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Zillat Ki Roti

In category

Poetry

Language

Hindi

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About the book

मनमोहन बेशक उन कवियों में हैं जो ‘साहिबे-दीवान’ बनने से पहले ही अपनी पीढ़ी की प्रतिनिधि आवाज़ बन जाते हैं। मनमोहन की कविता में वैचारिक और नैतिक आख्यान का एक अटूट सिलसिला है। उनके यहाँ वर्तमान जीवन या दैनिक अनुभव के किसी पहलू, किसी मामूली पीड़ा या नज़ारे के पीछे हमेशा हमारे समय की बड़ी कहानियों और बड़ी चिन्ताओं की झलक मिलती रही है। वह मुक्तिबोधियन लैंडस्केप के कवि हैं। उनकी भाषा और शिल्प को उनके कथ्य से अलग करना नामुमकिन है। यहाँ किसी तरह की कविताई का अतिरिक्त दबाव या एक वैयक्तिक मुहावरे के रियाज़ की ज़रूरत नहीं है, एक मुसलसल नैतिक उधेड़बुन है जो अपने वक़्त की राजनीतिक दास्तानों और आत्मीय अनुभवों के पेचदार रास्तों से गुज़रकर उनकी भाषा और शिल्प को एक विशिष्ट ‘टेक्स्चर’ और धीमा लेकिन आश्वस्त स्वर और एक वांछनीय खामोशी प्रदान करती है। मनमोहन अपनी पीढ़ी के सबसे ज़्यादा चिन्तामग्न, विचारशील और नैतिक रूप से अत्यन्त शिक्षित और सावधान कवि हैं। एक मुक्तिबोधीय पीड़ा और महान अपराधबोध उनके काव्य संस्कार में हैं, इन्हें एक रचनात्मक दौलत में बदलने की प्रतिभा और तौफ़ीक़ उनके पास है और इनका इस्तेमाल उन्होंने बड़ी विनम्रता, वस्तुनिष्ठता और सतर्कता से किया है। उनकी कविता में एक ‘गोपनीय आँसू’ और एक ‘कठिन निष्कर्ष’ है। इन दो चीज़ों को समझना आज अपने समय में कविता और समाज के, राजनीति और विचार के, और अन्ततः रचना और आलोचना के रिश्ते को समझना है। —असद ज़ैदी

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About the Book

मनमोहन बेशक उन कवियों में हैं जो ‘साहिबे-दीवान’ बनने से पहले ही अपनी पीढ़ी की प्रतिनिधि आवाज़ बन जाते हैं। मनमोहन की कविता में वैचारिक और नैतिक आख्यान का एक अटूट सिलसिला है। उनके यहाँ वर्तमान जीवन या दैनिक अनुभव के किसी पहलू, किसी मामूली पीड़ा या नज़ारे के पीछे हमेशा हमारे समय की बड़ी कहानियों और बड़ी चिन्ताओं की झलक मिलती रही है। वह मुक्तिबोधियन लैंडस्केप के कवि हैं। उनकी भाषा और शिल्प को उनके कथ्य से अलग करना नामुमकिन है। यहाँ किसी तरह की कविताई का अतिरिक्त दबाव या एक वैयक्तिक मुहावरे के रियाज़ की ज़रूरत नहीं है, एक मुसलसल नैतिक उधेड़बुन है जो अपने वक़्त की राजनीतिक दास्तानों और आत्मीय अनुभवों के पेचदार रास्तों से गुज़रकर उनकी भाषा और शिल्प को एक विशिष्ट ‘टेक्स्चर’ और धीमा लेकिन आश्वस्त स्वर और एक वांछनीय खामोशी प्रदान करती है। मनमोहन अपनी पीढ़ी के सबसे ज़्यादा चिन्तामग्न, विचारशील और नैतिक रूप से अत्यन्त शिक्षित और सावधान कवि हैं। एक मुक्तिबोधीय पीड़ा और महान अपराधबोध उनके काव्य संस्कार में हैं, इन्हें एक रचनात्मक दौलत में बदलने की प्रतिभा और तौफ़ीक़ उनके पास है और इनका इस्तेमाल उन्होंने बड़ी विनम्रता, वस्तुनिष्ठता और सतर्कता से किया है। उनकी कविता में एक ‘गोपनीय आँसू’ और एक ‘कठिन निष्कर्ष’ है। इन दो चीज़ों को समझना आज अपने समय में कविता और समाज के, राजनीति और विचार के, और अन्ततः रचना और आलोचना के रिश्ते को समझना है।
—असद ज़ैदी

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2026
Weight
165 grams
ISBN-13
9789377371838
Pages
160
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13 × 20 cm
Language
Hindi

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