Pitamaha Bhishma
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यह नाटक ‘महाभारत’ या भीष्म पर आधारित ऐतिहासिक कथा-चिंतन ही नहीं, वरन् भीष्म के माध्यम से हमारे स्वविवेक, उसकी महत्त्वाकांक्षा एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सीधे जीवन व चिंतन पर पड़नेवाले प्रभाव की व्याख्या है। वहीं सृष्टि के आरंभ से अब तक के सबसे जटिल मानवीय संबंध ‘स्त्री-पुरुष’ के संदर्भ में इस नाटक को मिथकीय रूपाकारों के माध्यम से आधुनिक चेतना-बोध एवं प्रश्नों को जोड़ने का यत्न है। इस नाटक में भीष्म को दो रूपों में प्रस्तुत किया गया है—देह और अंतर्मन। इसलिए प्रस्तुति में देह कभी अंतर्मन हो सकता है तो अंतर्मन कभी देहाकार हो सकता है। इस नाटक के पात्रों में कहीं-न-कहीं हम अपने आप को पा सकते हैं। कुछ घटनाएँ हमारे जीवन से होकर भी इसी रूप में गुजरती हैं। पढ़ें तो विचार है, निहारें तो नाटक है और देखें तो दर्पण।
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यह नाटक ‘महाभारत’ या भीष्म पर आधारित ऐतिहासिक कथा-चिंतन ही नहीं, वरन् भीष्म के माध्यम से हमारे स्वविवेक, उसकी महत्त्वाकांक्षा एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सीधे जीवन व चिंतन पर पड़नेवाले प्रभाव की व्याख्या है। वहीं सृष्टि के आरंभ से अब तक के सबसे जटिल मानवीय संबंध ‘स्त्री-पुरुष’ के संदर्भ में इस नाटक को मिथकीय रूपाकारों के माध्यम से आधुनिक चेतना-बोध एवं प्रश्नों को जोड़ने का यत्न है।
इस नाटक में भीष्म को दो रूपों में प्रस्तुत किया गया है—देह और अंतर्मन। इसलिए प्रस्तुति में देह कभी अंतर्मन हो सकता है तो अंतर्मन कभी देहाकार हो सकता है।
इस नाटक के पात्रों में कहीं-न-कहीं हम अपने आप को पा सकते हैं। कुछ घटनाएँ हमारे जीवन से होकर भी इसी रूप में गुजरती हैं। पढ़ें तो विचार है, निहारें तो नाटक है और देखें तो दर्पण।
Book Details
-
ISBN9789352660322
-
Pages80
-
Avg Reading Time3 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: हिन्दी में व्यापक लोकप्रियता और स्तरीय रचनात्मकता का अद्भुत उदाहरण है मुद्राराक्षस का यह नाटक ‘आला अफ़सर’। हिन्दी में ‘आला अफ़सर’ की लोकप्रियता लगभग अभूतपूर्व है जिसने भारत के हर कोने के रंगकर्मियों और दर्शकों को आकर्षित किया। इसके भारत की अन्य भाषाओं में अनुवाद भी हुए और उन्होंने भी दर्शकों को आकर्षित किया। सबसे लम्बी अवधि तक इस नाटक की प्रस्तुतियाँ मुम्बई जैसी व्यावसायिक रंगमंच की नगरी में हुईं। भारतीय रंगमंच के विदेशी अध्येताओं ने इसे एक गहरे आश्चर्य से देखा और विदेशी पुस्तकों में विस्तार से इस नाटक की चर्चा हुई। सरकार बदलने के बाद भी शासकों का न बदलना, नौकरशाही और राजनीतिज्ञों का रिश्ता एक यथार्थ बन जाना और मजलूमों का न्याय और दया के व्यापार द्वारा शोषण होना, इसके गानों में बताया गया है। मुद्राराक्षस के गानों की भाषा का प्रवाह बेदाग़ और उनका मज़ाहियापन नफ़ीस है। चाहिए कि इसके गाने हर खेल के साथ बेचे जाएँ या बँटें। इसके गाने प्रकाशित हों और रिकार्ड बनें, यह आज की नौटंकी का साहित्य से तक़ाज़ा है—आलोचकों का यह गम्भीर बयान इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मक स्तर बनाए रखते हुए भी यह नाटक ‘आला अफ़सर’ हिन्दी नाट्य-जगत की एक बड़ी और लोकरंजक घटना है। इस नाटक में नौटंकी के मूल छन्दों को बनाए रखते हुए हिन्दी की वर्तमान कविता की क्षमताओं का संवेदनशील प्रयोग हुआ है।
Lakshagrih Evam Anya Natak
- Author Name:
Vratya Basu
- Book Type:

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Description:
बांग्ला के प्रख्यात नाटककार और रंगकर्मी व्रात्य बसु से हिन्दी के पाठक अपरिचित नहीं हैं। वर्षों पहले ‘चतुष्कोण' शीर्षक से उनके चार नाटकों का संग्रह हिन्दी में अनूदित होकर आ चुका है, जिसे नाटक-प्रेमी पाठकों के साथ-साथ रंगकर्मियों ने भी बहुत उत्साह के साथ स्वीकार किया।
इस संग्रह में उनके तीन नाटक संकलित हैं—‘लाक्षागृह’, ‘संध्या की आरजू में भोर का सरसों फूल’ और ‘बम’ (बोमा)। व्रात्य बसु का नाटककार अपने समय को लक्षित होता है लेकिन जहाँ से वे अपने वर्तमान को देखते हैं, वह एक वृहत् दृष्टि-बिन्दु है। इस संग्रह में शामिल नाटक भी इसके अपवाद नहीं हैं। ‘लाक्षागृह’ में यदि वे महाभारत की एक घटना को आधार बनाकर मनुष्य की चिरन्तन प्रवृत्तियों की पड़ताल करते हैं तो, ‘संध्या की आरजू...’ के अपने पात्रों को आज के कॉरपोरेट तंत्र में स्थित करते हैं और इधर उभरी नई विडम्बनाओं पर प्रकाश डालते हैं। समय के इस बड़े अन्तराल के बीच ‘बम' की पृष्ठभूमि आज़़ादी के पहले का अविभाजित बंगाल है जिसमें हमें अरविन्द घोष मिलेंगे—ऋषि के रूप में नहीं, क्रन्तिकारी के रूप में...!
इसके अलावा इन नाटकों का सबसे बड़ा आकर्षण इनका भाषा-सौष्ठव और मंचीयता है जो इन्हें एक तरफ़ अभिनेय बनाती है तो दूसरी तरफ़ पठनीय भी। कथ्य स्वयं एक तत्त्व है जिसके लिए इन्हें पढ़ा ही जाना चाहिए।
Hanoosh
- Author Name:
Bhisham Sahni
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- Description: ‘हानूश’ भीष्म साहनी का एक ऐसा नाटक है जिसमें कलाकार की सृजन की अदम्य अकुलाहट और उसकी निरीहता को रूपायित किया गया है। धर्म और सत्ता के गठबन्धन के साथ सामाजिक शक्तियों के संघर्ष की मार्मिक अभिव्यक्ति भी है यह अनमोल नाटक ‘हानूश’। कलाकार के पारिवारिक तनावों का अनूठा अंकन हुआ है ‘हानूश’ में। इस नाटक में एक ऐसे कलकार को केन्द्रीय भूमिका मिली है जो शुरू में ताला बनानेवाला एक सामान्य मिस्त्री है, बाद में उसके दिमाग़ में घड़ी बनाने का विचार उत्पन्न होता है और वह घड़ी बनाने में लग जाता है। विषम परिस्थितियों से जूझता हुआ वह घड़ी बनाने के काम में लगातार सत्रह साल गुज़ार देता है और अन्ततः इस लगन और कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप वह चेकोस्लोवाकिया की पहली घड़ी बनाने में कामयाब होता है। उसकी बनाई गई घड़ी नगरपालिका की मीनार पर लगाई जाती है, लेकिन इतनी बड़ी सफलता के बाद कलाकार को क्या मिलता है? बादशाह कलाकार की आँखें निकलवा लेता है, ताकि वह उस तरह की दूसरी घड़ी नहीं बना सके। चेक-इतिहास की इस छोटी-सी घटना से भीष्म साहनी ने हिन्दी को यह यादगार नाटक सौंपा है जो आज छह दशक बाद भी रंग-प्रेमियों के लिए यथार्थ और आश्चर्य का एक सामंजस्य-सा प्रतीत होता है।
Rang Saptak
- Author Name:
Kavalam Narayana Panicker
- Book Type:

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Description:
‘रंग सप्तक’—पणिक्कर जी के बहुआयामी सात नाटकों का संकलन है। मान लीजिए उनके सात सुरों के समान सात मोतियों को एक धागे में पिरोकर, एक सरगम-धुन रूपी माला बनाने का प्रयास।
इसमें दो खंड हैं। खंड-1 में मूलत: संस्कृत के महान नाटकों के चयनित अंशों को आधार बनाकर पुनर्रचित नाट्यालेखों का समावेश किया गया है। इसकी पुनर्रचना में पणिक्कर जी और नाट्य-लेखक दोनों का सम्मिलित योगदान है। इस खंड में स्वप्नकथा, उत्तररामचरितम् एवं माया समाविष्ट हैं। खंड-2 में पणिक्कर जी के मौलिक, मलयालम में रचित नाटकों के हिन्दी अनुवादों का समावेश किया गया है। इसमें 'तैया-तैयम', 'कलिवेषम्', 'अपना-अपना कडम्बा' एवं 'स्थित है सूर्य' समाविष्ट हैं।
पणिक्कर जी के नाटकों में मिथकों, धार्मिक अनुष्ठानों, पारम्परिक एवं लोककथाओं और सामाजिक-राजनैतिक भूमिकाओं का पुनर्व्याख्यान, पुनरोद्धार एवं रूपान्तरण होता है, जो अपने वर्तमान को भूतकाल के माध्यम से खोजने का एक नितान्त मौलिक संसाधन बनता है। पणिक्कर जी इन भूमिकाओं का, परम्परा से लेकर आधुनिक विस्फोटक संक्रमणों पर सटीक टिप्पणी करने के लिए तत्पर रहते हैं। साथ ही वह इन भूमिकाओं के ज़रिए समाज में हो रही घटनाओं के बारे में प्रश्न उठाते हैं, जिसे विशिष्ट वातावरण में प्रस्तुत करके बहुआयामी नाट्यालोक (वैश्विक नाट्य) का परिचय देते हैं, किन्तु अन्तत: नैतिक उत्तर खोजने के लिए दर्शक को उत्प्रेरित कर देते हैं।
पणिक्कर जी की रंग-यात्रा कविता से रंगमंच तक और रंगमंच से कविता तक की एक अन्तर्यात्रा है। वह अपने नाटकों को सही मायने में दृश्यकाव्य के रूप में ढालते हैं। वे अपने गाँव के निजी अनुभवों को काव्यात्मक बनाकर, नाटक के माध्यम से विषयानुरूप दृश्यात्मकता प्रदान कर सौन्दर्यमूलक बनाते हैं। मान लो कि गाँव ही पूर्ण रूप से उनकी रंग-यात्रा का प्रमुख गोमुख है।
Maile Hath
- Author Name:
Jean Paul Sartre
- Book Type:

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Description:
पार्टी की विचारधारा से ‘भटके’ पार्टी प्रमुख के सचिव के तौर पर काम करने और उसे गोली से उड़ाने की ज़िम्मेदारी युवा पार्टी कार्यकर्ता ह्यूगो के कन्धों पर डाली जाती है। वो इस काम को अंजाम भी दे देता है...लेकिन क्या उसने उस राजनीतिक क़त्ल को एक आवेगी अपराध के जामे में छुपाया है? इस सवाल का जवाब तब साफ़ होता है जब दो साल की सज़ा काटकर, जेल से छूटने के बाद, वो अपने पुराने साथियों और ख़ुद अपने-आप से, इस कत्ल को करने के अपने वास्तविक उद्देश्यों का खुलासा करने की कोशिश करता है।
The Listner के शब्दों में ‘ज्याँ पॉल सार्त्र आज दुनिया के सबसे चर्चित लेखक हैं’ और ये उनका सबसे चर्चित नाटक। सर्वप्रथम पेरिस में सन् 1948 में मंचित यह नाटक साम्यवाद की मानसिकता और तौर-तरीक़ों की एक बेहतरीन (क्लासिक) विवेचना करता है।
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