About Ramashankar Yadav ‘Vidrohi’
रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’
रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ का जन्म 5 दिसम्बर, 1957 को गाँव अहिरी फ़िरोज़पुर, ज़िला सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। गाँव में ही प्राथमिक से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की। फिर आगे की पढ़ाई के लिए 1980 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान में दाखिला करवाया। अंग्रेज़ी साहित्य में उनकी गहरी दिलचस्पी थी और अंग्रेज़ी साहित्य का भी उन्होंने गहन अध्ययन किया।
बचपन से ही प्रगतिशील चेतना के संगठन से जुड़े रहे विद्रोही जीवन-भर सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों को लेकर मुखर रहे। सत्ता-प्रतिष्ठान का प्रखर विरोध किया और जनकवि के सच्चे अर्थ को साकार करते हुए निरन्तर कविता रचते-सुनाते-गाते रहे। आजीवन ‘जन संस्कृति मंच’ में सक्रिय रहे। 1983 में छात्र-आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण जेल भी गए।
उनके दो कविता-संग्रह प्रकाशित हैं—‘मैं तुम्हारा कवि हूँ’ और ‘मोहनजोदड़ो की आख़िरी सीढ़ी से’। उन पर ‘मैं तुम्हारा कवि हूँ!’ नाम से नितिन के. पमनानी और इमरान के निर्देशन में एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म भी बनी है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के नेतृत्व में यूजीसी पर
छात्र-हितों के लिए ‘घेरा डालो! डेरा डालो!!’ आन्दोलन करते हुए विद्रोही ने अन्तिम साँस ली।
8 दिसम्बर, 2015 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ।