Hindi Nibandh
(0)
Author:
Vinod TiwariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
यूजीसी (नेट/जेआरएफ) पाठ्यक्रम पर आधारित हिंदी निबंधों का संग्रह|
Read moreAbout the Book
यूजीसी (नेट/जेआरएफ) पाठ्यक्रम पर आधारित हिंदी निबंधों का संग्रह|
Book Details
-
ISBN9788199312296
-
Pages184
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Janane ki Batein (Vol. 4)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hatya Aur Atamhatya Ke Beech Mariya
- Author Name:
Veriar Elwin
- Book Type:

-
Description:
इस किताब का आधारभूत उद्देश्य हिंसा अपराधों के पीछे छिपे मनोविज्ञान को समझना है जो सबसे कम बिगड़े तथा भारतीय आदिवासियों में श्रेष्ठ प्रजाति के लोगों द्वारा किए जाते हैं, तथा वे परिस्थितियाँ जो यहाँ के आदमी, औरतों को आत्महत्या करने के लिए उकसाती हैं।
ऐसी कृति तथा शोधकार्य उन आदिवासियों को, जो जजों तथा मजिस्ट्रेटों द्वारा अपराधी करार दिए जाते हैं, सावधानी तथा बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से समझने तथा उनके साथ सलूक करने के लिए मार्गदर्शन दे सकते हैं। यह कृति निश्चित रूप से दंडित करने तथा आदिवासी कैदियों के साथ जेल में किए जानेवाले व्यवहार पर भी प्रश्न उठाती है। इस किताब के शुरुआती पृष्ठों में मारिया जीवन की विविधता को सारांश में बतलाया गया है। इस संक्षिप्तता में ही उनके अनेक विविध पक्षों को उजागर किया गया है। यह किताब अपराधों के अध्ययन की अपेक्षा सामाजिक नृतत्त्व विज्ञान के लिए एक अमूल्य योगदान है।
Aadivasi : Vikas Se Visthapan
- Author Name:
Ramanika Gupta
- Book Type:

-
Description:
आदिवासियों का पलायन और विस्थापन सदियों से होता रहा है और ये आज भी जारी है। आदिवासियों के जंगलों, ज़मीनों, गाँवों, संसाधनों पर क़ब्ज़ा कर उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर करने के पीछे मुख्य कारण हमारी सरकारी व्यवस्था रही है। वे केवल अपने जंगलों, संसाधनों या गाँवों से ही बेदख़ल नहीं हुए बल्कि मूल्यों, नैतिक अवधारणाओं, जीवन-शैलियों, भाषाओं एवं संस्कृति से भी वे बेदख़ल कर दिए गए हैं।
हमारे मौलिक सिद्धान्तों के अन्तर्गत सभी को विकास का समान अधिकार है। लेकिन आज़ादी के बाद के पहले पाँच वर्षों में लगभग ढाई लाख लोगों में से 25 प्रतिशत आदिवासियों को मजबूरन विस्थापित होना पड़ा। विकास के नाम पर लाखों लोगों को अपनी रोज़ी-रोटी, काम-धंधों तथा ज़मीनों से हाथ धोना पड़ा। उनको मिलनेवाले मूलभूत अधिकार जो उनकी ज़मीनों से जुड़े थे, वे भी उन्हें प्राप्त नहीं हुए।
आदिवासियों के प्रति सरकार तथा तथाकथित मुख्यधारा के समाज के लोगों का नज़रिया कभी संतोषजनक नहीं रहा। आदिवासियों को सरकार द्वारा पुनर्वसित करने का प्रयास भी पूर्ण रूप से सार्थक नहीं हो सका। अन्ततः अपनी ही ज़मीनों व संसाधनों से विलग हुए आदिवासियों का जीवन मरणासन्न अवस्था में पहुँच गया।
21वीं सदी में पहुँचकर भी हमारे देश का आदिवासी समाज जहाँ विकास की बाट जोह रहा है। वहीं दूसरी तरफ़ सरकार की उदासीन नीतियों के कारण उनकी स्थिति ज्यों की त्यों ही है।
विकास के नाम पर छले जा रहे आदिवासियों के पलायन और विस्थापन आदि समस्याओं पर केन्द्रित यह पुस्तक समाज और सरकार के सम्मुख कई सवाल खड़े करती है।
4 Baal Upanyas
- Author Name:
Prakash Manu
- Book Type:

- Description: साहित्य अकादेमी के पहले बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित प्रकाश मनु बच्चों के सुविख्यात कथाकार हैं। बच्चे और किशोर पाठक उनकी कहानियों और बाल उपन्यासों को खूब रस ले-लेकर पढ़ते, सराहते और जीवन भर अपनी यादों के पिटारे में सहेजकर रखते हैं। प्रकाश मनु उस्ताद किस्सागो हैं, इसीलिए देश के कोने-कोने में फैले हजारों बच्चे उनके मुरीद हैं, जिन्हें उनकी लिखी कहानी की नई पुस्तकों और उपन्यासों का इंतजार रहता है। मनुजी की कलम का जादू इस कदर बाल पाठकों के मन को बाँध लेता है कि उनके साथ बहते हुए, कब वे देश-दुनिया की नई-नई और रोमांचक जगहों की सैर करके आ गए, उन्हें खुद पता नहीं चलता। ‘चार बाल उपन्यास’ प्रकाश मनुजी के दिलचस्प और भावनापूर्ण बाल उपन्यासों की नई पुस्तक है, जिसे पढ़कर बच्चे रोमांचित हो उठेंगे और खेल-खेल में बहुत कुछ सीखेंगे भी। पुस्तक में मनुजी के चार बड़े ही कौतुकपूर्ण बाल उपन्यास शामिल हैं—‘चिंकू-मिंकू और दो दोस्त गधे’, ‘भोलू पढ़ता नई किताब’, ‘सांताक्लाज का पिटारा’ तथा ‘गोलू भागा घर से’। ये चारों ऐसे उपन्यास हैं, जिनका जादू बाल पाठकों के दिलों पर तारी हो जाएगा, और जब तक वे उन्हें पूरा पढ़ नहीं लेंगे, पुस्तक उनके हाथ से छूटेगी नहीं। निस्संदेह ‘चार बाल उपन्यास’ एक ऐसा बहुरंगी, मनमोहक उपहार है, जिसे बच्चे हमेशा सँजोकर रखेंगे और बार-बार पढ़ना चाहेंगे।
The Great Derangement
- Author Name:
Amitav Ghosh
- Book Type:

- Description: One of India's greatest writers, Amitav Ghosh, argues that future generations may well think so. How else can we explain our imaginative failure in the face of global warming? In this groundbreaking return to non-fiction, Ghosh examines our inability-at the level of literature, history and politics-to grasp the scale and violence of climate change. The climate crisis asks us to imagine other forms of human existence-a task to which fiction, Ghosh argues, is the best suited of all forms. The Great Derangement serves as a brilliant writer's summons to confront the most urgent task of our time.
Rasayan Ki Rochak Baaten
- Author Name:
Dr. D.D. Ojha
- Book Type:

- Description: "बहुत पुराने समय से ही पारे से सोना बनाने के 'प्रयास किए जाते रहे हैं । ऐसा प्रयास करनेवालों को कीमियागिर तथा इस विज्ञान को कीमियागिरी कहा जाता था । इसी को रसायनशास्त्र भी कहा जाता है । आयुर्वेद में इसे रसशास्त्र नाम से जाना जाता है । मानव-जीवन का कोई भी ऐसा पक्ष नहीं है, जिसमें रसायन विज्ञान का अंश न हो । वर्तमान युग में बिना रसायन विज्ञान के भौतिक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती । उदाहरण के तौर पर, यह ज्ञानवर्धक पुस्तक जिस कागज पर छपी है, छपाई में प्रयोग की गई स्याही तथा अन्य अभिक्रियाएँ भी रसायनजन्य हैं । रसायनज्ञों ने इसी विज्ञान के सहारे पृथ्वी, पेड़-पौधों तथा खनिजों से आश्चर्यजनक वस्तुएँ प्राप्त की हैं । सभी तरह की दवाइयाँ उन्नत कृषि के लिए खाद तथा कीटनाशी, सिंथेटिक कपड़े का उत्पादन, दैनिक जीवन में उपयोग आनेवाली खाने-पीने की अनेक वस्तुएँ रासायनिक उत्पाद ही हैं । यह विज्ञान रोचक भी है और विचित्र भी । दैनंदिन उपयोग में आनेवाले रासायनिक उत्पादों का प्रयोग करते हुए हमारे मन में जिज्ञासा होती है उनकी वास्तविकता जानने की । ' रसायन की रोचक बातें ' पुस्तक में इसी प्रकार के शताधिक तथ्यों के बारे में सरल भाषा में सचित्र जानकारी सुलभ कराने का प्रयास किया गया है । "
Uttaradhunik Avadharnayen
- Author Name:
Shriprakash Mishra
- Book Type:

-
Description:
अक्सर कहा जाता है कि कल्पनाशील लेखन करनेवाले हिन्दी के रचनाकार वस्तुगत ढंग से गम्भीर लेखन नहीं कर पाते। यदि करते भी हैं तो विवाद वाले मुद्दों पर स्पष्ट स्टैंड नहीं लेते। इस धारणा को ख़ारिज करती है श्रीप्रकाश मिश्र की यह पुस्तक ‘उत्तरआधुनिक अवधारणाएँ’।
श्रीप्रकाश मिश्र हमारे समय के महत्त्वपूर्ण साहित्यकारों में से एक हैं। इस पुस्तक में उत्तर-आधुनिकता, उत्तर-साम्यवाद, उत्तर-प्राच्यवाद, उत्तर-उपनिवेशवाद, स्त्रीवाद, विचारधारा, निर्वचन, भूमंडलीकरण, राष्ट्रवाद, जनतंत्र, संस्कृति, न्याय, सामाजिक अभियंत्रण, लोकलुभावनवाद आदि पर अच्छी तरह से विवेचित लेख हैं, व्याख्यान हैं। वे एक स्पष्ट स्टैंड लेकर चलते हैं और लेखक की स्पष्टवादिता दर्ज करते हैं।
उम्मीद है, यह पुस्तक पाठकों के ज्ञान और चिन्तन को समृद्ध करेगी।
Vibhram Aur Yathartha
- Author Name:
Christopher Caudwell
- Book Type:

-
Description:
‘विभ्रम और यथार्थ’ मार्क्सवादी दृष्टिकोण से लिखी गई काव्यशास्त्र की सम्भवतः पहली और हमारे युग की विशिष्टतम पुस्तक है। इसमें कविता की तो चर्चा है ही, कविता के स्रोतों की भी चर्चा की गई है। कविता भाषा में लिखी जाती है, इसलिए इस पुस्तक में भाषा के स्रोतों का भी विवेचन किया गया है। भाषा मनुष्य को समाज से प्राप्त होती है। एक ऐसा उपकरण है जिसके माध्यम से लोग न केवल अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, एक-दूसरे को प्रेरित और प्रोत्साहित भी करते हैं, इसलिए भाषा समाज में रहनेवाले मनुष्यों की प्रेरणा का भी उपकरण है। यानी कविता के स्रोतों का अध्ययन समाज के अध्ययन का अंग है, उसे समाज से अलग नहीं किया जा सकता। साहित्य समाज की उपज है, यह कोई नई स्थापना नहीं है। किन्तु मार्क्सवादी समीक्षा-प्रणाली में इसका निहितार्थ यह होता है कि साहित्य या कला की आलोचना के लिए आलोचक को साहित्य से बाहर जाना पड़ता है। उसके लिए साहित्य केन्द्रीय महत्त्व का होता है, किन्तु भौतिक विज्ञान, नृतत्त्वशास्त्र इतिहास और दर्शनशास्त्र आदि विषय में भी समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं। अतः इस पुस्तक में साहित्य के सैद्धान्तिक अध्ययन के लिए विशुद्ध सौन्दर्यशास्त्रीय दृष्टिकोण के निषेध और साहित्य अथवा कविता के मूल्यों को साहित्येतर मूल्यों के सन्दर्भ में देखने का आग्रह किया गया
है।कॉडवेल इस बात की लगातार वकालत करते दिखते हैं कि कला को कला के भीतर से नहीं, अपितु उसके बाहर से (यानी समाज के भीतर से) देखना चाहिए। उनके मतानुसार, कला या साहित्य की आलोचना शुद्ध सर्जना अथवा शुद्ध रसास्वादन से इस अर्थ में भिन्न है कि इसमें एक समाजशास्त्रीय तत्त्व निहित होता है। वस्तुतः साहित्य के हर जिज्ञासु पाठक के लिए यह अत्यंत आवश्यक और उपयोगी पुस्तक है।
Ab Ve Vhan Nahin Rehte
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

- Description: मोहन राकेश, कमलेश्वर और राजेन्द्र यादव की त्रयी को ‘नई कहानी’ आन्दोलन के प्रवर्त्तक और उन्नायक के रूप में जाना जाता है। प्रख्यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह को नई कहानी की प्रवृत्तियों को सूत्रबद्ध करने का श्रेय है। यह बात ग़ौरतलब है कि आज़ादी के बाद के ये चार शिखर रचनाकार आपस में गहरे मित्र थे, 1950 तथा ’60 के दशक में इन लोगों के बीच ज़बरदस्त अन्तर्संवाद भी था। आलोचना-प्रत्यालोचना और आत्मालोचना से भरे इस अन्तर्संवाद ने उस आन्दोलन को बल दिया, इन रचनाकारों को भी इससे ऊर्जा मिली यह वह समय था जब भारत का नया समाज बन रहा था और साहित्य का भी स्वरूप बदल रहा था। ऐसे में कुछ भी नया करने के लिए गहन विचार-विमर्श जरूरी था और उसका सबसे सुगम मार्ग था पत्र। मित्रों की स्वस्थ आलोचना उस समय का युगधर्म था। जाहिर है, रचनाशीलता के विकास में भी उसकी गहरी भूमिका थी। राजेन्द्र यादव के नाम मोहन राकेश, कमलेश्वर और डॉ. नामवर सिंह तथा राजेन्द्र यादव के नामवर सिंह के लिए पत्रों का यह संग्रह अपने समय के लेखकीय अन्तर्संवादों का जीवन्त दस्तावेज़ है। इनके माध्यम से इन लेखकों के रचनात्मक संघर्ष को भी समझा जा सकता है और साहित्य की उन अन्तर्ध्वनियों को भी, जिन्हें साहित्य के किसी इतिहास के माध्यम से सुन-समझ पाना सम्भव नहीं है।
Kavya Kavi-Karm : Sattarottari Hindi Kavita
- Author Name:
A. M. Murlidharn
- Book Type:

- Description: डॉ. मुरलीधरन की यह पुस्तक जहाँ एक ओर खड़ी बोली में लिखी कविताओं का संक्षिप्त परन्तु सुचिंतित इतिहास है वहीं सत्तर के बाद की कविताओं का गम्भीर विवेचन भी है। कविता और कवि-कर्म की सारगर्भित परिभाषा के साथ ही साथ सत्तर के दशक की कविता के कुल और शील का व्यापक विवरण भी इसमें है। यह कार्य एक अभाव की पूर्ति करता है। साठोत्तरी कविता के अवशेषों का उल्लेख करते हुए लेखक ने सत्तर के दशक के मोहभंगजन्य खीज, आक्रोश, विक्षोभ, विसंगति, संत्रास, अराजकता, राजनैतिक परिवर्तन की आकांक्षा और उलटफेर की आवश्यकता की प्रतीति को सप्रमाण रेखांकित किया है। इस पुस्तक की प्रमुख विशेषता है कि इसमें वैदुषिक दृष्टि से उपलब्ध सभी कवियों की कृतियों को विश्लेषण के लिए चुना गया है, जिसके कारण इस मूल्यांकन का महत्त्व बढ़ गया है। यह पहली पुस्तक है जिसमें हिन्दी-काव्य साहित्य को राष्ट्रीय दृष्टि से विवेचित किया गया है। विचारधाराओं के दबाव और संगठनों के नज़रिए से मुक्त होकर किया गया सटीक विश्लेषण इसे छात्रों के लिए ही नहीं अध्यापकों के लिए भी उपयोगी बनाता है। डॉ. मुरलीधरन के गहन अध्ययन और तत्त्वदर्शी दृष्टि का प्रमाण तो पुस्तक है ही। इससे भी महत्त्वपूर्ण है इसके ज़रिए उन सूक्ष्म अन्तरों और कमियों की ओर संकेत जो पीढ़ियों, दशकों के अन्तराल में मिलते हैं। इसमें कवियों की विशेषताओं और कृतियों की गुणवत्ता तथा अन्तर्वस्तु को स्पष्टता के साथ रेखांकित किया गया है। कविताओं को रचनाकार की आयु के तर्क से नहीं समकालीनता और रचनात्मकता के आधार पर परीक्षित करने के कारण पुस्तक का महत्त्व बढ़ गया है। छठें, सातवें और आठवें दशक की सामान्यताओं, अनुरूपताओं और विरुद्धताओं को अत्यन्त सावधानी से इसमें परिभाषित किया गया है। पुस्तक विद्वानों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए निश्चय ही उपयोगी है।
Bhrasth Satyam Jagat Mithya
- Author Name:
Sanjay Jhala
- Book Type:

- Description: Bhrasth Satyam Jagat Mithya
Nationalism
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Book Type:

- Description: Nationalism By Tagore Yes, this is the logic of the Nation. And it will never heed the voice of truth and goodness. It will go on in its ring-dance of moral corruption, linking steel unto steel, and machine unto machine; trampling under its tread all the sweet flowers of simple faith and the living ideals of man. Nationalism is a cruel epidemic of evil that is sweeping over the human world of the present age. I do not for a moment suggest that Japan should be unmindful of acquiring modern weapons of self-protection. But this should never be allowed to go beyond her instinct of self-preservation. She must know that the real power is not in the weapons themselves, but in the man who wields those weapons.
The Phoenix and The Carpet
- Author Name:
Edith Nesbit
- Book Type:

- Description: इस बार चारों बच्चों सिरिल, एंथिया, रॉबर्ट, जेन के हाथ अनजाने में लगता है एक जादुई कालीन जो उन्हें हर रोज़ तीन बार पूरे विश्व के किसी भी कोने की सैर करवा सकता है। उस जादुई कालीन के साथ ही उन्हें मिलता है एक विचित्र सुनहरा अंडा भी, जिसमें से निकलता है एक विलक्षण मायावी पंछी। चारों बच्चे उस जादुई कालीन पर चमत्कारी मायावी पंछी के साथ विलुप्त ख़ज़ाने की खोज से लेकर जंगली आदिवासियों के अनजान टापू की यात्रा जैसे ढेरों रोमांचक सफर पर निकल पड़ते हैं। लेकिन जादुई कालीन की एक छोटी सी गड़बड़ी के कारण उनके घर पर धावा बोलते हैं सैकड़ों बिन बुलाए ऐसे मेहमान, जिनके बारे में उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा। कैसे उनके नए दोस्त मायापंछी को बंधक बना लिया जाता है... कैसे उनका नन्हा सा भाई जादुई कालीन की वजह से अकेला ही ऐसी अनजान जगह पहुँच जाता है, जहाँ से उसे कोई भी वापस नहीं ला सकता... कैसे एक बार फिर से उनके ये नए रोमांच ही उनके लिए बन जाते है बड़ी मुसीबतें... जानने के लिए पढ़ें 'फाइव चिल्ड्रेन एंड इट’ के बाद एडिथ नेस्बिट द्वारा रचित ‘सैमिएड’ उपन्यास शृंखला का दूसरा भाग 'फीनिक्स एंड द कार्पेट'
Aadivasi Kaun
- Author Name:
Ramanika Gupta
- Book Type:

- Description: आज अगर सबसे बड़ा ख़तरा आदिवासी जमात को है, तो वह है उसकी पहचान मिटने का। इक्कीसवीं सदी में उसकी पहचान मिटाने की साज़िश एक योजनाबद्ध तरीक़े से रची जा रही है। किसी भी जमात, जाति, नस्ल या कबीले अथवा देश को मिटाना हो तो उसकी पहचान मिटाने का काम सबसे पहले शुरू किया जाता है। ‘आदिवासी’ की पहचान और नाम छीनकर उसे ‘वनवासी’ घोषित किया जा रहा है ताकि वह यह बात भूल जाए कि वह इस देश का मूल निवासी यानी आदिवासी है—वह भूल जाए अपनी संस्कृति, भाषा और अपना मूल धर्म ‘सरना’। यह पुस्तक आदिवासियों के जीवन के कई ऐसे अनछुए पहलुओं को हमारे सामने लाती है जिनसे अभी तक हम अपरिचित थे। स्वयं आदिवासियों द्वारा क़लमबद्ध किए गए विचारों को यहाँ दिया गया है। आदिवासियों की दशा में परिवर्तन कैसे हो, उनकी शिक्षा कैसी हो व किस प्रकार उनके जीवन से जुड़ी सभी समस्याओं का निदान किया जाए, जैसे सवालों को भी यहाँ उठाया गया है। आदिवासियों के अस्तित्व की बानगी प्रस्तुत करती यह पुस्तक सभी के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Sadhu Se Sevak
- Author Name:
Manjeet Negi
- Book Type:

- Description: ‘साधु से सेवक’ पुस्तक मोदी के युवा अवस्था के उन दो वर्षों की कहानी है, जब युवा नरेंद्र सांसारिक मोहमाया से दूर हिमालय में साधु बनने की खोज में भटक रहा था। कोलकाता में रामकृष्ण मिशन के बेलूर मठ से होते हुए ऋषिकेश के दयानंद आश्रम और फिर बाबा केदार की शरण में जाकर नरेंद्र मोदी की तृष्णा शांत हुई। ऋषिकेश के स्वामी दयानंद गिरि से पी.एम. मोदी का पुराना रिश्ता था। स्वामी दयानंद का मोदी के जीवन पर गहरा प्रभाव है। प्रचारक जीवन में मोदी जब ऋषिकेश आए और 1981 में स्वामी से जुड़ गए, तब से स्वामीजी मार्गदर्शन में सेवा-स्वच्छता को अपने जीवन में आत्मसात् किया। बाल्यकाल से ही हिमालय के प्रति नरेंद्र मोदी के मन में विशेष आकर्षण था। वह आए दिन साधु-संतों और श्रद्धालुओं से बाबा केदार, बदरीधाम, कैलाश मानसरोवर समेत हिमालयी क्षेत्र के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण दिशा में आनेवाले सभी पावन धार्मिक तीर्थों के विषय में रुचि लेकर सुनते थे। इन तीर्थों की महिमा और वहाँ के सौंदर्य की चर्चा सुनकर नरेंद्र मन-ही-मन में वहाँ की यात्रा कर लेते थे। यह पुस्तक नरेंद्र मोदी के आध्यात्मिक जीवन से जुड़े अनसुने पहलुओं को उजागर करने का प्रयास है। ‘साधु से सेवक’ पुस्तक युवावस्था में दो वर्षों की उस आध्यात्मिक यात्रा का सार है, जो साधु बनने की खोज में उन्हें यहाँ ले आई थी। यहीं से मिली प्रेरणा ने उनके व्यक्तित्व को हिमालय सा दृढ़ बनाया है।
Aranyapantha
- Author Name:
Pt. Sanjay Tignath
- Book Type:

-
Description:
‘अरण्यपंथा’ में वे समस्त मौलिक दुविधाएँ अन्तर्निहित हैं जो ज्ञान के गहन प्रान्तरों में विद्यमान हैं, क्योंकि ‘अरण्यपंथा’ उन्हीं के अपार और संकीर्ण पथ से निकलती है। इसमें मात्र आशय है किन्तु प्रयोजन स्पष्ट नहीं है। यदि प्रयोजन के आग्रह को त्यागा जा सकता हो तो सम्भवतः ‘अरण्यपंथा’ रुचिकर लगे।
मैंने उपनिषद ग्रन्थों का पुनर्अध्ययन किया और यहाँ पाया कि मैं उनकी अनुभूतियों को पहले की अपेक्षा अधिक निकटता से अनुभव कर रहा था, तथापि ‘अरण्यपंथा’ न तो वैज्ञानिक व्याख्याओं में घुसती है और न ही उपनिषद को अपने तर्क का हिस्सा बनाने की चेष्टा करती है। सचमुच उपनिषद को तो इस पुस्तक के कथ्य में बिना स्पर्श करते हुए ही मात्र आनन्द के स्रोत की तरह उद्धृत किया गया है।
—लेखक की क़लम से
Sagar Vigyan
- Author Name:
Shyam Sunder Sharma
- Book Type:

- Description: पढ़ने या सुनने में यह बात भले ही अटपटी लगे, पर यह सत्य है कि अब वह समय आ गया है जब हमें खाद्य, आवास, ऊर्जा, प्रदूषण आदि की बढ़ती हुई समस्याओं के समाधान के लिए थल के सीमित संसाधनों से हटकर सागर की ओर उन्मुख होना चाहिए। सागर पृथ्वी के केवल 71% भाग को ही घेरे हुए नहीं है, उसमें कुल जल का 97% भाग ही नहीं हैं, वरन् उसमें अपार खनिज संपदा, असंख्य जीव-जंतु और ऊर्जा का असीम भंडार भी है।
Tum Zindgi Ka Namak Ho
- Author Name:
Vipin Sharma
- Book Type:

- Description: तुम्हारी स्मृतियाँ इतनी गहरी हैं, जैसे नये-नकोर मकान पर कोई बच्चा ईंट के टुकडे से गुस्से में अपना नाम लिख दे। जैसे अलभोर ने रचा है धुंधलको को। रात रचती है सुबह की रोशनी। हर प्रेम रचता है अथवा यूँ कहेंं रचेगा आँसू। आज मेरे यार की शादी है, बैंड में नाच रहे होते हैं कुछ लोग। मगर कहीं दूर सूड़क रही होती है कोई नाक को। आँसू, जो दजला-फरात बनकर उसके गले में भर आए हैं। रोती है बाथरूम में जाकर जार-जार। -इसी किताब से
Satta Badal
- Author Name:
Datta Desai
- Book Type:

- Description: ‘भाकरी का करपली, पान का सडलं, घोडं का अडलं' याला आपल्या लोकसंस्कृतीत एकच उत्तर आहे : ‘फिरवलं नाही म्हणून!' आपल्या प्रजासत्ताकाचे पंचाहत्तरावे वर्ष आपण पूर्ण करत असताना ‘देशात लोकशाहीची कोंडी का झाली, कल्याणकारी विकास का अडला, सामाजिक न्याय का खुंटला' याचे उत्तर शोधण्याची गरज निर्माण झाली आहे. हे उत्तर ‘सत्ता बदलली नाही म्हणून' असे असू शकेल का? मग प्रश्न येतो की ‘सत्ता' म्हणजे काय आणि ‘बदल' म्हणजे काय? देश स्वतंत्र होताना झालेला सत्ता-बदल हे ‘सत्ता हस्तांतरण' होते, ते क्रांतिकारी परिवर्तन नव्हते असे म्हटले गेले. आपली चौकट बदलली, तरी अनेक बाबतीत ती तशीच राहिली. देशाने अनेक बरीवाईट वळणे घेतली. काही प्रश्न सुटत गेले, अनेक प्रश्न तसेच राहिले, तर बरेच नवे प्रश्न उभे होत गेले. परिणामी आज आपला देश जगाच्या नजरेत भरेल अशी अफाट संपन्नता, विकासाच्या घोषणा, प्रचंड विसंगती, असह्य विषमता व घुसमटवून टाकणारे वातावरण अनुभवतो आहे. ही साधीसुधी कोंडी नाही. हा राष्ट्रीय स्वरूपाचा चक्रव्यूह आहे! हा चक्रव्यूह नेमका काय आहे? तो कसा भेदता येईल? त्यासाठी देशाच्या राजकारणाला कोणती मूलगामी वैचारिक-राजकीय कलाटणी मिळायला हवी? ‘मूलगामी कलाटणी' म्हणजे काय? त्यातून देशातील प्रत्येक व्यक्तीची अर्थपूर्ण जीवनाकडे वाटचाल कशी सुरू होईल? याची चर्चा हे पुस्तक करते. त्यामुळेच हे पुस्तक या देशावर व इथल्या विविधतेवर प्रेम करणाऱ्या प्रत्येकासाठी आहे. विषमता आणि विध्वंस यांनी अस्वस्थ होणाऱ्या भारतीय माणसासाठी हे पुस्तक आहे. विचारांचे स्वातंत्र्य आणि कृतीचे महत्त्व ओळखणाऱ्या प्रत्येकासाठी ते आहे. नवे काही घडवण्यासाठी उत्सुक असलेल्या प्रत्येक युवक-युवतीसाठी हे पुस्तक आहे. Satta Badal | Datta Desai सत्ता बदल | दत्ता देसाई
Gandhi evam Pandit Nehru ka Vaicharik Drashtikon
- Author Name:
Dr. Siyaram Shukla
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book