🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Aadminama

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

‘आदमीनामा’ इमरजेंसी के बाद प्रकाशित काशीनाथ सिंह का एक बहुचर्चित संग्रह है। इसमें समाज, राजनीति, भूख, बेरोज़गारी, स्वार्थ, भ्रष्टाचार, अर्थ का अवमूल्यन, क्रान्तिकारिता के नाम पर छल, आपातकाल का तांडव, प्रतिबद्धता, प्रतिरोध आदि का जो जीवन्त यथार्थ है, वह अपने समय का बड़ा बयान है जिससे लोकतांत्रिक परिप्रेक्ष्य में बहुत कुछ समझा और सीखा जा सकता है। देखा जा सकता है कि इस संग्रह में अपनी क़‍िस्सागोई के लिए काशीनाथ सिंह के पास जो दृष्टि और भाषा की धार है, वह किस तरह ज़मीनी और सरोकारपूर्ण है। और इस बात का सशक्त उदाहरण हैं ये कहानियाँ—‘सूचना’, ‘निधन’, ‘‘माननिय’ होम मनिस्टर के नाम’, ‘आदमी का आदमी’, ‘मीसाजातकम्’, ‘लाल किले के बाज’, ‘मुसइ चा’, ‘सुधीर घोषाल’ आदि। इस संग्रह का एक बड़ा आकर्षण है ‘कहानी की वर्णमाला और मैं’। इसमें काशीनाथ सिंह ने अपने रचना-विकास को जिस ईमानदारी और आत्मीयता के साथ व्यक्त किया है, वह अनुकरणीय तो है ही, एक मिसाल भी कि जीवन और क़लम के बीच न फ़र्क़ ठीक, न फाँक। कोई दो राय नहीं कि अपने आस्वाद में ही नहीं, नई साज-सज्जा में भी ‘आदमीनामा’ संग्रह पाठकों के लिए एक बार पुन: उपलब्धि साबित होगा!

Read more

₹ 199

₹ 159.2 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Aadminama This book ₹159
Log Bistron Per Kashinath Singh ₹199
Mahuacharit Kashinath Singh ₹250
3 books selected ₹648 ₹608

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

‘आदमीनामा’ इमरजेंसी के बाद प्रकाशित काशीनाथ सिंह का एक बहुचर्चित संग्रह है। इसमें समाज, राजनीति, भूख, बेरोज़गारी, स्वार्थ, भ्रष्टाचार, अर्थ का अवमूल्यन, क्रान्तिकारिता के नाम पर छल, आपातकाल का तांडव, प्रतिबद्धता, प्रतिरोध आदि का जो जीवन्त यथार्थ है, वह अपने समय का बड़ा बयान है जिससे लोकतांत्रिक परिप्रेक्ष्य में बहुत कुछ समझा और सीखा जा सकता है। देखा जा सकता है कि इस संग्रह में अपनी क़‍िस्सागोई के लिए काशीनाथ सिंह के पास जो दृष्टि और भाषा की धार है, वह किस तरह ज़मीनी और सरोकारपूर्ण है। और इस बात का सशक्त उदाहरण हैं ये कहानियाँ—‘सूचना’, ‘निधन’, ‘‘माननिय’ होम मनिस्टर के नाम’, ‘आदमी का आदमी’, ‘मीसाजातकम्’, ‘लाल किले के बाज’, ‘मुसइ चा’, ‘सुधीर घोषाल’ आदि।
इस संग्रह का एक बड़ा आकर्षण है ‘कहानी की वर्णमाला और मैं’। इसमें काशीनाथ सिंह ने अपने रचना-विकास को जिस ईमानदारी और आत्मीयता के साथ व्यक्त किया है, वह अनुकरणीय तो है ही, एक मिसाल भी कि जीवन और क़लम के बीच न फ़र्क़ ठीक, न फाँक।
कोई दो राय नहीं कि अपने आस्वाद में ही नहीं, नई साज-सज्जा में भी ‘आदमीनामा’ संग्रह पाठकों के लिए एक बार पुन: उपलब्धि साबित होगा!

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2019
Weight
152 grams
ISBN-13
9789388933919
Pages
142
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp