Rashtriya Evam Antarrashtriya Sangathan
(0)
Author:
Shailesh KumarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संगठन हिन्दी माध्यम से प्रतियोगिता परीक्षाओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के मार्गदर्शन के उद्देश्य से लिखी गई है। प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के दौरान प्रतिभागियों को सामान्य अध्ययन की तैयारी के लिए विविध स्रोतों से सामग्री एकत्रित करनी पड़ती है। विषयवार ढंग से सामग्री को एक जगह उपलब्ध होना अत्यनत उपयोगी है। इस समन्दर्भ में यह किताब महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इस विषय पर हिन्दी में मुकम्मल किताब अब तक नहीं की।</p> <p>इसमें प्रतियोगिता परीक्षाओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय संगठनों की संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित और बिन्दुवार जानकारी दी गई है। वस्तुत: राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के बारे में जानना अपने आपकों जानने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। आज के गतिशील विश्व में सभी संघटन चाहे वे राजनैतिक हों, आर्थिक हों, सामरिक हों या सामाजिक-सांस्कृतिक हों एक-दूसरे से जुड़े हैं। यदि आप इनका सम्यक् ज्ञान रखें तो इनके अन्तर्सम्बन्धों एवं आन्तरिक जुड़ाव को भलीभाँति समझ सकते हैं। सिविल सेवा की परीक्षा के प्रत्येक स्तर पर चाहे वह प्रारम्भिक परीक्षा हो या मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार-इस ज्ञान की अपरिहार्यता से इनकार नहीं किया जा सकता। न केवल सीधे-सीधे प्रश्नों में बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति, समाजशास्त्र तथा अर्थाशास्त्र से जुड़े प्रश्नों में इन संस्थाओं के विषय में आपका ज्ञान आपको लाभ पहुँचाएगा।</p> <p>यह किताब मुख्यत: तथ्यात्मक है एवं इसमें सिविल सेवा परीक्षा सहित सभी महत्त्वपूर्ण परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तथ्यों को क्रम दिया गया है।
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About the Book
राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संगठन हिन्दी माध्यम से प्रतियोगिता परीक्षाओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के मार्गदर्शन के उद्देश्य से लिखी गई है। प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के दौरान प्रतिभागियों को सामान्य अध्ययन की तैयारी के लिए विविध स्रोतों से सामग्री एकत्रित करनी पड़ती है। विषयवार ढंग से सामग्री को एक जगह उपलब्ध होना अत्यनत उपयोगी है। इस समन्दर्भ में यह किताब महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इस विषय पर हिन्दी में मुकम्मल किताब अब तक नहीं की।</p>
<p>इसमें प्रतियोगिता परीक्षाओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय संगठनों की संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित और बिन्दुवार जानकारी दी गई है। वस्तुत: राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के बारे में जानना अपने आपकों जानने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। आज के गतिशील विश्व में सभी संघटन चाहे वे राजनैतिक हों, आर्थिक हों, सामरिक हों या सामाजिक-सांस्कृतिक हों एक-दूसरे से जुड़े हैं। यदि आप इनका सम्यक् ज्ञान रखें तो इनके अन्तर्सम्बन्धों एवं आन्तरिक जुड़ाव को भलीभाँति समझ सकते हैं। सिविल सेवा की परीक्षा के प्रत्येक स्तर पर चाहे वह प्रारम्भिक परीक्षा हो या मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार-इस ज्ञान की अपरिहार्यता से इनकार नहीं किया जा सकता। न केवल सीधे-सीधे प्रश्नों में बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति, समाजशास्त्र तथा अर्थाशास्त्र से जुड़े प्रश्नों में इन संस्थाओं के विषय में आपका ज्ञान आपको लाभ पहुँचाएगा।</p>
<p>यह किताब मुख्यत: तथ्यात्मक है एवं इसमें सिविल सेवा परीक्षा सहित सभी महत्त्वपूर्ण परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तथ्यों को क्रम दिया गया है।
Book Details
-
ISBN9789394902084
-
Pages182
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रशासन में राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रयोग और प्रगामी प्रयोग पर जोर दिया गया। अनुवाद शीघ्र ही एक व्यापक विषय बन गया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विधि, वाणिज्य तथा सर्वसुलभ रूप में साहित्य के क्षेत्र में भी अनुवाद का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य लगने लगा। प्रस्तुत ग्रंथ के कुछ अध्यायों में व्यावहारिक अनुवाद के क्षेत्र में उतरनेवालों के लिए आवश्यक मार्ग निर्देश दिए गए हैं। अनुवाद के मूल्यांकन के मानक अभी नहीं बने हैं। साहित्य में सृजनात्मक वाड्मय की रचना के बाद लक्षण ग्रंथ एवं व्याकरण ग्रंथ की जरूरत पड्ती है। अनुवाद के संदर्भ में एक लघु प्रयास ‘अनुवाद की स्तरीयता’ नामक अध्याय में किया गया है। हिंदी क्षेत्र में सिद्धांत एवं विशेषज्ञ ‘तत्काल भाषांतरण’ अथवा ‘इंटरप्रेटेशन’ पर अभी अधिक ध्यान नहीं दे सकते हैं; जबकि यह आज बहुत जरूरी एवं उर्वर क्षेत्र है। इस विशेष अनुवाद विधा की कुछ बारीकियों के विश्लेषण का प्रयास भी इस ग्रंथ में किया गया है। अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद आज निरंतर किया जाता है; परंतु उसके व्यावहारिक बिंदु (चेक प्वाइंट) पर सोदाहरण प्रकाश कम ही डाला गया है। इस पुस्तक में दो बड़े अध्यायों में इसीके विभिन्न पहलुओं पर विशद विवेचन प्रस्तुत किया है। विश्वास है, यह पुस्तक अनुवाद कला में कुशलता प्राप्ति में सहायक होने के साथ-साथ आम पाठकों के लिए भी ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी।
Super Genius Computer Learner-3
- Author Name:
Manuj Bajaj +1
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आधुनिक युग के विकास में कंप्यूटर का अतुलनीय योगदान है। आज किसी भी क्षेत्र में कंप्यूटर की उपस्थिति अनिवार्य रूप में देखी जा सकती है। हमारे राजमर्रा के लगभग सभी कार्य कंप्यूटर पर निर्भर हैं। बैंकका लेन-देन, टिकट, ए.टी.एम. सेवा, मोटरकार व हवाई जहाज नियंत्रण, पुस्तक-प्रकाशन, दस्तावेज तैयार करना, फोटो, फिल्म व संगीत से जुड़े कार्य, कक्षा में पढ़ाई करना इत्यादि सभी कार्य कंप्यूटर की मदद से सरलता से, तेजी से और त्रुटिहीनता के साथ पूरे हो जाते हैं। यही कारण है कि आज के युग को ‘कंप्यूटर का युग’ कहा जाता है। विज्ञान, तकनीकी, शोध, चिकित्सा, प्रौद्योगिकी, उड्डयन, संचार एवं शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर ने कृषि के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाई है। कंप्यूटर क्रांति ने विश्व को एकसूत्र में बाँध दिया है। इंटरनेट ने तो कंप्यूटर के प्रचार-प्रसार में और भी बड़ी भूमिका निभाई है। इंटरनेट के माध्यम से आज एक ‘क्लिक’ करके हम दुनिया के किसी भी कोने में पहुँच सकते हैं। इंटरनेट टेलीफोनी और इ-मेल ने संचार क्रांति को पंख लगा दिए हैं। इंटरनेट टेलीफोन से हम लगभग निशुल्क दुनिया के किसी भी कोने में टेलीफोन की तरह बात कर सकते हैं। ‘चैट’ के जरिए ‘लाइव’ बातचीत की जा सकती है।
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