Swasth Khain : Tan Man Jagain
About the book
भोजन हमारे जीवन का भी आधार है, और सेहत का भी। उसी से यह शरीर बनता है, हमें शक्ति मिलती है और हम हृष्ट-पुष्ट रह पाते हैं। स्वस्थ तन और मन के लिए क्या खाएँ, कितना खाएँ, किस खाद्य-पदार्थ में कौन-सा पोषक तत्त्व है, विटामिन और खनिज हमें किस-किस भोजन से मिलते हैं, उनकी शरीर को कितनी ज़रूरत है, यह कृति जीवन से जुड़े इन सभी बुनियादी पक्षों पर बेहद सरल और व्यावहारिक जानकारी प्रस्तुत करती है। रसोईघर में कौन सी छोटी-छोटी सावधानियाँ बरतने से फल-सब्जि़यों, चावल और दूसरे भोजनों के पौष्टिक गुण नष्ट नहीं होते, शुद्ध दूध और स्प्रेटा दूध के बीच क्या अन्तर है, फलों के छिलकों में क्या पौष्टिक गुण हैं जैसे विविध विषयों पर इस कृति में अद्यतन जानकारी उपलब्ध है। पुस्तक में कोलेस्टेरॉल के बारे में उपयोगी जानकारी है और उसे सुधारने के सरल नुस्खे भी हैं। साथ ही, डायबिटीज, हृदय रोग, गाउट, गुर्दे की पथरी, कलेजे में जलन, दूध की एलर्जी जैसे विविध रोगों में अमल में लाए जानेवाले आहार सम्बन्धी परहेज़ भी दिए गए हैं। हमारे रोज़मर्रा के जीवन में किस-किस तरह से मिलावट होती है और उससे हमें क्या-क्या नुकसान पहुँचता है, ‘स्वस्थ खाएँ तनमन जगाएँ’ इस सम्बन्ध में भी हमें सावधान करती है।
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About the Book
भोजन हमारे जीवन का भी आधार है, और सेहत का भी। उसी से यह शरीर बनता है, हमें शक्ति मिलती है और हम हृष्ट-पुष्ट रह पाते हैं। स्वस्थ तन और मन के लिए क्या खाएँ, कितना खाएँ, किस खाद्य-पदार्थ में कौन-सा पोषक तत्त्व है, विटामिन और खनिज हमें किस-किस भोजन से मिलते हैं, उनकी शरीर को कितनी ज़रूरत है, यह कृति जीवन से जुड़े इन सभी बुनियादी पक्षों पर बेहद सरल और व्यावहारिक जानकारी प्रस्तुत करती है।
रसोईघर में कौन सी छोटी-छोटी सावधानियाँ बरतने से फल-सब्जि़यों, चावल और दूसरे भोजनों के पौष्टिक गुण नष्ट नहीं होते, शुद्ध दूध और स्प्रेटा दूध के बीच क्या अन्तर है, फलों के छिलकों में क्या पौष्टिक गुण हैं जैसे विविध विषयों पर इस कृति में अद्यतन जानकारी उपलब्ध है।
पुस्तक में कोलेस्टेरॉल के बारे में उपयोगी जानकारी है और उसे सुधारने के सरल नुस्खे भी हैं। साथ ही, डायबिटीज, हृदय रोग, गाउट, गुर्दे की पथरी, कलेजे में जलन, दूध की एलर्जी जैसे विविध रोगों में अमल में लाए जानेवाले आहार सम्बन्धी परहेज़ भी दिए गए हैं। हमारे रोज़मर्रा के जीवन में किस-किस तरह से मिलावट होती है और उससे हमें क्या-क्या नुकसान पहुँचता है, ‘स्वस्थ खाएँ तनमन जगाएँ’ इस सम्बन्ध में भी हमें सावधान करती है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 3rd
- Publication year
- 2004
- Weight
- 132 grams
- ISBN-13
- 9788126709588
- Pages
- 52
- Reading time
- ~2 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
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