Upbhokta Adaltein Swaroop Evam Sambhavnaen
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
About the book
अपार सम्भावनाओं से भरा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लगभग एक समानान्तर न्याय व्यवस्था का स्वरूप ग्रहण करता जा रहा है। उपभोक्ता इस क़ानून से अनभिज्ञ नहीं रह गया है तथापि इन अदालतों के स्वरूप, न्याय-प्रक्रिया आदि की विधिवत् जानकारी के लिए अभी अपेक्षित पद्धति विकसित नहीं हो पाई है। कुछ ग़ैर-सरकारी संस्थाएँ इस दिशा में मुखर हैं व इस अधिनियम के दैनंदिन सशक्तीकरण का बहुत श्रेय इन संस्थाओं को जाता है, किन्तु अब स्थिति यह नहीं रही कि केवल जन-जागृति से ही सन्तोष कर लिया जाए। आवश्यकता अब इस बात की भी है कि उपभोक्ता क़ानूनों की शिक्षा भी अब विधिवत् रूप से शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से दी जाए। इस आवश्यकता को सभी स्तरों पर अनुभव किया जा रहा है। इस पुस्तक के माध्यम से एक छोटा-सा प्रयास किया गया है कि हम उपभोक्ता के पास जा सकें, उन्हें यह सामान्य जानकारी दे सकें कि वास्तव में उपभोक्ता अदालतें हैं क्या? जब हम यह दावा करते हैं कि उपभोक्ता न्यूनतम ख़र्च करके बिना वकीलों के सहयोग के अपनी बात अपनी भाषा में स्वयं इस अदालत में रख सकता है तो उपभोक्ता के लिए पहली आवश्यकता यह जानने की हो जाती है कि कैसे और कहाँ? इन सभी प्रश्नों के समाधान के लिए इस पुस्तक को कैसे और कहाँ से ही प्रारम्भ किया गया है और फिर क्या-क्या, कितने विषय, कैसी शिकायतें—सब जानकारियों को सिलसिलेवार देने का प्रयास किया गया है।
Read more₹
225
180 20% off
Unavailable
Rachnaye membership
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format
100% Original
Fast Dispatch
Secure Payment
About the Book
अपार सम्भावनाओं से भरा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लगभग एक समानान्तर न्याय व्यवस्था का स्वरूप ग्रहण करता जा रहा है। उपभोक्ता इस क़ानून से अनभिज्ञ नहीं रह गया है तथापि इन अदालतों के स्वरूप, न्याय-प्रक्रिया आदि की विधिवत् जानकारी के लिए अभी अपेक्षित पद्धति विकसित नहीं हो पाई है। कुछ ग़ैर-सरकारी संस्थाएँ इस दिशा में मुखर हैं व इस अधिनियम के दैनंदिन सशक्तीकरण का बहुत श्रेय इन संस्थाओं को जाता है, किन्तु अब स्थिति यह नहीं रही कि केवल जन-जागृति से ही सन्तोष कर लिया जाए। आवश्यकता अब इस बात की भी है कि उपभोक्ता क़ानूनों की शिक्षा भी अब विधिवत् रूप से शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से दी जाए। इस आवश्यकता को सभी स्तरों पर अनुभव किया जा रहा है।
इस पुस्तक के माध्यम से एक छोटा-सा प्रयास किया गया है कि हम उपभोक्ता के पास जा सकें, उन्हें यह सामान्य जानकारी दे सकें कि वास्तव में उपभोक्ता अदालतें हैं क्या? जब हम यह दावा करते हैं कि उपभोक्ता न्यूनतम ख़र्च करके बिना वकीलों के सहयोग के अपनी बात अपनी भाषा में स्वयं इस अदालत में रख सकता है तो उपभोक्ता के लिए पहली आवश्यकता यह जानने की हो जाती है कि कैसे और कहाँ? इन सभी प्रश्नों के समाधान के लिए इस पुस्तक को कैसे और कहाँ से ही प्रारम्भ किया गया है और फिर क्या-क्या, कितने विषय, कैसी शिकायतें—सब जानकारियों को सिलसिलेवार देने का प्रयास किया गया है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2004
- Weight
- 197 grams
- ISBN-13
- UpbhoktaAdalteinSwaroopEvamSambhavnaenPaperBack
- Pages
- 151
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21 cm
- Language
- Hindi
Recommended for you
Bharatiya Bhasha Mein High Court Ki Vakalat
- Author Name:
Anoop Baranwal
- Book Type:

- Description:
भारतीय संविधान को लागू किए जाने के समय हमारे संविधान-निर्माताओं ने उम्मीद जताई थी कि ‘पाँच वर्ष बीतते-बीतते हिन्दी-राज्यों के हाईकोर्ट पूरी तरह हिन्दी में काम करना आरम्भ कर देंगे’ लेकिन संविधान-निर्माताओं द्वारा संकल्पित उस पाँच वर्ष की अवधि के 69 वर्ष बाद भी हम इस लक्ष्य से बहुत दूर हैं। ‘भारतीय भाषा में हाईकोर्ट की वकालत’ पुस्तक इस कठोर सचाई को रेखांकित करती है और इस लक्ष्य को यथाशीघ्र हासिल करने का एक व्यावहारिक मार्ग प्रस्तावित करती है। इस पुस्तक में हाईकोर्ट में दाखिल होने वाले इक्कीस अलग-अलग तरह के प्रचलित मुकदमों और दर्जनों प्रार्थना-पत्रों के बारे में बताया गया है। साथ ही उनका हिन्दी में मसौदा तैयार करने के तरीके भी दिए गए हैं। सिविल एवं आपराधिक क्षेत्र से सम्बन्धित जनहित याचिका हो या रिट याचिका, अपील हो या निगरानी या निरीक्षण याचिका, 482 हो या जमानत या अवमानना, ऐसे सभी मुकदमों के संलग्न मसौदे कि हिन्दी में भी मुकदमा तैयार करना आसान है। यह कृति, उस हीनभावना को दूर करती है, जो हम हाईकोर्ट में अपनी ही भाषाओं यथा, हिन्दी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, बांग्ला, उड़िया, असमिया, तमिल, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम इत्यादि के प्रति महसूस करते हैं और जिसके कारण हम आजादी के 75 वर्ष बाद आज भी न्यायालयों में अंग्रेजी की भाषाई अधीनता में अपना कर्मजीवन जीने के आदती-से हो गए हैं।
Bachapan Se Balatkar
- Author Name:
Arvind jain
- Book Type:

- Description:
महिला क़ानूनों के जानकार और समाज तथा अदालत दोनों जगह स्त्री-सम्मान की सुरक्षा पर पैनी और सतर्क निगाह रखनेवाले लेखक व न्यायविद् अरविन्द जैन की यह पुस्तक बलात्कार के सामाजिक, वैधानिक और नैतिक पहलुओं को गहरी और मुखर न्याय-संवेदना के साथ देखती है। इस किताब की मुख्य चिन्ता यह है कि समाज के सांस्कृतिक चौखटे में जड़ी स्त्री-देह घरों और घरों से बाहर जितनी वध्य है, दुर्भाग्य से बलात्कार की शिकार हो जाने के बाद क़ानून की हिफ़ाज़त में भी उससे कुछ ज़्यादा सुरक्षित नहीं है। न सिर्फ़ यह कि समाज के पुरुष-वर्चस्व की छाया क़ानूनी प्रावधानों में भी न्यस्त है, बल्कि उनको कार्यान्वित करनेवाले न्यायालयों, जजों, वकीलों आदि की मनो-सांस्कृतिक संरचना में भी जस की तस काम करती दिखाई देती है। पुस्तक में पन्द्रह आलेख हैं। परिशिष्ट में कुछ ज़रूरी जानकारियाँ हैं। विशेषता यह है कि अरविन्द जैन ने पूरी सामग्री को व्यापक स्त्री-विमर्श से जोड़ा है। न्याय और अस्मिता रक्षा के लिए प्रतिबद्ध उनकी विचारधारा भाषा को नया तेवर देती है।
Nyayapalika Kasauti Par
- Author Name:
Kamlesh Jain +1
- Book Type:

- Description:
‘न्यायपालिका कसौटी पर’ अंग्रेज़ी में छपी लेखिका की पहली पुस्तक ‘ज्यूडिशियरी ऑन ट्रायल’ का हिन्दी अनुवाद है। यह पुस्तक ‘क्रिमिनल ज्यूडिशियल सिस्टम’ की ढहती दीवारों को लेकर चिन्तित आम और ख़ास सभी लोगों का द्वार खटखटाती है। जेलों में क़ैदियों का जीवन कठिन होता जा रहा है। यह सच वकीलों एवं मुवक्किलों के लिए प्रायः चिन्ता का विषय रहा है। न्यायालयों ने भी यदा-कदा इस विषय पर अपनी चिन्ता ज़ाहिर की है। जेल का उद्देश्य क़ैदी में इस क़दर ‘सुधार’ ला देना है कि वह सज़ा के बाद एक सामान्य नागरिक का जीवन जी सके। पर यह दुर्भाग्य ही है कि सारी चेष्टाओं के बावजूद क़ैदियों का जीवन बद से बदतर होता जा रहा है। यही वह जगह है जहाँ निर्दोष एवं कठोर अपराधी एक-दूसरे से रूबरू होते हैं। यही वजह है कि जेलों में नियम एवं मानवीय अधिकारों का पालन और भी ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है। पेशे से वकील कमलेश जैन ने जेल के बारे में गम्भीरता से सोचा है। वे मानती हैं कि क़ैदी भी उसी ईश्वर की सन्तान हैं जिसने हम सबको बनाया। उन्होंने क़ैदियों के नज़रिये से सारे ‘क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ को परखा है और इसके चतुर्दिक ह्रास को रेखांकित करते हुए कुछ सुझाव भी दिए हैं। ‘न्यायपालिका कसौटी पर’ उन क़ैदियों के लिए है जो ऐसी परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं जहाँ ‘सुधार’ अनुपस्थित है, सिर्फ़ दमन ही दमन है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए भी है जिनकी मानवीय अधिकारों और मानवीय न्याय में गहरी दिलचस्पी है
Soochana Ka Adhikar
- Author Name:
Arvind Kejariwal +2
- Book Type:

- Description:
राजशाही में व्यक्ति और समाज के पास कोई अधिकार था, तो सिर्फ़ इतना कि वह सत्तावर्ग की आज्ञा का चुपचाप पालन करे। राजा निरंकुश था, सर्वशक्तिमान। उस पर कोई उँगली नहीं उठा सकता था, न उसे किसी चीज़ के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता था। औद्योगिक क्रान्ति तथा उदारवाद के आगमन और लोकतांत्रिक शासन पद्धतियों के प्रारम्भ के साथ ही नागरिक स्वतंत्रता की अवधारणा आई। इसके बावजूद द्वितीय विश्वयुद्ध तक प्रजातांत्रिक देशों में भी शासनतंत्र में ‘गोपनीयता’ एक स्वाभाविक चीज़ बनी रही। विभिन्न दस्तावेज़ों में क़ैद सूचनाओं को ‘गोपनीय’ अथवा ‘वर्गीकृत’ करार देकर नागरिकों की पहुँच से दूर रखा गया। लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के बावजूद राजनेताओं एवं अधिकारियों में स्वयं को ‘शासक’ या ‘राजा’ समझने की प्रवृत्ति हावी रही। यही शासकवर्ग आज भारतीय लोकतंत्र का असली मालिक है। नागरिक का पाँच साल में महज़ एक वोट डाल आने का बेहद सीमित अधिकार इतना निरुत्साहित करनेवाला है कि चुनावों में बोगस वोट न पड़ें तो मतदान का प्रतिशत तीस-चालीस फ़ीसदी भी न पहुँचे। यही कारण है कि अक्टूबर 2005 से लागू सूचनाधिकार लोकतांत्रिक राजा की सत्ता के लिए गहरे सदमे के रूप में आया है। राजनेता और नौकरशाह हतप्रभ हैं कि इस क़ानून ने आम नागरिक को लगभग तमाम ऐसी चीज़ों को देखने, जानने, समझने, पूछने की इजाज़त दे दी है, जिन पर परदा डालकर लोकतंत्र को राजशाही अन्दाज़ में चलाया जा रहा था। इस पुस्तक में संकलित उदाहरणों में आप देख पाएँगे कि किस तरह लोकतांत्रिक राजशाही तेज़ी से अपने अन्त की ओर बढ़ रही है। साथ ही इस पुस्तक में यह भी बताया गया है कि हम अपने इस अधिकार का प्रयोग कैसे करें।
Samaan Nagrik Sanhita : Chunautiyan Aur Samaadhan
- Author Name:
Anoop Baranwal
- Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बने धर्मनिरपेक्ष क़ानूनों का समान नागरिक संहिता के सन्दर्भ में महत्त्व; अनुच्छेद 44 पर संविधान सभा में किए गए बहस की प्रासंगिकता; सुप्रीम कोर्ट द्वारा समान नागरिक संहिता के पक्ष में दिए गए निर्णयों के महत्त्व; नीति-निर्माताओं द्वारा हिन्दू क़ानून (1955) या भरण-पोषण क़ानून (1986) या तीन तलाक़ क़ानून (2017) बनाते समय और विधि आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट (2018) प्रस्तुत करते समय खो दिए गए अवसर के प्रभाव का विस्तार से विश्लेषण किया गया है। विश्व के प्रमुख सिविल संहिताओं जैसे फ्रांस, जर्मन, स्विस, टर्की, पुर्तगाल, गोवा सिविल संहिता का उल्लेख करते हुए पुस्तक में 'इक्कीस सूत्री मार्गदर्शक सिद्धान्त' का प्रतिपादन किया गया है। इसके आधार पर एक सर्वमान्य 'भारतीय सिविल संहिता' बनाया जा सकता है। संविधान निर्माताओं की मंशा के अनुरूप प्रस्तावित समान नागरिक संहिता को व्यापकता के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिसमें व्यक्ति, परिवार एवं सम्पत्ति सम्बन्धी विषयों के साथ राष्ट्रीयता सम्बन्धी विषय शामिल हैं। पुस्तक में 'भारत राष्ट्र हमारा' के रूप में राष्ट्रगान, 'चक्रध्वज' के रूप में राष्ट्रीय ध्वज के अतिरिक्त राष्ट्रभाषा, राष्ट्रीय पर्व और राष्ट्रीय दिवस, राष्ट्रीय सम्मान, भारतीय नागरिकता रजिस्टर, राष्ट्रपरक उपनाम जैसे विषयों की संविधान के अनुरूप व्यापक दृष्टिकोण के साथ व्याख्या की गई है। भारत में लागू सभी व्यक्तिगत क़ानूनों; यथा—हिन्दू क़ानून, मुस्लिम क़ानून, ईसाई क़ानून, पारसी क़ानून में मौजूद सभी विसंगति वाले विषयों जैसे बहुविवाह, विवाह-उम्र, मौखिक विवाह-विच्छेद (तलाक़), हलाला, उत्तराधिकार, वसीयत, गोद, अवयस्कता, जनकता, दान, मेहर, भरण-पोषण, महिलाओं की सम्पत्ति में अधिकार, आर्थिक अराजकता का विश्लेषण कर इनका धर्मनिरपेक्ष समाधान इस पुस्तक में दिया गया है।
Teen Talaq Ki Mimansa
- Author Name:
Anoop Baranwal
- Book Type:

- Description:
तलाक एवं इससे जुड़े विषय—हलाला, बहुविवाह की पवित्र क़ुरान और हदीस के अन्तर्गत वास्तविक स्थिति क्या है? वैश्विक पटल पर, ख़ास तौर से मुस्लिम देशों में तलाक से सम्बन्धित कानूनों की क्या स्थिति है? भारत में तलाक की व्यवस्था के बने रहने के सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभाव क्या हैं? महिलाओं के सम्पत्ति में अधिकार से वंचित बने रहने का तलाक से क्या सम्बन्ध हैं ? तलाक के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट के विचारों की क्या प्रासंगिकता है? धार्मिक आस्था एवं व्यक्तिगत कानून के मूल अधिकार के होने या न होने का तलाक पर क्या प्रभाव है? कांग्रेस सरकार द्वारा तलाक़ोपरान्त भरण-पोषण पर और भाजपा सरकार द्वारा तीन तलाक पर लाए गए कानून के क्या प्रभाव हैं? तलाक की समस्या का भारतीय परिपेक्ष्य में समाधान क्या है? तलाक से जुड़े ऐसे सवालों के सभी पहलुओं पर विश्लेषण करने का प्रयास इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है। ब्रिटिश हुकूमत द्वारा शरीयत अनुप्रयोग कानून, 1937 के माध्यम से जिस धार्मिक दुराग्रह का जहर घोलने का प्रयास किया गया था, उससे मुक्ति दिलाने में हमारे नीति-निर्माता 68 वषों बाद भी असफल रहे हैं। जबकि संविधान-निर्माताओं द्वारा इससे मुक्ति का रास्ता बताया गया है। वह है धर्मनिरपेक्षता के आईने से एक यूनिफॉर्म सिविल संहिता बनाकर लागू करने का रास्ता। हम सब इस रास्ते की ओर आगे तो बढे, किन्तु महज पाँच वर्ष बाद ही हिन्दू कानून में सुधार पर आकर अटल गए। मुस्लिम, ईसाई सहित सभी धर्मों के व्यक्तिगत कानूनो में सुधार कर एक समग्र व सर्वमान्य सिविल संहिता बनाने की इच्छाशक्ति नहीं जुटा सके, जिसका खामियाजा इस देश को भुगतते रहना होता है। भारत में तीन तलाक की समस्या का मूल इसी में छिपा है, जिसका विश्लेषणात्मक अध्ययन करना भी इस पुस्तक का विषय है ।
Aurat Hone Ki Saza
- Author Name:
Arvind jain
- Book Type:

- Description:
पाठकों को यह पढ़कर बेहद आश्चर्य होगा कि भारतीय क़ानून के किसी भी अधिनियम में माँ, माता, जननी, यानी मदर को परिभाषित नहीं किया गया है। द जेनेरल क्लासेस एक्ट की धारा 3, अप-धारा 20 में बाप, पिता यानी ‘फादर’ को तो परिभाषित किया गया है, लेकिन माँ को नहीं। माँ को परिभाषित करने की आवश्यकता नहीं थी या क़ानून निर्माता पुरुषों ने जानबूझकर इसे भुला दिया? ऐसा क्यों और कैसे हुआ—कहना कठिन है। शायद इसलिए कि माँ एक निश्चित सत्य है और पिता मात्र अनुमान या अनिश्चित तथ्य, जिसे परिभाषित करना अनिवार्य है। कुछ समय पहले सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति डॉ. ए.एस. आनन्द और फसौद्दीन के सामने यह गम्भीर प्रश्न आ खड़ा हुआ कि माँ शब्द की परिभाषा में, सौतेली माँ भी शामिल है? क्या आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 125 के अन्तर्गत सौतेली माँ को भी अपने सौतेले बेटे से गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार है या नहीं?
RTI Kaise Aayee!
- Author Name:
Aruna Roy +1
- Book Type:

- Description:
‘‘ब्यावर की गलियों से उठकर राज्य की विधानसभा से होते हुए संसद के सदनों और उसके पार विकसित होते एक जन आन्दोलन को मैंने बड़े उत्साह के साथ देखा है। यह पुस्तक, अपनी कहानी की तर्ज पर ही जनता के द्वारा और जनता के लिए है। मैं ख़ुद को इस ताक़तवर आन्दोलन के एक सदस्य के रूप में देखता हूँ।’’ —कुलदीप नैयर; मूर्धन्य पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता। ‘‘यह कहानी हाथी के ख़िलाफ़ चींटियों की जंग की है। ‘एमकेएसएस’ ने चींटियों को संगठित करके राज्य को जानने का अधिकार क़ानून बनाने के लिए बाध्य कर डाला। गोपनीयता के नाम पर हाशिये के लोगों को हमेशा अपारदर्शी व सत्ता-केन्द्रित राज्य का शिकार बनाया गया लेकिन वह ज़मीन की ताक़त ही थी जिसने संसद को यह क़ानून गठित करने को प्रेरित किया जैसा कि हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित है, यह राज्य ‘वी द पीपल’ (जनता) के प्रति जवाबदेह है। पारदर्शिता, समता और प्रतिष्ठा की लड़ाई आज भी जारी है...।’’ —बेजवाड़ा विल्सन; ‘सफ़ाई कर्मचारी आन्दोलन’ के सह-संस्थापक, ‘मैग्सेसे पुरस्कार’ से सम्मानित। ‘‘यह एक ऐसे क़ानून के जन्म और विकास का ब्योरा है जिसने इस राष्ट्र की विविधताओं और विरोधाभासों को साथ लेते हुए भारत की जनता के मानस पर ऐसी छाप छोड़ी है जैसा भारत का संविधान बनने से लेकर अब तक कोई क़ानून नहीं कर सका। इसे मुमकिन बनानेवाली माँगों और विचारों के केन्द्र में जो भी लोग रहे, उन्होंने इस परिघटना को याद करते हुए यहाँ दर्ज किया है...यह भारत के संविधान के विकास के अध्येताओं के लिए ही ज़रूरी पाठ नहीं है बल्कि उन सभी महत्त्वाकांक्षी लोगों के लिए अहम है जो इस संकटग्रस्त दुनिया के नागरिकों के लिए लोकतंत्र के सपने को वास्तव में साकार करना चाहते हैं।’’ —वजाहत हबीबुल्ला; पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त, केन्द्रीय सूचना आयोग। ‘‘देश-भर के मज़दूरों और किसानों के लिए न्याय व समता के प्रसार में बीते वर्षों के दौरान ‘एमकेएसएस’ का काम बहुमूल्य रहा है। इस किताब को पढऩा एक शानदार अनुभव से गुज़रना है। यह आरम्भिक दिनों से लेकर अब तक क़ानून के विकास की एक कहानी है। इस कथा में सक्रिय प्रतिभागी जो तात्कालिक अनुभव लेकर सामने आते हैं, वह आख्यान को बेहद प्रासंगिक और प्रभावी बनाता है।’’ —श्याम बेनेगल; प्रतिष्ठित फ़िल्मकार और सामाजिक रूप से प्रतिबद्ध नागरिक। ‘‘हाल के वर्षों में आरटीआइ सर्वाधिक अहम क़ानूनों में एक रहा है। इसे यदि क़ायदे से लागू किया जाए तो इसका इस्तेमाल शहरी और ग्रामीण ग़रीबों को उनकी ज़िन्दगी के बुनियादी हक़ दिलवाने और कुछ हद तक सामाजिक न्याय सुनिश्चित कराने में किया जा सकता है।’’ —रोमिला थापर; सुप्रसिद्ध इतिहासकार।
Prem Ke Pahle Basant Me
- Author Name:
Rashmi Bhardwaj
- Book Type:


- Description:
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार। जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।
Brahman Ki Beti & Viraj Bahu
- Author Name:
Sarat Chandra Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
मुहल्ले भर घूमकर तीसरे पहर रासमणि घर लौट रही थीं। आगे-आगे उनकी पोती मु. रही थी, जिसकी उम्र कोई दस-बारह साल की थी। गाँव का सँकरा रास्ता, जिसकी बगल की खूँटी में बँधा हुआ बकरी का बच्चा एक किनारे पड़ा सो रहा था। उस पर नजर पड़ते ही पोती को लक्ष्यकर वे चिल्ला पड़ीं, '' अरी छोकरी, कहीं रस्सी मत लाँव जाना ! सामने रस्सी मत 'लाँघ गई क्या ? हरामजादी, आसमान में देखती हुई चलती है। आँख से दिखलाई नहीं पड़ा कि सामने बकरी बँथी है ?'' पोती ने सहज भाव से कहा, '“बकरी तो सो रही है दादी।'' “सो रही है तो क्या दोष नहीं लगा ? आज मंगलवार के दिन तू बेखटके रस्सी लाँघ गई ?!!
Cinema Ki Duniya Aur Duniya Ka Cinema
- Author Name:
Vimal Chandra Pandey
- Book Type:

- Description:
विमल चन्द्र पाण्डेय का जन्म 20 अक्टूबर, 1981 को बनारस, उत्तर प्रदेश में हुआ। मूल रूप से गाँव कड़सर, जिला बलिया के निवासी। शुरुआती पढ़ाई बनारस में ही। फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई और पाँच साल तक पत्रकारिता करने के बाद इस्तीफा। वर्तमान में फ्रीलांसिंग, लेखन और फिल्म-निर्देशन। उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं- ‘डर’, ‘मस्तूलों के इर्द-गिर्द’, ‘उत्तर प्रदेश की खिड़की’, 'मेरी प्रिय कहानियाँ' और ‘मारण मंत्र’ (कहानी-संग्रह); ‘भले दिनों की बात थी’ (उपन्यास); ‘ई इलहाब्बाद है भइया’ (संस्मरण)। उनकी कहानियों और कविताओं के अनुवाद कन्नड़, मराठी, मलयालम, तमिल, गुजराती, रूसी और अंग्रेज़ी भाषाओं में हुए हैं। उनकी पहली फ़िल्म है ‘द होली फिश’ जिसके निर्देशन के अलावा लेखन और निर्माण भी उन्होंने स्वयं ही किया। दूसरी फ़िल्म ‘धतूरा’ रिलीज के लिए तैयार है। उन्हें ‘भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार’ और ‘मीरा स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।
21 ANMOL KAHANIYAN
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
Naagland
- Author Name:
Vikas Bhanti
- Book Type:

- Description:
एक घना जंगल, एक अंजान आदिवासी समूह और रहस्यमयी नागमणि की खोज नागलेंड [प्रतिबंधित क्षेत्र] इस जगह से आगे का क्षेत्र पिञालियों का है। इस सीमा के आगे भारत के राज संविधान और धाराओं के कोई नियम लागू नहीं होते। पिञालियों की अस्मिता को बरकरार रखने के लिए भारत सरकार दृढ़ है। 5000 वर्ष पुरानी इस सभ्यता की रक्षा और सम्मान हमारा दायित्व है। अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इस सीमा से आगे जाने का प्रयास न करें।
Dilli Se Karachi Via Rawalpindi
- Author Name:
Sabuha Khan
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Saahi & Sudhir
- Author Name:
Yogita Warde
- Book Type:

- Description:
“साही '&' सुधीर” दोस्ती, प्रेम और आकर्षण पर आधारित उपन्यास है। यह उपन्यास सभी पीढ़ियों को अपने समय, जीवन और कहानीसे वाकिफ कराता है, यह एक प्यारी सी कहानी है जिसमें साही और सुधीर बचपन के दोस्त हैं। सुधीर पेंटिंग बनाता है और साहीलेखिका है, जब साही सुधीर के जीवन में आयी तब उसने अपने जीवन में कई बदलाव महसूस किए। दोनों अच्छे दोस्त हैं लेकिन कुछसमय बाद सुधीर और साही दोनों को एहसास होता है कि वे एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है, फिर क्याहोता है? क्या वे फिर कभी मिलेंगे? क्या वे अपने प्यार का इजहार करेंगे? क्या पेंटिंग और लेखन दोनों का आपस में जुड़ पाते हैं? ऐसेबहुत से सवाल हैं, और जवाब के लिए आपको "साही '&' सुधीर” उपन्यास पढ़ना होगा। यह उपन्यास आपके दैनिक जीवन के साथआसानी से जुड़ सकता है। इस उपन्यास में स्कूली जीवन, दोस्ती और अलगाव के कई उतार-चढ़ाव शामिल हैं जो हर किसी को यहसोचने पर मजबूर करते हैं कि अब आगे क्या होगा, हिंदी साहित्य में लेखिका की यह सर्वश्रेष्ठ पहली रचना है एक परिपक्व कलमआपकी समीक्षाओं के साथ-साथ आलोचना की भी प्रतीक्षा कर रही है, ताकि अगले उपन्यास में आपके सामने और बेहतर काम किया जा सके।
The Hidden Hindu
- Author Name:
Akshat Gupta
- Book Type:

- Description:
इक्कीस साल का पृथ्वी एक अधेड़ और रहस्यमयी अघोरी ओम् शास्त्री की तलाश कर रहा है, जिसे पकड़कर भारत के एक सुनसान द्वीप पर अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच भेज दिया गया | विशेषज्ञों की एक टीम ने जब उस अघोरी को नशे की दवा दी और पूछताछ के लिए सम्मोहित किया, तो उसने दावा किया कि वह सभी चार युगों-सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग–(हिंदू धर्म के अनुसार चार युग) को देख चुका है और रामायण तथा महाभारत की घटनाओं में हिस्सा ले चुका है | जीवन के बाद मृत्यु के नियम को भी बेअसर साबित करनेवाले ओम् के अविश्वसनीय अतीत से जुड़े खुलासे सभी को हैरान कर देते हैं। उस टीम को यह भी पता चला कि ओम् हर युग के दूसरे अमर लोगों की भी तलाश कर रहा है। ऐसे विचित्र रहस्य अगर सामने आ गए तो प्राचीन धारणाएँ हिल जाएँगी और भविष्य की दिशा ही बदल जाएगी। तो यह ओम् शास्त्री कौन है? उसे पकड़ा क्यों गया? पृथ्वी उसे क्यों ढूँढ़ रहा है? सवार हो जाइए ओम् शास्त्री के रहस्यों, पृथ्वी की तलाश और हिंदू पौराणिक कथाओं के रहस्यों से भरे अन्य अमर लोगों के कारनामों की इस नाव पर, और चलिए एक रोचक और रोमांचक यात्रा पर|
Prawas Men Aaspaas
- Author Name:
Hansa Deep
- Book Type:

- Description:
Book
Vyangya Ke Nepathey
- Author Name:
Prem Janmejay
- Book Type:

- Description:
Book
Sarkti Parchhaiyan
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description:
Book
Bhag Chudail Bhag
- Author Name:
Devendra Pandey
- Book Type:

- Description:
अपनी नीरस और बोझिल जिंदगी से परेशान प्रीतम के पास दोस्त के नाम पर केवल केशव था, केशव जो अपनी ही अजीबोगरीब दुनिया में खोया रहता था। रोजमर्रा की इस बेमकसद जिंदगी में उन्हें किसी रोमांच की तलाश थी। और एक दिन मुम्बई की बरसात में वह मिली। अजीब, रहस्यमय और बला की खूबसूरत। लेकिन उनकी जिंदगी में आने वाली वह अकेली नही थी, उसके साथ आई थी कुछ अनचाही अनजानी मुसीबतें। वह कहते है ना इश्क का भूत सिर चढ़ कर बोलता है। लेकिन यहां तो इश्क वाकई भूत बना हुआ था। माईथोलॉजी, प्रेम, आदि जैसे विषयों पर लिखने वाले लेखक देवेन्द्र पाण्डेय इस बार लेकर आए हैं ‘हॉरर रोमांटिक कॉमेडी’ (Horror RomCom) नाम की विधा की हिन्दी की पहली पुस्तक ।
Customer reviews
Be the first to write a review
Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.