Jharkhand ke 50 krantikari | Coloring Book in Hindi
Author:
Sanjay KrishnaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789395386074
Pages: 104
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Khunte Se Bandha Aadmi
- Author Name:
SHEKHAR
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rajasthan REET Grade-III Adhyapak (Teacher) Level 2 Hindi Guide (Class 6 to 8)
- Author Name:
Kunwar Kanak Singh Rao
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ramdhari Singh Diwakar Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Ramdhari Singh Diwakar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Royal to Public Life
- Author Name:
Vijayaraje Scindia +1
- Book Type:

- Description: I felt that to remain in politics and keep fighting for the principles was my calling. So, I thought that working with the people of similar ideology might be more fruitful. I felt affinity with those parties which were neither corrupt nor power-drunk…. Ideologically, I found myself close to Jana Sangh and Swatantra Party. I was in a dilemma to choose between the two. So, I decided to contest the election on the ticket of both these parties. I became candidate of Jana Sangh from Karera constituency of Madhya Pradesh Assembly. Tihar is not a jail, it is hell on earth. And those people were pushed in this hell whose penance threatened to dethrone Indiraji. There were piles of filth at different places in Tihar jail. It would make the inside air polluted which was stifling. While eating one had to constantly drive away the flies with one’s hands. The ears would be abuzz with the sounds of insects. In the darkness the brooch would glow and crickets would speak. Life was difficult. But despite that we would have sound sleep. Ayodhya is not a city made of bricks and mortars. It is a symbol of India’s soul and national identity. That’s why when the Rath Yatra was taken out, Hindus and Muslims participated in it alike. This national integration caused heart burns to those vested interests that were in the habit of taking the advantage of social division.
SHRIGURUJI CHITRAWALI
- Author Name:
Deepankar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
VADYA-YANTRON KO JANEN
- Author Name:
Kamlesh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rukna Nahin Radhika "रुकना नहीं राधिका" Book In Hindi
- Author Name:
Ramesh Chandra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bargad Kaat Do
- Author Name:
Shri K.P.S. Verma
- Book Type:

- Description: This Book Doesn't have Description
Dakshayni
- Author Name:
Dr. Aruna Mukim
- Book Type:

- Description: In this novel | have tried to give a blend of mythology and the perineal values and emotions of the human beings. The characters here have been chosen from the pauranik literature and yet feelings and reactions they express are germane to what we find in all human beings. At the thematic level the central point of the novel presents the love between shiv and sati. It is related to the protection of the divinity and spirituality in the universe. It suggests the union between two forces — Shiv and Shakti. The essential elements in a cosmic planning. lf shiv is a great lover then Sati too is not wanting in longing for his love. However as it is sati’s father, great Prajapathi Daksh, the son of Brahma keeps an umbrage against shiv. He abhors shiv and Is openly against the matrimonial alliance between his daughter sati and shiv. From the very beginning sati knows that shiv is her eternal spouse. But Prajapathi Daksh is bent upon destroying this relationship. However by quirk of fate sati is married to shiv. Not withstanding all resistance, Daksh is compelled to give his daughter away to the person he dislikes most, Shiv. Deeply hurt Daksh is now looking for a chance to insult his son in law when he arranges a yagya and doesn't invite them. Sati burns her out there in yog Agni. | have presented this so repeated story from a different angle. The first person narration here has been used for the expansion of philosophy and thought that result in giving a contemporary canvas. | have visualised myself as Sati for exploring the in-depth feelings and emotions of a woman. The use of the montage technique has allowed me to pick up some stories from countless stories of shiv and sati and put them into an imaginative, an unputdownable literary piece.
Film Nirdeshan
- Author Name:
Kuldeep Sinha
- Book Type:

- Description: भारत विश्व के ऐसे देशों की श्रेणी में शुमार किया जाता है जहाँ सबसे अधिक फ़िल्मों का निर्माण होता है, लेकिन विडम्बना यह है कि फ़िल्म निर्देशन पर अब तक हिन्दी में कोई किताब नहीं थी। कुलदीप सिन्हा ने 'फ़िल्म निर्देशन' पुस्तक लिखकर यह कमी पूरी कर दी है, इसलिए उनकी यह पहल ऐतिहासिक है। श्री सिन्हा पुणे फ़िल्म इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षित फ़िल्मकार हैं। राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त अनेक फ़िल्मों के वे निर्माता-निर्देशक रहे हैं। इसलिए उनकी इस पुस्तक में निर्देशन के सैद्धान्तिक विवेचन के साथ ही उसके व्यावहारिक पक्ष को सूक्ष्मता और विस्तार से विवेचित किया गया है। पुस्तक 11 दृश्यों में विभक्त है। प्रत्येक दृश्य में निर्देशन के अलग-अलग मुद्दों तथा तकनीकी प्रसंगों को सहजता के साथ स्पष्ट किया गया है। श्री सिन्हा पहले बताते हैं कि फ़िल्म को फ़्लोर पर ले जाने के पूर्व क्या तैयारी करनी चाहिए! फ़िल्म की निर्माण-योजना में सन्तुलन के लिए क्या सावधानी बरतें! इसके बाद उन्होंने संक्षेप में पटकथा-लेखन के प्रमुख बिन्दुओं की भी चर्चा की है। लाइटिंग और कम्पोजीशन के सिलसिले में व्यावहारिक सुझाव दिए हैं। फ़िल्म सेंसरशिप की कार्यप्रणाली तथा उसके विषय पर प्रकाश डाला है। और अन्त में 'निर्देशक' कुलदीप सिन्हा ने अपनी पसन्द के कुछ हिन्दी फ़िल्म निर्देशकों जैसे—शान्ताराम, विमल राय, गुरुदत्त और राजकपूर आदि के ऐतिहासिक योगदान का महत्त्वपूर्ण विश्लेषण किया है। इसी प्रसंग में भारत में सिनेमा के इतिहास का संक्षिप्त रेखांकन भी हो गया है। आम लोग इस पुस्तक से यह आसानी से जान सकते हैं कि जो सिनेमा वे इतने चाव से देखते हैं, वह बनता कैसे है? और जो लोग फ़िल्म निर्माण के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, उनके लिए यह पुस्तक प्रवेशद्वार की तरह है। जो लोग फ़िल्म आलोचना से सम्बद्ध हैं, उनके सामने कुलदीप सिन्हा की यह पुस्तक अनेक अनुद्घाटित व्यावहारिक पक्षों को सामने लाती है। कुलदीप सिन्हा की इस बहुआयामी पुस्तक की उपयोगिता को देखते हुए मैं उन्हें इस नए दौर का 'सिनेमा गुरु' कहना चाहता हूँ। —सुरेश शर्मा, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फ़िल्म आलोचक।
Khaki In Action Hindi Translation of Crime, Grime And Gumption
- Author Name:
O.P. Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Wah Zindagi
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: ‘तुम यहाँ हो! मैं तो तुम्हें अंदर ढूँढ़ रही थी।’ इतने में कृतिका मुझे ढूँढ़ती बाहर चली आई। ‘यह क्या हाल बना रखा है तुमने अपना?’ और वह खिलखिलाकर हँस दी। तभी दोनों बच्चे भी स्कूल जाने के लिए बाहर आए और कृतिका को हँसते देख वे भी मुझे देख हँसने लगे। ‘मजा आ गया आज तो?’ ‘अरे पिताजी! रोज ऐसा किया करिए, छुट्टी के दिन हम भी आपके साथ भीगेंगे...।’ कहकर वे हाथ हिलाते हुए स्कूल निकल पड़े। कुहासा छँट रहा था। मैं अपने आपको बेहद हल्का महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था, जैसे मैं आकाश में उड़ रहा हूँ। जिंदगी बहुत खूबसूरत है, बस जरूरत है तो उसे इस नजरिए से देखने की। ‘वाह जिंदगी!।’ मैंने मन ही मन उस जिंदगी को धन्यवाद दिया, जो कल ही मेरे पास कुछ समय के लिए आकर मुझे जीना सिखा गई थी। —इसी पुस्तक से साहित्य-सृजन के प्रति सचेत राजनीतिज्ञ एवं लेखक रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की कलम से निकला कहानी-संग्रह ‘वाह जिंदगी!’ जीवटता एवं जीवंतता का अद्भुत उदाहरण है। जीवन के विविध रंग उकेरता मनोरंजक और प्रेरणाप्रद कहानी-संग्रह।
Phir Jeete Shri Ram
- Author Name:
Balveer Singh
- Book Type:

- Description: वह रात जागरण वाली थी जी हाँ! वह जागरण की ही रात थी। मुलायम सिंह जागते रहे थे इस चाव में कि कल 30 अक्तूबर को डेढ़ कार सेवक भी उनकी प्रिय मसजिद की ओर नहीं बढ़ पाएगा तो मैं किन शब्दों में अपनी महान् विजय का बखान दूरदर्शन पर करूँगा। लाखों कार सेवक जागते रहे इस ललक, उछाह और सौभाग्य की प्रतीक्षा में कि कब दिन निकले और हमें अपने आराध्य रामलला के श्रीचरणों में जीवन पुष्प चढ़ाने का सौभाग्य मिले। हवाएँ, तारक मालाएँ, अनंत आकाश और धवल चंद्रमा जागते रहे उन राम सेनानियों पर आशीषों की वर्षा करने में जो कल अपने प्राण हथेली पर लेकर निहत्थे मशीनगनों की गोलियों की बौछारों में सीने तानकर आगे बढ़ेंगे। और माँ सरयू जाग रही थी उस पावन रक्त के अपनी जलनाशि में आ मिलने की आशंका में दहती हुई जो कल अयोध्या की गलियों और उसके पुल पर बहने वाला है। उस रात तो स्वयं नींद भी जागी थी। पल-पल का मोल अमोल और अनमोल हो उठा था।
DaduDayal Aur Hamara Samay "दादूदयाल और हमारा समय" Book in Hindi | Nand Kishore Pandey
- Author Name:
Nand Kishore Pandey
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UPSSSC Rajaswa Lekhpal Bharti Pariksha- UPSSSC Lekhpal Entrance Exam 2022
- Author Name:
Chandra Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sangrang : Nai Peedhi Ke 25 Rangkarmiyon Ki Rachana-Prakriya
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

-
Description:
मंच पर उतरने से पहले अभिनेता किस भीतरी संघर्ष से गुजरता है; दिये गए चरित्र के साथ अपनी खुद की पहचान को एकलय करने में उसे नाटक के पाठ के साथ-साथ खुद को भी कितना पढ़ना-खँगालना पड़ता है; कितनी मदद उसे अपने अब तक के जिये जीवन से मिलती है, और कितनी अभिनेता के रूप में प्राप्त प्रशिक्षण से; और कैसे एक पात्र को जीना समाज में उसकी अपनी गति को प्रभावित करता है, इन सवालों पर आम दर्शक कभी नहीं सोचता।
ये चीजें आम तौर पर सामने भी नहीं आ पातीं क्योंकि अभिनेता न कभी इस बारे में कहीं लिखते हैं, न कोई उनसे पूछता है। यह उस मंच का किंचित् अदृश्य कोना है जिस पर हमने जीवन की नाटकीयताओं के जरिये अपने अस्तित्व के कई अँधेरे-अदेखे पहलुओं को देखा-जाना है।
यह किताब इस दिशा में एक बड़ी, और गम्भीर पहलकदमी है।
हिन्दी में पहली बार मंच पर सक्रिय युवा अभिनेता और अभिनेत्रियाँ यहाँ अपने ऐसे अनुभवों को साझा कर रहे हैं जो खुद उनके लिए भी गहरी अन्तर्यात्राओं की तरह रहे। इन्हें पढ़कर मालूम होता है कि जिसे हम ‘एक्टिंग’ कहकर आगे बढ़ जाते हैं, वह ‘एक्टर’ के लिए उसके अस्तित्व-बोध के स्तर पर घटित होनेवाला कितना बड़ा संघर्ष होता है; व्यक्तित्वान्तरण की वह प्रक्रिया उन्हें कितना मुक्त करती है, और कितना कसती है।
और यह हम पढ़ते हैं एक सजीव, धड़कते हुए, अत्यन्त ईमानदार गद्य के रूप में जिसे वही सम्भव कर पाता है जो अनुभव के कंटकाकीर्ण पथ पर नंगे पैर और खुली आँखों चला हो, जो प्रक्रिया का भोक्ता भी रहा हो और साक्षी भी।
अभिनय-जीवन के इन संस्मरणों को पढ़कर हम रंग-दर्शक के रूप में समृद्ध होते हैं। अभिनय के विद्यार्थियों के लिए तो इनसे गुजरना किसी ‘वर्कशॉप’ में होने जैसा है।
Pradakshina Ke Patra | प्रदक्षिणा के पात्र | Description Poem of Tulsi's Ramcharitmanas | Yogendra Prasad Book in Hindi
- Author Name:
Yogendra Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vyaktitva Ka Sampoorna Vikas
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: हमारी मातृभूमि भारतवर्ष का मेरुदंड धर्म केवल धर्म ही है। धर्म के आधार पर, उसी की नींव पर हमारी जाति के जीवन का प्रासाद खड़ा है। भारत के राष्ट्रीय आदर्श हैं-- त्याग और सेवा। आप उसकी इन धाराओं में तीव्रता उत्पन्न कीजिए और बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा। संसार में सत्संग से पवित्र और कुछ भी नहीं है, क्योंकि सत्संग से ही शुभ संस्कार चित्त रूपी सरोवर की तली से ऊपरी सतह पर उठ आने के लिए उन्मुख होते हैं । मान लो, किसी में दोष है तो केवल गाली- गलौज से कुछ नहीं होगा; हमें उसकी जड़ में जाना होगा। पहले पता लगाओ कि दोष का कारण क्या है ? फिर उस कारण को दूर करो और वह दोष अपने आप ही चला जाएगा। हमारा प्रत्येक कार्य, हमारा प्रत्येक अंग-संचालन, हमारा हर विचार हमारे चित्त पर इसी प्रकार का एक संस्कार छोड़ जाता है और यद्यपि ये संस्कार ऊपरी दृष्टि से स्पष्ट न हों, तथापि इतने प्रबल होते हैं कि ये अवचेतन मन में अज्ञात रूप से कार्य करते रहते हैं । - इसी पुस्तक से स्वामी विवेकानंद एक आध्यात्मिक विभूति, मानवधर्मी और समाजधर्मी भी थे। वे जीवन को उन्नत, त्याणमय, सत्यनिष्ठ और मानव-मूल्यों से प्रदीप्त करने के प्रबल पक्षधर थे। उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का पठन-चिंतन हर भारतवासी के लिए आत्म-विकास, सफलता, संतोष और सुख के द्वार खोलेगा |
Be a Humble Winner
- Author Name:
Suresh Mohan Semwal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kabeer Dohawali
- Author Name:
Neelotpal
- Book Type:

- Description: सामान्य तरीके से जन्म लेकर और एक अति सामान्य परिवार में पलकर कैसे महानता के शीर्ष को छुआ जा सकता है, यह महात्मा कबीर के आचार, व्यवहार, व्यक्तित्व और कृतित्व से सीखा जा सकता है। कबीर ने कोई पंथ नहीं चलाया, कोई मार्ग नहीं बनाया; बस लोगों से इतना कहा कि वे अपने विवेक से अपने अंतर्मन में झाँकें। कबीर मूर्ति या पत्थर को पूजने की अपेक्षा अंतर में बसे प्रभु की भक्ति करने पर बल देते थे। 1 4 वीं सदी में कबीर दलितों के सबसे बड़े मसीहा बनकर उभरे और उच्च वर्गों के शोषण के विरद्ध उन्हें जागरूक करते रहे। वह निरंतर घूम-घूमकर जन-जागरण चलाते और लोगों में जागृति पैदा करते थे। ‘रमैनी’, ‘सबद’ और ‘साखी’ में उन्होंने अंधविश्वास, वेदांत तत्त्व, धार्मिक पाखंड, मिथ्याचार, संसार की क्षणभंगुरता, हृदय की शुद्धि, माया, छुआछूत आदि अनेक प्रसंगों पर बड़ी मार्मिक उक्तियाँ कही हैं। महात्मा कबीर अपनी कालजयी रचनाओं के कारण युगों-युगों तक हमारे बीच उपस्थित रहेंगे। उनकी वाणी का अनुसरण करके हम अपना वर्तमान ही नहीं, भविष्य भी सँवार सकते हैं। कबीर आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस काल में थे। प्रस्तुत पुस्तक में, वर्तमान प्रासंगिकता को ध्यान में रखकर ही, संत कबीर की जीवनी और काव्य-रचना के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है, जिससे कि पाठकों को कबीर को समझने और उनके दरशाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिल सके।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book