₹ 239.2
Available
Manikarnika : Drishti Aur Vimarsh
- Author Name:
Anand Das
- Book Type:

- Description:
समकालीन हिन्दी दलित साहित्य और आत्मकथा विधा के वैचारिक आधार को गहराई से समझने के लिए “मणिकर्णिका : दृष्टि और विमर्श” एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक आनंद दास ने इस पुस्तक के माध्यम से समाज में व्याप्त असमानता, शोषण और संघर्ष की वास्तविकताओं का सटीक एवं गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक न केवल साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि सामाजिक चेतना जगाने का भी कार्य करती है। शोधार्थियों और साहित्य-प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी एवं पठनीय पुस्तक!
District Saharanpur (Environmental Challenges and Population Scenario)
- Author Name:
Dr. Narendar Kumar +1
- Book Type:

- Description:
जनपद सहारनपुर अपनी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, भौगोलिक स्थिति, विविधतापूर्ण सांस्कृतिक परम्पराओं तथा प्राकृतिक संसाधनों के कारण प्रदेश में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। उत्तर प्रदेश राज्य के इस प्रसिद्ध जनपद की जनसंख्या, संस्कृति एवं पर्यावरण जैसे ज्वलन्त विषयों पर आधारित यह पुस्तक लेखकों द्वारा अत्यन्त सराहनीय एवं समयानुकूल प्रयास है। वर्तमान समय में तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या, नगरीयकरण तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण जनपद में अनेक पर्यावणीय चुनौतियाँ सामने आ रही है। अतः वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रकार का सार्थक प्रयास न केवल शैक्षणिक समाज की दृष्टि से अर्पित नीति निर्धारकों और सामाजिक विकास के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। लेखकों का यह प्रयास सहारनपुर जनपद की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण सन्तुलन के प्रति जागरूकता लाने के दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करेगा। मैं लेखकों को इस अत्यन्त ही सार्थक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई और उज्जवल भविष्य के लिए हृदय की गहराइयों से अपनी ढेरों शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ। - प्रो. बीरेन्द्र सिंह : पूर्व प्राचार्य, आर.एस.एम. (पी.जी.) कालेज धामपुर, बिजनौर (उ.प्र.)
Aalim Sir Ki English Class
- Author Name:
Aalim
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Mai urdu Hoon
- Author Name:
Dheerendra Singh Fayyaz
- Book Type:

- Description:
मैं उर्दू हूँ’ एक भाषा के सफ़र का संस्मरण है। ये किताब उर्दू के प्रारम्भिक युग से शुरू होती है और मीर-ओ-ग़लिब से लेकर आधुनिक युग के नामचीन साहित्यकारों की उँगली थामे उस जगह तक जा पहुँचती है, जहाँ प्राचीन भाषाओं और लिपियों का ज़िक्र स्वाभाविक हो जाता है। इस संस्मरण में धीरे-धीरे ये भेद भी खुलता है कि सभी भाषाओं में कुछ न कुछ साम्य है और प्रत्यक्ष रूप से असंबद्ध लगने वाली देवनागरी, फ़ारसी और अरबी लिपियाँ दर-अस्ल एक ही मूल से निकली हैं। ये किताब लेखक और उर्दू के बीच होने वाला एक रोचक वार्तालाप है जो भाषाओं की व्युत्पत्ति, विकास और प्रसार के विषयों पर रौशनी डालता है।
Sarjnatmak Shiksha
- Author Name:
Raghav Prakash +2
- Book Type:

- Description:
आज हर समझदार माता-पिता अपने बच्चे को सही शिक्षा दिलवाने के लिए बेचैन हैं, हर चैतन्य शिक्षक अपने विद्यार्थी को ऊँचाइयाँ देने के लिए आतुर है और हर प्रबुद्ध शिक्षा-प्रशासक अपने स्कूल-कॉलेज की शिक्षण-पद्धति को परवान चढ़ाकर उसे उत्कृष्ट बनाने के लिए संकल्पित है। किन्तु, कुछ अपवादों को छोड़कर, दुनिया भर की शिक्षा सर के बल खड़ी है। असल में, व्यवस्था-केन्द्रित शिक्षा-पद्धति को विद्यार्थी-केन्द्रित होना चाहिए। शिक्षा की मूल्य-दृष्टि, उसका पाठ्यक्रम शिक्षण-पद्धति और मूल्यांकन-पद्धति सबकुछ विद्यार्थी की वृत्ति, रुचि, योग्यता और गति के अनुरूप होनी चाहिए; विद्यार्थी की चेतना में गहरे छिपी उसकी मूल्यवान सर्जनात्मक क्षमता का, अधिकतम विकास कैसे किया जा सकता है, उसकी तजबीज ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ में प्रस्तुत की गई है। इसमें जीवन-दृष्टि और शिक्षा-दृष्टि के ठहराव को उजागर कर कल्याणकारी जीवन-दृष्टि और उसी के अनुरूप सर्जनात्मक पाठ्यक्रम, सर्जनात्मक शिक्षण-पद्धति, सर्जनात्मक मूल्यांकन पद्धति एवं रचनात्मक शिक्षा-प्रशासन-व्यवस्था को प्रस्तुत किया गया है। पूर्व और पश्चिम के लगभग सौ शिक्षाशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों, मनोवैज्ञानिकों, धर्मशास्त्रियों, शिक्षा-वैज्ञानिकों आदि द्वारा लिखित शोधपूर्ण पुस्तकों का गहन मंथन करने के उपरांत जो शिक्षा-दृष्टि और शिक्षा-व्यवहार विकसित हुआ है; ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ उसी का ऐसा ‘अमृत तत्त्व’ है जो उत्कृष्ट की तलाश में जुटे हुए प्रत्येक शिक्षाविद्, अभिभावक, शिक्षक, शिक्षा-प्रबन्धक और चैतन्य विद्यार्थी के लिए अनिवार्य रूप से पठनीय है।
SUDHA OM DHINGRA KI KAHANIYON ME PRVASI JEEVAN
- Author Name:
Shahnaz
- Book Type:

- Description:
Book
SUDHA OM DHINGRA KI KAHANIYON ME NIHIT TATHA ABHIVYAKT SAMASYAEN
- Author Name:
Nidhiraj Bhadana +1
- Book Type:

- Description:
प्रवासी कहानीकार डाॅ सुधा ओम ढींगरा की कहानियों पर यह दो शोध कार्य हैं जो निधिराज भडाना तथा रेशू पाण्डेय ने किये हैं।
Keshav Mishr Ke Granthon Me Orchha Ka Itihas
- Author Name:
Dr. Ramswaroop Dengula
- Book Type:

- Description:
डॉ. रामस्वरूप ढेंगुला द्वारा लिखित इस विस्तृत हिंदी साहित्य पुस्तक के माध्यम से ओरछा के समृद्ध ऐतिहासिक ताने-बाने में गोता लगाएँ। यह विद्वत्तापूर्ण कार्य शानदार शहर ओरछा के बारे में महाकवि केशव मिश्र के लेखन में दर्शाई गई ऐतिहासिक चेतना की बारीकी से जाँच करता है। यह पुस्तक पाठकों को इस बात का गहन विश्लेषण प्रदान करती है कि कैसे इस मध्यकालीन कवि ने अपने विभिन्न साहित्यिक कार्यों में इस ऐतिहासिक शहर के सार, वास्तुकला, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को उकेरा। सावधानीपूर्वक शोध और अकादमिक कठोरता के माध्यम से, लेखक केशव मिश्र के लेखन में प्रलेखित ओरछा के राजसी मंदिरों, महलों और सांस्कृतिक विरासत के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करता है। यह अकादमिक पाठ शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक अमूल्य संसाधन के रूप में कार्य करता है, जो शास्त्रीय हिंदी साहित्य के लेंस के माध्यम से ओरछा की ऐतिहासिक कथा को समझने में रुचि रखते हैं।
Adyatan Hindi Vyakaran
- Author Name:
B.N. Pandey
- Book Type:

- Description:
"यह पुस्तक चार अध्यायों में विभक्त है : प्रथम अध्याय में हिंदी भाषा में उपलब्ध सभी ध्वनियों एवं उनके लिखित रूप अक्षरों एवं संयुक्ताक्षरों की लेखन विधि, उच्चारण एवं उनसे शब्द-निर्माण की व्याख्या की गई है, ताकि हिंदीतरभाषी भारतीय एवं विदेशी परीक्षार्थी उनकी स्पष्ट समझ के साथ-साथ कम-से-कम समय में उनका अभ्यास कर उनपर अधिकार कर सकें। दूसरे अध्याय में सभी प्रकार के शब्दों की प्रकृति, निर्माण एवं पहचान की व्याख्या के साथ-साथ वाक्य गठन के दौरान लिंग, वचन विभक्ति, काल आदि के प्रभाव से उनमें होनेवाले रूप परिवर्तन को विवेचित-विश्लेषित किया गया है। तीसरे अध्याय में हिंदी भाषा में उपलब्ध सभी प्रकार के वाक्यों के गठन के अंतर्निहित नियमों को विश्लेषित किया गया है। वाक्य किसी भाषा के दैनिक प्रयोग की सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई हैं और सभी प्रकार के अधिक-से-अधिक वाक्यों के निरंतर अभ्यास से ही भाषा का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। चौथे अध्याय में उपसर्ग, प्रत्यय, संधि एवं समास समाहित हैं : व्याकरण पुस्तकों की महत्ता विषय के चयन में नहीं उनकी सुबोध एवं सुग्राह्य प्रस्तुति में होती है। व्याकरण की सार्थकता इसमें है कि वह साध्य नहीं, अपितु भाषा की सम्यक् समझ एवं प्रयोग का साधन बने।
Hindi Sahitya Ka Itihas
- Author Name:
Acharya Ramchandra Shukla
- Book Type:

- Description:
"हिंदी साहित्य का भंडार पर्याप्त समृद्ध है। गद्य तथा पद्य की लगभग सभी विधाओं का प्रचुर मात्रा में साहित्य-सर्जन हुआ है। अनेक कालजयी कृतियाँ सामने आईं। लेखक-कवियों ने भी सर्जना के उच्च मानदंड स्थापित किए, जिन पर साहित्य-सृजन को कालबद्ध किया गया; वह युग उनके नामों से जाना गया। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने गहन शोध और चिंतन के बाद हिंदी साहित्य के पूरे इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है। हिंदी भाषा के मूर्धन्य इतिहासकार- साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का जो इतिहास रचा है, वह सर्वाधिक प्रामाणिक तथा प्रयोगसिद्ध ठहरता है। इससे पहले भी हिंदी का इतिहास लिखा गया; पर आचार्यजी का ज्ञान विस्तृत फलक पर दिग्दर्शित है। इसमें आदिकाल यानी वीरगाथा काल का अपभ्रंश काव्य एवं देशभाषा काव्य के विवरण के बाद भक्तिकाल की ज्ञानमार्गी, प्रेममार्गी, रामभक्ति शाखा, कृष्णभक्ति शाखा तथा इस काल की अन्य रचनाओं को अपने अध्ययन का केंद्र बनाया है। इसके बाद के रीतिकाल के सभी लेखक-कवियों के साहित्य को इसमें समाहित किया है। अध्ययन को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक काल के गद्य साहित्य, उसकी परंपरा तथा उत्थान के साथ काव्य को अपने विवेचन केंद्र में रखा है। हिंदी साहित्य का क्षेत्र चहुँदिशि विस्तृत है। हिंदी साहित्य के इतिहास को सम्यक् रूप में तथा गहराई से जानने-समझने के लिए आचार्य रामचंद्र शुक्ल का यह इतिहास-ग्रंथ सर्वाधिक उपयुक्त है।
Achchhi English Kaise Bolen
- Author Name:
A.K. Gandhi
- Book Type:

- Description:
"बाजार में अंग्रेजी बोलना सीखाने का दावा करनेवाली अनेक पुस्तकें हैं, लेकिन प्रस्तुत पुस्तक उन सभी से स्तर, ज्ञान तथा अभ्यास में कहीं बेहतर है, क्योंकि इसमें उन गुणों का समावेश किया गया है, जिनके आधार पर व्यवहार में छात्रों को अंग्रेजी बोलना सिखाया गया है। इस पुस्तक में दी गई तकनीक छात्रों पर आजमाई गई है, तथा इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त भी हुए हैं। इसका कारण है कि इसमें वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक तथा शैक्षिक-मनोवैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर पाठों की रचना की गई है। प्रस्तुत पुस्तक में अंग्रेजी के सभी आयामों को 30 दिन के पाठों में समेटा गया है तथा प्रत्येक दिन के अभ्यास को शीर्षकों में विभाजित किया गया है, जिससे पाठकगण अंग्रेजी के साथ बेहतर तारतम्य स्थापित कर पाएँ। आसानी से अच्छी अंग्रेजी सिखानेवाली एक व्यावहारिक पुस्तक। "
Saral Nibandh
- Author Name:
Shyam Chandra Kapoor
- Book Type:

- Description:
निबंध लिखते हुए संकोच, भय और लज्जा त्याग देनी चाहिए। झिझकने तथा डरने से निबंध अच्छा नहीं बन पड़ता। निबंध-लेखक से यह आशा कोई नहीं करता कि वह जिस विषय पर निबंध लिख रहा है, उसके विषय में वह संपूर्ण तथ्यों को जानता ही हो। उससे तो केवल इतनी ही अपेक्षा की जाती है कि वह प्रस्तुत विषय के बारे में जो कुछ भी जानता है, उसे बिना छिपाये, संक्षेप में और सरलता से प्रकट कर दे। निबंध तो वास्तव में शुद्ध हृदय की विचार-तरंग ही है।
Prabhat Sookti Kosh
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description:
सूक्तियाँ गागर में सागर भरे वे शब्द समूह हैं, जो सीधे मर्म पर चोट करते हैं। इन शब्दों में ऐसी शक्ति होती है कि ये इनसान को सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं और कई बार वह क्षण जीवन का महत्त्वपूर्ण मोड़ साबित होता है, जो जीवन की दशा और दिशा को बदलकर रख देता है, यह व्यक्ति का मानो नया जन्म होता है; उसका चीजों को देखने का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है। महात्मा बुद्ध के कुछ सूक्ति वाक्य ज्यों अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तित कर देते हैं और वह डाकू से संत बन जाता है; सूक्तियाँ कुछ यों ही मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में दुनिया भर के महान् विचारकों की सूक्तियों का संकलन किया गया है, जो प्रबुद्ध पाठकों के लिए निश्चित ही उपयोगी सिद्ध होगा।
Vyavharik Anuvad
- Author Name:
N.E. Vishwanath Iyer
- Book Type:

- Description:
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रशासन में राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रयोग और प्रगामी प्रयोग पर जोर दिया गया। अनुवाद शीघ्र ही एक व्यापक विषय बन गया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विधि, वाणिज्य तथा सर्वसुलभ रूप में साहित्य के क्षेत्र में भी अनुवाद का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य लगने लगा। प्रस्तुत ग्रंथ के कुछ अध्यायों में व्यावहारिक अनुवाद के क्षेत्र में उतरनेवालों के लिए आवश्यक मार्ग निर्देश दिए गए हैं। अनुवाद के मूल्यांकन के मानक अभी नहीं बने हैं। साहित्य में सृजनात्मक वाड्मय की रचना के बाद लक्षण ग्रंथ एवं व्याकरण ग्रंथ की जरूरत पड्ती है। अनुवाद के संदर्भ में एक लघु प्रयास ‘अनुवाद की स्तरीयता’ नामक अध्याय में किया गया है। हिंदी क्षेत्र में सिद्धांत एवं विशेषज्ञ ‘तत्काल भाषांतरण’ अथवा ‘इंटरप्रेटेशन’ पर अभी अधिक ध्यान नहीं दे सकते हैं; जबकि यह आज बहुत जरूरी एवं उर्वर क्षेत्र है। इस विशेष अनुवाद विधा की कुछ बारीकियों के विश्लेषण का प्रयास भी इस ग्रंथ में किया गया है। अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद आज निरंतर किया जाता है; परंतु उसके व्यावहारिक बिंदु (चेक प्वाइंट) पर सोदाहरण प्रकाश कम ही डाला गया है। इस पुस्तक में दो बड़े अध्यायों में इसीके विभिन्न पहलुओं पर विशद विवेचन प्रस्तुत किया है। विश्वास है, यह पुस्तक अनुवाद कला में कुशलता प्राप्ति में सहायक होने के साथ-साथ आम पाठकों के लिए भी ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book