(0)
Author:
Kashinath SinghPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
895
716 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘धूमिल के आने तक आलोचना का मुँह कहानी की ओर था। वह आया और उसने आलोचना का मुँह कविता की ओर कर दिया। अपनी ओर कर लिया।’ इस पुस्तक में संकलित ‘विपक्ष का कवि : धूमिल’ शीर्षक निबन्ध में काशीनाथ जी यह कहते हुए कवि और व्यक्ति धूमिल के जीवन की विडम्बनाओं और शक्तियों, दोनों को याद करते हैं और धूमिल के साथ उनकी कविता को समझने के भी नये औज़ार हमें देते हैं। ‘आलोचना भी रचना है’ काशीनाथ सिंह के ऐसे ही निबन्धों का संग्रह है। इनमें कुछ के केन्द्र में रचनाकार हैं, कुछ का विषय संस्कृति, साहित्य और लेखक की भूमिका जैसे प्रश्न बने हैं। ‘लेखक की भूमिका का भारतीय सन्दर्भ’ शीर्षक व्याख्यान जो उन्होंने जापान में तीसरी दुनिया के लेखकों के सम्मेलन में दिया, उसमें वह कहते हैं कि एक राजनेता या नौकरशाह की नागरिकता सन्दिग्ध हो सकती है क्योंकि उसके अपने स्वार्थ होते हैं, मगर एक लेखक अपनी धरती का सच्चा नागरिक होता है। तीन खंडों में संयोजित रचनात्मक भाषा में लिखे निबन्धों, संस्मरणों, आलेखों और टिप्पणियों के इस संकलन में हम न सिर्फ़ काशीनाथ सिंह की सुपरिचित गद्य-भाषा के कई रंगों से परिचित होते हैं, बल्कि आलोचना के उनके अपने औज़ारों से जनवादी लेखन, वर्तमान हिन्दी कविता, ‘गोदान’ व होरी, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचन्द, परसाई आदि विषयों और व्यक्तित्वों को भी नये ढंग से देखते हैं। उनकी अत्यन्त चर्चित पुस्तक ‘काशी का अस्सी’ की रचना-यात्रा भी एक निबन्ध का विषय बनी है, तो एक आलेख उनके उपन्यास ‘अपना मोर्चा’ के बारे में भी यहाँ हैं। उस समय लिखे जा रहे उपन्यासों और कहानियों को भाषा व संरचना के बरक्स अपने इस उपन्यास को रखते हुए कहते हैं : यदि हमारे लेखन की समस्याएँ अगल-बग़ल के लोगों की ज़िन्दगी की, उनके नितान्त परिचित संसार से हों और उस गद्य में उन्हें बुलाने, धकियाने, ठेलने, मारने और प्यार करने की आवाज़ हो—आत्मीयता की ज़िन्दा आवाज़, तो वे (पाठक) भूखे की तरह उस पर टूट पड़ेंगे।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
‘धूमिल के आने तक आलोचना का मुँह कहानी की ओर था। वह आया और उसने आलोचना का मुँह कविता की ओर कर दिया। अपनी ओर कर लिया।’
इस पुस्तक में संकलित ‘विपक्ष का कवि : धूमिल’ शीर्षक निबन्ध में काशीनाथ जी यह कहते हुए कवि और व्यक्ति धूमिल के जीवन की विडम्बनाओं और शक्तियों, दोनों को याद करते हैं और धूमिल के साथ उनकी कविता को समझने के भी नये औज़ार हमें देते हैं।
‘आलोचना भी रचना है’ काशीनाथ सिंह के ऐसे ही निबन्धों का संग्रह है। इनमें कुछ के केन्द्र में रचनाकार हैं, कुछ का विषय संस्कृति, साहित्य और लेखक की भूमिका जैसे प्रश्न बने हैं। ‘लेखक की भूमिका का भारतीय सन्दर्भ’ शीर्षक व्याख्यान जो उन्होंने जापान में तीसरी दुनिया के लेखकों के सम्मेलन में दिया, उसमें वह कहते हैं कि एक राजनेता या नौकरशाह की नागरिकता सन्दिग्ध हो सकती है क्योंकि उसके अपने स्वार्थ होते हैं, मगर एक लेखक अपनी धरती का सच्चा नागरिक होता है।
तीन खंडों में संयोजित रचनात्मक भाषा में लिखे निबन्धों, संस्मरणों, आलेखों और टिप्पणियों के इस संकलन में हम न सिर्फ़ काशीनाथ सिंह की सुपरिचित गद्य-भाषा के कई रंगों से परिचित होते हैं, बल्कि आलोचना के उनके अपने औज़ारों से जनवादी लेखन, वर्तमान हिन्दी कविता, ‘गोदान’ व होरी, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचन्द, परसाई आदि विषयों और व्यक्तित्वों को भी नये ढंग से देखते हैं।
उनकी अत्यन्त चर्चित पुस्तक ‘काशी का अस्सी’ की रचना-यात्रा भी एक निबन्ध का विषय बनी है, तो एक आलेख उनके उपन्यास ‘अपना मोर्चा’ के बारे में भी यहाँ हैं। उस समय लिखे जा रहे उपन्यासों और कहानियों को भाषा व संरचना के बरक्स अपने इस उपन्यास को रखते हुए कहते हैं : यदि हमारे लेखन की समस्याएँ अगल-बग़ल के लोगों की ज़िन्दगी की, उनके नितान्त परिचित संसार से हों और उस गद्य में उन्हें बुलाने, धकियाने, ठेलने, मारने और प्यार करने की आवाज़ हो—आत्मीयता की ज़िन्दा आवाज़, तो वे (पाठक) भूखे की तरह उस पर टूट पड़ेंगे।
Book Details
-
ISBN9789377372460
-
Pages256
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Apna Morcha
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
काशीनाथ सिंह का नाम सामने आते ही उस तैराक का चित्र आँखों के सामने तैर जाता है, जो एक चढ़ी हुई नदी में, धारा के विरुद्ध हाथ-पाँव मारता चला आता हो। ‘अपना मोर्चा’ स्वयं में इसकी सर्वश्रेष्ठ गवाही है। यह मोर्चा प्रतिरोध की उस मानसिकता का बहुमूल्य दस्तावेज़ है जिसे इस देश के युवा वर्ग ने पहली बार अर्जित किया था। एक चेतन अँगड़ाई इतिहास की करवट बनी थी—जब विश्वविद्यालय से टूटा हुआ भाषा का सवाल, पूरे सामाजिक-राजनीतिक ढाँचे का सवाल बन गया था और आन्दोलनों की लहरें जनमानस को भिगोने लगी थीं। हम क्यों पढ़ते हैं? ये विश्वविद्यालय क्यों? भाषा केवल एक लिपि ही क्यों, जीवन की भाषा क्यों नहीं? छात्रों, अध्यापकों, मज़दूरों और किसानों के अपने-अपने सवाल अलग-अलग क्यों हैं? व्यवस्था उन्हें किस तरह भटकाकर तोड़ती है? एक छोटी-सी कृति में इन सारे सवालों को उछाला है काशीनाथ सिंह ने। इनके जवाबों के लिए लोग ख़ुद अपनी आत्मा टटोलें, यह सार्थक आग्रह भी इस कृति का है।
Pratinidhi Kahaniyan : Kashinath Singh
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
साठोत्तरी पीढ़ी के जिन प्रगतिशील कथाकारों ने हिन्दी कहानी को नई ज़मीन सौंपने का काम किया, काशीनाथ सिंह का नाम उनमें विशेष महत्त्व रखता है। इस संग्रह में उनकी बहुचर्चित कहानियाँ शामिल की गई हैं। ध्वस्त होते पुराने समाज, व्यक्ति-मूल्यों तथा नई आकांक्षाओं के बीच जिस अर्थद्वन्द्व को जन-सामान्य झेल रहा है, उसकी टकराहटों से उपजी, भयावह अन्तःसंघर्ष को रेखांकित करती हुई ये कहानियाँ पाठक को सहज ही अपनी-सी लगने लगती हैं। इनमें हम वर्तमान राजनीतिक ढाँचे के तहत पनप रही मूल्य-भ्रंशता को भी देखते हैं और जीवन-मूल्यों की पतनशील त्रासदी को भी महसूस करते हैं। समकालीन यथार्थ की गहरी पकड़, भाषा-शैली की सहजता और एक ख़ास क़िस्म का व्यंग्य इस सन्दर्भ में पाठक की भरपूर मदद करता है। वह एक प्रगतिशील मूल्य-दृष्टि को अपने भीतर खुलते हुए पाता है, क्योंकि काशीनाथ सिंह के कथा-चरित्र विभिन्न विरोधी जीवन-स्थितियों में पड़कर स्वयं अपना-अपना अन्तःसंघर्ष उजागर करते चलते हैं और इस प्रक्रिया में लेखकीय सोच की दिशा सहज ही पाठकीय सोच से एकमेक हो उठती है।
Kahni Upkhan
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
सुप्रसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह पिछले चालीस वर्षों से हिन्दी कथा में सक्रिय और तरो-ताज़ा हैं। उन्होंने अपने लेखन के ज़रिए पाठकों की नई जमात तैयार की है—युवाओं की जमात ‘अपना मोर्चा’ लिखकर और साहित्य से कोई सरोकार न रखनेवाले सामान्य पाठकों के संस्मरण और ‘काशी का अस्सी’ लिखकर। लेकिन ऊपर से आरोप यह कि उन्होंने साहित्य की कुलीनता की धज्जियाँ उड़ाई हैं। इसके एवज़ में उन्होंने गालियाँ भी खाई हैं, उपेक्षाएँ भी झेली हैं और ख़तरे भी उठाए हैं। यह यों ही नहीं है कि कथा-कहानी में आनेवाली हर युवा पीढ़ी काशी को अपना समकालीन और सहयात्री समझती रही है। ऐसा क्यों है—यह देखना हो तो कहनी उपखान पढ़ना चाहिए। कहनी उपखान काशी की सारी छोटी-बड़ी कहानियों का संग्रह है—अब तक की कुल जमा-पूँजी। मात्र चालीस कहानियाँ। देखा जाना चाहिए कि वह कौन-सी ख़ासियत है कि इतनी-सी पूँजी पर काशी लगातार कथा-चर्चा में बने रहे हैं और आलोचकों के लिए भी ‘अपरिहार्य’ रहे हैं। काल और काल से छेड़छाड़ और मुठभेड़—पहचान है काशी की कहानियों की। काल के केन्द्र में है सामाजिक और आर्थिक विसंगतियों से घिरा आदमी—कभी अकेले, कभी परिवार में, कभी समाज में। इस आदमी से मिलना यानी कहानियों को पढ़ना हरी-भरी ज़िन्दगी के बीच चहलक़दमी करने जैसा है। न कहीं बोरियत, न एकरसता, न मनहूसियत, न दुहराव। उठने-गिरने, चलने-फिरने, लड़ने-हारने में भी हँसी-ठट्ठा और व्यंग्य-विनोद। ज़िन्दादिली कहीं भी पाठक का साथ नहीं छोड़ती। जियो तो हँसते हुए, मरो तो हँसते हुए—यही जैसे जीने का नुस्खा हो पात्रों के जीवन का। जैसे-जैसे ज़़िन्दगी बदली है, वैसे-वैसे काशी की कहानी भी बदली है—अगर नहीं बदला है तो कहानी कहने का अन्दाज़। जातक, पंचतंत्र और लोकप्रचलित कथाशैलियाँ जैसे उनके कहानीकार के ख़ून में हैं। कई कहानियाँ तो चौपाल या अलाव के गिर्द बैठकर सुनने का सुख देती हैं। आइए, वह सुख आप भी लीजिए ‘कहनी उपखान’ पढ़कर। कहनी (कहानी) और उपखान (उपाख्यान) कहकर तो काशी ने लिया है, आप भी लीजिए पढ़कर, क्योंकि काशी को पढ़ना ही सुनना है।
Patta Patta Boota Boota
- Author Name:
Kashinath Singh +1
- Book Type:

- Description:
काशीनाथ सिंह ने कई विधाओं में रचना की है। यह उनकी अभी तक असंकलित रचनाओं का संग्रह है जिसमें उनकी कुछ कहानियों के साथ कुछ अन्य गद्य रचनाओं को शामिल किया गया है। इनमें से कुछ कहानियों को काशीनाथ जी ने ख़ारिज के खाते में डाल रखा था। लेकिन किसी भी रचनाकार की संरचना को पूरी तरह समझने के लिए यह आवश्यक है कि उसकी उन रचनाओं को भी पढ़ा जाए, जिन्हें वह ख़ुद महत्त्वपूर्ण नहीं मानता। कई बार ऐसा भी होता है कि अपनी जिन चीज़ों को लेखक बहुत अहमियत नहीं देता, वे वास्तव में पाठकों के लिए बहुत महत्त्वर्ण साबित होती हैं। सम्भव है कि इनमें भी आपको कुछ ऐसी रचनाएँ दिख जाएँ। काशीनाथ सिंह लोक-बोध से सम्पन्न रचनाकार रहे हैं। वे चीज़ों को वहाँ से देखने के हिमायती हैं जहाँ हम खड़े होते हैं, वहाँ से नहीं जहाँ से देखने का रिवाज चल निकलता है और हर कोई जिसे या तो फ़ैशन के चलते या पोलिटिकल करेक्टनेस के कारण अपनाने लगता है। इस पुस्तक में शामिल रचनाओं में हमें उनकी अपनी दृष्टि से देखी हुई चीज़ें मिलती हैं जो हमें आगे अपनी दृष्टि विकसित करने, अपने पक्ष को परिभाषित करने का आधार देती हैं। इस पुस्तकीय प्रस्तुति का उद्देश्य काशीनाथ सिंह की पचास वर्षों के व्यापक कालखंड में बिखरे रचना-स्फुलिंगों को एकत्रित करना और उनके उस लेखक को समझना है जो इस बीच बना, साथ ही उसके बनने की प्रक्रिया को भी।
Yaad Ho Ki Na Yaad Ho
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
काशीनाथ जी ने संस्मरण को अकेले जितना दिया है किसी एक विधा को कोई एक क़लम बिरले ही दे पाती है। धर्मोचित श्रद्धा जिनकी ध्वजवाहक है, उन तमाम भीनी-भीनी भावनाओं में रसी-बसी, चीमड़-सी विधा उनके यहाँ आकर खेलने लगती है। किसी को याद करके वे न तो कोई शास्त्र-सम्मत ऋण चुकाते हैं, न उसके छिद्रों से अपनी महानता पर रोशनी फेंकते हैं, वे उस व्यक्ति, उस स्थान, उस समय को उसकी हर सिलवट समेत भाषा में रूपान्तरित करते हैं, और कुछ ऐसे कौशल से कि उनका विषयगत भी वस्तुगत होकर दिखाई देता है। इस जिल्द में चित्रित हजारीप्रसाद द्विवेदी, धूमिल, त्रिलोचन, नामवर सिंह, अस्सी, बनारस और इन सबके साथ लगा-बिंधा वह समय आपको कहीं और नहीं मिलेगा। आप ख़ुद भी उन्हें उस तरह नहीं देख सकते जिस तरह इन संस्मरणों में उन्हें देख लिया गया है। यह भाषा, जो अपनी क्षिप्रता में फ़िल्म की रील को टक्कर देती प्रतीत होती है, आपको सिर्फ़ चित्र नहीं देती, पूरा वातावरण देती है जिसमें और सब चीज़ों के साथ आपको देखने का तरीक़ा भी मिलता है। इन संस्मरणों को पढ़कर हम जान लेते हैं कि अपने किसी समकालीन को देखें तो कैसे देखें, अपने जीवन में रोज़-रोज़ गुज़रनेवाली किसी जगह को जिएँ तो कैसे जिएँ और अपने समय को उसकी औक़ात बताते हुए भोगें तो कैसे भोगें।
Sampoorna Kahaniyan : Kashinath Singh
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
काशीनाथ सिंह कहानी के लिए जिस चीज़ को सबसे ज़रूरी मानते हैं, वह है जीवन्तता। जीवन की ठस प्रतिकृति नहीं, एक रचना जिसमें उसका अपना जीवन धड़कता हो, जो पाठक को थकाए नहीं, यथार्थ के तीखे चित्र दिखाते हुए भी उसे अपने साथ बनाए रखे। उनकी कहानियों में यह स्पन्दन है। अपना देखा-जाना ग्रामीण जीवन और बनारस का अनूठा परिवेश, उसको जीवन्त बनाने वाले पात्र उनकी कहानियों में अपनी समूची मानवीय जटिलता के साथ दिखाई देते हैं। समय के साथ बदलता यथार्थ कहानी के उनके ट्रीटमेंट को भी बदलता रहा है, लेकिन आम आदमी हमेशा उनके कहानीकार को प्रिय रहा है। उसके दुख-दर्द, असमंजस, दुविधाएँ, उसका जीवट और साहस सब मिलकर उनकी कहानियों को सजीव बनाते हैं। विचारधारा उन्हें दृष्टि ज़रूर देती है, लेकिन जीवन के चित्रण में उनकी सीमा नहीं बनती। यह उनकी अभी तक की कहानियों की सम्पूर्ण प्रस्तुति है। ‘काशी का अस्सी’ के लेखक की कथा-रचनाओं का यह विशाल फलक पाठकों को निश्चय ही लम्बे समय तक साथ रहनेवाला अनुभव प्रदान करेगा।
Ghar Ka Jogi Jogda
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
‘गरबीली गरीबी वह’ के बारे में अद्भुत रचना है काशी का संस्मरण—जिस ऊष्मा, सम्मान और समझदार संयम से लिखा गया है, वह पहली बार तो अभिभूत कर लेता है। मैं इसे नामवरी सठियाना-समारोह की एक उपलब्धि मानता हूँ। साथ ही मेरी यह राय भी है कि अगर ऐसी क़लम हो तो हिटलर को भी भगवान बुद्ध का अवतार बनाकर पेश किया जा सकता है। (मज़ाक़ अलग) व्यक्तित्व के अन्तर्विरोधों पर भी कुछ बात की जाती तो शायद और ज़्यादा जीवन्त संस्मरण होता! —राजेन्द्र यादव घर का जोगी जोगड़ा के बारे में काशीनाथ सिंह का आख्यानक उनके रचनात्मक गद्य की पूरी ताक़त के साथ सामने आया है। काशी के पास रचनात्मक गद्य की जीवन्तता है—गहरे अनुभव-संवेदन हैं। उनकी भाषा को लेकर और अभिव्यक्ति भंगिमाओं को लेकर काफ़ी कुछ कहा गया है, परन्तु जो बात देखने की है, वह यह है कि अपनी ज़मीन और परिवेश से काशी का कितना गहरा रिश्ता है। संस्मरण को जीवन्त बना देने का कितना माद्दा है। काशी पूरी ऊर्जा में बहुत सहज होकर लिखते हैं और जब ‘भइया’ सामने हों तो वे अपनी रचनात्मकता के चरम पर पहुँचते हैं और महत्त्वपूर्ण के साथ-साथ तमाम मार्मिक और बेधक भी हमें दे जाते हैं। —डॉ. शिवकुमार मिश्र।
Kashi Ka Assi
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
ज़िन्दगी और ज़िन्दादिली से भरा एक अलग क़िस्म का उपन्यास। उपन्यास के परम्परित मान्य ढाँचों के आगे प्रश्नचिह्न। ‘अस्सी’ काशीनाथ की भी पहचान रहा है और बनारस की भी। जब इस उपन्यास के कुछ अंश ‘कथा रिपोर्ताज’ के नाम से पत्रिकाओं में छपे थे तो पाठकों और लेखकों में हलचल-सी हुई थी। छोटे शहरों और क़स्बों में उन अंक विशेषों के लिए जैसे लूट-सी मची थी, फ़ोटोस्टेट तक हुए थे, स्वयं पात्रों ने बावेला मचाया था और मारपीट से लेकर कोर्ट-कचहरी की धमकियाँ तक दी थीं। अब यह मुकम्मल उपन्यास आपके सामने है जिसमें पाँच कथाएँ हैं और उन सभी कथाओं का केन्द्र भी अस्सी है। हर कथा में स्थान भी वही, पात्र भी वे ही—अपने असली और वास्तविक नामों के साथ, अपनी बोली-बानी और लहज़ों के साथ। हर राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय मुद्दे पर इन पात्रों की बेमुरव्वत और लट्ठमार टिप्पणियाँ काशी की उस देशज और लोकपरम्परा की याद दिलाती हैं जिसके वारिस कबीर और भारतेन्दु थे। उपन्यास की भाषा उसकी जान है—भदेसपन और व्यंग्य-विनोद में सराबोर। साहित्य की ‘मधुर मनोहर अतीव सुन्दर’ वाणी शायद कहीं दिख जाए!
Rehan Par Ragghu
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
‘रेहन पर रग्घू’ प्रख्यात कथाकार काशीनाथ सिंह की रचना-यात्रा का नव्य शिखर है। भूमंडलीकरण के परिणामस्वरूप संवेदना, सम्बन्ध और सामूहिकता की दुनिया में जो निर्मम ध्वंस हुआ है — तब्दीलियों का जो तूफान निर्मित हुआ है — उसका प्रामाणिक और गहन अंकन है ‘रेहन पर रग्घू’। यह उपन्यास वस्तुतः गाँव, शहर, अमेरिका तक के भूगोल में फैला हुआ अकेले और निहत्थे पड़ते जा रहे समकालीन मनुष्य का बेजोड़ आख्यान है। उपन्यास में केन्द्रीय पात्र रघुनाथ की व्यवस्थित और सफल ज़िन्दगी चल रही है। सब कुछ उनकी योजना और इच्छा के मुताबिक़। अचानक कुछ ऐसा घटित होता है कि उनके जीवन का अर्जित यथार्थ इतना महत्त्वाकांक्षी, आक्रामक, हिंस्र हो जाता है कि मनुष्यता की तमाम सारी आत्मीय, कोमल अच्छी चीजे़ं टूटने, बिखरने, बरबाद होने लगती हैं। इस महाबली आक्रान्ता के प्रतिरोध का जो रास्ता उपन्यास के अन्त में अख़्तियार किया गया, वह न केवल विलक्षण और अचूक है, बल्कि ‘रेहन पर रग्घू’ को यादगार व्यंजनाओं से भर देता है। ‘रेहन पर रग्घू‘ नए युग की वास्तविकता की बहुस्तरीय गाथा है। इसमें उपभोक्तावाद की क्रूरताओं का विखंडन है ही, साथ में शोषित-प्रताड़ित जातियों के सकारात्मक उभार और नई स्त्री की शक्ति एवं व्यथा का दक्ष चित्रांकन भी है। दरअसल ‘रेहन पर रग्घू’ में वास्तविकताओं, चरित्रों, लोकेल, उपकथाओं आदि का ऐसा सधा हुआ अकाट्य अन्तर्गुम्फन है कि उसे एक प्रौढ़ रचनात्मकता के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। देशज सच्चाइयों, कल्पना, काव्यात्मकता, झीनी दार्शनिकता का सहमेल उपन्यास को मूल्यवान आभा से समृद्ध बनाता है। संक्षेप में कहें, ‘रेहन पर रग्घू’ बीते दो दशक के यथार्थ का ऐसा औपन्यासिक रूपान्तरण है जो काशीनाथ सिंह और हिन्दी उपन्यास दोनों को एक नई गरिमा प्रदान करता है। —अखिलेश
Batein Hain Baton Ka Kya
- Author Name:
Kashinath Singh +1
- Book Type:

- Description:
पिछले पचास साल की हिन्दी कहानी में अनेक बड़े लेखकों के साथ जिन कहानीकारों का नाम अग्रणी रहा और जिन्हें पाठकों ने लगातार पसन्द किया उनमें काशीनाथ सिंह प्रमुख हैं। काशीनाथ सिंह अपने लेखन के लिए लोक से ऊर्जा ग्रहण करते हैं। वे जीवन का महत्त्व समझने वाले कथाकार हैं। सीधी-सच्ची बात कहने के लिए कला की कृत्रिमता उन्हें कभी पसन्द न आई और तभी उनकी कलम से काशी का अस्सी जैसी कालजयी कृति भी सम्भव हुई। लेखक के संसार को जानने-समझने के लिए ही नहीं वरन् उसकी कला के रहस्य को भी समझने के लिए उससे किए गए संवादों का महत्त्व है। काशीनाथ सिंह से समय-समय पर किए गए संवादों के इस संग्रह को वस्तुत: बतकही की संज्ञा अधिक समीचीन होगी क्योंकि काशीनाथ सिंह उस लोक के कथाकार हैं जो विचारों की आवाजाही में विश्वास रखता है। यहाँ संकलित लगभग दो दर्जन संवाद काशीनाथ सिंह के व्यक्तित्व और उनके सृजन सरोकारों को उजागर करने वाले हैं। विचारधारा, राजनीति और समाज की व्यापक बहसें और सवाल इन संवादों को धार देते हैं तो गद्य की कला का मर्म भी इन संवादों को उल्लेखनीय बनाता है। उनके लेखन के उत्तरार्ध में आई अनेक कृतियों यथा रेहन पर रग्घू, महुआ चरित और उपसंहार पर यहाँ अनेक संवाद हुए हैं। इन सबसे अलहदा और ऊपर है बनारस की बोली-बानी में काशीनाथ सिंह की बतकही। सीधी-सच्ची बातें और न हुआ तो दरेरा देकर कह देने का आत्मविश्वास। यह बतकही हमारे संवादहीनता से भरे समय में आत्मीय गपशप का विरल सुख है। इस गपशप में कथाकार अपने साथ पाठक को वैसे ही साथ लिए बैठा है जैसे गाँव में बर्फीली हवाओं में अलाव तापते हुए लोग सुख-दुःख की बात करते हैं। आइए, इस बतकही में शामिल होते हैं और बातों का आनन्द लेते हैं।
Aahatein Sun Raha Hun Yadon Ki
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
काशीनाथ सिंह कहानियाँ, उपन्यास, नाटक और आलोचना लिखकर और कथाकार के रूप में ख्याति अर्जित कर संस्मरणों की दुनिया में आए। सम्भवत: इसीलिए उनके संस्मरण अन्तत: स्मृति-कथाएँ हैं। कथा, जिसमें गल्प का तत्व कभी भी यथार्थ के सामने निस्तेज और प्रभावहीन नहीं होता। ऐतिहासिक व्यक्तियों और वास्तविक घटनाओं के इर्द-गिर्द बुने जाने पर भी उनमें रचनात्मकता और कल्पना के पहलू ऐसे मिले-जुले होते हैं कि वे कभी भी ‘यथार्थ’ को ‘भारी’, ‘ठोस’ और ‘पत्थर’ सा नहीं बनने देते। यहाँ ‘यथार्थ’ एक जीवित पाखी की तरह ‘गल्प’ के पंख लगाकर जीवन के महा-आकाश में उड़ता है। कहानी-उपन्यास से संस्मरण की ओर आने का एक लाभ यह भी हुआ है कि कहानी-उपन्यास बुनते-गढ़ते हुए जो सीखें कथाकार काशीनाथ सिंह को मिली थीं, वे यहाँ भी काम आ सकी हैं। काशीनाथ सिंह के संस्मरणों में वास्तविकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उनमें एक ख़ास तरह की स्पष्टता, साहसिकता और बेबाकी पैदा की है। भोजपुरी की शक्ति, जो उनकी कहानियों में, संयत भाव से प्रकट होती थी, उनके संस्मरणों में खुलकर प्रकट होती है। बनारसीपन ने इन संस्मरणों के गद्य को जीवन का आईना बना दिया। हरिशंकर परसाई और नामवर सिंह—गद्य में काशीनाथ सिंह के आदर्श मालूम पड़ते हैं। इसीलिए उनके संस्मरणों की संरचना में करुणा और व्यंग्य अन्तर्भुक्त हैं। इन दोनों गद्यकारों की तरह उनकी भाषा बतकही के अत्यन्त निकट चली जाती है। छोटे-छोटे वाक्य, कौतुक और खिलंदड़ापन उनकी भाषा में भीतर तक विन्यस्त है। बनारसीपन इन सबको एक नया रंग देता है । ‘आहटें सुन रहा हूँ यादों की’ स्मृति-कथाओं की किताब है। इस पुस्तक में ‘याद हो कि न याद हो’ के पहले संस्करण के बाद प्रकाशित छोटे-बड़े 18 संस्मरण शामिल हैं। पुस्तक के पहले खंड के संस्मरण निजी जीवन के इर्द-गिर्द घूमते हैं। दूसरे खंड में काशीनाथ सिंह के निकट जनों–गुरु बच्चन सिंह, बड़े भाई नामवर जी के परम मित्र वकील साहेब उर्फ नागेंद्र सिंह, आलोचक-मित्र-संगठक प्रो. कमला प्रसाद, मित्र-कथाकार दूधनाथ सिंह, मित्र–भाषाविज्ञानी श्री राम अधार सिंह और कमउम्र मित्र सिने विशेषज्ञ श्री प्रह्लाद अग्रवाल पर केन्द्रित संस्मरण हैं। काशीनाथ सिंह के इन संस्मरणों से गुजरते हुए सहज ही आभास होता है कि वास्तविक देश के सामानान्तर स्मृति एक देश है!
Mahuacharit
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह का उपन्यास ‘महुआचरित’ जीवन के अपार अरण्य में भटकती इच्छाओं का आख्यान है। मध्यवर्गीय समाज की सच्चाइयों को लेखक ने विशिष्ट कथा-रस के साथ प्रकट किया है। यह उपन्यास जिस शिल्प में अभिव्यक्त हुआ है, वह कथा-संसार में एक नया प्रस्थान निर्मित करता है। छोटे-बड़े किंचित् असमाप्त अपूर्ण वाक्य संकेतों की ओर उन्मुख विवरण और बहुअर्थी बिम्ब इस रचना को महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। महुआ की सहेली है उसके मकान की छत जहाँ वह खुलती, खिलती और खेलती है। यह कल्पना ही अपने आपमें अनूठी और व्यंजक है। कहना न होगा कि ‘महुआचरित’ को ‘वृत्तान्त का अन्त’ करती कथा-रचना के रूप में रेखांकित किया जा सकता है। अस्सी साल के स्वतंत्रता सेनानी पिता की पुत्री महुआ की देहासक्ति से विवाह तक की यात्रा और फिर उसमें जागता अस्मिता-बोध—इस कथा को लेखक ने समुचित सामाजिक सन्दर्भों के साथ प्रस्तुत किया है। स्त्री-विमर्श की अनुगूँज के बावजूद यह प्रश्न आकार लेता है, ‘ऐसा क्या है देह में कि उसका तो कुछ नहीं बिगड़ता/लेकिन मन का सारा रिश्ता-नाता तहस-नहस हो जाता है।’ सघन संवेदना और सर्वथा नवीन संरचना से समृद्ध ‘महुआचरित’ उपन्यास निश्चित रूप से पाठकों की आत्मीयता अर्जित करेगा।
Aadminama
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
‘आदमीनामा’ इमरजेंसी के बाद प्रकाशित काशीनाथ सिंह का एक बहुचर्चित संग्रह है। इसमें समाज, राजनीति, भूख, बेरोज़गारी, स्वार्थ, भ्रष्टाचार, अर्थ का अवमूल्यन, क्रान्तिकारिता के नाम पर छल, आपातकाल का तांडव, प्रतिबद्धता, प्रतिरोध आदि का जो जीवन्त यथार्थ है, वह अपने समय का बड़ा बयान है जिससे लोकतांत्रिक परिप्रेक्ष्य में बहुत कुछ समझा और सीखा जा सकता है। देखा जा सकता है कि इस संग्रह में अपनी क़िस्सागोई के लिए काशीनाथ सिंह के पास जो दृष्टि और भाषा की धार है, वह किस तरह ज़मीनी और सरोकारपूर्ण है। और इस बात का सशक्त उदाहरण हैं ये कहानियाँ—‘सूचना’, ‘निधन’, ‘‘माननिय’ होम मनिस्टर के नाम’, ‘आदमी का आदमी’, ‘मीसाजातकम्’, ‘लाल किले के बाज’, ‘मुसइ चा’, ‘सुधीर घोषाल’ आदि। इस संग्रह का एक बड़ा आकर्षण है ‘कहानी की वर्णमाला और मैं’। इसमें काशीनाथ सिंह ने अपने रचना-विकास को जिस ईमानदारी और आत्मीयता के साथ व्यक्त किया है, वह अनुकरणीय तो है ही, एक मिसाल भी कि जीवन और क़लम के बीच न फ़र्क़ ठीक, न फाँक। कोई दो राय नहीं कि अपने आस्वाद में ही नहीं, नई साज-सज्जा में भी ‘आदमीनामा’ संग्रह पाठकों के लिए एक बार पुन: उपलब्धि साबित होगा!
Log Bistron Per
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

- Description:
खाँटी माटी के कथाकार हैं काशीनाथ सिंह। कथा साहित्य में ‘अकहानी’, ‘सचेतन कहानी’, ‘समान्तर कहानी’ आदि आन्दोलनों के काल से गुज़रे काशीनाथ सिंह ने भीड़ में होते हुए अपनी लीक स्वयं बनाई है। जो लोक रचा है उसका यथार्थ अपनी भाषा, शिल्प, कथ्य और दृष्टि में विश्वसनीय तो है ही, विलक्षण भी है। एक सेवानिवृत्त व्यक्ति की नज़र से देखी-लिखी गई कहानी ‘सुख’ सामाजिक यथार्थ को व्यक्त करनेवाली एक अलग कहानी है तो ‘संकट’ एक ऐसे फौजी चरित्र की कथा जो अपनी वासना की पूर्ति न होने पर कई मानसिक तनावों में घिरता और घेरते चला जाता है। ‘एक बूढ़े की कहानी’ एक नाबालिग लडक़ी से बलात्कार की बेहद मार्मिक कथा है। ‘चोट’ में जाति के अहं को जिस पैनी दृष्टि के साथ रचा गया है, वह बदलते युग में वर्ण से जुड़ी कई गिरहों को खोलने में मदद करती है। जबकि ‘सुबह का डर’ मनुष्यता और पुलिसिया आतंक के बीच फँसे लोगों के डर के संजाल की कहानी है। देखें तो, काशीनाथ सिंह के दो संग्रहों ‘लोग बिस्तरों पर’ और ‘सुबह का डर’ से शामिल कहानियों की इस एक जिल्द में ‘बैलून’ जैसी प्रेम कहानी है तो मौत के प्रति चिन्ता और चिन्तन के खोखलेपन से पर्दा हटाती ‘चायघर में मृत्यु’ जैसी कहानी भी। ‘आखिरी रात’ में दाम्पत्य जीवन के आर्थिक तनाव की कथा है, ‘अपने घर का देश’ में बदलते मूल्यों का गहन अंकन तो निरन्तर छीजती संवेदना का एक त्रासद रूप रचती पुस्तक की शीर्षक कहानी ‘लोग बिस्तरों पर’। निस्सन्देह, काशीनाथ सिंह का यह कहानी-संग्रह महत्त्वपूर्ण ही नहीं, अपने समय की एक दस्तावेज़ भी है।
Vichar Ka Aina Kala Sahitya Sanskriti : Mahatma Gandhi
- Author Name:
Mahatma Gandhi +1
- Book Type:

- Description:
विचार का आईना शृंखला के अन्तर्गत ऐसे साहित्यकारों, चिन्तकों और राजनेताओं के ‘कला साहित्य संस्कृति’ केन्द्रित चिन्तन को प्रस्तुत किया जा रहा है जिन्होंने भारतीय जनमानस को गहराई से प्रभावित किया। इसके पहले चरण में हम मोहनदास करमचन्द गांधी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, राममनोहर लोहिया, रामचन्द्र शुक्ल, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ और गजानन माधव मुक्तिबोध के विचारपरक लेखन से एक ऐसा मुकम्मल संचयन प्रस्तुत कर रहे हैं जो हर लिहाज से संग्रहणीय है। मोहनदास करमचन्द गांधी ऐसे जननेता हैं जो वैश्विक उपस्थिति रखते हैं। वे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के ऐसे नायक हैं जिन्होंने इसे जनता का आन्दोलन बना दिया। औपनिवेशिक सत्ता का प्रतिरोध करते हुए उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपनी लड़ाई का केन्द्रीय शिल्प बनाया। उन्होंने साध्य ही नहीं साधन की भी पवित्रता की बात की, बेलगाम उपभोग की संस्कृति का विरोध किया। सत्याग्रही के रूप में विरोधी के प्रति भी किसी तरह की कटुता न रखने की बात कही। अपने समय के शीर्ष लेखकों, चिन्तकों और कलाकारों पर गांधी के विचारों का गहरा असर रहा। वे लोगों से निरन्तर संवादरत रहे और अपने विचारों को मजबूती से रखते रहे। हमें उम्मीद है कि उनके कला, साहित्य और संस्कृति सम्बन्धी लेखन को पढ़ते हुए इस कठिन समकाल से जूझने की अनेक राहें रोशन होंगी।
Hindi Sufi Kavya Ka Samgra Anushilan
- Author Name:
Shivsahay Pathak
- Book Type:

- Description:
चौदहवीं शताब्दी ईसवी से लेकर 20वीं शताब्दी ईसवी तक के छह सौ वर्षों की सुदीर्घ अवधि में शताधिक सूफी काव्यों से हिन्दी-साहित्य समृद्ध हुआ है। साहित्य और संस्कृति की अनेकानेक धाराएँ हिन्दी सूफी काव्य में अनुस्यूत हैं। अनेक परम्पराओं, धर्म, दर्शनों, साधनाओं आदि ने सूफी काव्य को अनुप्राणित किया है। हिन्दी सूफी काव्य का अध्ययन स्वयं में अत्यन्त मनोरंजक और महत्त्वपूर्ण विषय है। सूफी संतों ने धर्म और मजहब से ऊपर मनुष्यत्व का परिचय दिया है। इनके काव्यों में प्रेम-पीर की स्निग्ध पुकार है, विरह की प्रशान्त-गम्भीर तड़प है, आत्मसमर्पण का परम पुनीत आग्रह है। इसीलिए ये काव्य हमारे हृदयों को सहज ही छूकर झंकृत कर देते हैं। इन संतों का उद्देश्य संकीर्णताओं से ऊपर उठकर आत्मशुद्धि और जनजीवन में प्रेम-सन्देश का सम्प्रसार था। इसी उद्देश्य का सुफल सूफी काव्य है। सूफीमतवाद की विशेषता रही है कि वह कभी जीवन की उपेक्षा करके नहीं चला। सूफी कवि सही अर्थों में जनकवि थे। उत्तरी हिन्दी के सूफी कवियों ने ठेठ अवधी– जनता की बोली को काव्य की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया है। पन्द्रहवीं शताब्दी ईसवी से बीसवीं शताब्दी ईसवी तक की जीवन्त अवधी भाषा इनके काव्य का आधार- शृंगार है। इस पुस्तक में एक नवीन दृष्टि से हिन्दी सूफी काव्यों पर विचार किया गया है। फारसी में लिखे गए प्रमुख सूफी काव्यों और अंग्रेजी-फारसी-उर्दू में लिखे गए इस विषय के प्रामाणिक ग्रन्थों के अध्ययन के अनन्तर ही लेखक ने इस शोध-कार्य को सम्पन्न किया। काव्य-परम्परा, प्रबन्ध-योजना, प्रतीक पद्धति, उपमान, कथानक-रूढ़ि, अध्यात्म और दर्शन आदि के फारसी, अरबी और भारतीय मूल प्रेरणास्रोतों का सन्धान करके और उन्हें दृष्टिपथ में रख करके किए गए इस अध्ययन (और निकाले गए निष्कर्षों) से हिन्दी सूफी काव्य-विषयक अनेक भ्रान्त धारणाओं का निराकरण भी लेखक ने किया है।
Sahitya Siddhant
- Author Name:
Rene Wellek +2
- Book Type:

- Description:
प्रसिद्ध अमेरिकी आलोचकों ‘रेने वेलेक और आस्टिन वारेन’ की यह कृति अपने विषयगत वैज्ञानिक विवेचन एवं शैलीगत सहजता के कारण अभूतपूर्व लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी है। विद्वान् लेखकों ने एक ओर तो काव्यशास्त्र और अलंकारशास्त्र (जिसकी परम्परा अरस्तू से शुरू होकर ब्लेयर, कैम्पबेल और केम्स तक आई हुई है) के विभिन्न पक्षों का सम्यक् विवेचन प्रस्तुत किया है और दूसरी ओर ललित साहित्य की विधाओं और शैलीशास्त्र तथा साहित्यालोचन के प्रमुख सिद्धान्तों से भी पाठकों को परिचित कराया है। इसके साथ ही अनुसन्धान, साहित्य का इतिहास, साहित्य का मूल्यांकन, कॉलेजों में साहित्य का अध्ययन जैसी ज्वलन्त समस्याओं का समाधान भी सुझाने का सफल प्रयास किया है। प्रस्तुत पुस्तक में ‘काव्यशास्त्र’ (या साहित्य-सिद्धान्त) और ‘आलोचना (साहित्य का मूल्यांकन) को पांडित्य (अनुसन्धान) और साहित्यिक इतिहास (सिद्धान्त और आलोचना के रूढ़पथ के विपरीत, साहित्य के गतिशील पक्ष) से भी जोड़ना चाहा है। शब्दावली, टोन और बल में निःसन्देह दोनों लेखकों में थोड़ी-बहुत असंगतियाँ रह गई हैं। परन्तु वे यह भी सोचते हैं कि इस कमी की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि दो व्यक्ति मूलत: एक ही निष्कर्ष पर पहुँचे हैं।
Sher Behtar Kaise Hua?
- Author Name:
Akash Arsh
- Book Type:

- Description:
"Sher Behtar Kaise Hua" is a documentation of the classical tradition in Urdu poetry, in which masters would guide their disciples by correcting flaws in their verses. Through this gradual process, the students were introduced to the finer nuances—both strengths and weaknesses—of poetic craft. This book is a compilation of such corrections (islaah) offered by great poets like Mir, Ghalib, Nasikh, and Daagh on the verses of their disciples. Through these curated islaahs and their interpretations, the book teaches readers how to recognise and refine errors in Urdu poetry. It serves as an essential reference for students, lovers, and aspiring poets of Urdu literature. Aakash ‘Arsh’ (Aakash Tiwari) was born on May 2, 2001, in Sultanpur, Uttar Pradesh. He received his early education in Jagraon, Punjab. He holds a deep interest in the literature of four languages—Urdu, Hindi, English, and Punjabi. Alongside writing poetry in Urdu and Punjabi, he is also actively engaged in translation and editorial work. Currently, he serves as an editor at the Rekhta Foundation.
Urdu Shabdon Ka Guldasta
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
उर्दू अपनी खूबसूरती, नफ़ासत और बेहतरीन शब्द-भंडार के लिए जानी जाती है। "उर्दू शब्दों का गुलदस्ता" रेख़्ता फ़ाउंडेशन की एक अनोखी पहल है, जो आपको मज़ेदार और आसान तरीके से उर्दू शब्द सीखने में मदद करती है। पारंपरिक शब्दकोश के बजाय, यह किताब कहानियों के ज़रिए उर्दू शब्द पेश करती है, जिससे शब्द सीखना और भी मज़ेदार हो जाता है। शब्दों को संदर्भ के अनुसार बांटा गया है ताकि सीखने वाले एक ही मूल शब्द से जुड़े दूसरे शब्द भी सीख सकें। हर अध्याय के आखिर में जल्दी दोहराने के लिए अभ्यास दिए गए हैं। यह किताब उर्दू शायरी में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले शब्दों और बातचीत के बुनियादी हुनर में महारत हासिल करने के लिए एक बेहतरीन गाइड है। कृपया इस किताब के बारे में अपनी राय और सुझाव दें। 'वर्ड पावर मेड ईज़ी' की तर्ज़ पर बनी यह किताब आपको तेज़ी से अपना उर्दू शब्द-भंडार बढ़ाने और बेहतर बनाने में मदद करती है। इसमें कई तरह के विषय शामिल हैं, जैसे अभिवादन, प्यार, ज्ञान, रिश्ते, लोग, घर की चीज़ें, कपड़े, स्वाद, रंग, शरीर के अंग, बाज़ार, यात्रा, पेशे, शायरी, मयख़ाने, बाग़-बगीचे और प्रकृति। अध्यायों के दौरान, आप आम गलतियों, सही उच्चारण और वर्तनी के बारे में जानेंगे, और शब्दों के मूल रूप, उनके अलग-अलग रूप और बहुवचन बनाने के नियम समझेंगे। साथ ही, आप अलग-अलग मौकों पर अभिवादन करने, मेहमाननवाज़ी करने और आभार व्यक्त करने के तरीके भी सीखेंगे। आसान व्याख्या, बुनियादी व्याकरण और अध्याय-वार अभ्यास के साथ, यह किताब उर्दू बोलने में आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है। आखिर में, यह किताब आपको उर्दू भाषा और तहज़ीब की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेगी।
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
उर्दू कई तहज़ीबों और भाषाओं के मेल से बनी है और शायरी की रिवायत (काव्य-परम्परा) में फ़ारसी, अरबी, संस्कृत और तुर्की के रंग शामिल हैं। ये किताब एक शब्दकोश न हो कर उर्दू शायरी में आने वाले विभिन्न विषयों पर ख़ूबसूरत शेरों के संकलन पर आधारित है। शायरी की दुनिया की सैर कराते हुए ये किताब आपको नए-नए शब्दों और उनके उपयोग की बारीकियों के बारे में बताती है और शायरी में इस्तेमाल होने वाले अहम लफ़्ज़ों, तरकीबों और तल्मीहात के मानी और उनके विभिन्न सन्दर्भों को विस्तार से समझाया गया है। ये किताब शायराना लफ़्ज़ों के कलात्मक इस्तेमाल और उनके गहरे अर्थों को समझने में मददगार होगी, और उर्दू शायरी के अथाह ख़ज़ाने का भरपूर लुत्फ़ उठाने का मौक़ा देगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book