Manusmriti
(1)
Author:
Dr. Ramchandra Verma ShastriPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
700
₹ 560 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मनुष्य ने जब समाज व राष्ट्र्र के अस्तित्व तथा महत्त्व कौ मान्यता दी, तो उसके कर्तव्यों और अधिकारों की व्याख्या निर्धारित करने तथा नियमों के अतिक्रमण करने पर दण्ड व्यवस्था करने की भी आवश्यकता उत्पन्न हुई । यही कारण है कि विभिन्न युगों में विभिन्न स्मृतियों की रचना हुई, जिनमें मनुस्मृति को विशेष महत्व प्राप्त है । मनुस्मृति में बारह अध्याय तथा दो हज़ार पांच सौ श्लोक हैं, जिनमें सृष्टि की उत्पत्ति, संस्कार, नित्य और नैमित्तिक कर्म, आश्रमधर्म, वर्णधर्म, राजधर्म व प्रायश्चित्त आदि अनेक विषयों का उल्लेख है। ब्रिटिश शासकों ने भी मनुस्मृति को ही आधार बनाकर ' इण्डियन पेनल कोड ' बनाया तथा स्वतन्त्र भारत की विधानसभा ने भी संविधान बनाते समय इसी स्मृति को प्रमुख आधार माना । व्यक्ति के सर्वतोमुखी विकास तथा सामाजिक व्यवस्था को सुनिश्चित रूप देने व व्यक्ति की लौकिक उन्नति और पारलौकिक कल्याण का पथ प्रशस्त करने में मनुस्मृति शाश्वत महत्त्व का एक परम उपयोगी शास्त्र मथ है । वास्तव में मनुस्मृति भारतीय आचार-संहिता का विश्वकोश है, जो भारतीय समाज के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगा।
Read moreAbout the Book
मनुष्य ने जब समाज व राष्ट्र्र के अस्तित्व तथा महत्त्व कौ मान्यता दी, तो उसके कर्तव्यों और अधिकारों की व्याख्या निर्धारित करने तथा नियमों के अतिक्रमण करने पर दण्ड व्यवस्था करने की भी आवश्यकता उत्पन्न हुई । यही कारण है कि विभिन्न युगों में विभिन्न स्मृतियों की रचना हुई, जिनमें मनुस्मृति को विशेष महत्व प्राप्त है । मनुस्मृति में बारह अध्याय तथा दो हज़ार पांच सौ श्लोक हैं, जिनमें सृष्टि की उत्पत्ति, संस्कार, नित्य और नैमित्तिक कर्म, आश्रमधर्म, वर्णधर्म, राजधर्म व प्रायश्चित्त आदि अनेक विषयों का उल्लेख है। ब्रिटिश शासकों ने भी मनुस्मृति को ही आधार बनाकर ' इण्डियन पेनल कोड ' बनाया तथा स्वतन्त्र भारत की विधानसभा ने भी संविधान बनाते समय इसी स्मृति को प्रमुख आधार माना । व्यक्ति के सर्वतोमुखी विकास तथा सामाजिक व्यवस्था को सुनिश्चित रूप देने व व्यक्ति की लौकिक उन्नति और पारलौकिक कल्याण का पथ प्रशस्त करने में मनुस्मृति शाश्वत महत्त्व का एक परम उपयोगी शास्त्र मथ है । वास्तव में मनुस्मृति भारतीय आचार-संहिता का विश्वकोश है, जो भारतीय समाज के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगा।
Book Details
-
ISBN9789389982374
-
Pages504
-
Avg Reading Time17 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Vaachikata : Aadivasi Darshan, Sahitya Aur Saundaryabodh
- Author Name:
Vandana Tete
- Book Type:

- Description: आदिवासी दर्शन प्रकृतिवादी है। आदिवासी समाज धरती, प्रकृति और सृष्टि के ज्ञात-अज्ञात निर्देश, अनुशासन और विधान को सर्वोच्च स्थान देता है। उसके दर्शन में सत्य-असत्य, सुन्दर-असुन्दर, मनुष्य-अमनुष्य जैसी कोई अवधारणा नहीं है, न ही वह मनुष्य को उसके बुद्धि-विवेक अथवा ‘मनुष्यता’ के कारण 'महान' मानता है। उसका दृढ़ विश्वास है कि सृष्टि में जो कुछ भी सजीव और निर्जीव है, सब समान है। न कोई बड़ा है, न कोई छोटा है। न कोई दलित है, न कोई ब्राह्मण। सब अर्थवान है एवं सबका अस्तित्व एकसमान है—चाहे वह एक कीड़ा हो, पौधा हो, पत्थर हो या कि मनुष्य हो। वह ज्ञान, तर्क, अनुभव और भौतिकता को प्रकृति के अनुशासन की सीमा के भीतर ही स्वीकार करता है, उसके विरुद्ध नहीं। अन्वेषण, परीक्षण और ज्ञान को आदिवासी दर्शन सुविधा और उपयोगिता की दृष्टि से नहीं देखता, बल्कि धरती, प्रकृति और समस्त जीव-जगत के साथ सहजीवी सामंजस्य और अस्तित्वपूर्ण संगति के बतौर देखता है। मानव की सभी गतिविधियों और व्यवहारों को, समूची विकासात्मक प्रक्रिया को प्रकृति व समष्टि के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके पूरक के रूप में देखता है। उन सबका उपयोग वह वहीं तक करता है, जहाँ तक समष्टि के किसी भी वस्तु अथवा जीव को, प्रकृति और धरती को कोई गम्भीर क्षति नहीं पहुँचती हो। जीवन का क्षरण अथवा क्षय नहीं होता हो। आदिवासी साहित्य इसी दर्शन को लेकर चलता है।
Mashhoor Hue To Kya Hua?
- Author Name:
Soha Ali Khan
- Book Type:

- Description: मंसूर अली खान पटौदी की बेटी होना कैसा लगता है? या शर्मिला टैगोर जैसी मशहूर माँ की बेटी होना कैसा लगता है? या जब लोग सैफ अली खान की बहन के तौर पर जानते हैं? या फिर करीना कपूर की ननद होना कैसा लगता है? और उन सबके बीच मैं खुद को कहाँ पाती हूँ? अभिनेत्री सोहा अली खान की यह पहली पुस्तक वास्तव में उन निजी लेखों का एक बेहतरीन संग्रह है, जिनमें वह अपनी खिल्ली उड़ाने के मजाकिया अंदाज में बताती हैं कि किस प्रकार वह देश के सबसे विख्यात परिवारों में से एक में जनमी-बढ़ीं। लेखिका के पारिवारिक चित्रों के खजाने से पहली बार अनदेखी तसवीरों के साथ प्रकाशित यह किताब हमें उनके जीवन के दिल को छू लेनेवाले पलों से होकर ले जाती है, जिनमें आधुनिक युग की राजकुमारी से बल्लिओल कॉलेज के दिनों की उनकी जिंदगी और फिर सोशल मीडिया की संस्कृति वाले समय में एक हस्ती बनने तक की कहानी है, जिन्हें उन जगहों पर प्यार मिला जहाँ उम्मीद नहीं थी, और यह सबकुछ ताजगी भर देनेवाली बेबाकी और चुटीले अंदाज में बताया गया है। एक शाही परिवार में जन्म लेने के बाद भी कैसे आप लोगों की संवेदना को कोई महसूस कर सकता है, यह इस पुस्तक को पढ़ने के बाद आपको जानना आसान होगा।
KALPTARU
- Author Name:
Gurudev Nandkishore Shrimali
- Book Type:

- Description: अमृत मंथन से कल्पतरु वृक्ष उत्पन्न हुआ जिसे इंद्र अपने साथ स्वर्ग ले आए, क्योंकि कल्पतरु सभी कामनाओं को पूर्ण कर सकता है। जहाँ कामनाएँ पूर्ण होती हैं, वही स्वर्ग है; और उसे पाने के लिए अनंत काल से संघर्ष चल रहा है। देवता और दानव आपस में युद्धरत हैं स्वर्ग पर अधिकार पाने के लिए; और पृथ्वी पर मनुष्य कोशिश में लगा है कि उसकी कामनाएँ कैसे पूर्ण होंगी? कल्पतरु की सबको चाह है। इसके मिलने के बाद गालिब की तरह कहना नहीं पड़ेगा कि हजारों ख्वाहिशें ऐसी...क्योंकि ख्वाहिशें-कामनाएँ पूरी हो रही हैं। वैसे भी, इंद्र इंद्रियजनित सुखों की पराकाष्ठा को निरूपित करते हैं; इसलिए उन्हें हमेशा ही तप से खतरा रहा है। इंद्र की तरह आपने भी यही समझा है कि योग और भोग एक साथ नहीं रह सकते हैं। परंतु शक्ति इस नियम का अपवाद हैं। उन्होंने योगी शिव से विवाह कर उन्हें गृहस्थ बनाया है, सकल जगत् की कामनापूर्ति का उत्तरदायित्व लिया है, और फिर वही शक्ति क्षुधा, कामना रूप में हर प्राणी में स्थित है। इसलिए कल्पतरु खास है। वह विश्वास दिलाता है कि जो माँगोगे, वही मिलेगा। यह विश्वास पुरुषार्थ को जीवंत, सक्रिय कर देता है। जीवन पूर्ण लगने लगता है। ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ आओ, साकार करें उपनिषद् की यह शांति प्रार्थना कल्पतरु के सान्निध्य में।
Gandhi Ke Desh Mein
- Author Name:
Sudhir Chandra
- Book Type:

-
Description:
विवेक, सन्मति और सदाशयता के धनी चिन्तक, विख्यात इतिहासकार सुधीर चन्द्र की निबन्ध पुस्तक।
‘‘सत्य, अहिंसा, प्रेम, अस्तेयादि एक झटके में और कायमी तौर पर लोगों की ज़िन्दगी में परिवर्तन ला देनेवाले गुण नहीं हैं। ख़ुद गांधी सारी ज़िन्दगी अपने को गांधी बनाने में लगे रहे थे। पर गांधी के नाम पर सब कुछ निछावर करनेवालों ने क़ुर्बानियाँ जो भी की हों, उन लोगों ने अपने को वैसा बनाने की कोशिश नहीं की जैसा बनकर ही गांधी का स्वराज हासिल हो सकता था।’’
‘‘गांधी की हमारी समझ गम्भीर रूप से अपूर्ण रहेगी जब तक हम अहिंसा के परिप्रेक्ष्य में उस हिंसा के स्वरूप और परिस्थितियों को समझने की शुरुआत नहीं करते, जिसे नैतिक हिंसा कहा जा सके।’’
‘‘समलैंगिकता को अप्राकृतिक या अस्वाभाविक मान लेने का आधार क्या है? इसी से जुड़ा एक बुनियादी सवाल भी उठता है : क्या किसी कर्म का अप्राकृतिक होना काफ़ी है उसे दंडनीय अपराध बनाए जाने के लिए? किसी कर्म का प्राकृतिक या अप्राकृतिक होना—जिस हद तक इस तरह का निर्धारण सम्भव है—उसे अपराध की श्रेणी में न तो लाता है और न ही उससे बाहर रखता है। हिंसा और वासना से जुड़े तमाम अपराधों को प्राकृतिक कृत्यों के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी तरफ़ सभ्यता और संस्कृति का विकास उत्तरोत्तर हमें प्रकृति से दूर लाता आया है।’’
‘‘जो मैं नहीं समझ पाता वह है बहुत सारे लोगों का विश्वास, देरीदा की मिसाल देते हुए कि, ‘डीकंस्ट्रक्शन’ और परिणामस्वरूप उत्तर-आधुनिकतावाद ‘एमॉरल’—नैतिक-अनैतिक से परे—है। देरीदा को, न कि देरीदा के बारे में, थोड़ा ही सही, पढ़े बगै़र कुछ प्रचलित भ्रान्तियों को मान लेना बौद्धिक आलस है।’’
देश के गतिशील समकालीन यथार्थ को समझने के लिए एक ज़रूरी पाठ।
Na Teen Mein, Na Teraha Mein, Mradang Bajaye Dere Mein
- Author Name:
Dr. Anand Prakash Maheshwari +1
- Book Type:

- Description: एक साधारण व्यक्ति के जीवन से उभरा यह वृत्तांत अपरोक्ष रूप से हमें आईना ही नहीं दिखाता, अपितु जीवन में हमारी विभिन्न गतिविधियों की सार्थकता की ओर हमें सोचने को मजबूर करता है बाहर क्या है घट में देख। हर पथ का है पथिक एक॥ ‘घट’ में भी हम क्या लख पाएँगे; यह भी निर्भर करता है कि हम किस घाट पर हैं। नीचे के घाट पर शून्य होंगे तो ही ऊपर के घाट में समाएँगे। शून्य मृत्यु से आध्यात्मिक लखाव का यह सातत्य बोध इस पुस्तक के पात्र ने किस प्रकार प्राप्त किया, कदाचित् आप पढ़ना चाहें।
Art And Crafts Of Chhattisgarh
- Author Name:
Niranjan Mahawar
- Book Type:

- Description: Chhattisgrah has many archaeological sites of great historical importance. The archaeological history of this region starts from the early Gupta period. The vast sites of Malhar in Bilaspur district, Dipadiha in Surguja, Sirpur (Shreepur) in Raipur and Barsur in Dantewada (Old Bastar district) are very rich. The punch mark coins have been found from Tarapur, Udela and Arng. Coins of Mouriyan period, Satvahan, Kushan, Gupta kings and local dynasties-Sharabhpuria, Nal, Pandu, and Kalchury have also been found at several places. Besides this the metal work was practiced and beautiful bronzes were found from Sirpur site. These bronzes were casted in the sixth or seventh century A.D. Iron working was also prevalent in this region. Agaria tribe was mining iron ore and smelting it and making iron tools and agricultural equipments. There are several brick temples too in Chhattisgarh. This book talks in depth about chhattisgarh and its arts and crafts. The author, a distinguished expert on traditional arts and crafts and working on the subject since 1960s, has documented all major and minor craft forms in this book. We hope the readers will find it extremely useful as to acquainted them with the rich tradition of region.
Apne Khawab Ki Tabir Chahti Hoon
- Author Name:
Nasera Sharma
- Book Type:

- Description: बकौल नासिरा शर्मा ‘बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के बाद एक नया हिन्दुस्तान उभरा है, जिसको अभी ठीक से समझा जाना बाक़ी है। पहले भारत ज़मीन के स्तर पर दो फाँक हुआ था, अब विचार और संवेदना के स्तर पर सियासत ने उसे चार फाँक कर दिया है।’ नासिरा शर्मा न सिर्फ़ भारत बल्कि ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और यूरोप की भी सामाजिक-सांस्कृतिक पेचीदगियों की जानकार हैं, और मनुष्यता की स्वाभाविक सकारात्मकता विशेषत: स्त्री सरोकार के प्रति अपनी पक्षधरता के लिए जानी जाती हैं। ‘अपने ख़्वाब की ताबीर चाहती हूँ’ उनके साक्षात्कारों का संकलन है। समकालीन पुरुष पत्रकारों-लेखकों-चिन्तकों, जिनमें देश से बाहर के भी कुछ नाम शामिल हैं, द्वारा लिए गए इन साक्षात्कारों को वे ‘आदम के सवाल हव्वा से’ कहती हैं। इन साक्षात्कारों में हम उनके लेखन से परिचित होते हैं, उनकी स्त्री से भी, और सबसे ज़्यादा उस सजग-चिन्तनशील व्यक्ति से जिसने भौगोलिक और राजनीतिक अर्थों में एक विराट और वैविध्यपूर्ण अनुभव को बहुत नज़दीक से देखा-जिया है। इसीलिए वे जिस विषय पर बात करती हैं, उसमें गहरा आत्मविश्वास और प्रामाणिकता स्पष्ट दिखाई देते हैं। मुस्लिम कठमुल्लावाद और हिन्दू कट्टरता से बराबर लोहा लेती आ रहीं नासिरा जी ने इन वार्ताओं में अनेक ऐसे सवाल उठाए हैं, और अनेक ऐसे सवालों के जवाब भी दिए हैं जिनका गहरा ताल्लुक़ हमारे आज के सामाजिक और राजनीतिक माहौल से भी है। मसलन हिन्दू-मुसलमान के बीच बढ़ाए जा रहे विद्वेष पर वे कहती हैं कि ‘इन सारे जालों को साफ़ करने का काम उतने प्रभावी ढंग से हमारी क़लम नहीं कर पाई जितना राजनेता समाज को काटने और दिलों को बाँटने में कामयाब हुए हैं।’ इस पुस्तक में कुछ सवालों के जवाब में उन्होंने ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के राजनीतिक-सामाजिक घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की है, और अन्य सामयिक मुद्दों पर भी जिनमें हिन्दी कहानी, साहित्य, दुनियाभर की स्त्री का लेखन और जीवन, बँटवारा, दंगे, भारत में मुस्लिम जीवन आदि शामिल हैं। आज जब हम कई निर्णायक मोर्चों पर किंकर्तव्यविमूढ़ खड़े हैं, एक बड़ी क़लम के ये विचार नि:सन्देह हमें कुछ रौशनी देंगे।
Sadhu Se Sevak
- Author Name:
Manjeet Negi
- Book Type:

- Description: ‘साधु से सेवक’ पुस्तक मोदी के युवा अवस्था के उन दो वर्षों की कहानी है, जब युवा नरेंद्र सांसारिक मोहमाया से दूर हिमालय में साधु बनने की खोज में भटक रहा था। कोलकाता में रामकृष्ण मिशन के बेलूर मठ से होते हुए ऋषिकेश के दयानंद आश्रम और फिर बाबा केदार की शरण में जाकर नरेंद्र मोदी की तृष्णा शांत हुई। ऋषिकेश के स्वामी दयानंद गिरि से पी.एम. मोदी का पुराना रिश्ता था। स्वामी दयानंद का मोदी के जीवन पर गहरा प्रभाव है। प्रचारक जीवन में मोदी जब ऋषिकेश आए और 1981 में स्वामी से जुड़ गए, तब से स्वामीजी मार्गदर्शन में सेवा-स्वच्छता को अपने जीवन में आत्मसात् किया। बाल्यकाल से ही हिमालय के प्रति नरेंद्र मोदी के मन में विशेष आकर्षण था। वह आए दिन साधु-संतों और श्रद्धालुओं से बाबा केदार, बदरीधाम, कैलाश मानसरोवर समेत हिमालयी क्षेत्र के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण दिशा में आनेवाले सभी पावन धार्मिक तीर्थों के विषय में रुचि लेकर सुनते थे। इन तीर्थों की महिमा और वहाँ के सौंदर्य की चर्चा सुनकर नरेंद्र मन-ही-मन में वहाँ की यात्रा कर लेते थे। यह पुस्तक नरेंद्र मोदी के आध्यात्मिक जीवन से जुड़े अनसुने पहलुओं को उजागर करने का प्रयास है। ‘साधु से सेवक’ पुस्तक युवावस्था में दो वर्षों की उस आध्यात्मिक यात्रा का सार है, जो साधु बनने की खोज में उन्हें यहाँ ले आई थी। यहीं से मिली प्रेरणा ने उनके व्यक्तित्व को हिमालय सा दृढ़ बनाया है।
Learn To Earn
- Author Name:
Peter Lynch +2
- Book Type:

- Description: अनेक गुंतवणूकदारांना, अगदी शेअर बाजारात भरीव कामगिरी केलेल्या गुंतवणूकदारांनादेखील, हा शेअर बाजार नक्की कसे काम करतो याबद्दल सखोल माहिती नसते. म्हणूनच आपल्या अर्थव्यवस्थेच्या मूलभूत बाबी काय आहेत आणि शेअर बाजाराशी त्यांचा कसा संबंध आहे, यासारख्या गुंतवणुकीबाबतच्या प्राथमिक गोष्टी शालेय शिक्षणात शिकवल्या जाव्यात, असा आग्रह लिंच आणि रोथचाइल्ड धरतात. प्रत्येक तरुण व्यक्तीसमोर आपल्या महाविद्यालयीन शिक्षणासाठी पैसे जमा करायचे, की आपल्या वृद्धापकाळातील अर्थार्जनाची सोय करायची अशी द्विधा मनस्थिती असते, मात्र गुंतवणुकीचे मूलभूत प्रशिक्षण त्याला वेळीच मिळाले असते, तर त्याच्या पुढे असा प्रश्न उभा राहिला नसता. गुंतवणुकीच्या संधी सर्वत्र असतात, मात्र त्या शोधण्याची दृष्टी असायला हवी. शालेय शिक्षणामध्ये फारसे हुशार नसलेल्या विद्यार्थ्यालादेखील नायके, रीबॉक, मॅकडोनाल्ड्स, द गॅप आणि बॉडी शॉप यासारख्या ब्रँड्सची माहिती असते. अमेरिकेत प्रत्येक किशोरवयीन मुलाने कोका-कोला किंवा पेप्सीची चव एकदा तरी चाखलेली असते, मात्र त्यापैकी किती जणांनी या दोन्हीपैकी एका कंपनीचा समभाग विकत घेतला असेल किंवा या कंपन्यांचा समभाग विकत घेता येतो, याची किमान माहिती तरी त्याला असेल? प्रत्येक विद्यार्थी अमेरिकी इतिहासाचा अभ्यास करतो. मात्र, आपला देश हा युरोपीय वसाहतवाद्यांनी घडवला आहे, या वसाहतवाद्यांना इंग्लंड आणि हॉलंड या देशातील पब्लिक कंपन्यांनी वित्तपुरवठा केला होता आणि या पब्लिक कंपन्यांच्या मूलभूत तत्त्वांमध्ये गेल्या तीनशे साडेतीनशे वर्षात फारसा बदल झालेला नाही हे त्यातील मोजयाच विद्यार्थ्यांना ठाऊक असते. आबालवृद्धांना रस वाटेल अशा सहज सोप्या शैलीत लिंच आणि रोथचाइल्ड यांनी ‘लर्न टू अर्न’ या पुस्तकात शेअर बाजारातल्या मूलभूत बाबींचे ज्ञान उपलब्ध करून दिले आहे. वर्तमानपत्रातल्या शेअर बाजाराचे तक्ते कसे वाचावेत, कंपन्यांचे वार्षिक अहवाल कसे समजून घ्यावेत आणि प्रत्येकाने शेअर बाजार समजून घेणे का गरजेचे आहे? तसेच केवळ गुंतवणूक कशी करावी यावर भाष्य करून हे पुस्तक थांबत नाही, तर वाचकांना गुंतवणूकदारासारखा विचार करायलादेखील प्रवृत्त करते. Learn To Earn: लर्न टू अर्न पीटर लिंच आणि जॉन रोथचाइल्ड Peter Lynch and John Rothchild अनुवाद: डॉ. नितीन हांडे Translator: Dr. Nitin Hande
Kattarata Jitegi Ya Udarata
- Author Name:
Prem Singh
- Book Type:

-
Description:
यह पुस्तक भारतीय राजनीति और समाज को पिछले दो दशकों से मथनेवाली साम्प्रदायिकता की परिघटना को समझने और उसके मुक़ाबले की प्रेरणा और सम्यक् समझ विकसित करने के उद्देश्य से लिखी गई है। चार खंडों—वाजपेयी (अटल बिहारी), संघ सम्प्रदाय, जॉर्ज फर्नांडीज, गुराज—में विभक्त इस पुस्तक में साम्प्रदायिकता के चलते पैदा होनेवाली कट्टरता, संकीर्णता और फासीवादी प्रवृत्तियों और उन्हें अंजाम देने में भूमिका निभानेवाले नेताओं, संगठनों, शक्तियों आदि का घटनात्मक ब्यौरों सहित विवेचन किया गया है। इसमें मुख्यतः साम्प्रदायिकता के राष्ट्रीय जीवन के सामाजिक-सांस्कृतिक-शैक्षिक-अकादमिक आयामों पर पड़नेवाले दुष्प्रभावों/दुष्परिणामों की भी शिनाख़्त और आकलन किया गया है। साम्प्रदायिकता की विचारधारा भूमंडलीकरण की विचारधारा के साथ मिलकर देश की आर्थिक और राजनैतिक सम्प्रभुता पर गहरी चोट कर रही है। पुस्तक में दोनों के गठजोड़ का उद्घाटन करते हुए, उसके चलते दरपेश नवसाम्राज्यवादी ख़तरे के प्रति आगाह किया गया है।
पुस्तक की विषयवस्तु साम्प्रदायिकता और उससे होनेवाले बिगाड़ को चिन्हित करने तक सीमित नहीं है। इसमें धर्मनिरपेक्षता, उदारता, लोकतंत्र और समाजवाद की विचारधारा के पक्ष में लगातार जिरह की गई है। इस रूप में यह सरोकारधर्मी और हस्तक्षेपकारी लेखन का सशक्त उदाहरण है।
भाषा की स्पष्टता और शैली की रोचकता पुस्तक को सामान्य पाठकों के लिए पठनीय बनाती है।
Aansu Aur Raushani : Alok Dhanwa Se Samvad
- Author Name:
Pankaj Chaturvedi
- Book Type:

- Description: कवि-आलोचक पंकज चतुर्वेदी की पुस्तक ‘आँसू और रौशनी’ दरअस्ल दो कवियन की वार्ता है। यह रूखा-सूखा साक्षात्कार नहीं, वरन् दो संवेदनशील सृजनधर्मियों का संवाद है; जिसमें हम अपने प्रिय साथी कलाकार से वह सब बाँट लेना चाहते हैं, जो हमें रसज्ञ की तरह अभिभूत करता है। आलोकधन्वा जैसे ख़ामोश कवि को थोड़ा-बहुत खोलना भी धैर्य, धृति और साधना की माँग करता है। पंकज ने वे एकान्त क्षण पकड़े, जब आलोक संवाद की सृजन-चेतना में जाग्रत थे। उनकी वह भीगी भावप्रवण आवाज़ इस पुस्तक में सुनाई दे रही है, जो घास के एक तिनके का भी कम्पन पहचान लेती है। पंकज चतुर्वेदी आलोकधन्वा की विह्वलता, वाग्वैभव और तरलता को ज्यों-का-त्यों हम तक लेकर आए हैं इस अनूठी पुस्तक में। संवाद दो कवियों का परस्पर मिलना भी है और खुलना भी। वे जीवन-संग्राम से बच नहीं रहे, उसी में रहते हुए रच रहे हैं। पंकज चतुर्वेदी की युवा उत्कंठाओं को पहचानते हुए आलोकधन्वा उन्हें अपने सृजन-कक्ष की मेज़ तक ले जाकर दिखा देते हैं और कहते हैं, “अच्छे लोग वही हुए, जो अन्याय के ख़िलाफ़ लड़े, उनसे ख़ूबसूरत कोई नहीं है।” एक ऐसे समय में, जब संवाद मन्थर पड़ रहा है, ‘आँसू और रौशनी’ के प्रकाशन का स्वागत है। —ममता कालिया, कथाकार
Aksharon Ki Kahanee
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

- Description: Aksharon Ki Kahanee-language teaching
Meghdoot : Ek Antaryatra
- Author Name:
Prabhakar Shrotriya
- Book Type:

- Description: ‘मेघदूत’ एक कालजयी कृति ही नहीं प्रेम, प्रकृति और निसर्ग के प्रति कालिदास की अनन्य प्रपत्ति भी है। अपने विशिष्ट स्वर, स्वरूप और न्यास में यह काव्य एक अप्रतिम एवं इन्द्रधनुषी भाव-वितान है, जिसमें कृतिकार की अपूर्व परिकल्पना, मौलिक उद्भावना तथा बिम्बों और वर्णों की जीवन्त छवियाँ सहज ही देखी जा सकती हैं। कालिदास ने अपनी यशस्वी कृति ‘मेघदूत’ के द्वारा जिस रूपक-राज्य का निर्माण किया था—पिछली दो सहस्राब्दियों से उसका निरन्तर विकास और विस्तार होता रहा है। विरही यक्ष के मनोजगत में विद्यमान एक आर्तप्रेमी के प्रणयोत्सुक प्रार्थी भाव को अनुषंग बनाकर—अपनी प्राण-प्रियतमा को भेजे जानेवाले विरहातुर सन्देश को कई रचनाकारों, भाष्यकारों और रूपान्तरकारों और चित्रकारों ने अपने-अपने ढंग से, अलग-अलग शैलियों में निरूपित किया है। प्रसंगानुरूप और प्रसंगान्तर परिदृश्य को अपने विरहकातर निवेदन से मुखर करनेवाली इस कालातीत रचना का अनुगायन और अनुकीर्तन न केवल सदियों से होता रहा है, बल्कि आधुनिक और समकालीन पीढ़ियाँ भी इसमें अपनी रचनात्मक भावांजलि लिए खड़ी रही हैं। अपनी सर्जनात्मक समग्रता के नाते और ‘क्लासिकी’ के गुणों से समृद्ध एवं समादृत ‘मेघदूत’ ने काव्य और काव्येतर माध्मयों के द्वारा सहृदय पाठकों, प्रेक्षकों, गायकों और समीक्षकों की क्षमता और आकांक्षाओं के अनुरूप सुदीर्घ रचना-प्रकिया एवं परम्परा को जीवित रखा है। इसी अनुक्रम में हिन्दी के सुपरिचित विद्वान, आलोचक, कवि एवं रचनाकार प्रभाकर श्रोत्रिय ने ‘मेघदूत’ के मार्मिक प्रसंगों, अछूते अनुषंगों—और सबसे बढ़कर—रचनाकार की विराट मनोभूमि का स्पर्श एवं अनुभावन अपनी विदग्ध रचना मनीषा के द्वारा किया है। ‘मेघदूत : एक अन्तर्यात्रा’ पुस्तक प्रेमी और प्रकृति के शाश्वत एवं चिरन्तन आधान को सुललित और सर्जनात्मक आयाम प्रदान करेगी—इसमें सन्देह नहीं।
Bhoolane Ke Viruddha
- Author Name:
Rameshchandra Shah
- Book Type:

-
Description:
रचना और आलोचना का सम्बन्ध सनातन है और दोनों ही एक-दूसरे की पूरक हैं। रचना यदि जीवन का भरपूर और संश्लिष्ट संवेदन है तो आलोचना उसका बौद्धिक समतुल्य। पाठक इन दोनों से जुड़ता है, लेकिन रचना से गुज़रना उसकी पहली शर्त है। इससे रचना और पाठक के बीच जो सम्बन्ध बनता है, आलोचना उसे और अधिक गहरा और तर्कसंगत बनाने का कार्य करती है। सुपरिचित कवि, कथाकार और साहित्य-समीक्षक रमेशचन्द्र शाह की यह कृति रचना और आलोचना के इसी सम्बन्ध-निर्वाह की सार्थक परिणति है।
लेखक के शब्दों में, आलोचना स्वैरिणी नहीं, बल्कि स्वाधीन बुद्धि की उत्तरदायी गतिविधि है। उसकी यह भी मान्यता है कि ''साहित्य की दुनिया हमारे व्यापक सांस्कृतिक दृश्य का ही एक हिस्सा—गोकि सबसे अन्दरूनी और सबसे गझिन बुनावटवाला हिस्सा—है।’’ इस सन्दर्भ में इस कृति का 'आलोचना, परम्परा और इतिहास’ नामक पहला निबन्ध अत्यन्त महत्त्वपूर्ण निष्कर्षों तक ले जाता है।
पूरी पुस्तक 'प्राचीन और नवीन’ तथा 'अस्ति और स्वराज’ नामक दो उपशीर्षकों में विभाजित है। इनमें जो पन्द्रह निबन्ध संग्रथित हैं, उनमें एक ओर जहाँ लेखक ने 'भारत-भारती’ के माध्यम से मैथिलीशरण गुप्त का और छायावाद की प्रासंगिकता पर विचार करते हुए प्रसाद का पुनर्मूल्यांकन किया है, वहीं उसने अज्ञेय, निर्मल वर्मा, मलयज और श्रीकान्त वर्मा इत्यादि परवर्ती और समकालीन लेखकों की रचनात्मकता की गम्भीर विवेचना की है। दूसरे खंड के अन्तिम निबन्ध में उसने अनुवादजीवी संस्कृति और वैचारिक स्वराज का सवाल उठाकर पाठकीय चेतना को गहरे तक झकझोरा है। संक्षेप में, लेखक के ही शब्दों का सहारा लें तो इस कृति में “पिछले दसेक वर्षों के दौरान लिखी गई कुछ समीक्षाएँ, पुनर्मूल्यांकन और कुछ स्वतंत्र विवेचनात्मक लेख भी संकलित हैं। शुद्ध साहित्यिक चिन्तन की आलोचना को भी शामिल करने का औचित्य, आशा है, मर्मज्ञ पाठक स्वयं ही इस पुस्तक के क्रम-विन्यास से गुजरते हुए समझ सकेंगे और संकलित सामग्री के व्यापक वैविध्य का ही नहीं, उसकी अन्त:संगति का भी पर्याप्त आश्वासन पा सकेंगे।”
Darvin Aani Jivsrushtiche Rahasya
- Author Name:
Nanda Khare +1
- Book Type:

- Description: उत्क्रांतीचा सिद्धान्त ही मानवी इतिहासातील सर्वांत महत्त्वपूर्ण संकल्पना आहे. जीवनाच्या जवळपास प्रत्येक क्षेत्रात मूलभूत परिवर्तन घडवून आणणारा हा सिद्धान्त डार्विनने मांडला, त्याला आता दीडशे वर्षे झाली आहेत. आजच्या गतिमान जगात ह्या सिद्धान्ताचं स्थान काय? आज तो कालबाह्य ठरला आहे का? त्याची पुनर्मांडणी करायला हवी का? माणसाच्या विकासात अधिक महत्त्वाचे काय, नैसर्गिक प्रकृती, की पालनपोषण? मार्क्सवाद आणि स्त्रीवाद या विसाव्या शतकातल्या महत्त्वाच्या विचारप्रणालींवर या सिद्धान्ताने काय प्रभाव पाडला? भारतीय विचारपरंपरेवर डार्विनचा काही परिणाम झाला का? जातिव्यवस्था आणि शेतीवरील अरिष्ट या भारताच्या दृष्टीनं कळीच्या मुद्यांबाबत हा सिद्धान्त काय सांगतो? रंगभेद आणि जातिभेद यांचं तो समर्थन करतो का? वैज्ञानिक शेती ही उत्क्रांतीविरोधी आणि पर्यायानं निसर्गविरोधी आहे का? गेल्या वीस-पंचवीस वर्षांत उदयाला आलेल्या मेंदूजैवविज्ञानाच्या अनेक अंगांना हा सिद्धान्त कसा काय लागू पडू शकतो ? अशा अनेक प्रश्नांची उत्तरं शोधणारा ग्रंथ. महाराष्ट्रातल्या नव्या पिढीतल्या बारा विद्वान आणि व्यासंगी लेखकांनी सिद्ध केलेला. - सुबोध जावडेकर Darvin Aani Jivsrushtiche Rahasya : Nanda Khare,Ravindra Rukmini Pandharinath डार्विन आणि जीवसृष्टीचे रहस्य : संपादक : रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ । नंदा खरे
Pakistan: Balochistan Ki Paheli
- Author Name:
Shri Tilak Devashar
- Book Type:

- Description: تلک دیواشیر نے 2014 میں خصوصی سکریٹری کے طور پر کابینہ سکریٹریٹ، حکومت ہند سے سبکدوش ہونے کے بعد لکھنا شروع کیا۔ وہ پاكستان کے موضوع پر دو وسیع پیمانے پر سراہی جانے والی کتابوں کے مصنف ہیں—پاكستان: کورٹنگ دی آبیس (2016) اور پاکستان: ایٹ دی ہیلم (2018)۔ کابینہ سکریٹریٹ میں اپنے پیشہ ورانہ کیریئر کے دوران، انھوں نے ہندوستان کے پڑوس سے متعلق سلامتی کے معاملات میں مہارت حاصل کی۔ سبکدوش ہونے کے بعد سے انھوں نے پاكستان اور افغانستان پر خصوصی توجہ کے ساتھ ہندوستان کے پڑوس میں گہری دلچسپی لینا جاری رکھی ہے۔ انھوں نے مختلف قومی اخبارات اور رسائل کے لیے مضامین لکھے ہیں اور وہ انڈیا ٹوڈے، ٹائمز ناؤ، سی این این نیوز18 اور راجیہ سبھا ٹی وی جیسے سرکردہ نیوز چینلوں پر ٹی وی شوز میں بھی نظر آئے ہیں۔ دیواشیر نے اپنی اسکول کی تعلیم میو کالج، اجمیر سے حاصل کی، اور انھوں نے انڈرگریجویٹ سطح پر سینٹ اسٹیفن کالج، دہلی اور پوسٹ گریجویٹ سطح پر دہلی یونیورسٹی سے تاریخ میں تعلیم حاصل کی۔ وہ فی الحال نیشنل سکیورٹی ایڈوائزری بورڈ (این ایس اے بی) کے ممبر اور وویکانند انٹرنیشنل فاؤنڈیشن (وی آئی ایف) میں مشیر ہیں۔
Bihar Ke Vyanjan – Sanskriti Aur Itihas
- Author Name:
Ravishankar Upadhyay
- Book Type:

- Description: बिहारी खानपान का बेहद समृद्ध इतिहास रहा है. मगध साम्राज्य में जब बिहार लंबे समय तक सत्ता का केंद्र रहा तो यहां से शासन करनेवाले महान सम्राटों ने यहां के व्यंजनों को राज्याश्रय प्रदान किया. इसी कारण प्राचीन राजगृह के इर्दगिर्द आज भी व्यंजनों पर निर्भर कस्बे मौजूद हैं, चाहे वह खाजा के बेमिसाल स्वाद वाला सिलाव हो या पेड़ा बनाने वाला निश्चलगंज. गया में चावल और तिल के साथ प्रयोग कर तिलवा-तिलकुट से लेकर अनरसा जैसा प्रयोगधर्मी स्वाद बनाया गया. प्राचीन पाटलिपुत्र यानी आज का पटना देख लीजिए. यहां पर पुराने शहर में खुरचन, थोड़ी दूर पर बाढ़-बख्तियारपुर और धनरूआ में लाई, तो मनेरशरीफ में नुक्ती वाले लड्डू हैं. बड़हिया में रसगुल्ले हैं. भोजपुर इलाके के उदवंतनगर में खुरमा, ब्रह्मपुर में गुड़ई लड्डू, गुड़ की ही जलेबी तो बक्सर में सोनपापड़ी है. थावे, गोपालगंज चले जाइए तो वहां पर आपको पेडुकिया मिलेगा. मिथिला के दही- चूड़ा से लेकर अरिकंचन और बेसन के गट्टे की सब्जी के क्या कहने! ये उदाहरण तो बस बानगी हैं, आप राज्य के जिस किसी हिस्से में चले जाइए वहां पर आपको कोई न कोई बेमिसाल स्वाद मिल जाएगा. इस किताब में आपको बिहार की स्वाद परंपरा का लिखित इतिहास और सांस्कृतिक प्रयोग के अनुभव पढ़ने को मिलेंगे जो चौथी शताब्दी से शुरू होकर आजतक जारी है.
Padchihna Bulate Hain
- Author Name:
Devendra Swarup
- Book Type:

- Description: प्रो. देवेंद्र स्वरूप—इतिहासकार, पत्रकार, अध्यापक, चिंतक, लेखक—72 वर्ष के सार्वजनिक जीवन में हजारों लोगों से संपर्क; सभी से आत्मीय संबंध पर उनमें से कुछ से अधिक प्रभावित। उनके द्वारा लिखे गए कुछ संस्मरणों में किसी व्यक्ति पर ही नहीं, वरन् तात्कालिक परिस्थितियों एवं कालखंड पर भी टिप्पणी होती हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की व्यक्तित्व-निर्माण की पद्धति की झलक और इस निर्माणशाला से निकले लोगों द्वारा खड़े किए गए कुछ प्रकल्पों की जानकारी। सामाजिक एवं राष्ट्रीय कार्यों में जीवन खपाने वाली कुछ विभूतियों का परिचय। पठनीय ग्रंथ।
Nationalism
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Book Type:

- Description: Nationalism By Tagore Yes, this is the logic of the Nation. And it will never heed the voice of truth and goodness. It will go on in its ring-dance of moral corruption, linking steel unto steel, and machine unto machine; trampling under its tread all the sweet flowers of simple faith and the living ideals of man. Nationalism is a cruel epidemic of evil that is sweeping over the human world of the present age. I do not for a moment suggest that Japan should be unmindful of acquiring modern weapons of self-protection. But this should never be allowed to go beyond her instinct of self-preservation. She must know that the real power is not in the weapons themselves, but in the man who wields those weapons.
Shrikrishnacharitra
- Author Name:
Bankim Chandra Chatterjee
- Book Type:

- Description: श्रीकृष्णचरित्र बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की मूलतः बांग्ला में इसी नाम से रचित कालजयी कृति का अनुवाद है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के वास्तविक चरित्र को ऐतिहासिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। गहन शोध और तर्कपूर्ण विश्लेषण के साथ, बंकिमचन्द्र ने श्रीकृष्ण को केवल एक पौराणिक नायक के रूप में नहीं बल्कि एक आदर्श मानव, दूरद्रष्टा राजनयिक और अलौकिक ज्ञान-सम्पन्न दार्शनिक के रूप में चित्रित किया है। लगभग 130 वर्ष पहले रची गई इस पुस्तक में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को कालानुक्रम में प्रस्तुत किया गया है। महाभारत, प्रमुख पुराणों तथा अन्य धार्मिक सन्दर्भों के प्रामाणिक उद्धरणों से समृद्ध यह पुस्तक प्राचीन और मान्य ग्रन्थों के आधार पर श्रीकृष्ण के जीवन, व्यक्तित्व-कृतित्व और उनकी शिक्षाओं को पुनर्परिभाषित करती है, जो भारतीय संस्कृति और नैतिकता के मूल्यों को सहजता से स्पष्ट करती हैं। इस कालजयी रचना की सामग्री तथा मूल शैली को बनाए रख कर, अपरिहार्य संशोधनों के साथ, इस अनूदित संस्करण को आधुनिक पाठकों के लिए अधिक प्रासंगिक बनाया गया है। निस्सन्देह यह कृति साहित्य, इतिहास, अध्यात्म, दर्शन और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए नितान्त पठनीय और अवश्य संग्रहणीय है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
5 out of 5
Book