🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Katha : Tattva Aur Siddhant

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

हिन्दी आलोचना के पास एक समृद्ध परम्परा है, फिर भी कहना ग़लत न होगा कि आलोचना विधा की अधिकतर उपलब्धियाँ पाठ केन्द्रित, उसमें भी कविता केन्द्रित हैं। इस तरह देखें तो सैद्धान्तिक आलोचना के दृष्टिकोण से हम लगभग अभावग्रस्त कहे जाएँगे। ऐसे में हिन्दी के सुप्रसिद्ध आलोचक विनोद तिवारी की कृति ‘कथा : तत्त्व और सिद्धान्त’ एक बड़ी रिक्ति को भरने का शानदार उपक्रम है । विनोद तिवारी ‘कथा’ में उपन्यास और कहानी दोनों को समाहित करते हैं और उनकी रचना प्रक्रिया, उनकी संरचना के विभिन्न अवयवों, प्रकट अप्रकट जटिल प्रश्नों के विश्लेषण से गुज़रते हुए जिस विद्वतापूर्ण विस्तार में जाते हैं और देश-विदेश में अब तक हुए उल्लेखनीय चिन्तन को अपनी यात्रा में हमसफ़र बनाते हैं और उसमें जो ख़ास तरह का सृजनात्मक भावबोध ले आते हैं वह चकित करता है । कहना न होगा कि ‘कथा : तत्त्व और सिद्धान्त’ वह ज़रूरी किताब है जिसे हिन्दी के गम्भीर पाठकों, छात्रों, शोधार्थियों, विद्वानों को पढ़ना ही चाहिए, कथा-साहित्य में काम करने वाले आलोचकों और कथाकारों के लिए भी यह मानीख़ेज़, ज़रूरी तथा सहेज कर रखने वाली किताब है । —अखिलेश कथाकार

Read more

₹ 275

₹ 220 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Katha : Tattva Aur Siddhant This book ₹220
Acharya Ramchandra Shukla Ke Shreshtha Nibandh Acharya Ramchandra Shukla ₹225
3 books selected ₹1,195 ₹1,140

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

हिन्दी आलोचना के पास एक समृद्ध परम्परा है, फिर भी कहना ग़लत न होगा कि आलोचना विधा की अधिकतर उपलब्धियाँ पाठ केन्द्रित, उसमें भी कविता केन्द्रित हैं। इस तरह देखें तो सैद्धान्तिक आलोचना के दृष्टिकोण से हम लगभग अभावग्रस्त कहे जाएँगे। ऐसे में हिन्दी के सुप्रसिद्ध आलोचक विनोद तिवारी की कृति ‘कथा : तत्त्व और सिद्धान्त’ एक बड़ी रिक्ति को भरने का शानदार उपक्रम है ।
विनोद तिवारी ‘कथा’ में उपन्यास और कहानी दोनों को समाहित करते हैं और उनकी रचना प्रक्रिया, उनकी संरचना के विभिन्न अवयवों, प्रकट अप्रकट जटिल प्रश्नों के विश्लेषण से गुज़रते हुए जिस विद्वतापूर्ण विस्तार में जाते हैं और देश-विदेश में अब तक हुए उल्लेखनीय चिन्तन को अपनी यात्रा में हमसफ़र बनाते हैं और उसमें जो ख़ास तरह का सृजनात्मक भावबोध ले आते हैं वह चकित करता है ।
कहना न होगा कि ‘कथा : तत्त्व और सिद्धान्त’ वह ज़रूरी किताब है जिसे हिन्दी के गम्भीर पाठकों, छात्रों, शोधार्थियों, विद्वानों को पढ़ना ही चाहिए, कथा-साहित्य में काम करने वाले आलोचकों और कथाकारों के लिए भी यह मानीख़ेज़, ज़रूरी तथा सहेज कर रखने वाली किताब है ।
—अखिलेश कथाकार

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2026
Weight
270 grams
ISBN-13
9789377370879
Pages
248
Reading time
~8 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp