Khwahishen
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"Khwahishen" is a Hindi poetry and Shayari collection; most of the verses are emotions of love, sadness, wait, n dreams etc.; the poetry is in simple Hindi n coupled with some lovely words of Urdu; the verses are an exploration of the soul, close to life, straight from the heart... The best part is the poems are felt through every human nature, and while reading, one feels it's all about my thoughts. Sonika 'Niti' Ahuja is a Hindi poet who started her career as a homoeopath but gave up her practice to look after her children. She is a proud mother of three daughters and a son, who passed away while he was still very young. She is a passionate writer who started writing in her early forties to express her thoughts, feelings and dreams. She is already an author of a book named 'Soul's Whispers'. She currently resides in Ludhiana, Punjab, with her husband, father-in-law and three daughters, whom she loves to her heart's content, and she is a source of inspiration for thousands of people...
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"Khwahishen" is a Hindi poetry and Shayari collection; most of the verses are emotions of love, sadness, wait, n dreams etc.; the poetry is in simple Hindi n coupled with some lovely words of Urdu; the verses are an exploration of the soul, close to life, straight from the heart... The best part is the poems are felt through every human nature, and while reading, one feels it's all about my thoughts. Sonika 'Niti' Ahuja is a Hindi poet who started her career as a homoeopath but gave up her practice to look after her children. She is a proud mother of three daughters and a son, who passed away while he was still very young. She is a passionate writer who started writing in her early forties to express her thoughts, feelings and dreams. She is already an author of a book named 'Soul's Whispers'. She currently resides in Ludhiana, Punjab, with her husband, father-in-law and three daughters, whom she loves to her heart's content, and she is a source of inspiration for thousands of people...
Book Details
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ISBN9788192955599
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Pages98
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Avg Reading Time2 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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उनकी कविता नितांत समसामयिक होकर भी समयातीत लगती है। वह पीछे भी देखती है और आगे भी, पर उल्लेखनीय बात यह है कि वह अपने समय में धँसी होने के बावजूद अपने समय में फँसती नहीं है। उनके काव्यबोध में जो अचूक क़िस्म की पारदर्शी सूक्ष्मता है, वह कई लोगों को जटिलता, रूपवाद, कलावाद का अवतार लगती है लेकिन रूपवादी कविता है नहीं। काव्य-प्रयोगों के लिए उनसे बड़ा कवि आज कम से कम हिन्दी में दिखाई नहीं देता
वे विचारधारा के पुल से होकर रास्ता तय करने वाले कवि नहीं हैं, बल्कि वे कविता की नदी को ख़ुद तैर कर पार करने वाले कवि हैं। कम से कम उनके लम्बे कवि-कर्म का संघर्ष यही प्रतिमान हमारे सामने रखता है। वे हिन्दी कविता के संसार में उन थोड़े से कवियों में हैं जिन्होंने चालू मुहावरे को तोड़कर अपनी कविता में संवेदना और काव्य-शिल्प के लिए अनोखा आयाम चुना है। अपनी काव्यभाषा के चुनाव में वे जितने विरल, संयमी और जागरूक कवि हैं, उतने कम ही कवि रहे हैं। यह उनकी चुनिन्दा कविताओं का संकलन है।
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साहिर लुधियानवी को जनसाधारण आम तौर पर फ़िल्मों के गीतकार के रूप में ही जानता-पहचानता है। लेकिन तथ्य यह है कि फ़िल्में उनके जीवन में बहुत बाद में आईं, उससे पहले वे एक प्रगतिशील शायर के तौर पर अपनी बड़ी पहचान बना चुके थे। फ़िल्मों ने बस उन्हें रोज़गार दिया जिसके जवाब में उन्होंने फ़िल्मों को कुछ ऐसे अमर उपहार दिए जिन्हें उन्होंने अपने ऊबड़-खाबड़ और गहरी उदासी में बीते जीवन में कमाया था।
एक ऐसे परिवार में पैदा होकर, जिसका शायरी और अदब से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं था, और एक ऐसे पिता का पुत्र होकर जिसके साथ उनके सम्बन्ध कभी पिता-पुत्र जैसे नहीं रहे और एक ऐसे समाज में जीकर जिसका सस्तापन, नाइंसाफ़ी और संकीर्णताएँ उनकी उदास आँखों से बचकर निकल नहीं पाती थीं, उन्होंने वह कमाया जिसे भले ही उस वक़्त के आलोचकों ने बहुत मान नहीं दिया, लेकिन जो आम आदमी की यादों में हमेशा के लिए पैठ गया। फ़िल्मों में आने से पहले ही वे अपने समय के सबसे लोकप्रिय और चहेते शायरों में शुमार हो चुके थे।
साहिर की ऐसी कई नज़्में और ग़ज़लें हैं, और गीत भी, जिनमें उन्होंने समाज की आलोचना दो-टूक लहज़े में की है। प्रगतिशील आन्दोलन से जुड़े साहिर की चिन्ताओं में गाँव में भूख और अकाल से जूझ रहे किसानों के दु:ख से लेकर शहरों में भूख के हाथों बिकतीं उन औरतों जिन्हें समाज वेश्या कहता है—तक का दर्द एक जैसी गहराई से आया है, जिसका मतलब यही है कि दु:ख को देखना, जीना और पकड़ना, शायर के रूप में यही उनका एकमात्र कौशल था, और इसी के विस्तार में उन्होंने हर माथे की हर सिलवट को पिरोकर तस्वीर बना दिया।
यह किताब उनकी रचनाओं का समग्र है, अभी तक उपलब्ध उनकी तमाम ग़ज़लों, नज़्मों और गीतों को इसमें इकट्ठा करने की कोशिश की गई है। उम्मीद है दर्द-पसन्द पाठकों को इसमें अपना वह खोया घर मिल जाएगा जो इधर की चमक-दमक में खो गया है।
Mohabbat Na Samaj Hoti Hai
- Author Name:
Wasim Barelvi
- Book Type:

- Description:
This book (Mohabbat Naa Samajh Hotii Hai) brings together such works, where on one hand the hardships of our times are depicted, and on the other, glimpses of the unspoken aspects of Wasim Barelvi’s life can also be found. Wasim Barelvi was born on February 8, 1940, in Bareilly, Uttar Pradesh. He is considered one of the most renowned and admired poets of the present time. His poetry reflects deep emotions and feelings. In his verses, one can see both the pain of clashing Eastern and Western cultures as well as respect for traditions. His poetry also highlights the bitterness of life’s struggles and expresses an inner sorrow over today’s political attitudes.
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Book
Khwahishen is a poetry collection that reads like a quiet conversation with your own heart. Sonika 'Niti' Ahuja, a homoeopath turned poet, writes in accessible Hindi softened by carefully chosen Urdu words, crafting verses that explore mohabbat, intezaar, sadness, and the half-formed dreams that live between waking and sleep. The emotional register is intimate and unguarded — readers often recognize their own unspoken thoughts reflected in Ahuja's lines. Her poetry does not perform; it confesses. Each piece feels less like a constructed literary artifact and more like an emotional snapshot, capturing the vulnerability of waiting for someone who may not return, the ache of love that outlives its object, and the resilience found in naming one's desires aloud. The simplicity of her language makes the emotion immediate, allowing the reader to step inside the poem without translation or distance.
इस किताब को पढ़ते समय मुझे कैसा अनुभव होगा?
यह किताब आपको एक शांत, आत्मीय यात्रा पर ले जाएगी जहाँ हर शेर आपके अपने अनकहे जज्बातों को छू लेता है। सोनिका 'निति' आहूजा की कविताएँ सरल हिंदी और उर्दू के खूबसूरत शब्दों में लिखी गई हैं, जो मोहब्बत, इंतज़ार, उदासी और सपनों को बयान करती हैं। पढ़ते समय लगेगा कि ये पंक्तियाँ आपके ही दिल से निकली हैं, और हर कविता एक ईमानदार बातचीत की तरह महसूस होगी।
यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है?
- जो पाठक सहज हिंदी और उर्दू मिश्रित शायरी को पसंद करते हैं
- जिन्हें प्रेम, विरह और इंतज़ार के भावों में रुचि है
- जो काव्य में जटिल रूपकों से अधिक सीधी, दिल से निकली अभिव्यक्ति चाहते हैं
- जो अपनी भावनाओं को किसी और की कविता में पहचानने का अनुभव चाहते हैं
आज के भारतीय पाठकों के लिए इस किताब की भावनात्मक प्रासंगिकता क्या है?
आधुनिक भारत में, जहाँ रिश्तों की गति तेज़ हो गई है और भावनाओं को व्यक्त करना कठिन हो गया है, ख्वाहिशें उन अनकही इच्छाओं और दर्द को शब्द देती है। युवा पीढ़ी जो डिजिटल दूरी और भावनात्मक अकेलेपन से जूझ रही है, उन्हें इन कविताओं में अपनी आवाज़ मिलेगी। यह संग्रह प्रेम, प्रतीक्षा और स्वप्नों को उस सरलता से प्रस्तुत करता है जो हर मनुष्य की प्रकृति से जुड़ता है।
सोनिका 'निति' आहूजा की कविता शैली को क्या खास बनाती है?
सोनिका 'निति' आहूजा होम्योपैथ से कवयित्री बनीं, और उनकी कविताएँ किसी साहित्यिक प्रदर्शन से अधिक एक आत्मीय स्वीकारोक्ति हैं। वह सरल हिंदी में लिखती हैं, लेकिन उर्दू के कुछ चुनिंदा शब्द उनकी कविता को गहराई और कोमलता देते हैं। उनकी शैली में कोई दिखावा नहीं, बल्कि सीधे दिल से निकली अभिव्यक्ति है, जिससे हर पाठक को लगता है कि ये उनके अपने विचार हैं।
इस किताब को पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या बचता है?
यह किताब आपको अपनी भावनाओं को पहचानने और स्वीकार करने की हिम्मत देती है। पाठक के मन में एक कोमल, भावनात्मक जागरूकता बची रहती है — कि इंतज़ार करना, प्रेम करना, और सपने देखना सभी मानवीय अनुभव हैं। यह संग्रह अकेलेपन को साझा अनुभव में बदल देता है, और पाठक को यह अहसास दिलाता है कि उनकी ख्वाहिशें भी किसी और के शब्दों में जीवित हैं।