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Bhookh aur Bhoj ke Beech Vivekananda

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कभी राजभवन में सोने की थाली में राजसी भोजन, कभी झोंपड़ी में गरीबों का भोजन, कभी भूखे पेट, कभी सुनसान जंगल में आधे पेट खाकर भ्रमण करना स्वामी विवेकानंद के जीवन के अंतिम दो दशकों की आश्चर्यजनक जीवनगाथा। पिछले लगभग डेढ़ सौ वर्षों से कई देशों में स्वामीजी के पाककला प्रेम की चर्चा के साथ महासागर के उस पार अमेरिका में वेद, वेदांत के साथ-साथ बिरयानी-पुलाव-खिचड़ी से संबंधित कई अनजानी कहानियाँ प्रचलित हैं। भारतीय पाककला के प्रचार में सर्वत्यागी संन्यासी के असीम उत्साह वर्तमान के समाजतत्त्वविद् के लिए आश्चर्य की बात है, फिर भी पाकशास्त्री महाराज विवेकानंद को लेकर कोई संपूर्ण पुस्तक किसी भी भाषा में क्यों नहीं लिखी गई है, यह समझ से परे है। इस पुस्तक में स्वामी विवेकानंद के आहार के विषय में हजारों लोगों के मुँह से कही गई अनमोल बातों पर खोजी लेखक शंकर की अद्भुत प्रस्तुति है।

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कभी राजभवन में सोने की थाली में राजसी भोजन, कभी झोंपड़ी में गरीबों का भोजन, कभी भूखे पेट, कभी सुनसान जंगल में आधे पेट खाकर भ्रमण करना स्वामी विवेकानंद के जीवन के अंतिम दो दशकों की आश्चर्यजनक जीवनगाथा। पिछले लगभग डेढ़ सौ वर्षों से कई देशों में स्वामीजी के पाककला प्रेम की चर्चा के साथ महासागर के उस पार अमेरिका में वेद, वेदांत के साथ-साथ बिरयानी-पुलाव-खिचड़ी से संबंधित कई अनजानी कहानियाँ प्रचलित हैं।
भारतीय पाककला के प्रचार में सर्वत्यागी संन्यासी के असीम उत्साह वर्तमान के समाजतत्त्वविद् के लिए आश्चर्य की बात है, फिर भी पाकशास्त्री महाराज विवेकानंद को लेकर कोई संपूर्ण पुस्तक किसी भी भाषा में क्यों नहीं लिखी गई है, यह समझ से परे है।
इस पुस्तक में स्वामी विवेकानंद के आहार के विषय में हजारों लोगों के मुँह से कही गई अनमोल बातों पर खोजी लेखक शंकर की अद्भुत प्रस्तुति है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Hardbound
Publisher
Prabhat Prakashan
Publication year
2023
Weight
235 grams
ISBN-13
9789353228576
Pages
256
Reading time
~9 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
10 × 10 cm
Language
Hindi

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