Paramveer Albert Ekka 1971 Ke Nayak
(0)
Author:
Sanjay KrishnaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
400
₹ 320 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
सन 1971 के मार्च महीने से लेकर दिसंबर तक के नौ महीनों के मुक्तियुद्ध का परिणाम है बांग्लादेश। मार्च के महीने में ही स्थितियाँ बिगडऩी शुरू हो गई थीं। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच कड़वाहट और तेज हो गई थी। यह कहानी उसी अल्बर्ट एक्का की है, जिस अल्बर्ट ने 1962 के चीन के साथ युद्ध में भाग लिया और 1971 के युद्ध में भी, लेकिन 1971 के युद्ध में वे शहीद हो गए। 44 साल बाद उनकी मिट्टी उनके गाँव आई और 46 साल बाद उनकी कथा लिपिबद्ध की जा रही है। इस दीर्घावधि सालों में शंख और महानंदा में न जाने कितना पानी बह गया। परमवीर के संगी-साथी उनके बचपन की यादें-बातें बताने को रहे नहीं। गाँव वैसा ही है, जैसा वे छोड़ गए थे। परमवीर का परिवार संघर्ष करते हुए आगे बढ़ता रहा। प्रस्तुत पुस्तक में डॉ. शिवप्रसाद सिंह का एक लेख, डॉ. धर्मवीर भारती का चर्चित यात्रा-वृत्तांत और एक रिपोर्ट भी है। इनके साथ ही विष्णुकांत शास्त्रीजी का एक रिपोर्ताज भी यहाँ दिया जा रहा है। इन रचनाओं से गुजरते हुए पाठक उस समय के कराह, द्वंद्व, संघर्ष और नरसंहार को भीतर तक महसूस कर सकेंगे। एक ही धर्म के माननेवाले कैसे एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे। दुनिया में यह अकेला युद्ध था, जिसकी पृष्ठभूमि में धर्म नहीं, भाषा थी। धर्म के आधार पर बँटा यह देश भाषा के कारण अलग हो गया। 1971 के युद्ध के हीरो, बांग्लादेश बनाने में सहायक रहे जाँबाज परमवीर अल्बर्ट एक्का की रोमांचक और प्रेरक कहानी।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
सन 1971 के मार्च महीने से लेकर दिसंबर तक के नौ महीनों के मुक्तियुद्ध का परिणाम है बांग्लादेश। मार्च के महीने में ही स्थितियाँ बिगडऩी शुरू हो गई थीं। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच कड़वाहट और तेज हो गई थी।
यह कहानी उसी अल्बर्ट एक्का की है, जिस अल्बर्ट ने 1962 के चीन के साथ युद्ध में भाग लिया और 1971 के युद्ध में भी, लेकिन 1971 के युद्ध में वे शहीद हो गए। 44 साल बाद उनकी मिट्टी उनके गाँव आई और 46 साल बाद उनकी कथा लिपिबद्ध की जा रही है। इस दीर्घावधि सालों में शंख और महानंदा में न जाने कितना पानी बह गया। परमवीर के संगी-साथी उनके बचपन की यादें-बातें बताने को रहे नहीं। गाँव वैसा ही है, जैसा वे छोड़ गए थे। परमवीर का परिवार संघर्ष करते हुए आगे बढ़ता रहा।
प्रस्तुत पुस्तक में डॉ. शिवप्रसाद सिंह का एक लेख, डॉ. धर्मवीर भारती का चर्चित यात्रा-वृत्तांत और एक रिपोर्ट भी है। इनके साथ ही विष्णुकांत शास्त्रीजी का एक रिपोर्ताज भी यहाँ दिया जा रहा है। इन रचनाओं से गुजरते हुए पाठक उस समय के कराह, द्वंद्व, संघर्ष और नरसंहार को भीतर तक महसूस कर सकेंगे। एक ही धर्म के माननेवाले कैसे एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए थे। दुनिया में यह अकेला युद्ध था, जिसकी पृष्ठभूमि में धर्म नहीं, भाषा थी।
धर्म के आधार पर बँटा यह देश भाषा के कारण अलग हो गया। 1971 के युद्ध के हीरो, बांग्लादेश बनाने में सहायक रहे जाँबाज परमवीर अल्बर्ट एक्का की रोमांचक और प्रेरक कहानी।
Book Details
-
ISBN9788196159016
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Jharkhand Ke Mele
- Author Name:
Sanjay Krishna
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Mahaveer
- Author Name:
Sanjay Krishna
- Book Type:

- Description:
देश की आजादी में पत्र-पत्रिकाओं ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उस समय के आंदोलनों के दस्तावेजीकरण का काम इन पत्र-पत्रिकाओं ने बखूबी किया। जाने-अनजाने एक तरह से ये पत्रिकाएँ ‘इतिहास’ लेखन कर रही थीं। इन्हीं पत्रिकाओं में एक है बिहार से प्रकाशित साप्ताहिक—‘महावीर’। इस पत्रिका के बारे में जो जानकारी मिलती है, वह पर्याप्त नहीं, आधी-अधूरी है। लेकिन इस एक अंक में जो जानकारी मिलती है, वह दुर्लभ है। इस पत्रिका के बारे में पत्रकारिता के इतिहास की पुस्तकें भी सर्वथा मौन हैं। लघु पत्रिकाओं के साथ यह दिक्कत तब भी थी, आज भी है। साधनों का अभाव और समय पर लेखकों का पर्याप्त और अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाने के बावजूद जो अंक निकला, वह कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। दुर्भाग्य से ‘महावीर’ का यह ‘सत्याग्रह’ विशेषांक ही उपलब्ध है। बिहार और झारखंड में स्वाधीनता आंदोलन का प्रामाणिक दस्तावेज है यह संकलन।
Jharkhand ke 50 krantikari | Coloring Book in Hindi
- Author Name:
Sanjay Krishna
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
AAO SEEKHEN GINTI KARNA
- Author Name:
Sanjay Krishna
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Aamir Khan A Social Spark
- Author Name:
Kirti Sisodia
- Book Type:

- Description:
Aamir Khan is a multifaceted individual—an actor, filmmaker, social activist, and fundamentally, a good human. While he has achieved fame, glamour, and success, he also feels a moral obligation to give back to society. His films, including Jo Jeeta Vo Sikandar, Lagaan, 3 Idiots, Tare Zameen Par, Rang De Basanti, PK, and Dangal, along with the widely known TV series Satyamev Jayate, address sensitive issues often overlooked or unexplored by mainstream cinema. Through Satyamev Jayate, he brought awareness to social problems already present in our homes and society, helping viewers understand the realities faced by many. His journey reflects growth through struggles and experiences, shaping him into both a successful actor and a socially conscious individual. His films raise awareness and influence society, highlighting his commitment to mindful storytelling. This book is not about Aamir as a person but about his mindset—the drive to serve society and take bold, sometimes risky, steps as an artist.
Boskiyana
- Author Name:
Gulzar +1
- Book Type:

- Description:
गुलज़ार से बातें...'माचिस' के, 'हू-तू' के, 'ख़ुशबू', 'मीरा' और 'आँधी' के बहुरंगी लेकिन सादा गुलज़ार से बातें...फ़िल्मों में अहसास को एक किरदार की तरह उतारनेवाले और गीतों-नज़्मों में ज़िंदगी के जटिल सीधेपन को अपनी विलक्षण उपमाओं और बिम्बों में खोलनेवाले गुलज़ार से उनकी फ़िल्मों, उनकी शायरी, उनकी कहानियों और उस मुअम्मे के बारे में बातें जिसे गुलज़ार कहा जाता है। उनके रहन-सहन, उनके घर, उनकी पसंद-नापसंद और वे इस दुनिया को कैसे देखते हैं और कैसे देखना चाहते हैं, इस पर बातें... यह बातों का एक लम्बा सिलसिला है जो एक मुलायम आबोहवा में हमें समूचे गुलज़ार से रू-ब-रू कराता है। यशवंत व्यास गुलज़ार-तत्त्व के अन्वेषी रहे हैं। वे उस लय को पकड़ पाते हैं जिसमें गुलज़ार रहते और रचते हैं। इस लम्बी बातचीत से आप उनके ही शब्दों में कहें तो 'गुलज़ार से नहाकर' निकलते हैं।
Aamne-Saamne
- Author Name:
Namvar Singh +2
- Book Type:

- Description:
नामवर सिंह अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनका बोला-बताया अब भी ऐसा बहुत कुछ है जो सामने आना बाकी है। लम्बे समय तक उन्होंने व्यवस्थित ढंग से कुछ नहीं लिखा था; व्याख्यानों और वक्तव्यों के रूप में ही उन्होंने आलोचना के नए-नए पैमाने तोड़े और बनाए। युवाओं, वरिष्ठों, छात्रों-पत्रकारों और समकालीन रचनाकारों को दिए साक्षात्कारों में भी उन्होंने सदैव एक उत्तरदायी आलेचकीय चेतना को अभिव्यक्ति दी। उनकी आश्चर्यजनक स्मृति, वैचारिक स्पष्टता और आस्वादपरक समीक्षा के चलते व्याख्यानों की तरह उनके साक्षात्कार भी सदैव चर्चित रहे। इस पुस्तक में उनके ऐसे साक्षात्कारों को संकलित किया गया है जो अब तक किसी और पुस्तक में नहीं आए थे। कई वरिष्ठ और कनिष्ठ रचनाकारों और सम्पादकों के साथ हुए ये वार्तालाप उनकी आलोचना-दृष्टि, समकालीन रचनात्मकता पर उनके विचारों और सरोकारों को रेखांकित करते हैं। इनमें से कुछ साक्षात्कार इसलिए और भी दिलचस्प है कि इनमें उन्होंने किसी एक ही रचनाकार या कृति पर केन्द्रित प्रश्नों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। मसलन स्वयं प्रकाश, त्रिलोचन, काशीनाथ सिंह का ‘काशी का अस्सी’ आदि पर केन्द्रित बातचीत। साक्षात्कारकर्ताओं में भी अलग-अलग पीढ़ियों के लोग हैं; जिन्होंने अपने-अपने ढंग से उनसे अपनी जिज्ञासाओं पर विचार-विनिमय किया है।
Mera Pariwar
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description:
‘मेरा परिवार’ पुस्तक में महादेवी वर्मा जी ने कुछ विशिष्ट मानवेतर प्राणियों के प्रति अपनी जिस सहज, सौहाद्र और एकांत आत्मीयता की अभिव्यंजना का जो अपूर्व कला-कौशल अपने इन चित्रों में व्यक्त किया है, वह केवल उनकी अपनी ही कला की विशिष्टता की दृष्टि से नहीं वरन् संसार-साहित्य की इस कोटि की कला के समग्र क्षेत्र में भी बेमिसाल और बेजोड़ हैं। ये कृतियाँ मानवीय भावज्ञता, संवेदना और कलात्मक प्रतिभा के अपूर्व निदर्शन की दृष्टि से शाब्दिक अर्थ में अपूर्व ओर अद्भुत कलात्मक चमत्कार के नमूने हैं।
Chaitanya Mahaprabhu
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

- Description:
चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव वैष्णव धर्म के विकास में एक चमत्कारी घटना है। एक गहरे आवेश और भावनात्मकता के साथ सारे जनसामान्य तक वैष्णव धर्म को पहुँचाने का काम पहले बंगाल में और बाद में सम्पूर्ण देश में, चैतन्य महाप्रभु ने किया। मधुर भाव की नाम–संकीर्तन पद्धति चैतन्य की देन है। इसी के साथ वैष्णव धर्म ने एक नए युग में प्रवेश किया। प्रस्तुत पुस्तक में पहली बार चैतन्य के व्यक्तित्व के इस योगदान को सम्पूर्णता के साथ उजागर किया गया है। लेकिन इस पुस्तक का उद्देश्य मात्र इतना ही नहीं है। विद्वान लेखक ने चैतन्य के व्यक्तित्व को तत्कालीन राजनैतिक परिस्थितियों में भी रखकर देखा है। अपने समय के इतिहास में चैतन्य का व्यक्तित्व एक चुनौती की तरह उभरा और पराजित हिन्दू जाति को एक नई आस्था और नए आलोक से संयुक्त करने का काम भी चैतन्य ने किया। उपन्यासकार नागर जी की लेखनी से प्रस्तुत चैतन्य की यह जीवनी पढ़ने पर एक उपन्यास का मज़ा तो देती है, साथ ही वैष्णव धर्म के उदार पथ के विकास में उनका महत्त्वपूर्ण और अद्वितीय योगदान भी सामने लाती है।
Joothan-2
- Author Name:
Omprakash Valmiki
- Book Type:

- Description:
जूठन’ ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा है। इसका पहला भाग बरसों पहले प्रकाशित होकर, आज हिन्दी दलित साहित्य और खासकर आत्मकथाओं की शृंखला में एक विशेष स्थान प्राप्त कर चुका है। वाल्मीकि जी अब हमारे बीच नहीं हैं, अपने जीवन-काल में उन्होंने 'जूठन’ के बाद साहित्य, समाज और संवेदना के दायरों में एक लम्बी यात्रा पूरी की। कई कथात्मक और आलोचनात्मक कृतियों के साथ उनके काव्य-संग्रह भी आए। 'जूठन’ का यह दूसरा भाग उनके उसी दौर का आख्यान है। आत्मकथा के इस दूसरे भाग की शुरुआत उन्होंने देहरादून की आर्डिनेंस फैक्ट्री में अपनी नियुक्ति से की है। नई जगह पर अपनी पहचान को लेकर आई समस्याओं के साथ-साथ यहाँ मजदूरों के साथ जुड़ी अपनी गतिविधियों का जिक्र करते हुए उन्होंने अपनी साहित्यिक सक्रियता का भी विस्तार से उल्लेख किया है। सहज, प्रवाहपूर्ण और आत्मीय भाषा में लिखी गई यह पुस्तक देहरादून से जबलपुर और वहाँ से पुन: देहरादून की यात्रा करती हुई शिमला उच्च अध्ययन संस्थान और फिर उनके अस्वस्थ होने तक जाती है। दलित साहित्य के वर्तमान परिदृश्य में 'जूठन’ के इस दूसरे भाग को पढ़ना एक अलग अनुभव है।
Khamosh Logon Ki Or Se By Dalai Lama
- Author Name:
Dalai Lama
- Book Type:

- Description:
परम पूज्य दलाई लामा – खामोश लोगों की ओर से यह पुस्तक परम पूज्य दलाई लामा की आत्मकथात्मक कृति Voice for the Voiceless का हिंदी अनुवाद है। इसमें उन्होंने तिब्बत और तिब्बती लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए चीन के विरुद्ध अपने सात दशकों के शांतिपूर्ण संघर्ष को आत्मीयता से वर्णित किया है। पुस्तक में उन प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं जो चीन द्वारा तिब्बत और तिब्बतीयों को लेकर खड़े किए जाते हैं- और जो पाठकों के मन में भी स्वाभाविक रूप से उठते हैं। इसके साथ ही, अगली दलाई लामा की घोषणा और उससे जुड़ी जटिलताओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई है, जो वर्तमान में चीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गंभीर बहस का विषय बना हुआ है। इसकी भाषा और शैली प पू दलाई लामा के व्यक्तित्व की तरह ही सहज और सरल है।
Shri Rambhakt : Shaktipunj Hanuman
- Author Name:
Jairam Mishra +1
- Book Type:

- Description:
‘मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम’ ने कहा है—लोक पर जब कोई विपत्ति आती है तब वह त्राण पाने के लिए मेरी अभ्यर्थना करता है परन्तु जब मुझ पर कोई संकट आता है तब मैं उसके निवारणार्थ पवनपुत्र का स्मरण करता हूँ। अवतार श्रीराम का यह कथन हनुमानजी के महान व्यक्तित्व का बहुत सुन्दर प्रकाशन कर देता है। श्रीराम का कितना अनुग्रह है उन पर कि वे अपने लौकिक जीवन के संकटमोचन के श्रेय का सौभाग्य सदैव उन्हीं को प्रदान करते हैं और कैसे शक्तिपुंज हैं हनुमान कि जो श्रीराम तक के कष्ट का तत्काल निवारण कर सकते हैं। भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अपूर्व, अद्भुत, अप्रतिम, एकान्त भक्ति के कारण अन्य की इसी प्रकार की भक्ति का आलम्बन बन जानेवाला हनुमान जैसा कोई अन्य उदाहरण विश्व में नहीं। यही कारण है कि संस्कृत से लेकर समस्त मध्यकालीन और आधुनिक भारतीय भाषाओं में श्री हनुमान में परम पावन चरित्र का गान किया गया है और उनके मन्दिर भारतवर्ष के प्रत्येक कोने में पाए जाते हैं। इस पुस्तक की रचना में ‘वाल्मीकीय रामायण’, ‘अध्यात्म रामायण’ तथा ‘आनन्द रामायण’ से विशेष सहायता ली गई है। ‘स्कंदपुराण’, ‘पद्मपुराण’ आदि एवं ‘महाभारत’ (वनपर्व) भी रचना में सहायक सिद्ध हुए हैं। गोस्वामी तुलसीदास की कृतियों—‘रामचरितमानस’, ‘विनयपत्रिका’, ‘गीतावली’, ‘कवितावली’ एवं ‘कम्बन’ रचित ‘कम्ब रामायण’ (तमिल रचना) से भी यत्र-तत्र सहायता ग्रहण की गई है। इनके अतिरिक्त श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ रचित ‘आंजनेय' कल्याण पत्रिका के ‘हनुमानांक’ (1975 ई.) तथा डॉ. गोविन्दचन्द्र राय की पुस्तक ‘हनुमान के देवत्व और मूर्ति का विकास’ आदि से भी यथावसर सामग्री प्राप्त की गई है।
Tumhare Naam : Jan Nisar Akhtar ko Safia Akhtar ke khat
- Author Name:
Safia Akhtar
- Book Type:

- Description:
जाँ निसार अख़्तर और उनकी शरीके-हयात सफ़िया अख़्तर को साथ रहने का मौक़ा बहुत कम मिला। उस ज़माने में जब औरतों के लिए घर से बाहर जाकर काम करना बहुत आम बात नहीं थी, वे स्कूल में अपनी नौकरी करती रहीं और न सिर्फ़ अपनी और अपने बच्चों, बल्कि मुम्बई की फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी ज़मीन तलाश रहे जाँ निसार साहब के लिए भी सम्बल जुटाती रहीं। ये ख़त उन्होंने इसी संघर्ष के दौरान लिखे, लेकिन ये ख़त सिर्फ़ उनके हाल-अहवाल की सूचना-भर नहीं देते, बल्कि वे एक बड़े सृजक की क़लम से उतरे शाहकार की तरह हमारे सामने आते हैं। ज़िन्दगी उन्हें कुछ और वक़्त देती तो निश्चय ही वे साहित्य की दुनिया को कुछ बड़ा देकर जातीं। इन ख़तों में उनकी मुहब्बत और हिम्मत के साथ-साथ उनकी और बेशक जाँ निसार अख़्तर की ज़िन्दगी खुलती जाती है, साथ ही उनका अपना दौर भी अपने तमाम स्याह-सफ़ेद के साथ रौशन होता जाता है। ये ख़त प्यार और हौसले से भरे एक दिल की अक़्क़ासी करते हैं। ये जादू की तरह असर करते हैं; इनका बेहद ताक़तवर और सधा हुआ ‘प्रोज़’ कहीं आपको रुकने नहीं देता, और इनकी तुर्श मिठास में डूबे-डूबे बारहा आपकी आँखें भर आती हैं। उनके निधन के बाद जाँ निसार साहब ने उनके इन ख़तों को दो जिल्दों में प्रकाशित कराया—’हर्फ़े-आश्ना’ और ‘ज़ेरे-लब’। इस किताब में इन दोनों जिल्दों में संकलित ख़तों को दे दिया गया है।
Tumhare Naam : Jan Nisar Akhtar ko Safia Akhtar ke khat
Safia Akhtar
20% off₹ 199
₹ 159.2
Available
Yugon Ka Yatri : Nagarjun Ki Jeewani
- Author Name:
Taranand Viyogi
- Book Type:

- Description:
मिथिला के बन्द समाज से बाहर निकलकर नागार्जुन ने अपनी तमाम रचनाओं और सहज सुलभ व्यक्तित्व से एक ऐसा जागरण किया जिसकी आज पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है। वे सच्चे अर्थों में क्लैसिकल मॉडर्न थे। तारानन्द वियोगी की यह जीवनी पाठक को नागार्जुन के अन्त:करण में प्रवेश कराने में सक्षम है। उनके घने साहचर्य में जो रहे हैं, वे इसे पढ़कर बाबा की उपस्थिति फिर से अपने भीतर महसूस करेंगे। अपनी सशक्त लेखनी से तारानन्द ने बाबा नागार्जुन को पुनर्जीवित कर दिया है। यहाँ तथ्य और सत्य का सन्तुलित समन्वय है। बाबा से जुड़े शताधिक जनों के अनुभव उन्होंने बड़ी सहृदयता से अन्तर्ग्रथित किए हैं। बाबा नागार्जुन को संसार से विदा हुए बीस वर्ष से ज़्यादा हुए। इस बीच हिन्दी-मैथिली की जो तरुण पीढ़ी आई है, वह भी इस कृति से बाबा नागार्जुन का सम्पूर्ण साक्षात्कार कर सकेगी। बाबा के बारे में एक जगह लेखक ने लिखा है, 'स्मृति, दृष्टान्त और अनुभव का ज़खीरा था उनके पास।' तारानन्द की इस जीवनी में भी ये तीनों बातें आद्यन्त मौजूद हैं। बाबा के जीवन-सृजन पर यह बहुत रचनात्मक, ऐतिहासिक महत्त्व का कार्य सम्पन्न हो सका है। मैं इतना ही कहूँगा कि बाबा की ऐसी प्रामाणिक जीवनी मैं भी नहीं लिख पाता। ‘युगों का यात्री' हिन्दी की कुछ सुप्रसिद्ध जीवनियों की शृंखला की अद्यतन सशक्त कड़ी है। —वाचस्पति, वाराणसी (दशकों तक नागार्जुन के क़रीब रहे अध्येता समीक्षक)
Sutradhar
- Author Name:
Sanjeev
- Book Type:

- Description:
अपनी रचनात्मक ज़मीन और लेखकीय दायित्व की तलाश करते हुए एक ईमानदार लेखक प्रायः स्वयं को भी रचने की कोशिश करता है। अनुपस्थित रहकर भी वह उसमें उपस्थित रहता है; और सहज ही उस देश-काल को लाँघ जाता है जो उसे आकार देता रहा है। समकालीन कथाकारों में संजीव की मौजूदगी को कुछ इसी तरह देखा जाता है। आकस्मिक नहीं कि हिन्दी की यथार्थवादी कथा-परम्परा को उन्होंने लगातार आगे बढ़ाया है। ‘सूत्रधार’ संजीव का नया उपन्यास है, और उनकी शोधपरक कथा-यात्रा में नितान्त चुनौतीपूर्ण भी। केन्द्र में हैं भोजपुरी गीत-संगीत और लोकनाट्य के अनूठे सूत्रधार भिखारी ठाकुर। वही भिखारी ठाकुर, जिन्हें महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ कहा था और उनके अभिनन्दनकर्ताओं ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र। लेकिन भिखारी ठाकुर क्या सिर्फ़ यही थे? निश्चय ही नहीं, क्योंकि कोई भी एक बड़ा किसी दूसरे बड़े के समकक्ष नहीं हो सकता। और यों भी भिखारी का बड़प्पन उनके सहज सामान्य होने में निहित था, जिसे इस उपन्यास में संजीव ने उन्हीं के आत्मद्वन्द्व से गुज़रते हुए चित्रित किया है। दूसरे शब्दों में, यह एक ऐसी धूपछाँही कथा-यात्रा है, जिसे हम भिखारी जैसे लीजेंडरी लोक कलाकार और उनके संगी-साथियों के अन्तर्बाह्य संघर्ष को महसूस करते हुए करते हैं। काल्पनिक अतिरेक की यहाँ कोई गुंजाइश नहीं। न कोई ज़रूरत। ज़रूरत है तो तथ्यों के बावजूद रचनात्मकता को लगातार साधे रखने की, और संजीव को इसमें महारत हासिल है। यही कारण है कि ‘सूत्रधार’ की शक्ल में उतरे भिखारी ठाकुर भोजपुरी समाज में रचे-बसे लोकराग और लोकचेतना को व्यक्त ही नहीं करते, उद्दीप्त भी करते हैं। उनकी लोकरंजकता भी गहरे मूल्यबोध से सम्बलित है; और उसमें न सिर्फ़ उनकी, बल्कि हमारे समाज और इतिहास की बहुविध विडम्बनाएँ भी समाई हुई हैं। अपने तमाम तरह के शिखरारोहण के बावजूद भिखारी अगर अन्त तक भिखारी ही बने रहते हैं तो यह यथार्थ आज भी हमारे सामने एक बड़े सवाल की तरह मौजूद है। कहने की आवश्यकता नहीं कि देश, काल, पात्र की जीवित-जाग्रत् पृष्ठभूमि पर रचा गया यह जीवनीपरक उपन्यास आज के दलित-विमर्श को भी एक नई ज़मीन देता है। तथ्यों से बँधे रहकर भी संजीव ने एक बड़े कलाकार से उसी के अनुरूप रससिक्त और आत्मीय संवाद किया है। —रामकुमार कृषक
Jeete Jee Allahabad
- Author Name:
Mamta Kaliya +1
- Book Type:

- Description:
एक ऐसा शहर जहाँ बक़ौल ममता कालिया पैदल चलना किसी निरुपायता का पर्याय नहीं था। साहित्य की वह उर्वर भूमि जिसकी नमी किसी भी कलम को ऊर्जा से भर देती थी, जहाँ का सामाजिक ताना-बाना ही लेखकों-बुद्धिजीवियों से बना था। रचनात्मकता, प्रतिरोध और गंगा-जमुनी अपनेपन में रसा-पगा यह शहर, इलाहाबाद कभी देश की हिन्दी मनीषा को दिशा देता था। आन्दोलनों को जन्म देता था और राजधानियों से चले आन्दोलनों को उनकी औकात भी बताता था। ममता जी बताती हैं कि मुम्बई जैसे महानगर को छोड़कर यहाँ आते समय उन्हें बहुत अफसोस हो रहा था लेकिन इस छोटे शहर के बड़प्पन ने बाद में उन्हें हमेशा के लिए अपना कर लिया। इस किताब में उन्होंने उसी इलाहाबाद को साकार किया है। वह इलाहाबाद जहाँ 'विपन्नता का वैभव और गरीबी का गौरव' धन और सत्ता के दम्भ में झूमते महानगरों की आँखों में आँखें डाल कर देखा करता था। उपेन्द्रनाथ अश्क, शैलेश मटियानी, नरेश मेहता, भैरव प्रसाद गुप्त, मार्कण्डेय, शेखर जोशी, अमरकांत, ज्ञानरंजन, दूधनाथ सिंह, रवींद्र कालिया, उस समय के साहित्यिक इलाहाबाद की धुरी लोकभारती प्रकाशन और उसके कर्ता-धर्ता दिनेश जी, जलेस-प्रलेस और परिमल से जुड़े लेखक, गरज कि इतिहास का एक पूरा अध्याय अपने नायकों और उनकी खूबियों-खामियों के साथ यहाँ पूरी संवेदना और जीवन्तता के साथ अंकित है। साहित्य की आभासी राजधानियों के आत्मग्रस्त स्तूपों पर बैठे हम लोगों के लिए यह वृतान्त बहुत ईर्ष्याजनक भी है। दिल की तरह धड़कते हुए एक शहर में फैला हुआ हमारा यह सांवला सा कल सोशल मीडिया के असंख्य मंचों पर छितराए हमारे चमचमाते आज को बहुत कुछ सिखा सकता है। नए साहित्यिकों को इसे अवश्य ही पढ़ना चाहिए और जहाँ भी वे हैं, वहीं एक ऐसा इलाहाबाद बनाना चाहिए।
Bageshwar Dham Sarkar: Pt. Dheerendra Krishna Shastri Ki Adbhut Yatra
- Author Name:
Sachin Choudhary
- Book Type:

- Description:
“बागेश्वर धाम सरकार – पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अद्भुत यात्रा” सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है—एक युवा साधक से लेकर राष्ट्र की आस्था के केंद्र बन चुके पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तक की प्रेरणादायी गाथा। इस पुस्तक में लेखक सचिन चौधरी ने न सिर्फ बागेश्वर धाम सरकार से अपनी पहली मुलाकात, बल्कि पिछले चार वर्षों में उनके साथ हुए अनुभवों, संवादों और आत्मीय क्षणों को सच्चाई और श्रद्धा के साथ शब्दों में पिरोया है। किताब में वर्णित है कि कैसे एक सामान्य से गाँव गढ़ा से शुरू होकर, बाबा का तेज, ज्ञान और दिव्य दृष्टि लोगों के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन लेकर आए। यह पुस्तक इस बात की साक्षी है कि कैसे बुंदेलखंड की धरती से निकला एक युवा आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया है। बागेश्वर धाम सरकार की महिमा, श्रद्धालुओं की अडिग भक्ति, खजुराहो जैसे क्षेत्रों पर इसका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, और बाबा के अनदेखे पहलुओं को उजागर करती यह पुस्तक—हर उस व्यक्ति के लिए पठनीय है जो आस्था, अध्यात्म और आत्मबल की शक्ति को समझना चाहता है।
Main Barbad Hona Chahti Hoon
- Author Name:
Malika Amar Shaikh +1
- Book Type:

- Description:
मलिका अमर शेख उस समय मात्र उन्नीस बरस की थीं जब वे मराठी के युग-प्रवर्तक कवि नामदेव ढसाल के साथ विवाह-बन्धन में बँध गईं। लेकिन जल्द ही यह शादी टूट गई। दलित पैंथर्स के सह-संस्थापक नामदेव न तो एक पति के रूप में, न पिता के रूप में, और न ही एक पुरुष के रूप में वैसे निकले जैसी उम्मीद मलिका ने की थी। यह मुख्यतः उस विवाह की कहानी है, जिसमें हम उस स्त्री से मिलते हैं जो एक पुरुष-संसार में अपनी जगह ढूँढ़ने की कोशिश में है। लेकिन यह कहानी मराठी दलित आन्दोलन के अन्तर्विरोधों, मुम्बई शहर, उसके कवियों और एक्टिविस्टों की कहानी भी है। मूल रूप से मराठी में प्रकाशित यह आत्मकथा छपते ही एक सनसनी बन गई थी। व्यक्तिगत बनाम राजनीतिक, वाम विचारधारा बनाम दलित आन्दोलन और अपने पति के प्रति प्रेम और घृणा के बीच फँसी एक स्त्री की यह आत्मकथा कई मायनों में एक दस्तावेज़ की हैसियत रखती है।
Yogigatha, Yogi Adityanath Ki Jivangatha
- Author Name:
Shantanu Gupta
- Book Type:

- Description:
यह जीवनी आपको अपने चार खंडों में योगी आदित्यनाथ के जीवन के चार पहलुओं से होकर ले जाती है। पुस्तक का आरंभ योगी के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के वर्तमान रूप, 2017 की उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति, यू.पी. का सी.एम. चुने जाने के तथ्यों और पंचम तल (यू.पी. के सीएम का दफ्तर) से होता है। दूसरा खंड आपको योगी आदित्यनाथ के पाँच बार के सांसद के रूप में लंबे कार्यकाल, चुनावी जीत, संसद् में उनकी कुशल भागीदारी, उनके तथाकथित विवादित भाषणों की सच्चाई, लव-जिहाद की उनकी सोच के पीछे का तर्क, घर वापसी, हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के साथ उनके संबंध से परिचित कराता है। तीसरे खंड में लेखक अपने पाठकों को गोरखनाथ मठ के महंत अवेद्यनाथ, योगी आदित्यनाथ, उनकी कठोर यौगिक दिनचर्या, नाथ पंथ के गुरुओं और कई दशकों से मठ की सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता से होकर ले जाते हैं। आखिरी खंड में लेखक अपने पाठकों को उत्तराखंड के इलाके में पले अजय सिंह बिष्ट के बचपन से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प और उनके अपनों के मुँह से कही बातों के साथ छोड़ देते हैं, जो गायों, खेतों, पहाड़ों, नदियों के बीच पला-बढ़ा और आगे चलकर एक सांसद और मुख्यमंत्री बना।
Karpuri Thakur
- Author Name:
Dr. Ranjana Kumari +1
- Book Type:

- Description:
जननायक कर्पूरी ठाकुर की ख्याति मुख्यमंत्री के रूप में कम और 'विपक्ष के प्राण' के रूप में ज्यादा थी। समाजवादी धारा के अग्रणी नेता के रूप में कर्पूरीजी भारतीय राजनीति में प्रतिष्ठित रहे हैं। संसदीय मर्यादा और विधाओं के भरपूर पालन तथा संसदीय व्यवस्था में कर्पूरीजी की अटूट आस्था थी। बिहार विधानसभा तथा लोकसभा में उनकी भागीदारी अत्यन्त उच्चकोटि की रही है। इस पुस्तक में विभिन्न संसदीय विधाओं, राज्यपाल के अभिभाषण, प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, बजट, वाद-विवाद, लोक महत्त्व के विषयों, प्रस्तावों तथा अविश्वास प्रस्ताव आदि में नेता विपक्षी दल के रूप में कर्पूरीजी की भागीदारी का निरूपण किया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न संसदीय विधाओं के सैद्धान्तिक पक्ष का अनुशीलन करते हुए उन सिद्धान्तों की कसौटी पर कर्पूरीजी की भूमिका का परीक्षण किया गया है। कर्पूरीजी की सदन के अन्दर नेता विपक्षी दल के रूप में निभाई गई भूमिका का विस्तृत विवरण देनेवाली यह पुस्तक भारतीय राजनीति के कुछ महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं की सूचना भी देती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book