Patanjali Aur Ayurvedic Yoga
(0)
Author:
Vinod Verma, Ramchandra TiwariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Health₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्तों के अनुसार, पित्त और कफ में से किसी एक के असन्तुलन से मानसिक अवस्था में तो परिवर्तन आता ही है, उससे शरीर पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। पतंजलि योग में वर्णित अष्टांग योग के प्रथम तीन अंगों—यम, नियम और आसन से त्रिदोष सन्तुलन में बड़ी सहायता मिलती है।</p> <p>योग और आयुर्वेद दोनों ही मूल रूप से शरीर से सम्बन्धित हैं। इनके आधारभूत सिद्धान्त सांख्य पर आधारित हैं आयुर्वेदिक योग पतंजलि के अष्टांग योग से ही ग्रहण किया गया है। इसका आधारभूत उद्देश्य है—अच्छा स्वास्थ्य, शारीरिक-मानसिक सन्तुलन और जीवन का सम्पूर्ण आनन्द। डॉ. विनोद वर्मा की इस पुस्तक का उद्देश्य योग और आयुर्वेद दोनों के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखना है। दूसरा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान सागर से ऐसी नई एवं सरल विधियों का विकास करना है जिनसे मानव स्वास्थ्य, शान्ति और सौमनस्य प्राप्त कर सके।</p> <p>इस पुस्तक को पाँच खंडों में विभाजित किया गया है। पहले खंड में भारतीय परम्परा : योग और आयुर्वेद पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे खंड में पतंजलि के योग सूत्रों की व्याख्या की गई है और तीसरे खंड में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्त तथा चौथे खंड में योग और आयुर्वेद का एकीकरण एवं पाँचवें खंड में आयुर्वेद योग पर विस्तृत चर्चा की गई है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्तों के अनुसार, पित्त और कफ में से किसी एक के असन्तुलन से मानसिक अवस्था में तो परिवर्तन आता ही है, उससे शरीर पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। पतंजलि योग में वर्णित अष्टांग योग के प्रथम तीन अंगों—यम, नियम और आसन से त्रिदोष सन्तुलन में बड़ी सहायता मिलती है।</p>
<p>योग और आयुर्वेद दोनों ही मूल रूप से शरीर से सम्बन्धित हैं। इनके आधारभूत सिद्धान्त सांख्य पर आधारित हैं आयुर्वेदिक योग पतंजलि के अष्टांग योग से ही ग्रहण किया गया है। इसका आधारभूत उद्देश्य है—अच्छा स्वास्थ्य, शारीरिक-मानसिक सन्तुलन और जीवन का सम्पूर्ण आनन्द। डॉ. विनोद वर्मा की इस पुस्तक का उद्देश्य योग और आयुर्वेद दोनों के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखना है। दूसरा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान सागर से ऐसी नई एवं सरल विधियों का विकास करना है जिनसे मानव स्वास्थ्य, शान्ति और सौमनस्य प्राप्त कर सके।</p>
<p>इस पुस्तक को पाँच खंडों में विभाजित किया गया है। पहले खंड में भारतीय परम्परा : योग और आयुर्वेद पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे खंड में पतंजलि के योग सूत्रों की व्याख्या की गई है और तीसरे खंड में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्त तथा चौथे खंड में योग और आयुर्वेद का एकीकरण एवं पाँचवें खंड में आयुर्वेद योग पर विस्तृत चर्चा की गई है।
Book Details
-
ISBN9788183611916
-
Pages260
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ayurvedic Bhojan Sanskriti
- Author Name:
Vinod Verma
- Book Type:

- Description:
आयुर्वेद आयु का विज्ञान है जो जीवन के प्रत्येक पहलू से जुड़ा है। ‘आयुर्वेदिक भोजन’ आयुर्वेदिक जीवन-शैली का अंग है और भोजन बनाने के अन्य अंगों को अपनाए बिना यह प्रयास अपूर्ण है।
आयुर्वेदिक भोजन क्या है? आयुर्वेदिक भोजन संस्कृति के प्रमुख तत्त्व, बुनियादी ज्ञान एवं
आधारभूत बातें, रसों का व्यावहारिक स्वरूप, भोजन बनाने की मूल वस्तुओं का संकलन, भोजन के छह आयाम तथा आयुर्वेदिक भोज्य व्यंजन (नाश्ते के व्यंजन, प्रमुख भोजन, सूप, सहायक खाद्य पदार्थ आदि) पर सम्पूर्ण सामग्री के अलावा खाद्य पदार्थों, जड़ी-बूटियों और मसालों की पूर्ण जानकारी।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार वर्मा के वर्षों के शोध और परिश्रम का निष्कर्ष यह पुस्तक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए आयुर्वेदिक भोजन बनाने और खाने की कला के विषय में सम्पूर्ण जानकारी देती है।
Karyakshamta Ke Liye Aayurveda Aur Yog
- Author Name:
Vinod Verma
- Book Type:

- Description:
डॉ. विनोद वर्मा के वर्षों के शोध और परिश्रम का निष्कर्ष यह पुस्तक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए निरोधी उपायों और दूसरे स्वावलम्बी तरीक़ों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी देती है। लेखिका की विदेशों में आयुर्वेद की शिक्षा, आयुर्वेद और योग का लम्बे समय तक अध्ययन तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसन्धान और अनुभव इस पुस्तक को महत्त्वपूर्ण कृति बनाते हैं।
दफ़्तर में तनावमुक्त वातावरण कैसे बने, इसके लिए डॉ. विनोद वर्मा की पहली सलाह दैनिक योगाभ्यास है—एक ऐसा आसान-सा व्यायाम जो आपके पूरे दिन से मात्र 16 मिनट चाहता है। आगे डॉ. वर्मा आयुर्वेद के आधार पर तीन मूलभूत व्यक्ति-प्रकारों पर प्रकाश डालती हैं, ताकि आप अपने सहकर्मियों का भलीभाँति अध्ययन कर सकें। इस पुस्तक से आप अपने प्रकार को विभिन्न भोज्य पदार्थों और मसालों से सन्तुलित करने की प्रविधियाँ भी जानेंगे। निःसन्देह, यह कोई भोजन-निर्देशिका नहीं है, यह पुस्तक आपको केवल यह बताती है कि अपनी क्षमताओं के अधिकाधिक उपयोग के लिए आप अपनी ऊर्जा का समुचित सन्तुलन कैसे प्राप्त करें। आयुर्वेद की नज़र से देखें तो भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, वह आपकी ऊर्जा के पुनर्सन्तुलन के लिए एक महत्त्वपूर्ण साधन भी
है।डॉ. विनोद वर्मा व्यावहारिक अध्यापिका हैं। वे दुनिया के कई हिस्सों में पढ़ाती रही हैं। अनेक भाषाओं में उनकी पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित व चर्चित हो चुके हैं। इसके अलावा उनके पास अनुभवों का ख़ज़ाना है और अत्यन्त तनावकारी व्यस्तता के साथ एक स्वस्थ जीवन-शैली के निर्वाह की कला भी। जिस पाँच हज़ार साल पुरानी जीवन-पद्धति की शिक्षा वे देती हैं, उसे वे अन्य असंख्य लोगों के साथ-साथ अपने ऊपर भी सफलतापूर्वक आज़मा चुकी हैं। क्यों न आप भी आज़माएँ? यदि आप कार्य-तत्पर प्रकृति के व्यक्ति हैं तो इस पुस्तक का अध्ययन आपको हर प्रकार से लाभान्वित करेगा।
Acharya Ramchandra Shukla
- Author Name:
Ramchandra Tiwari
- Book Type:

- Description:
आचार्य शुक्ल का व्यक्तित्व बहुआयामी है। उनके व्यक्तित्व में स्वाभिमान, दृढ़ता, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता, करुणार्द्रता, गम्भीरता, मर्यादाप्रियता आदि गुणों के साथ प्रत्युत्पन्नमतित्व और रंजन की प्रवृत्तियाँ भी लक्षित होती हैं। उनके व्यक्तित्व के अनेक आयामों का विकास उनके जीवन-संघर्ष से जुड़ा है। उन्हें एक खास तरह से सोचने-समझने, निर्णय लेने और अपने व्यक्तित्व को विकसित करने की दिशा में उनके परिवेश ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उनकी रचनाओं में उनके व्यक्तित्व की छाप है। कहा जा सकता है कि आचार्य शुक्ल का जीवन-संघर्ष, व्यक्तित्व और रचना दृष्टि एक-दूसरे से बहुत गहरे स्तर पर जुड़े हैं। इसलिए इन्हें अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।
Bhartiya Evam Pashchatya Kavyshastra Ki Rooprekha
- Author Name:
Ramchandra Tiwari
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत कृति विश्वविद्यालयों के उच्च कक्षा के छात्रों को दृष्टि में रखकर लिखी गई है। प्रथम खंड में भारतीय काव्यशास्त्र की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। इसमें वे सारे विषय बोधगम्य शैली में प्रस्तुत किए गए हैं जो छात्रों के लिए उपयोगी हैं।
पाश्चात्य काव्यशास्त्र में प्लेटो-पूर्व युग से लेकर नई समीक्षा तक वे सभी विषय दे दिए गए हैं जो हिन्दी के छात्रों के लिए ज्ञातव्य हैं। इस क्रम में उस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को भी प्रस्तुत करने की चेष्टा की गई है जिससे आलोचना की विशिष्ट प्रवृत्ति या आलोचक-विशेष के व्यक्तित्व का विकास हुआ है।
Hindi Aalochana : Shikharo Ka Sakshatkar
- Author Name:
Ramchandra Tiwari
- Book Type:

- Description:
द्विवेदी-युग के उत्तरार्ध में आचार्य शुक्ल के रूप में पहली बार हिन्दी-आलोचना ने पारम्परिक भारतीय काव्य-चिन्तन की अन्तरवर्ती प्राणधारा और आधुनिक यूरोप के विज्ञानालोकित कला-चिन्तन के उल्लसित प्रवाह की संश्लिस्ट शक्ति का आधार लेकर अपने मौलिक व्यक्तित्व का निर्माण किया, उनका मूल स्वर रीति-विरोधी और लोक-मंगल की साधना के गत्यात्मक सौन्दर्य का पोषक है। छायावादकालीन सौन्दर्यबोध का प्रेरक तत्त्व स्वातंत्र्य चेतना है जो देश की अभिनव आकांक्षा और नवीन सांस्कृतिक मूल्यों के स्वीकार का द्योतक है रचना के कलावादी रुझान का नहीं। छायावादोत्तर प्रगतिशील आलोचना का प्रेरक-तत्त्व सामाजिक न्याय की प्रतिष्ठा की सात्त्विक आकांक्षा है। वैचारिक ग्रहजन्य सीमाओं के बावजूद हिन्दी-साहित्य में उसकी ऐतिहासिक भूमिका का महत्त्व सर्वमान्य है।
प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी, आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, डॉ. रामविलास शर्मा, मुक्तिबोध, डॉ. नामवर सिंह, डॉ. बच्चन सिंह तथा डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी जैसे महान समीक्षकों पर एक गवेषणात्मक दृष्टि डाली गई है।
Alochak Ka Dayitva
- Author Name:
Ramchandra Tiwari
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत कृति में आधुनिक हिन्दी-आलोचना की परिधि में आने वाले विविध सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक प्रश्नों के विश्लेषण-क्रम में आलोचक के गहन दायित्व के आकलन की चेष्टा की गई है। लेखक ने आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी, आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, डॉ. नगेन्द्र, डॉ. रामविलास शर्मा और डॉ. नामवर सिंह जैसे प्रख्यात् आलोचकों की सैद्धान्तिक मान्यताओं एवं व्यावहारिक समीक्षा-पद्धतियों के विश्लेषण द्वारा यह स्पष्ट करने की चेष्टा की है कि इन आलोचकों ने किस सीमा तक और किस रूप में एक आदर्श आलोचक के दायित्व का निर्वाह किया है। यह कृति हिन्दी के विवेकशील एवं आग्रहमुक्त सुधी पाठकों के बीच प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकेगी, ऐसा हमारा विश्वास है।
Adhunik Hindi Alochana: Sandarbh Evam Drishti
- Author Name:
Ramchandra Verma +1
- Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में भारतेन्दु-युग से लेकर आज तक की हिन्दी-समीक्षा के सामाजिक सन्दर्भ और उसके प्रभाव में निर्मित और प्रयुक्त पारिभाषिक शब्दावली का ऐतिहासिक दृष्टि से विवेचना किया गया है। इस क्रम में प्रमुख समीक्षकों द्वारा प्रयुक्त पारिभाषिक शब्दावली को उनकी समीक्षा-दृष्टि के आलोक में देखने की चेष्टा की गई है। पुस्तक में लक्षित किया गया है कि भारतेन्दु-युग में एक ओर परम्परागत शास्त्रीय शब्दावली की जटिलता को शिथिल करने की कोशिश की गई दूसरी ओर नए सामाजिक सन्दर्भ के अनुकूल देश-भक्ति और सामाजिक सुधार जैसे मूल्यों को समीक्षा के केन्द्र में प्रतिष्ठित किया गया।
Kabeer Mimansa
- Author Name:
Ramchandra Tiwari
- Book Type:

- Description:
इस संस्करण में कबीर से सम्बन्धित निबन्ध—कबीर-वाणी की लिखित एवं मौखिक परम्परा तथा कबीर का व्यक्तित्व, ‘कबीर-वाणी के अध्ययन की परम्परा’, ‘प्रगतिवादी कबीर', ‘कबीर का आदर्श मानव और मानवतावाद’, ‘कबीर को कबीर ही रहने दें’, ‘कबीर : अन्तर्विरोधों के बावजूद’ शामिल किया गया है। यह कबीर से सम्बन्धित सभी पक्षों का समग्र मूल्यांकन करनेवाली कृति है।
प्रस्तुत कृति में कबीर के जीवन-वृत्त और कृतियों के प्रामाणिक परिचय के साथ ही उनके युग-विधायक बहुआयामी व्यक्तित्व को व्यंजित करने वाली सभी संघटक तत्त्वों का गम्भीर, सन्तुलित, सारग्राही, स्पष्ट एवं आग्रहयुक्त अध्ययन किया गया है। यह प्रयास उस महिमामय व्यक्तित्व के प्रति एक विनम्र प्रणति है।
आशा है, विद्वज्जनों के बीच यह कृति इसी रूप में स्वीकार्य होगी तथा पाठकों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी।
Heart Talk
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Daily Bread
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Kya Khayen Jab Bimar Paden
- Author Name:
Madhuri Gupta
- Book Type:

- Description:
‘रैसिपी बुक’ मोटापा, गठिया, उच्च रक्तचाप, पीलिया, ऑस्टियोपोरोसिस, दस्त, मधुमेह—गुर्दे, हृदय, अल्सर, क़ब्ज़ जैसी बीमारियों के बारे में जानकारी देने के अलावा यह भी बताती है कि किस प्रकार अपने आहार में चुनिन्दा चीज़ों को सेवन करने से हम इन रोगों को आगे बढ़ने से रोक सकते हैं। साथ ही इस पुस्तक में पाठकों के लिए विविध व्यंजन-विधियों की सरल और सम्पूर्ण जानकारी भी दी गई है। एक परिशिष्ट में ‘आहार सम्बन्धी नियम’, ‘पोषक तत्त्वों की सुरक्षा’ के अतिरिक्त ‘शेष बचे खाद्य-पदार्थों के उपयोग पर महत्त्वपूर्ण टिप्स’ भी दिए गए हैं। पुस्तक में लिखित प्रत्येक पाक-विधि आसान भाषा में लिखी गई है और वह भी विशिष्ट डॉक्टरों से विचार-परामर्श करने के बाद।
High Blood Pressure
- Author Name:
Rekha Agrawal +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Managing Diabetes
- Author Name:
Yatish Agarwal +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Swasth Khain : Tan Man Jagain
- Author Name:
Rekha Agrawal +1
- Book Type:

- Description:
भोजन हमारे जीवन का भी आधार है, और सेहत का भी। उसी से यह शरीर बनता है, हमें शक्ति मिलती है और हम हृष्ट-पुष्ट रह पाते हैं। स्वस्थ तन और मन के लिए क्या खाएँ, कितना खाएँ, किस खाद्य-पदार्थ में कौन-सा पोषक तत्त्व है, विटामिन और खनिज हमें किस-किस भोजन से मिलते हैं, उनकी शरीर को कितनी ज़रूरत है, यह कृति जीवन से जुड़े इन सभी बुनियादी पक्षों पर बेहद सरल और व्यावहारिक जानकारी प्रस्तुत करती है।
रसोईघर में कौन सी छोटी-छोटी सावधानियाँ बरतने से फल-सब्जि़यों, चावल और दूसरे भोजनों के पौष्टिक गुण नष्ट नहीं होते, शुद्ध दूध और स्प्रेटा दूध के बीच क्या अन्तर है, फलों के छिलकों में क्या पौष्टिक गुण हैं जैसे विविध विषयों पर इस कृति में अद्यतन जानकारी उपलब्ध है।
पुस्तक में कोलेस्टेरॉल के बारे में उपयोगी जानकारी है और उसे सुधारने के सरल नुस्खे भी हैं। साथ ही, डायबिटीज, हृदय रोग, गाउट, गुर्दे की पथरी, कलेजे में जलन, दूध की एलर्जी जैसे विविध रोगों में अमल में लाए जानेवाले आहार सम्बन्धी परहेज़ भी दिए गए हैं। हमारे रोज़मर्रा के जीवन में किस-किस तरह से मिलावट होती है और उससे हमें क्या-क्या नुकसान पहुँचता है, ‘स्वस्थ खाएँ तनमन जगाएँ’ इस सम्बन्ध में भी हमें सावधान करती है।
Khatarnak Yon Janit Rog Aur Aids
- Author Name:
Premchandra Swarnkar
- Book Type:

- Description:
— प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक। रोगाणु के प्रवेश के औसतन 25 दिन बाद यौनांग पर अंडाकार फफोला बनता है। इसकी बाहरी सतह टूटने से यह एक छाले का रूप ले लेता है। छाले को प्राथमिक शैंकर भी कहते हैं। इससे ख़ून नहीं आता और सामान्य तौर पर दर्द भी नहीं होता। 95 प्रतिशत यौन रोगियों में घाव शिशन के ऊपर बनता है लेकिन समलिंगी रोगियों में यह गुदा के किनारे पर होता है। इसके अलावा यह होंठों अथवा जीभ पर भी हो सकता है। स्त्रियों में योनि द्वार के आसपास बनता है।
रोग की द्वितीयक अवस्था में 80 प्रतिशत मरीज़ों में त्वचा के रोग भी हो जाते हैं। कुछ मरीज़ों में यकृत, तिल्ली, मस्तिष्क की झिल्लियों में भी रोग फैल जाता है। इसके साथ ही बुख़ार, सिरदर्द, गले में दर्द इत्यादि लक्षण पैदा होते हैं।
पूरे शरीर की त्वचा में विभिन्न तरह की फुंसियाँ भी उभरती हैं। ये फुंसियाँ गुलाबी अथवा ताँबिया रंग की होती हैं। इनमें खुजलाहट नहीं होती। रोग की द्वितीयक अवस्था अधिक संक्रामक मानी जाती है। इस अवस्था में शरीर की प्रायः सभी लसिका ग्रन्थियों में सूजन आ जाती है।
रोग की तृतीयक अवस्था में शरीर के विभिन्न भागों पर ठोस गाँठों का निर्माण होता है जिन्हें गुम्मा कहते हैं। ये अनियमित आकार की होती हैं। तृतीयक सिफ़लिस पुरुष अथवा स्त्री के प्रायः सभी अंग संस्थानों में फैल जाती हैं उदाहरणार्थ—यह हृदय एवं रक्त वाहिकाओं, फेफड़ों, पाचन संस्थान, अस्थि तंत्र, तंत्रिका तंत्र इत्यादि को प्रभावित कर इनके कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है, यहाँ तक कि रोगी पागल हो जाता है। उसको लकवा लग सकता है, उसकी हृदयगति रुक सकती है।
—इसी पुस्तक से
Blood Pressure : Jitna Sainyat Utna Swasth
- Author Name:
Rekha Agrawal +1
- Book Type:

- Description:
च रक्तदाब जीवनशैली से जुड़ा वर्तमान सदी का प्रमुख रोग है। दुनिया में एक अरब से अधिक लोग इस रोग से घिरे हुए हैं। स्वस्थ जीवनशैली रक्तदाब को संयम में लाने का प्रथम आधार है। कुछ कमी छूट जाए, तो इसे पूरा करने के लिए बहुत-सी उच्च रक्तदाबरोधक दवाएँ हैं, जिन्हें नियम से लेकर यह जीवन स्वस्थ और सुखद बना रह सकता है। यह कृति एक कुशल विवेकी डॉक्टर मित्र के समाधान प्रस्तुत करती है और उसके बचाव और उपचार की सुगम राह दिखाती है।
Medicine Chest
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
Provides all you need to know about correct usage of medications to take effective care of your health.
Santulit Bhojan
- Author Name:
Premchandra Swarnkar
- Book Type:

- Description:
भोजन का हमारे स्वास्थ्य से गहरा सम्बन्ध है। जीवित रहने के लिए ऊर्जा और रोगों से लड़ने की क्षमता हमें भोजन से ही मिलती है। इसके लिए ज़रूरी है कि जो भोजन हम लेते हैं, उसमें सभी आवश्यक तत्त्व शामिल हों, लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश की ज़्यादातर आबादी को सन्तुलित भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता। इसी कारण कुपोषण आज हमारी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है।
इसका एक बड़ा कारण सन्तुलित आहार के बारे में सही जानकारी न होना है। इस पुस्तक में भोजन में शामिल विभिन्न खाद्य पदार्थों में मिलनेवाले पोषक तत्त्वों के साथ-साथ ऐसे सस्ते और सहज उपलब्ध भोज्य पदार्थों की जानकारी दी गई है जिनसे हम अपनी स्वास्थ्य सम्बन्धी सारी ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं। एक अत्यन्त उपयोगी गाइड बुक है ‘सन्तुलित भोजन’।
Gurda Rog Kidni Ke Rog
- Author Name:
Pradeep Kumar Agarwal +1
- Book Type:

- Description:
गुर्दा के रोगग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही प्रभावित व्यक्ति एवं उसके शुभचिन्तक भयग्रस्त हो जाते हैं। उन्हें लगता है, बीमारी लाइलाज होगी एवं व्यक्ति की आयु सीमित होगी। परन्तु वर्तमान समय में उपलब्ध जानकारियों एवं आधुनिक चिकित्साशास्त्र के उपायों ने इस अवधारणा को मिथ्या सिद्ध कर दिया है। सही निदान, उपचार एवं सावधानी बरत कर गुर्दा रोगी भी स्वस्थ एवं दीर्घायु हो सकता है।
यद्यपि शरीर में दो गुर्दे होने के बावजूद जीवनयापन के लिए एक गुर्दा ही काफ़ी है परन्तु हमें लापरवाह नहीं होना चाहिए। यदि हम सावधानी रखें, दवाओं का उपयोग सोच-समझ कर चिकित्सकों की सलाह से करें तो गुर्दों की कष्टदायक बीमारियों से बचा जा सकता है और अगर रोग हो भी जाए तो उसका उचित उपचार गुर्दा विशेषज्ञ की सहायता से सम्भव है। हमें मन से यह भय एवं चिन्ता निकाल देनी चाहिए कि गुर्दा रोग हो जाने पर जीवन सीमित एवं कष्टमय हो जाता है, या गुर्दा रोग लाइलाज होता है।
डॉ. प्रदीप कुमार अग्रवाल ने इस पुस्तक में गुर्दा रोगों के बारे में विस्तृत वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक जानकारी सरल भाषा में दी है, जिससे आम पाठक भी सुगमतापूर्वक समझ सकें और व्यावहारिक लाभ उठा सकें। आज के युग में किसी भी विषय की समझ, जानकारी या ज्ञान व्यक्ति के लिए अमूल्य धन के समान है। डॉ. अग्रवाल का प्रयास प्रशंसनीय है एवं गुर्दा रोगियों के लिए अति लाभकारी है।
Dawain Aur Hum
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
मानव ने अपनी सुरक्षा के लिए दवाओं की एक बहुत बडी दुनिया रच ली है। यह उनका ही चमत्कार है कि जहाँ सौ साल पहले धरती पर आदमी की औसत उम्र 25 से भी कम थी, आज वह दुगुनी-तिगुनी हो गई है। कठिन से कठिन, दु:साध्य से दु:साध्य रोग जीत लिए गए हैं। यह सच है कि जीवन के तार दवाओं से जितने मुक्त
रहें, यह जीवन उतना ही सुखमय रहता है, किन्तु कठिन घड़ियों में दवाओं का सहारा न लेने में भी जीवन की जीत नहीं, हार है।
दवाओं की दुनिया पर प्रकाश डालती या कृति एक छोटी हैंडबुक है, जिसमें दवाओं से जुडी कुछ बहुत बुनियादी बातें और व्यावहारिक पहलू उकेरे गए हैं—डॉक्टर के पर्चे में बने संकेत क्या इंगित करते हैं, दवाओं के सुरक्षित प्रयोग के सच्चे मायने क्या हैं, दवाओं के साथ भोजन सम्बन्धी क्या-क्या परहेज़ ज़रूरी हैं, प्रमुख दवाओं के साथ अनिवार्य सावधानियाँ क्या हैं, कब कोई दवा दूसरी दवा को पटकी दे सकती है, कब किसे बढ़ावा देकर जीवन मुश्किल कर सकती है, इसका एक संक्षिप्त विवरण इस रचना में प्रस्तुत है।
यह विज्ञान इतना विशद और विशाल है कि इसका अंश-भर ही इस पुस्तक में आ सका है। यूँ भी इस लघु रचना की सफलता इसी में है कि वह पाठक में जागरूकता का दीया प्रज्वलित कर सके, उसे नीमहकीमी की काली छाया से मुक्त होने की ओर प्रेरित कर सके। कृति में उपलब्ध सभी जानकारियाँ आयुर्विज्ञान के आधिकारिक ग्रन्थों पर आधारित हैं जिसमें लेखक के चिकित्सकीय जीवन के तीन दशकों का अनुभव अभिन्न रूप से समाविष्ट है ।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book