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Doctor, Main Kya Karoon?

Published by

Prabhat Prakashan

In category

Health

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Hindi

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About the book

तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों को अपना वजूद बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। जीवन की महत्त्वाकांक्षाएँ उफान पर हैं। माता-पिता की बच्चों से और बच्चों की माता-पिता से उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। पारिवारिक रिश्तों में भावनात्मक सहयोग एवं प्यार की कमी आ गई है। पति-पत्‍नी के संबंधों में अहं आ गया है। सात जन्मों का रिश्ता सात दिनों का होने लगा है। तलाक की घटनाएँ बढ़ गई हैं। युवा वर्ग एवं किशोर दिग्भ्रमित हो रहे हैं। मानसिक तनाव एवं आत्महत्या की घटनाओं ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया है। भले ही हम इंटरनेट की दुनिया में जी रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक दुनिया से कटते जा रहे हैं। नकारात्मक मनोभाव हमारे मन में घर करते जा रहे हैं। बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग सभी के व्यवहार में आक्रामकता आ गई है। धैर्य कम हो गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी तरह मानसिक रूप से परेशान है। प्रस्तुत पुस्तक में इन बातों को ध्यान में रखकर सरल भाषा में बच्चों, किशोरों, युवा एवं बुजुर्ग को जागरूक करने की कोशिश की गई है कि वे खुद को इतना मजबूत रखें कि छोटी-छोटी परेशानियाँ उन्हें विचलित न कर सकें। मनोविकारों और मनोरोगों को दूर कर जीवन में सकारात्मक भाव जाग्रत् कर जीने का आनंद उठाने की राह दिखाती पठनीय पुस्तक।

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तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों को अपना वजूद बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। जीवन की महत्त्वाकांक्षाएँ उफान पर हैं। माता-पिता की बच्चों से और बच्चों की माता-पिता से उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। पारिवारिक रिश्तों में भावनात्मक सहयोग एवं प्यार की कमी आ गई है। पति-पत्‍नी के संबंधों में अहं आ गया है। सात जन्मों का रिश्ता सात दिनों का होने लगा है। तलाक की घटनाएँ बढ़ गई हैं। युवा वर्ग एवं किशोर दिग्भ्रमित हो रहे हैं। मानसिक तनाव एवं आत्महत्या की घटनाओं ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया है। भले ही हम इंटरनेट की दुनिया में जी रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक दुनिया से कटते जा रहे हैं। नकारात्मक मनोभाव हमारे मन में घर करते जा रहे हैं। बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग सभी के व्यवहार में आक्रामकता आ गई है। धैर्य कम हो गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी तरह मानसिक रूप से परेशान है। प्रस्तुत पुस्तक में इन बातों को ध्यान में रखकर सरल भाषा में बच्चों, किशोरों, युवा एवं बुजुर्ग को जागरूक करने की कोशिश की गई है कि वे खुद को इतना मजबूत रखें कि छोटी-छोटी परेशानियाँ उन्हें विचलित न कर सकें।

मनोविकारों और मनोरोगों को दूर कर जीवन में सकारात्मक भाव जाग्रत् कर जीने का आनंद उठाने की राह दिखाती पठनीय पुस्तक।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Hardbound
Publisher
Prabhat Prakashan
Publication year
2024
Weight
175 grams
ISBN-13
9789382898528
Pages
112
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
10 × 10 cm
Language
Hindi

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