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Gyanyog

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‘ज्ञानयोग’ में स्वामी विवेकानन्द के वेदान्त पर दिए गए विश्लेषणपरक भाषणों को संकलित किया गया है। इनमें कुछ भाषण लंदन में, कुछ अमेरिका में और कुछ अत्यत्र दिए गए थे। उनका मानना था कि व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में वेदान्त निर्णायक रूप में उपयोगी साबित हो सकता है; कि वह मनुष्य के अब तक किए गए चिन्तन का उच्चतम फल है, संसार की समस्त विचार-सरणियों को अन्ततः उसी में विलीन होना है। अत्यन्त सरल और सुगम भाषा में दिए गए इन वक्तव्यों में उन्होंने माया क्या है, मनुष्य का वास्तविक स्वरूप क्या है, माया और ईश्वर की अवधारणा का विकास किस प्रकार हुआ, संसार क्या है, आत्मा का स्वभाव क्या है, अमरत्व क्या है, आदि विषयों पर विचार किया है। विवेकानन्द के चिन्तन की विशेषता ये है कि दर्शन के गूढ़ प्रश्नों पर वे जो भी विचार करते हैं, उसे हमारे भौतिक और वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए, उसकी रोशनी में व्याख्यायित करते हुए करते हैं, यह विशेषता इन आलेखों और वक्तव्यों में भी दृष्टिगोचर होती है।

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‘ज्ञानयोग’ में स्वामी विवेकानन्द के वेदान्त पर दिए गए विश्लेषणपरक भाषणों को संकलित किया गया है। इनमें कुछ भाषण लंदन में, कुछ अमेरिका में और कुछ अत्यत्र दिए गए थे।

उनका मानना था कि व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में वेदान्त निर्णायक रूप में उपयोगी साबित हो सकता है; कि वह मनुष्य के अब तक किए गए चिन्तन का उच्चतम फल है, संसार की समस्त विचार-सरणियों को अन्ततः उसी में विलीन होना है।

अत्यन्त सरल और सुगम भाषा में दिए गए इन वक्तव्यों में उन्होंने माया क्या है, मनुष्य का वास्तविक स्वरूप क्या है, माया और ईश्वर की अवधारणा का विकास किस प्रकार हुआ, संसार क्या है, आत्मा का स्वभाव क्या है, अमरत्व क्या है, आदि विषयों पर विचार किया है।

विवेकानन्द के चिन्तन की विशेषता ये है कि दर्शन के गूढ़ प्रश्नों पर वे जो भी विचार करते हैं, उसे हमारे भौतिक और वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए, उसकी रोशनी में व्याख्यायित करते हुए करते हैं, यह विशेषता इन आलेखों और वक्तव्यों में भी दृष्टिगोचर होती है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2025
Weight
210 grams
ISBN-13
9789395328456
Pages
200
Reading time
~7 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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