Gurda Rog Kidni Ke Rog
(0)
₹
99
₹ 79.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
गुर्दा के रोगग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही प्रभावित व्यक्ति एवं उसके शुभचिन्तक भयग्रस्त हो जाते हैं। उन्हें लगता है, बीमारी लाइलाज होगी एवं व्यक्ति की आयु सीमित होगी। परन्तु वर्तमान समय में उपलब्ध जानकारियों एवं आधुनिक चिकित्साशास्त्र के उपायों ने इस अवधारणा को मिथ्या सिद्ध कर दिया है। सही निदान, उपचार एवं सावधानी बरत कर गुर्दा रोगी भी स्वस्थ एवं दीर्घायु हो सकता है।</p> <p>यद्यपि शरीर में दो गुर्दे होने के बावजूद जीवनयापन के लिए एक गुर्दा ही काफ़ी है परन्तु हमें लापरवाह नहीं होना चाहिए। यदि हम सावधानी रखें, दवाओं का उपयोग सोच-समझ कर चिकित्सकों की सलाह से करें तो गुर्दों की कष्टदायक बीमारियों से बचा जा सकता है और अगर रोग हो भी जाए तो उसका उचित उपचार गुर्दा विशेषज्ञ की सहायता से सम्भव है। हमें मन से यह भय एवं चिन्ता निकाल देनी चाहिए कि गुर्दा रोग हो जाने पर जीवन सीमित एवं कष्टमय हो जाता है, या गुर्दा रोग लाइलाज होता है।</p> <p>डॉ. प्रदीप कुमार अग्रवाल ने इस पुस्तक में गुर्दा रोगों के बारे में विस्तृत वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक जानकारी सरल भाषा में दी है, जिससे आम पाठक भी सुगमतापूर्वक समझ सकें और व्यावहारिक लाभ उठा सकें। आज के युग में किसी भी विषय की समझ, जानकारी या ज्ञान व्यक्ति के लिए अमूल्य धन के समान है। डॉ. अग्रवाल का प्रयास प्रशंसनीय है एवं गुर्दा रोगियों के लिए अति लाभकारी है।
Read moreAbout the Book
गुर्दा के रोगग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही प्रभावित व्यक्ति एवं उसके शुभचिन्तक भयग्रस्त हो जाते हैं। उन्हें लगता है, बीमारी लाइलाज होगी एवं व्यक्ति की आयु सीमित होगी। परन्तु वर्तमान समय में उपलब्ध जानकारियों एवं आधुनिक चिकित्साशास्त्र के उपायों ने इस अवधारणा को मिथ्या सिद्ध कर दिया है। सही निदान, उपचार एवं सावधानी बरत कर गुर्दा रोगी भी स्वस्थ एवं दीर्घायु हो सकता है।</p>
<p>यद्यपि शरीर में दो गुर्दे होने के बावजूद जीवनयापन के लिए एक गुर्दा ही काफ़ी है परन्तु हमें लापरवाह नहीं होना चाहिए। यदि हम सावधानी रखें, दवाओं का उपयोग सोच-समझ कर चिकित्सकों की सलाह से करें तो गुर्दों की कष्टदायक बीमारियों से बचा जा सकता है और अगर रोग हो भी जाए तो उसका उचित उपचार गुर्दा विशेषज्ञ की सहायता से सम्भव है। हमें मन से यह भय एवं चिन्ता निकाल देनी चाहिए कि गुर्दा रोग हो जाने पर जीवन सीमित एवं कष्टमय हो जाता है, या गुर्दा रोग लाइलाज होता है।</p>
<p>डॉ. प्रदीप कुमार अग्रवाल ने इस पुस्तक में गुर्दा रोगों के बारे में विस्तृत वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक जानकारी सरल भाषा में दी है, जिससे आम पाठक भी सुगमतापूर्वक समझ सकें और व्यावहारिक लाभ उठा सकें। आज के युग में किसी भी विषय की समझ, जानकारी या ज्ञान व्यक्ति के लिए अमूल्य धन के समान है। डॉ. अग्रवाल का प्रयास प्रशंसनीय है एवं गुर्दा रोगियों के लिए अति लाभकारी है।
Book Details
-
ISBN9788126721801
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Daily Bread
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Swasth Khain : Tan Man Jagain
- Author Name:
Rekha Agrawal +1
- Book Type:

- Description:
भोजन हमारे जीवन का भी आधार है, और सेहत का भी। उसी से यह शरीर बनता है, हमें शक्ति मिलती है और हम हृष्ट-पुष्ट रह पाते हैं। स्वस्थ तन और मन के लिए क्या खाएँ, कितना खाएँ, किस खाद्य-पदार्थ में कौन-सा पोषक तत्त्व है, विटामिन और खनिज हमें किस-किस भोजन से मिलते हैं, उनकी शरीर को कितनी ज़रूरत है, यह कृति जीवन से जुड़े इन सभी बुनियादी पक्षों पर बेहद सरल और व्यावहारिक जानकारी प्रस्तुत करती है।
रसोईघर में कौन सी छोटी-छोटी सावधानियाँ बरतने से फल-सब्जि़यों, चावल और दूसरे भोजनों के पौष्टिक गुण नष्ट नहीं होते, शुद्ध दूध और स्प्रेटा दूध के बीच क्या अन्तर है, फलों के छिलकों में क्या पौष्टिक गुण हैं जैसे विविध विषयों पर इस कृति में अद्यतन जानकारी उपलब्ध है।
पुस्तक में कोलेस्टेरॉल के बारे में उपयोगी जानकारी है और उसे सुधारने के सरल नुस्खे भी हैं। साथ ही, डायबिटीज, हृदय रोग, गाउट, गुर्दे की पथरी, कलेजे में जलन, दूध की एलर्जी जैसे विविध रोगों में अमल में लाए जानेवाले आहार सम्बन्धी परहेज़ भी दिए गए हैं। हमारे रोज़मर्रा के जीवन में किस-किस तरह से मिलावट होती है और उससे हमें क्या-क्या नुकसान पहुँचता है, ‘स्वस्थ खाएँ तनमन जगाएँ’ इस सम्बन्ध में भी हमें सावधान करती है।
Kya Khayen Jab Bimar Paden
- Author Name:
Madhuri Gupta
- Book Type:

- Description:
‘रैसिपी बुक’ मोटापा, गठिया, उच्च रक्तचाप, पीलिया, ऑस्टियोपोरोसिस, दस्त, मधुमेह—गुर्दे, हृदय, अल्सर, क़ब्ज़ जैसी बीमारियों के बारे में जानकारी देने के अलावा यह भी बताती है कि किस प्रकार अपने आहार में चुनिन्दा चीज़ों को सेवन करने से हम इन रोगों को आगे बढ़ने से रोक सकते हैं। साथ ही इस पुस्तक में पाठकों के लिए विविध व्यंजन-विधियों की सरल और सम्पूर्ण जानकारी भी दी गई है। एक परिशिष्ट में ‘आहार सम्बन्धी नियम’, ‘पोषक तत्त्वों की सुरक्षा’ के अतिरिक्त ‘शेष बचे खाद्य-पदार्थों के उपयोग पर महत्त्वपूर्ण टिप्स’ भी दिए गए हैं। पुस्तक में लिखित प्रत्येक पाक-विधि आसान भाषा में लिखी गई है और वह भी विशिष्ट डॉक्टरों से विचार-परामर्श करने के बाद।
Managing Diabetes
- Author Name:
Yatish Agarwal +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Santulit Bhojan
- Author Name:
Premchandra Swarnkar
- Book Type:

- Description:
भोजन का हमारे स्वास्थ्य से गहरा सम्बन्ध है। जीवित रहने के लिए ऊर्जा और रोगों से लड़ने की क्षमता हमें भोजन से ही मिलती है। इसके लिए ज़रूरी है कि जो भोजन हम लेते हैं, उसमें सभी आवश्यक तत्त्व शामिल हों, लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश की ज़्यादातर आबादी को सन्तुलित भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता। इसी कारण कुपोषण आज हमारी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है।
इसका एक बड़ा कारण सन्तुलित आहार के बारे में सही जानकारी न होना है। इस पुस्तक में भोजन में शामिल विभिन्न खाद्य पदार्थों में मिलनेवाले पोषक तत्त्वों के साथ-साथ ऐसे सस्ते और सहज उपलब्ध भोज्य पदार्थों की जानकारी दी गई है जिनसे हम अपनी स्वास्थ्य सम्बन्धी सारी ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं। एक अत्यन्त उपयोगी गाइड बुक है ‘सन्तुलित भोजन’।
High Blood Pressure
- Author Name:
Rekha Agrawal +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Khatarnak Yon Janit Rog Aur Aids
- Author Name:
Premchandra Swarnkar
- Book Type:

- Description:
— प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक। रोगाणु के प्रवेश के औसतन 25 दिन बाद यौनांग पर अंडाकार फफोला बनता है। इसकी बाहरी सतह टूटने से यह एक छाले का रूप ले लेता है। छाले को प्राथमिक शैंकर भी कहते हैं। इससे ख़ून नहीं आता और सामान्य तौर पर दर्द भी नहीं होता। 95 प्रतिशत यौन रोगियों में घाव शिशन के ऊपर बनता है लेकिन समलिंगी रोगियों में यह गुदा के किनारे पर होता है। इसके अलावा यह होंठों अथवा जीभ पर भी हो सकता है। स्त्रियों में योनि द्वार के आसपास बनता है।
रोग की द्वितीयक अवस्था में 80 प्रतिशत मरीज़ों में त्वचा के रोग भी हो जाते हैं। कुछ मरीज़ों में यकृत, तिल्ली, मस्तिष्क की झिल्लियों में भी रोग फैल जाता है। इसके साथ ही बुख़ार, सिरदर्द, गले में दर्द इत्यादि लक्षण पैदा होते हैं।
पूरे शरीर की त्वचा में विभिन्न तरह की फुंसियाँ भी उभरती हैं। ये फुंसियाँ गुलाबी अथवा ताँबिया रंग की होती हैं। इनमें खुजलाहट नहीं होती। रोग की द्वितीयक अवस्था अधिक संक्रामक मानी जाती है। इस अवस्था में शरीर की प्रायः सभी लसिका ग्रन्थियों में सूजन आ जाती है।
रोग की तृतीयक अवस्था में शरीर के विभिन्न भागों पर ठोस गाँठों का निर्माण होता है जिन्हें गुम्मा कहते हैं। ये अनियमित आकार की होती हैं। तृतीयक सिफ़लिस पुरुष अथवा स्त्री के प्रायः सभी अंग संस्थानों में फैल जाती हैं उदाहरणार्थ—यह हृदय एवं रक्त वाहिकाओं, फेफड़ों, पाचन संस्थान, अस्थि तंत्र, तंत्रिका तंत्र इत्यादि को प्रभावित कर इनके कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है, यहाँ तक कि रोगी पागल हो जाता है। उसको लकवा लग सकता है, उसकी हृदयगति रुक सकती है।
—इसी पुस्तक से
Digestive Disorders : Common Issues
- Author Name:
Dr. Pradip Kumar Agrawal +1
- Book Type:

- Description:
Digestive Disorders: Common Issues A book on health and fitness.
Patanjali Aur Ayurvedic Yoga
- Author Name:
Vinod Verma
- Book Type:

- Description:
आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्तों के अनुसार, पित्त और कफ में से किसी एक के असन्तुलन से मानसिक अवस्था में तो परिवर्तन आता ही है, उससे शरीर पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। पतंजलि योग में वर्णित अष्टांग योग के प्रथम तीन अंगों—यम, नियम और आसन से त्रिदोष सन्तुलन में बड़ी सहायता मिलती है।
योग और आयुर्वेद दोनों ही मूल रूप से शरीर से सम्बन्धित हैं। इनके आधारभूत सिद्धान्त सांख्य पर आधारित हैं आयुर्वेदिक योग पतंजलि के अष्टांग योग से ही ग्रहण किया गया है। इसका आधारभूत उद्देश्य है—अच्छा स्वास्थ्य, शारीरिक-मानसिक सन्तुलन और जीवन का सम्पूर्ण आनन्द। डॉ. विनोद वर्मा की इस पुस्तक का उद्देश्य योग और आयुर्वेद दोनों के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखना है। दूसरा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान सागर से ऐसी नई एवं सरल विधियों का विकास करना है जिनसे मानव स्वास्थ्य, शान्ति और सौमनस्य प्राप्त कर सके।
इस पुस्तक को पाँच खंडों में विभाजित किया गया है। पहले खंड में भारतीय परम्परा : योग और आयुर्वेद पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे खंड में पतंजलि के योग सूत्रों की व्याख्या की गई है और तीसरे खंड में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्त तथा चौथे खंड में योग और आयुर्वेद का एकीकरण एवं पाँचवें खंड में आयुर्वेद योग पर विस्तृत चर्चा की गई है।
Coronary Hridaya Rog : Bachav Aur Upchar Ki Raah
- Author Name:
Yatish Agarwal +1
- Book Type:

- Description:
न का सुर-संगीत दिल की धड़कनों में ही बसा है। ये धड़कनें ताज़िन्दगी मज़बूत बनी रहें, यह मंगल प्रार्थना पूरी करने के लिए जीवन में थोड़ा संयम, थोड़ा अनुशासन गूँथना ज़रूरी है। जब तक स्वस्थ जीवन-पद्धति न अपनाई जाए, उम्र बढ़ने के साथ और कभी कम उम्र में ही कोरोनरी धमनियों में सँकरापन आना स्वाभाविक है। ऐंजाइना और दिल का दौरा इसी की देन हैं। हृदय रोग से सम्बन्धित नवीनतम जानकारियाँ तथा बचाव और उपचार के व्यावहारिक पहलुओं को सरल- सुबोध शैली में प्रस्तुत करती यह कृति न सिर्फ़ रोगी और उसके परिवारजन बल्कि हर किसी के लिए पठनीय और उपयोगी है। ऐंजाइना क्या है, दिल का दौरा क्यों पड़ता है, किन-किन चीज़ों से दिल बीमार पड़ता है, दिल के बचाव के क्या उपाय हैं, कोलेस्टेरॉल को कैसे कम कर सकते हैं, अपने हृदय का भविष्यफल जानने के लिए क्या सूत्र लगाएँ, कोरोनरी ऐंजियोप्लास्टी में क्या करते हैं, बायपास ऑपरेशन कैसे हृदय को नया जीवन देता है, दिल के विभिन्न टेस्ट कैसे किए जाते हैं और उनकी क्या उपयोगिता है, आदि की जानकारी देती पुस
Medicine Chest
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
Provides all you need to know about correct usage of medications to take effective care of your health.
Dawain Aur Hum
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
मानव ने अपनी सुरक्षा के लिए दवाओं की एक बहुत बडी दुनिया रच ली है। यह उनका ही चमत्कार है कि जहाँ सौ साल पहले धरती पर आदमी की औसत उम्र 25 से भी कम थी, आज वह दुगुनी-तिगुनी हो गई है। कठिन से कठिन, दु:साध्य से दु:साध्य रोग जीत लिए गए हैं। यह सच है कि जीवन के तार दवाओं से जितने मुक्त
रहें, यह जीवन उतना ही सुखमय रहता है, किन्तु कठिन घड़ियों में दवाओं का सहारा न लेने में भी जीवन की जीत नहीं, हार है।
दवाओं की दुनिया पर प्रकाश डालती या कृति एक छोटी हैंडबुक है, जिसमें दवाओं से जुडी कुछ बहुत बुनियादी बातें और व्यावहारिक पहलू उकेरे गए हैं—डॉक्टर के पर्चे में बने संकेत क्या इंगित करते हैं, दवाओं के सुरक्षित प्रयोग के सच्चे मायने क्या हैं, दवाओं के साथ भोजन सम्बन्धी क्या-क्या परहेज़ ज़रूरी हैं, प्रमुख दवाओं के साथ अनिवार्य सावधानियाँ क्या हैं, कब कोई दवा दूसरी दवा को पटकी दे सकती है, कब किसे बढ़ावा देकर जीवन मुश्किल कर सकती है, इसका एक संक्षिप्त विवरण इस रचना में प्रस्तुत है।
यह विज्ञान इतना विशद और विशाल है कि इसका अंश-भर ही इस पुस्तक में आ सका है। यूँ भी इस लघु रचना की सफलता इसी में है कि वह पाठक में जागरूकता का दीया प्रज्वलित कर सके, उसे नीमहकीमी की काली छाया से मुक्त होने की ओर प्रेरित कर सके। कृति में उपलब्ध सभी जानकारियाँ आयुर्विज्ञान के आधिकारिक ग्रन्थों पर आधारित हैं जिसमें लेखक के चिकित्सकीय जीवन के तीन दशकों का अनुभव अभिन्न रूप से समाविष्ट है ।
Gyan Hai To Jahan Hai
- Author Name:
Gyan Chaturvedi
- Book Type:

- Description:
एक ऐसी किताब जो स्वस्थ सेहत और अनुकूल दिनचर्या के साथ डॉक्टरी परामर्श देती है। जिसे ठीक ही मुहावरेनुमा भाषा में ‘ज्ञान है तो जहान है’ का शीर्षक दिया गया है। लेखक का दावा है कि इस किताब में शामिल लेख पाठकों को उस तिलिस्म की मास्टर-की सौंपेगी जिसे तकनीकी शब्दावली में ‘मेडिकल विज्ञान’ कहते हैं। इन्हीं आधारों पर यह किताब अपने आप में रोचक और पठनीय बन पड़ती है।
इन लेखों में, सरल भाषा तथा रोचक शैली में बीपी, ऑस्टियोपोरोसिस, हार्ट अटैक, स्त्री रोग से लेकर हिस्टीरिया तथा बहुत सारी अन्य कॉमन बीमारियों के बारे में बेहद महत्त्वपूर्ण बातें बतलाई गई हैं; जिसमें पाठकों की जिज्ञासाओं और उनके विषय में जानकारियों के साथ समाधान के कई नए द्वार खुलते हैं। इस तरह यह किताब सामान्य जन के लिए तो लाभदायक है ही, जनरल डॉक्टरों, विशेषज्ञों तथा सुपर स्पेशलिस्टों के लिए भी ये अवश्य ही बेहद रुचिकर सिद्ध होगी। किन्तु ज्ञात हो कि मेडिकल साइंस निरन्तर बढ़ती और बदलती विद्या है इसलिए लेखक का मानना है कि यदि इस किताब के लेखों को पढ़ते हुए पाठक कहीं असहमत हों तो डॉक्टर से मिलकर उस विषय में पड़ताल करके ही सहमत हों, ताकि चिकित्सा सम्बन्धी भ्रांतियों का सावधानीपूर्वक निदान मिल सके।
बीमारियों को लेकर फैले भ्रमों को दूर कर उपचार और स्वास्थ्य की सटीक जानकारी देने वाली यह किताब स्वास्थ्य के लिए जिज्ञासु व्यक्तियों के साथ घर-घर के लिए बहुत ही अनिवार्य बन पड़ी है।
Heart Talk
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Doctor, Main Kya Karoon?
- Author Name:
Dr. Binda Singh
- Book Type:

- Description:
तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों को अपना वजूद बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। जीवन की महत्त्वाकांक्षाएँ उफान पर हैं। माता-पिता की बच्चों से और बच्चों की माता-पिता से उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। पारिवारिक रिश्तों में भावनात्मक सहयोग एवं प्यार की कमी आ गई है। पति-पत्नी के संबंधों में अहं आ गया है। सात जन्मों का रिश्ता सात दिनों का होने लगा है। तलाक की घटनाएँ बढ़ गई हैं। युवा वर्ग एवं किशोर दिग्भ्रमित हो रहे हैं। मानसिक तनाव एवं आत्महत्या की घटनाओं ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया है। भले ही हम इंटरनेट की दुनिया में जी रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक दुनिया से कटते जा रहे हैं। नकारात्मक मनोभाव हमारे मन में घर करते जा रहे हैं। बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग सभी के व्यवहार में आक्रामकता आ गई है। धैर्य कम हो गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी तरह मानसिक रूप से परेशान है। प्रस्तुत पुस्तक में इन बातों को ध्यान में रखकर सरल भाषा में बच्चों, किशोरों, युवा एवं बुजुर्ग को जागरूक करने की कोशिश की गई है कि वे खुद को इतना मजबूत रखें कि छोटी-छोटी परेशानियाँ उन्हें विचलित न कर सकें। मनोविकारों और मनोरोगों को दूर कर जीवन में सकारात्मक भाव जाग्रत् कर जीने का आनंद उठाने की राह दिखाती पठनीय पुस्तक।
Ek Manochikitsak Ke Notes
- Author Name:
Dr. Vinay Kumar
- Book Type:

- Description:
Article based on Phychological Issues
Mahamari Corona Aur Virus Janit Rog
- Author Name:
Dr. Prem Chandra Swarankar
- Book Type:

- Description:
इस पुस्तक में कोविड-19 और कोरोना के बारे में संपूर्ण और शोधपरक प्रमाणित जानकारियाँ प्रस्तुत की गई हैं। रोग के इतिहास से लेकर कोरोना विषाणु और रोग क्या है, रोग के कौन से लक्षण हैं, रोग की पहचान, जाँचें और इलाज क्या है? रोग से स्वयं को और परिवार को कैसे सुरक्षित रखें और इस खतरनाक रोग से बचने के उपाय इस पुस्तक में विस्तार से दिए गए हैं। कोरोना के टीके के बारे में बतलाते हुए विभिन्न वैज्ञानिक अभिमत और खोजों का भी अध्याय है। पाठकों के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण अध्याय है, लोगों द्वारा सामान्यतया पूछे जानेवाले लगभग 60 प्रश्न और उनके उत्तर। यह अध्याय आपकी सभी शंकाओं का समाधान करेगा। पारिभाषिक शब्दावलियों का भी एक अध्याय है। प्रथम भाग में संक्रामक रोगों की सामान्य जानकारियों के साथ, रोग प्रतिरोधक क्षमता या इम्यूनिटी के बारे में टीके क्या होते हैं, विवरण देकर बताया गया है। फिर संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय दिए गए हैं। पुस्तक के तीसरे भाग में वायरस जनित कुछ अन्य खतरनाक जानलेवा रोगों—सार्स, इबोला, एड्स, स्वाइन फ्लू, हेपेटाटिस, डेंगू, रोटावायरस इत्यादि के बारे में भी पूर्ण जानकारी दी गई है। इस प्रकार वायरस जनित रोगों पर, विशेषकर कोविड-19 पर यह बहुत ही उपयोगी और प्रामाणिक पुस्तक है। शिक्षा : बी.एस-सी., एम.बी.बी. एस., एम.डी. (पैथोलॉजी)
Homoeopathy Chikitsa
- Author Name:
Dr. M. B. L. Saxena
- Book Type:

- Description:
ऐलोपैथी चिकित्सा पद्धति से होनेवाले साइड इफेक्ट्स के कारण बड़ी संख्या में लोग होम्योपैथी चिकित्सा की ओर आकर्षित होने लगे हैं। प्रतिष्ठित एवं विख्यात होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. एम.बी.एल. सक्सेना के गहन अध्ययन और अनुभवों का परिणाम है यह पुस्तक। चूँकि आम आदमी रोगों को उनकी प्रकृति से ही समझता है, इसलिए पुस्तक में रोगों के नाम भी दिए गए हैं। उपचार पूरी तरह से रोगों की विशेषताओं और विचित्र लक्षणों पर आधारित हैं, जिनमें होम्योपैथी के सिद्धांतों का ध्यान रखा गया है। दवाओं की उपयुक्त पोटेंसी का भी सुझाव दिया गया है। पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य होम्योपैथी चिकित्सा के संबंध में पाठकों को विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी देने के साथ ही रोगियों को आसान और सस्ता उपचार उपलब्ध कराना है। यह पुस्तक होम्योपैथी चिकित्सकों के लिए भी संदर्भ पुस्तक के रूप में उपयोगी सिद्ध होगी।
Blood Pressure : Jitna Sainyat Utna Swasth
- Author Name:
Rekha Agrawal +1
- Book Type:

- Description:
च रक्तदाब जीवनशैली से जुड़ा वर्तमान सदी का प्रमुख रोग है। दुनिया में एक अरब से अधिक लोग इस रोग से घिरे हुए हैं। स्वस्थ जीवनशैली रक्तदाब को संयम में लाने का प्रथम आधार है। कुछ कमी छूट जाए, तो इसे पूरा करने के लिए बहुत-सी उच्च रक्तदाबरोधक दवाएँ हैं, जिन्हें नियम से लेकर यह जीवन स्वस्थ और सुखद बना रह सकता है। यह कृति एक कुशल विवेकी डॉक्टर मित्र के समाधान प्रस्तुत करती है और उसके बचाव और उपचार की सुगम राह दिखाती है।
Diabetes Ke Saath Swasth Jeevan
- Author Name:
Yatish Agarwal
- Book Type:

- Description:
इस भाग-दौड़ वाली ज़िन्दगी में क्या उपाय करें कि डायबिटीज से आप बचे रहें और अगर यह हो जाए तो उसे कैसे जीतें, प्रस्तुत कृति हमें यह सुगम राह दिखाती है। सरल-सुबोध शैली में रची गई इस पुस्तक में नई से नई वैज्ञानिक खोजों का खुलासा है। यह क्रान्तिकारी वैज्ञानिक सोच भी कि डायबिटीज में मीठी चीज़ें छोड़ना क़त्तई ज़रूरी नहीं। आयुर्विज्ञान के साथ-साथ योग और सन्तुलित आहार पर व्यावहारिक जानकारी है और नमूने के रूप में उपयोगी डाइट चार्ट भी प्रस्तुत हैं।
डायबिटीज के साथ स्वस्थ जीवन में आपकी अनेक जिज्ञासाओं के समाधान प्रस्तुत हैं—
- डायबिटीज क्यों होती है।
- डायबिटीज की पहचान क्या है।
- डायबिटीज से कैसे बचें।
- मेथी और जामुन शुगर को कैसे कम करते हैं।
- खानपान में क्या-क्या एहतियात बरतें।
- कौन-कौन से योगासन शुगर को घटाते हैं।
- व्यायाम के समय क्या-क्या सावधानियाँ बरतें।
- डायबिटीज की नई दवाएँ कौन-कौन सी हैं।
- इंसुलिन लेना कब ज़रूरी है।
- इमरजेंसी की घड़ियों में क्या करें।
- डायबिटीज के दुष्प्रभाव से कैसे मुक्त रहें।
- और....और भी बहुत कुछ। <
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book