Mahila Cricket Ki Kahani
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2025 में भारत की महिला क्रिकेट टीम ने अपना पहला आईसीसी महिला वर्ल्ड कप जीतकर क्रिकेट की पुरुष-केन्द्रित दुनिया में अपनी बड़ी दावेदारी पेश की। क्रिकेट प्रेमियों ने भी इसका स्वागत उतने ही जोशो-खरोस के साथ किया।</p> <p>लेकिन इस उपलब्धि के पीछे भारत में महिला क्रिकेट का एक लम्बा इतिहास रहा है जिसमें खेल के लिए जरूरी साधनों का अभाव और स्त्रियों के प्रति भारतीय समाज का पक्षपातपूर्ण रवैया भी बाधाएँ पैदा करता रहा। इसके बावजूद महिला क्रिकेटरों ने अपना सफर जारी रखा और आज वे पुरुष क्रिकेटरों के बराबर आ खड़ी हुई हैं।</p> <p>‘महिला क्रिकेट की कहानी’ किताब भारतीय महिला क्रिकेट के अब तक के सफर और उसके जज्बे का इतिहास बताती है। लेकिन सिर्फ इतना ही नहीं, बाकी विश्व में महिला क्रिकेट की स्थिति क्या है, एक पूरा अध्याय इस पर भी है।</p> <p>महिला क्रिकेटरों का विस्तृत परिचय, उनकी उपलब्धियों, उनके कीर्तिमानों, उन्हें मिले सम्मान-पुरस्कारों के साथ-साथ यह पुस्तक अन्तर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेट के नियमों की जानकारी भी उपलब्ध कराती है।</p> <p>भारत और विश्व महिला क्रिकेट पर एक सम्पूर्ण किताब।
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2025 में भारत की महिला क्रिकेट टीम ने अपना पहला आईसीसी महिला वर्ल्ड कप जीतकर क्रिकेट की पुरुष-केन्द्रित दुनिया में अपनी बड़ी दावेदारी पेश की। क्रिकेट प्रेमियों ने भी इसका स्वागत उतने ही जोशो-खरोस के साथ किया।</p>
<p>लेकिन इस उपलब्धि के पीछे भारत में महिला क्रिकेट का एक लम्बा इतिहास रहा है जिसमें खेल के लिए जरूरी साधनों का अभाव और स्त्रियों के प्रति भारतीय समाज का पक्षपातपूर्ण रवैया भी बाधाएँ पैदा करता रहा। इसके बावजूद महिला क्रिकेटरों ने अपना सफर जारी रखा और आज वे पुरुष क्रिकेटरों के बराबर आ खड़ी हुई हैं।</p>
<p>‘महिला क्रिकेट की कहानी’ किताब भारतीय महिला क्रिकेट के अब तक के सफर और उसके जज्बे का इतिहास बताती है। लेकिन सिर्फ इतना ही नहीं, बाकी विश्व में महिला क्रिकेट की स्थिति क्या है, एक पूरा अध्याय इस पर भी है।</p>
<p>महिला क्रिकेटरों का विस्तृत परिचय, उनकी उपलब्धियों, उनके कीर्तिमानों, उन्हें मिले सम्मान-पुरस्कारों के साथ-साथ यह पुस्तक अन्तर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेट के नियमों की जानकारी भी उपलब्ध कराती है।</p>
<p>भारत और विश्व महिला क्रिकेट पर एक सम्पूर्ण किताब।
Book Details
-
ISBN9789360867300
-
Pages248
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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एक घना जंगल, एक अंजान आदिवासी समूह और रहस्यमयी नागमणि की खोज नागलेंड [प्रतिबंधित क्षेत्र] इस जगह से आगे का क्षेत्र पिञालियों का है। इस सीमा के आगे भारत के राज संविधान और धाराओं के कोई नियम लागू नहीं होते। पिञालियों की अस्मिता को बरकरार रखने के लिए भारत सरकार दृढ़ है। 5000 वर्ष पुरानी इस सभ्यता की रक्षा और सम्मान हमारा दायित्व है। अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इस सीमा से आगे जाने का प्रयास न करें।
Saahi & Sudhir
- Author Name:
Yogita Warde
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“साही '&' सुधीर” दोस्ती, प्रेम और आकर्षण पर आधारित उपन्यास है। यह उपन्यास सभी पीढ़ियों को अपने समय, जीवन और कहानीसे वाकिफ कराता है, यह एक प्यारी सी कहानी है जिसमें साही और सुधीर बचपन के दोस्त हैं। सुधीर पेंटिंग बनाता है और साहीलेखिका है, जब साही सुधीर के जीवन में आयी तब उसने अपने जीवन में कई बदलाव महसूस किए। दोनों अच्छे दोस्त हैं लेकिन कुछसमय बाद सुधीर और साही दोनों को एहसास होता है कि वे एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है, फिर क्याहोता है? क्या वे फिर कभी मिलेंगे? क्या वे अपने प्यार का इजहार करेंगे? क्या पेंटिंग और लेखन दोनों का आपस में जुड़ पाते हैं? ऐसेबहुत से सवाल हैं, और जवाब के लिए आपको "साही '&' सुधीर” उपन्यास पढ़ना होगा। यह उपन्यास आपके दैनिक जीवन के साथआसानी से जुड़ सकता है। इस उपन्यास में स्कूली जीवन, दोस्ती और अलगाव के कई उतार-चढ़ाव शामिल हैं जो हर किसी को यहसोचने पर मजबूर करते हैं कि अब आगे क्या होगा, हिंदी साहित्य में लेखिका की यह सर्वश्रेष्ठ पहली रचना है एक परिपक्व कलमआपकी समीक्षाओं के साथ-साथ आलोचना की भी प्रतीक्षा कर रही है, ताकि अगले उपन्यास में आपके सामने और बेहतर काम किया जा सके।
Cinema Ki Duniya Aur Duniya Ka Cinema
- Author Name:
Vimal Chandra Pandey
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विमल चन्द्र पाण्डेय का जन्म 20 अक्टूबर, 1981 को बनारस, उत्तर प्रदेश में हुआ। मूल रूप से गाँव कड़सर, जिला बलिया के निवासी। शुरुआती पढ़ाई बनारस में ही। फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई और पाँच साल तक पत्रकारिता करने के बाद इस्तीफा। वर्तमान में फ्रीलांसिंग, लेखन और फिल्म-निर्देशन। उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं- ‘डर’, ‘मस्तूलों के इर्द-गिर्द’, ‘उत्तर प्रदेश की खिड़की’, 'मेरी प्रिय कहानियाँ' और ‘मारण मंत्र’ (कहानी-संग्रह); ‘भले दिनों की बात थी’ (उपन्यास); ‘ई इलहाब्बाद है भइया’ (संस्मरण)। उनकी कहानियों और कविताओं के अनुवाद कन्नड़, मराठी, मलयालम, तमिल, गुजराती, रूसी और अंग्रेज़ी भाषाओं में हुए हैं। उनकी पहली फ़िल्म है ‘द होली फिश’ जिसके निर्देशन के अलावा लेखन और निर्माण भी उन्होंने स्वयं ही किया। दूसरी फ़िल्म ‘धतूरा’ रिलीज के लिए तैयार है। उन्हें ‘भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार’ और ‘मीरा स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।
Manusmriti
- Author Name:
Dr. Ramchandra Verma Shastri
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मनुष्य ने जब समाज व राष्ट्र्र के अस्तित्व तथा महत्त्व कौ मान्यता दी, तो उसके कर्तव्यों और अधिकारों की व्याख्या निर्धारित करने तथा नियमों के अतिक्रमण करने पर दण्ड व्यवस्था करने की भी आवश्यकता उत्पन्न हुई । यही कारण है कि विभिन्न युगों में विभिन्न स्मृतियों की रचना हुई, जिनमें मनुस्मृति को विशेष महत्व प्राप्त है । मनुस्मृति में बारह अध्याय तथा दो हज़ार पांच सौ श्लोक हैं, जिनमें सृष्टि की उत्पत्ति, संस्कार, नित्य और नैमित्तिक कर्म, आश्रमधर्म, वर्णधर्म, राजधर्म व प्रायश्चित्त आदि अनेक विषयों का उल्लेख है। ब्रिटिश शासकों ने भी मनुस्मृति को ही आधार बनाकर ' इण्डियन पेनल कोड ' बनाया तथा स्वतन्त्र भारत की विधानसभा ने भी संविधान बनाते समय इसी स्मृति को प्रमुख आधार माना । व्यक्ति के सर्वतोमुखी विकास तथा सामाजिक व्यवस्था को सुनिश्चित रूप देने व व्यक्ति की लौकिक उन्नति और पारलौकिक कल्याण का पथ प्रशस्त करने में मनुस्मृति शाश्वत महत्त्व का एक परम उपयोगी शास्त्र मथ है । वास्तव में मनुस्मृति भारतीय आचार-संहिता का विश्वकोश है, जो भारतीय समाज के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगा।
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