Purushottam Parashuram
(0)
Author:
Pt. Vijay Shankar MehtaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
95
₹ 76 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
पृथ्वी पर जब-जब अधर्म ने अपना अधिक प्रभाव दिखाया, तब-तब कुछ दिव्यात्माओं ने अपनी लीला दिखाई। भगवान् विष्णु के दस अवतारों में भगवान् परशुराम को भी एक माना जाता है। वे महर्षि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे। राजा कार्तवीर्य, जिसे सहस्रार्जुन भी कहा गया है, ने एक बार जमदग्निजी के आश्रम पर आक्रमण करके कामधेनु गाय का अपहरण किया। परशुरामजी ने सहस्रार्जुन से युद्ध किया और दंड-स्वरूप उसका वध कर दिया। सहस्रार्जुन के पुत्रों ने परशुरामजी की अनुपस्थिति में आश्रम पर आक्रमण कर उनके पिता जमदग्निजी की हत्या कर दी थी। इस विराट् व्यक्तित्व पर यह नाटक इसीलिए तैयार किया जा रहा है कि उनके उद्देश्यों को हम आज भी अपने निजी, पारिवारिक और राष्ट्रीय जीवन में उतार सकें। प्रयास यही किया गया है कि इनके चरित्र से संबंधित घटनाएँ शास्त्रों के आधार पर प्रामाणिक रहें। किंतु अलग-अलग शास्त्रों और साहित्य में घटनाओं के वर्णन में भिन्नता है। यह नाट्य-साहित्य केवल शोध की दृष्टि से तैयार नहीं किया गया है वरन् इसका उद्देश्य है, परशुरामजी के अद्भुत व्यक्तित्व को आज के हमारे जीवन से जोड़ना। पुरुषोत्तम परशुराम के अनुपमेय जीवन का सांगोपांग दर्शन कराती पठनीय पुस्तक।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
पृथ्वी पर जब-जब अधर्म ने अपना अधिक प्रभाव दिखाया, तब-तब कुछ दिव्यात्माओं ने अपनी लीला दिखाई। भगवान् विष्णु के दस अवतारों में भगवान् परशुराम को भी एक माना जाता है। वे महर्षि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे। राजा कार्तवीर्य, जिसे सहस्रार्जुन भी कहा गया है, ने एक बार जमदग्निजी के आश्रम पर आक्रमण करके कामधेनु गाय का अपहरण किया। परशुरामजी ने सहस्रार्जुन से युद्ध किया और दंड-स्वरूप उसका वध कर दिया। सहस्रार्जुन के पुत्रों ने परशुरामजी की अनुपस्थिति में आश्रम पर आक्रमण कर उनके पिता जमदग्निजी की हत्या कर दी थी।
इस विराट् व्यक्तित्व पर यह नाटक इसीलिए तैयार किया जा रहा है कि उनके उद्देश्यों को हम आज भी अपने निजी, पारिवारिक और राष्ट्रीय जीवन में उतार सकें। प्रयास यही किया गया है कि इनके चरित्र से संबंधित घटनाएँ शास्त्रों के आधार पर प्रामाणिक रहें। किंतु अलग-अलग शास्त्रों और साहित्य में घटनाओं के वर्णन में भिन्नता है। यह नाट्य-साहित्य केवल शोध की दृष्टि से तैयार नहीं किया गया है वरन् इसका उद्देश्य है, परशुरामजी के अद्भुत व्यक्तित्व को आज के हमारे जीवन से जोड़ना।
पुरुषोत्तम परशुराम के अनुपमेय जीवन का सांगोपांग दर्शन कराती
पठनीय पुस्तक।
Book Details
-
ISBN9789351868385
-
Pages104
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Jeena Sikhati hai Ramkatha
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
रामचरितमानस का दर्शन, इसकी फिलॉसफी, इसके विचार, सिद्धांत, नीति, शब्दों का गठन सबकुछ अद्भुत है। कहते हैं, जिस समय तुलसीदासजी ने रामचरितमानस लिखी, उनके दो ही सहारे थे—एक राम और दूसरे हनुमान। हनुमानजी उनका प्रमुख सहारा थे, गुरु थे उनके। जब रामचरितमानस लिखना आरंभ किया तो कहते हैं, रामचरितमानस के प्रत्येक दृश्य, प्रत्येक चौपाई, दोहा, सोरठा, छंद को तुलसीदासजी ने लिखा था। हनुमानजी रामकथा का एक-एक दिव्य दृश्य दिखाते और तुलसीदासजी लिखते चले जाते। कोई रचनाकार, सृजनकार, साहित्यकार पूरे घटनाक्रम को इस प्रकार अपने सामने देखे और लिखे, तभी उन पंक्तियों में प्राण आते हैं। तुलसीदासजी ने जिया है रामकथा को। इसीलिए रामायण हमें जीना सिखाती है। देश-काल, परिस्थिति के अनुसार पूरी रामकथा को सात भागों में बाँटते हुए इन्हें सात सोपान या सात कांड कहा जाता है। रामायण में सात कांड हैं—बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर कांड। प्रत्येक कांड में उत्तम जीवन के सूत्र समाए हैं। इस पुस्तक में उन्हें क्रमशः व्याख्यायित किया गया है। हर आम और खास की सहज समझ में आनेवाली शैली में लिखी सर्वथा नवीन रामकथा, जो हमारे जीवन को एक नई दिशा देगी, नए आयाम खोलेगी।
Pitamaha Bhishma
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
यह नाटक ‘महाभारत’ या भीष्म पर आधारित ऐतिहासिक कथा-चिंतन ही नहीं, वरन् भीष्म के माध्यम से हमारे स्वविवेक, उसकी महत्त्वाकांक्षा एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सीधे जीवन व चिंतन पर पड़नेवाले प्रभाव की व्याख्या है। वहीं सृष्टि के आरंभ से अब तक के सबसे जटिल मानवीय संबंध ‘स्त्री-पुरुष’ के संदर्भ में इस नाटक को मिथकीय रूपाकारों के माध्यम से आधुनिक चेतना-बोध एवं प्रश्नों को जोड़ने का यत्न है। इस नाटक में भीष्म को दो रूपों में प्रस्तुत किया गया है—देह और अंतर्मन। इसलिए प्रस्तुति में देह कभी अंतर्मन हो सकता है तो अंतर्मन कभी देहाकार हो सकता है। इस नाटक के पात्रों में कहीं-न-कहीं हम अपने आप को पा सकते हैं। कुछ घटनाएँ हमारे जीवन से होकर भी इसी रूप में गुजरती हैं। पढ़ें तो विचार है, निहारें तो नाटक है और देखें तो दर्पण।
Kamyab Hona Hi Hai
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
‘कामयाब होना ही है’ विद्यार्थियों के लिए एक अत्यंत प्रेरक और मार्गदर्शक पुस्तक है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है; बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है क्योंकि इन्हीं में सारे सांसारिक ज्ञान निहित हैं। इनका अनुसरण और अनुपालन कर प्रत्येक व्यक्ति सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, व्यावहारिक—हर स्तर पर मनचाही सफलता हासिल कर सकता है। इस पुस्तक में विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास के साथ-साथ मानसिक व भावनात्मक विकास हेतु छोटे-छोटे रोचक व प्रेरक प्रसंग दिए गए हैं, जो कथा-किस्सों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी और संग्रहणीय पुस्तक, जो जीवन के प्रत्येक कदम पर उनकी सभी समस्याओं व कठिनाइयों का त्वरित हल प्रस्तुत करने को सदैव तत्पर रहेगी। सफलता के नए सोपान खोलनेवाली पठनीय प्रेरक पुस्तक।
Jeene Ki Raah Ke 125 Sootra
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में निरूपित 125 सूत्र आपको ‘जीने की राह’ दिखा सकते हैं। यह शब्दों में व्यक्त विचार मात्र नहीं, बल्कि मानव जीवन के पूरे दर्शन और परंपराओं का निचोड़ प्रस्तुत करते हैं। वैसे तो किसी भी समस्या को ठीक से समझ लेना ही उसका सबसे बड़ा निदान है। जीने की राह का मतलब ही है कि हर कदम पर समस्या आएगी, लेकिन साथ में समाधान भी लाएगी। कितना ही बड़ा दुःख या परेशानी आए, जीवन रुकना नहीं चाहिए। यह पुस्तक अपने भीतर के आत्मबल को जाग्रत् कर, सेवा, सत्य, परोपकार और अहिंसा आदि जीवनमूल्यों को जगाने की सामर्थ्य रखती है। इसके अध्ययन से सद्प्रवृत्ति विकसित होगी, सद्विचार मुखर होंगे और हम आनंद, संतोष और सार्थक जीवन जी पाएँगे। जीवन को सरल-सहज बनाने के व्यावहारिक सूत्र बताती पठनीय पुस्तक।
EK SHAM PARIVAR KE NAAM
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Jeevan Prabandhan : Kripa Karahu Guru Dev Ki Naain
- Author Name:
Pt. Vijay Shankar Mehta +1
- Book Type:

- Description:
करोड़ों लोगों के लिए ‘श्रीहनुमान चालीसा’ नित्य परायण का साधन है। कइयों को यह कण्ठस्थ है पर अधिकांश ने यह जानने का प्रयत्न नहीं किया होगा कि इन पंक्तियों का गूढ़ अर्थ क्या है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपना सारा साहित्य प्रभु को साक्षात् सामने रखकर लिखा है। उनका सारा सृजन एक तरह से वार्तालाप है। श्रीहनुमान जी से उनकी ऐसी ही एक निजी बातचीत का एक लोकप्रिय जनस्वीकृत नाम है ‘श्रीहनुमान चालीसा।’ आज के मानव के लिए अच्छा, सहज, सरल और सफल जीवन जीने के सारे संकेत हैं इस चालीसा में। ज्ञान के सागर में डुबकी लगाकर, भक्ति के मार्ग पर चलते हुए, निष्काम कार्य–योग को कैसे साधा जाए, जीवन में इसका सन्तुलन बनाती है ‘श्रीहनुमान चालीसा’। जिसे पढ़ने के बाद यह समझ में आ जाता है कि श्रीहनुमान जीवन–प्रबन्धन के गुरु हैं। जीवन–प्रबन्धन का आधार है स्वभाव और व्यवहार। आज के समय में बच्चों को जो सिखाया जा रहा है, युवा जिस पर चल रहे हैं, प्रौढ़ जिसे जी रहे हैं और वृद्धावस्था जिसमें अपना जीवन काट रही है, वह समूचा प्रबन्धन ‘व्यवहार’ पर आधारित है। जबकि जीवन–प्रबन्धन के मामले में ‘श्रीहनुमान चालीसा’ ‘स्वभाव’ पर जोर देती है। व्यवहार से स्वभाव बनना आज के समय की रीत है, जबकि होना चाहिए स्वभाव से व्यवहार बने। जिसका स्वभाव सधा है, उसका हर व्यवहार सर्वप्रिय और सर्वस्वीकृत होता है। स्वभाव को कैसे साधा जाए, ऐसे जीवन–प्रबन्धन के सारे सूत्र हैं ‘श्रीहनुमान चालीसा’ की प्रत्येक पंक्ति में...
Jeevan Prabandhan : Kripa Karahu Guru Dev Ki Naain
Pt. Vijay Shankar Mehta
20% off₹ 299
₹ 239.2
Available
Gorakh-Vijay
- Author Name:
Brajendra Kumar Singhal +1
- Book Type:

- Description:
‘गोरख विजय' नाथपंथ के महान योगी गुरु गोरखनाथ से सम्बन्धित पुरातन बाग्रा काव्य ग्रन्थ ‘गोर्ख विजय’ का हिन्दी अनुवाद और समीक्षात्मक पर्यालोचन प्रस्तुत करनेवाली कृति है। गोरखनाथ ने अपने साधनामय जीवन और कल्याणमय दर्शन से तत्कालीन जन-समाज को अत्यन्त प्रभावित-प्रेरित किया था। उन्होंने द्वैताद्वैत-विलक्षण अद्वैतवाद का समर्थन किया लेकिन संसार को मिथ्या मानने से इनकार किया। उन्होंने मोक्ष का साधन योग को माना और योग को अष्टांग न मानकर षडंग माना। वस्तुतः यम-नियम को उन्होंने, साधक हो या सामान्य-जन, मनुष्य मात्र का कर्तव्य और दायित्व बताया जिनमें परिपक्वता के बाद ही आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की सिद्धि सम्भव है। ऐसी अनेकानेक बातों को जानने-समझने के लिए ‘गोरख विजय’ एक अत्यन्य उपयोगी ग्रन्थ है। प्रस्तुत पुस्तक का एक और उल्लेखनीय पक्ष यह है कि इसमें बंगाल के लोक समाज में प्रचलित गोरखनाथ सम्बन्धी कई लोकगाथाएँ और कुछ अन्य प्रासंगिक सामग्री भी दी गई हैं जिनसे गोरखपंथी साधना के नये आयाम खुलते हैं। वस्तुतः साधक हो या साहित्यिक, विद्वान हो या सामान्य पाठक, गोरखनाथ में दिलचस्पी रखनेवाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।
Ramdoot : Hanuman Ka Aatmakhyan
- Author Name:
Trilok Nath Pandey
- Book Type:

- Description:
प्रभु श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण सहित ऋष्यमूक पर्वत की एक दूसरी सुरम्य चोटी, जिसका नाम प्रस्रवण था, पर चले गए और वहाँ एक गुफा में निवास करने लगे। मैंने उनसे आग्रह किया कि मैं दास-रूप में उनके निकट रहकर उनकी सेवा करना चाहता हूँ। इस सम्बन्ध में मैंने सुग्रीव जी से भी अनुमति ले ली थी, किन्तु प्रभु श्रीराम ने मेरे आग्रह को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि, “मैं आपके अतिशय स्नेह एवं सत्कार की भावना से अनुगृहीत हूँ, हनुमान। किन्तु, आपका प्रस्ताव मैं स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि मैं और मेरे अनुज लक्ष्मण तपस्वी रूप में हैं और तपस्वियों को किसी दास से सेवा लेने का अधिकार नहीं है। आपकी सेवा नहीं, आपकी सहायता की मुझे आवश्यकता है। इसके अनेक अवसर आगे आएँगे। अभी वर्षा ऋतु प्रारम्भ हो गई है। इस काल में यात्रा एवं उद्योग सम्बन्धित सारे कार्य स्थगित हो जाते हैं। वर्षा ऋतु के इन चार महीनों आप किष्किन्धापुरी में विश्राम करें और मैं लक्ष्मण सहित प्रस्रवण पर्वत पर। वर्षा ऋतु समाप्त होते ही सीता की खोज शुरू कर दी जाएगी।”
Main Ram Bol Raha Hoon
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description:
राम का जीवन भारतीयों के लिए एक आदर्श जीवन है। जन्म से लेकर अंत तक राम का चरित्र एक दीप-स्तंभ है। ऐसे सार्वकालिक राष्ट्रीय नायक का कथानक किसी भी कृति को गौरवान्वित करता है। ‘रामचरितमानस’ के धीरोदात्त नायक राम कथनी से अधिक करनी में विश्वास रखते थे। अतः उनके जो भी कथन उपलब्ध हैं, वे भारतीय संस्कृति की महत्त्वपूर्ण धरोहर हैं। राम के प्रस्तुत उद्घोष तुलसीकृत रामचरितमानस एवं लेखक की समांतर कृति ‘रामचरितमानस: नाट्य रूप’ से उद्धृत किए गए हैं। विश्वास है, सुधी पाठक प्रस्तुत कृति से प्रेरणा ग्रहण करके अपने जीवन को सफल बनाएँगे और भारतीय तथा विश्व-समाज को समुन्नत करने में योगदान देंगे।
Rumi: Rooh-E-Kainat
- Author Name:
- Book Type:

- Description:
Desc awaiting from Publisher
Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg
- Author Name:
Vishen Lakhiani
- Book Type:

- Description:
Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg Hindi Translation of The Buddha and The Badass: The Secret Spiritual Art of Succeeding at Work. क्या आपने गौर किया है कि कैसे कुछ लोग नौकरी में कमाल के भाग्यशाली होते हैं! वे बड़ी आसानी से समाधान सुझा देते हैं। वे सही लोगों को आकर्षित करते हैं। लोग उनके अभियानों, कंपनियों, उनकी टीमों का हिस्सा बनना चाहते हैं। वे बड़े-बड़े काम मुसकराते हुए पूरा कर लेते हैं और वेतन में अच्छी वृद्धि के साथ ही प्रमोशन भी पा लेते हैं। ये सुपरस्टार कमाल की एकाग्रता और रचनात्मकता का प्रदर्शन कर खास दायरे का हिस्सा बन जाते हैं।यह पुस्तक बताती है कि उनके साथ कैसे जुड़ें। आप जहाँ भी हों, आप में अनोखी शक्तियाँ हैं। यह आधुनिक युग का भ्रम है कि कठिन परिश्रम और संघर्ष से ही सफलता मिलती है। आपके भीतर एक आत्मा है और एक बार आपने काम के क्षेत्र में इसकी पूरी शक्ति का प्रयोग किया, तो बस कमाल हो जाता है। अपने भीतर के बुद्ध और निर्भीक योद्धा को जगाना एक ऐसी प्रक्रिया है, जो आपके काम करने के तरीके को बदलकर रख देगी। आप उन तरीकों को जान लेंगे, जो वास्तविकता के हर नियम को आपके पक्ष में ला देंगे।
Shri Hanuman Chalisa | Devotional & Spirituality Prayer of Lord Hanuman Book in Hindi
- Author Name:
Kishor Makwana::Rasikba Kesariya
- Book Type:

- Description:
श्री हनुमान चालीसा भगवान् श्रीराम तक पहुँचने का एक मार्ग है। जन-मानस में व्याप्त श्रीहनुमान चालीसा कोई सिद्ध कर ले, नित्य सौ बार पठन करे तो हनुमानजी उसकी सब इच्छा-आकांक्षा पूर्ण करते हैं, ऐसी मान्यता है। मनुष्य के जीवन को सफल बनानेवाली ये रत्नमणिकाएँ हैं। श्रीहनुमानजी का संपूर्ण चरित्र हम सबमें श्रद्धा, विश्वास, ज्ञान, शक्ति, पुरुषार्थ, भक्ति, सत्य, प्रामाणिक प्रयत्न, समर्पण भाव, पराक्रम, संस्कार- संपन्न वाणी, विवेक और निष्काम कर्म जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए अनेक गुणों का सिंचन करता है।
Gita-Mata
- Author Name:
Mahatma Gandhi
- Book Type:

- Description:
महात्मा गांधीजी ने गीता को ‘माता’ की संज्ञा दी थी। उसके प्रति उनका असीम अनुराग और भक्ति थी। उन्होंने गीता के श्लोकों का सरल-सुबोध भाषा में तात्पर्य दिया, जो ‘गीता-बोध’ के नाम से प्रकाशित हुआ। उन्होंने सारे श्लोकों की टीका की और उसे ‘अनासक्तियोग’ का नाम दिया। कुछ भक्ति-प्रधान श्लोकों को चुनकर ‘गीता-प्रवेशिका’ पुस्तिका निकलवाई। इतने से भी उन्हें संतोष नहीं हुआ तो उन्होंने ‘गीता-पदार्थ-कोश’ तैयार करके न केवल शब्दों का सुगम अर्थ दिया, अपितु उन शब्दों के प्रयोग-स्थलों का निर्देश भी किया। गीता के मूल पाठ के साथ वह संपूर्ण सामग्री प्रस्तुत पुस्तक में संकलित है। गीता को हमारे देश में ही नहीं, सारे संसार में असाधारण लोकप्रियता प्राप्त है। असंख्य व्यक्ति गहरी भावना से उसे पढ़ते हैं और उससे प्रेरणा लेते हैं। जीवन की कोई भी ऐसी समस्या नहीं, जिसके समाधान में गीता सहायक न होती हो। उसमें ज्ञान, भक्ति तथा कर्म का अद्भुत समन्वय है और मानव-जीवन इन्हीं तीन अधिष्ठानों पर आधारित है। महात्मा गांधी की कलम से प्रसूत गीता पर एक संपूर्ण पुस्तक, जो जीवन के व्यावहारिक पक्ष पर प्रकाश डालकर पाठक की कर्मशीलता को गतिमान करेगी।
Shri Hanuman Chalisa Rahasy
- Author Name:
Shailesh Tiwari
- Book Type:

- Description:
Book
Raman Maharshi
- Author Name:
Anita Gaur
- Book Type:

- Description:
"साधना में अभिरुचि रखनेवालों के लिए श्री रमण महर्षि का नाम जाना-पहचाना है। भारत के आध्यात्मिक क्षितिज पर पिछले कुछ वर्षों में जिन नक्षत्रों का उदय हुआ है, उनमें श्री रमण महर्षि का नाम विशेष उल्लेखनीय है। उन्होंने अपने जीवन तथा कार्यों से भारत का नाम आलोकित किया है। भारत के अलावा पश्चिम के कई देशों में अपना उजाला फैलाकर रमण महर्षि ने देश को गौरवान्वित किया है तथा मानव-जाति की बहुमूल्य सेवा की है। 30 दिसंबर, 1879 को सोमवार के दिन आधी रात के लगभग एक घंटे बाद एक जाने-माने प्राचीन ब्राह्मण कुल में जन्म हुआ उस अद्भुत बालक का, जिसे बाद में पूरी दुनिया ने भगवान् श्री रमण महर्षि के नाम से जाना। उन्होंने साधारण जनों को रास्ता बताया कि मानव को उसके दैनिक कार्यों को करते हुए किस प्रकार उस परम तत्त्व की वंदना करनी है, कैसे आत्मा की शुद्धि करके जन्म-मरण के चक्करों से पार पाना है। यदि हम अपने दायित्वों का निर्वाह ही नहीं कर सकते तो हमें इस पृथ्वी पर मानव बनकर रहने का क्या अधिकार है! इस जगत् में ज्ञान की वास्तविक परिभाषा, जीवन की गहराइयाँ महर्षि रमण जैसे ज्ञानी पुरुषों ने ही हमें समझाई है। आध्यात्मिकता के मार्ग का दिग्दर्शन करनेवाले श्री रमण महर्षि की प्रेरणाप्रद जीवनगाथा।
Dashaguru Parampara Ke Navam Guru Shri Tegabahaduraji
- Author Name:
Dr. Kuldip Chand Agnihotri
- Book Type:

- Description:
सप्तसिंधु क्षेत्र की कुछ घटनाएँ ऐसी हैं, जिन्होंने भारतवर्ष के इतिहास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें सबसे पहली घटना तो सिंधु-सरस्वती सभ्यता का विकास है। दरअसल वर्तमान भारतीय विश्वासों, आस्थाओं एवं पूजा-पद्धति का आधार सिंधु-सरस्वती घाटी में ही मिलता है। इसके उपरांत वेद रचना का युग आता है। यह सिंधु-सरस्वती सभ्यता का अगला चरण है—गंभीर चिंतन का युग। इस युग के चिंतन ने भारतवर्ष को ही नहीं, बल्कि पूरे जंबूद्वीप को आच्छादित किया। कुरुक्षेत्र में हुआ महाभारत का युद्ध इस क्षेत्र की ऐसी घटना है, जिसने पूरे हिंदुस्तान को सप्तसिंधु के मैदान में लाकर खड़ा कर दिया था। बाद के काल में विदेशी आक्रांता येन-केन-प्रकारेण विजित प्रदेश के निवासियों को अपने मजहब में मतांतरित करने लगे थे। हमले क्योंकि सप्तसिंधु क्षेत्र से ही होते थे, इसलिए इसका सर्वाधिक दंश भी इसी क्षेत्र को सहना पड़ा। लेकिन इस नई आफत का सामना कैसे किया जाए, यह सबसे बड़ी चुनौती थी। इस मरहले पर दशगुरु परंपरा की शुरुआत एक दैवी योजना ही मानी जा सकती है। गुरु नानक देवजी इसके संस्थापक थे। दुर्भाग्य से दशगुरु परंपरा का मूल्यांकन आध्यात्मिक क्षेत्र में तो हुआ है, लेकिन ऐतिहासिक व सामाजिक क्षेत्र में समग्र रूप से नहीं हुआ। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसमें कुदाल चलाने की जरूरत है और यह पुस्तक दशगुरु परंपरा को प्रकाश में लाने का स्तुत्य प्रयास है।
Sai Ki Seva Mein
- Author Name:
Dr. Suresh Haware
- Book Type:

- Description:
साईं की सेवा करने का मुझे अवसर मिला, यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा ईश्वरीय आशीर्वाद है, ऐसी मेरे मन की प्रामाणिक भावना है। इस कालावधि में मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। मैं शिरडी कभी आता नहीं था, लेकिन इस पूरे कार्यकाल में मैं शिरडी के सिवाय कहीं जाता ही नहीं था। साईं बाबा का पहले कभी विचार करता नहीं था। लेकिन इस दौरान साईं के सिवाय कोई दूसरा विचार ही नहीं किया। पैर अपने आप शिरडी की ओर खिंचे चले आते थे।
Prayagraj Aur Kumbh : Sanskritik Vaibhav Ki Abhinav Gatha
- Author Name:
Zilani Bano +1
- Book Type:

- Description:
प्रयागराज को तीर्थराज कहा गया है। यह भारत का सर्वप्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र होने के साथ ही भारतीय सात्त्विकता का सर्वोत्तम प्रतीक भी है। यह हिन्दू-आस्था का एक महान केन्द्र तो है ही, यह हमारे देश की धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना का केन्द्रबिन्दु भी है। प्रयागराज के माहात्म्य का विस्तृत वर्णन मत्स्य, पद्म और कूर्म पुराण के कई अध्यायों में मिलता है। कुम्भ के दौरान संगम तीर्थ पर एक स्नान-दिवस पर भक्तिभाव से कई बार इतने लोग जमा हो जाते हैं कि उनकी संख्या दुनिया के कई देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक होती है। उन श्रद्धालुओं को कभी कोई निमंत्रण नहीं देता, वे श्रद्धा और भक्ति की एक अदृश्य डोर में बँधकर वहाँ खिंचे चले आते हैं। हमारी सनातन सस्कृति का यह चुम्बकीय आकर्षण अनादिकाल से यथावत् बना हुआ है। श्रद्धा और आस्था का यह आवेग सदियों से चली आ रही हमारी परम्परा का हिस्सा है। यह परम्परा हमें अपनी मूल संस्कृति से जोड़े रखने के साथ ही सांस्कृतिक एकीकरण का पथ भी प्रशस्त करती है। स्वाभाविक रूप से प्रयागराज और कुम्भ के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानना-समझना एक सुखद अनुभूति है। बहरहाल, अभिलेखीय और साहित्यिक स्रोतों के आधार पर प्रयागराज और कुम्भ के गौरवशाली इतिहास को इस पुस्तक में बहुत ही सरस ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रामाणिकता और रोचकता का मणि-कांचन संयोग है। यह पुस्तक हमारे देश के सांस्कृतिक वैभव की एक अभिनव गाथा लेकर आई है।
Shrimadbhagwadgita
- Author Name:
Dr. Jagmohan Sharma
- Book Type:

- Description:
श्रीमद्भगवद्गीता संपूर्ण मानव जगत् के लिए प्रासंगिक है। यह एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें सृष्टि के समस्त आध्यात्मिक पक्षों का समावेश किया गया है| इसमें संगृहीत सात सौ श्लोक सात महाद्वीपों के समान गंभीर हैं, जिन्हें समझकर भारतीय चिंतन का समस्त सार ज्ञात हो सकता है। युद्धभूमि में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया ज्ञान सार्वभौमिक है । उसमें किसी भी देश, धर्म, जाति के लिए समान रूप से कर्म का संदेश समाहित है । प्रस्तुत पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता के सात सौ श्लोकों का बहुत सुंदर शब्दों में दोहे रूप में रूपांतरण है । उदाहरण के लिए-- यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदाssत्मानं सृजाम्यहम्॥ दोहा-- हानि होय जब-जब धरम, अति अधर्म बढ़ जाय। हे भारत ! संसार में, तब-तब प्रकटूँ आय॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥ दोहा-- पापी करूँ विनाश मैं, करूँ साधु उद्धार । युगों-युगों में प्रकटता, धर्म स्थापना सार ॥ मानवीय संबंधों और जीवनमूल्यों को वर्णित करती सरल-सहज कृति, जो हर पाठक के हृदय को छू लेगी और वे 'गीता-ज्ञान' से संपकृत हो जाएँगे।
Ashtavakra Geeta
- Author Name:
Swami Prakhar Pragyanand
- Book Type:

- Description:
"भारतीय पौराणिक साहित्य-भंडार में एक-से-एक अप्रतिम बहुमूल्य रत्न भरे पड़े हैं। अष्टावक्र गीता अध्यात्म का शिरोमणि गं्रथ है। इसकी तुलना किसी अन्य गं्रथ से नहीं की जा सकती। अष्टावक्रजी बुद्धपुरुष थे, जिनका नाम अध्यात्म-जगत् में आदर एवं सम्मान के साथ लिया जाता है। कहा जाता है कि जब वे अपनी माता के गर्भ में थे, उस समय उनके पिताजी वेद-पाठ कर रहे थे, तब उन्होंने गर्भ से ही पिता को टोक दिया था—‘शास्त्रों में ज्ञान कहाँ है? ज्ञान तो स्वयं के भीतर है! सत्य शास्त्रों में नहीं, स्वयं में है।’ यह सुनकर पिता ने गर्भस्थ शिशु को शाप दे दिया, ‘तू आठ अंगों से टेढ़ा-मेढ़ा एवं कुरूप होगा।’ इसीलिए उनका नाम ‘अष्टावक्र’ पड़ा। ‘अष्टावक्र गीता’ में अष्टावक्रजी के एक-से-एक अनूठे वक्तव्य हैं। ये कोई सैद्धांतिक वक्तव्य नहीं हैं, बल्कि प्रयोगसिद्ध वैज्ञानिक सत्य हैं, जिनको उन्होंने विदेह जनक पर प्रयोग करके सत्य सिद्ध कर दिखाया था। राजा जनक ने बारह वर्षीय अष्टावक्रजी को अपने सिंहासन पर बैठाया और स्वयं उनके चरणों में बैठकर शिष्य-भाव से अपनी जिज्ञासाओं का शमन कराया। यही शंका-समाधान अष्टावक्र संवाद रूप में ‘अष्टावक्र गीता’ में समाहित है। ज्ञान-पिपासु एवं अध्यात्म-जिज्ञासु पाठकों के लिए एक श्रेष्ठ, पठनीय एवं संग्रहणीय आध्यात्मिक ग्रंथ। "
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book