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Aao Pani Ban Jate Hain

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‘आओ पानी बन जाते हैं’ आशीष कुमार मिश्र का पहला कविता-संग्रह है। इसमें संकलित कविताएँ अपने रचाव और बसाव में एक ठेठपन का अहसास कराती हैं। यह निश्चय ही आशीष के अपनी जड़ों से गहरे जुड़ाव से उपजा है। और, उनकी जड़ें अपने घर-परिवार, हित-मीत से होती हुई देस-दुनिया और धरती-आसमान तक फैली हैं;  यह फैलाव केवल भावनात्मक नहीं है बल्कि इसका ठोस आधार है कवि का अपना जीवन, उसकी अपनी चर्या। यहाँ यह जिक्र करना अनुचित न होगा कि आशीष एक पेशेवर पत्रकार और समर्पित रंगकर्मी भी हैं और इन कामों ने भी उनकी कविता को कहीं-न-कहीं समृद्ध किया है। इस संग्रह की एक कविता, ‘यह ठीक नहीं’ को इस सन्दर्भ में देखा जा सकता है। यह कविता एक व्यक्तिगत आत्मीय से संवाद की तरह शुरू होती है—‘कहो, क्या हाल-चाल हैं’। लेकिन तीसरी ही पंक्ति से यह एक अलग धरातल पर पहुँच जाती है—‘सबकुछ अच्छा है!/ ऐसा है तो सचमुच/ यह ठीक नहीं।’ क्या यह सतह के नीचे दबे सच को देखने की पत्रकारीय दृष्टि नहीं है! इसी तरह एक अन्य कविता, ‘दाल-भात’ में आशीष ने शब्दों के मितव्यय और सहज तुक-ताल से ऐसी सृष्टि की है जो पर्याप्त नाटकीय हो उठी है। वस्तुतः इस संग्रह में ऐसा और भी बहुत कुछ है जो आपको ठिठकने, रुकने, याद रखे जाने और अपना लिए जाने के लिए विवश करेगा।

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‘आओ पानी बन जाते हैं’ आशीष कुमार मिश्र का पहला कविता-संग्रह है। इसमें संकलित कविताएँ अपने रचाव और बसाव में एक ठेठपन का अहसास कराती हैं। यह निश्चय ही आशीष के अपनी जड़ों से गहरे जुड़ाव से उपजा है। और, उनकी जड़ें अपने घर-परिवार, हित-मीत से होती हुई देस-दुनिया और धरती-आसमान तक फैली हैं;  यह फैलाव केवल भावनात्मक नहीं है बल्कि इसका ठोस आधार है कवि का अपना जीवन, उसकी अपनी चर्या। यहाँ यह जिक्र करना अनुचित न होगा कि आशीष एक पेशेवर पत्रकार और समर्पित रंगकर्मी भी हैं और इन कामों ने भी उनकी कविता को कहीं-न-कहीं समृद्ध किया है। इस संग्रह की एक कविता, ‘यह ठीक नहीं’ को इस सन्दर्भ में देखा जा सकता है। यह कविता एक व्यक्तिगत आत्मीय से संवाद की तरह शुरू होती है—‘कहो, क्या हाल-चाल हैं’। लेकिन तीसरी ही पंक्ति से यह एक अलग धरातल पर पहुँच जाती है—‘सबकुछ अच्छा है!/ ऐसा है तो सचमुच/ यह ठीक नहीं।’ क्या यह सतह के नीचे दबे सच को देखने की पत्रकारीय दृष्टि नहीं है! इसी तरह एक अन्य कविता, ‘दाल-भात’ में आशीष ने शब्दों के मितव्यय और सहज तुक-ताल से ऐसी सृष्टि की है जो पर्याप्त नाटकीय हो उठी है। वस्तुतः इस संग्रह में ऐसा और भी बहुत कुछ है जो आपको ठिठकने, रुकने, याद रखे जाने और अपना लिए जाने के लिए विवश करेगा।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2026
Weight
140 grams
ISBN-13
9789347265433
Pages
128
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13 × 20 cm
Language
Hindi

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