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Sampoorna Kavitayein Ramashankar Yadav ‘Vidrohi’

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रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ की कविताएँ आदिम से अर्वाचीन तक ऐतिहासिक बोध की संचित सामूहिक चेतना को अभिव्यक्त करती हैं और मज़दूरों-किसानों-मज़लूमों, सर्वहारा के पक्ष में खड़ी होती हैं। ये ईश्वर, धर्म, जातिवाद, वर्णवाद और पूँजीवाद सहित तमाम शोषणकारी व भेदभावमूलक विचारों और व्यवस्थाओं के विरुद्ध क्रान्तिकारी सामूहिक चेतना का अलख जगाती हैं। ‘विद्रोही’ की कविता वास्तव में मनुष्य की सामूहिक मुक्ति का आह्वान है जो एक तरफ अब तक चली आ रही सभ्यता-संस्कृति के अँधेरों पर अपनी बिजली-सी तर्कधार से आक्रमण करती है, तो दूसरी तरफ बराबरी के उज्ज्वल स्वप्न से मनुष्य मात्र के हृदय में नई चेतना के बीज बोती है। प्रगतिशील चेतना ‘विद्रोही’ की कविताओं में पूरी प्रतिबद्धता के साथ गतिमान है। निस्सन्देह ये कविताएँ हर तरह से जन-गण के मन की अभिव्यक्ति हैं और विद्रोही जनकवि! —निर्मला पुतुल

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रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ की कविताएँ आदिम से अर्वाचीन तक ऐतिहासिक बोध की संचित सामूहिक चेतना को अभिव्यक्त करती हैं और मज़दूरों-किसानों-मज़लूमों, सर्वहारा के पक्ष में खड़ी होती हैं। ये ईश्वर, धर्म, जातिवाद, वर्णवाद और पूँजीवाद सहित तमाम शोषणकारी व भेदभावमूलक विचारों और व्यवस्थाओं के विरुद्ध क्रान्तिकारी सामूहिक चेतना का अलख जगाती हैं। ‘विद्रोही’ की कविता वास्तव में मनुष्य की सामूहिक मुक्ति का आह्वान है जो एक तरफ अब तक चली आ रही सभ्यता-संस्कृति के अँधेरों पर अपनी बिजली-सी तर्कधार से आक्रमण करती है, तो दूसरी तरफ बराबरी के उज्ज्वल स्वप्न से मनुष्य मात्र के हृदय में नई चेतना के बीज बोती है। प्रगतिशील चेतना ‘विद्रोही’ की कविताओं में पूरी प्रतिबद्धता के साथ गतिमान है। निस्सन्देह ये कविताएँ हर तरह से जन-गण के मन की अभिव्यक्ति हैं और विद्रोही जनकवि!
—निर्मला पुतुल

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2026
Weight
210 grams
ISBN-13
9789309021213
Pages
208
Reading time
~7 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13.5 × 21.5 cm
Language
Hindi

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