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Shatrughna Charit

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ईश्‍वर के अंशावतार शत्रुघ्न के समग्र व्यक्‍त‌ित्व को उद्घाटित करने वाली यह कृति विश्‍व के साहित्याकाश की प्रथम एवं मौलिक कृति है। इस ग्रंथ में जहाँ ईश्‍वर अंश अवतार श्री शत्रुघ्न के अकथनीय कर्मयोग का अवतरण है, वहीं श्रीरामचरित मानस एवं वाल्मीकि रामायण के विवादित प्रसंगों की भी सही व्याख्या का अवतरण हुआ है। सनातन संस्कृति की वैदिक अवधारणाओं से लेकर संबंधित उपलब्ध सभी महनीय शास्त्रों का नवनीत इस ग्रंथ में प्रभु की कृपा से समाहित हुआ है। पावन श्रीरामचरित मानस और वाल्मीकि के संदर्भों और अंतर्निहित साक्ष्यों को आधार बनाकर ही इस ग्रंथ की रचना हुई है। अतः मूल तो वही ग्रंथ है, किंतु यह पावन ‘श्री शत्रुघ्न चरित’ महाकाव्य इन दोनों ग्रंथों का ज्योतिवाह अर्थात् प्रकाश-स्तंभ है। भारतीय अजेय चिंतनधारा को विकृत करने के आशय से की गई गलत व्याख्याओं को भी यथासंभव सही अर्थों में प्रस्तुत करने का कार्य इस ग्रंथ में हुआ है।

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ईश्‍वर के अंशावतार शत्रुघ्न के समग्र व्यक्‍त‌ित्व को उद्घाटित करने वाली यह कृति विश्‍व के साहित्याकाश की प्रथम एवं मौलिक कृति है। इस ग्रंथ में जहाँ ईश्‍वर अंश अवतार श्री शत्रुघ्न के अकथनीय कर्मयोग का अवतरण है, वहीं श्रीरामचरित मानस एवं वाल्मीकि रामायण के विवादित प्रसंगों की भी सही व्याख्या का अवतरण हुआ है। सनातन संस्कृति की वैदिक अवधारणाओं से लेकर संबंधित उपलब्ध सभी महनीय शास्त्रों का नवनीत इस ग्रंथ में प्रभु की कृपा से समाहित हुआ है। पावन श्रीरामचरित मानस और वाल्मीकि के संदर्भों और अंतर्निहित साक्ष्यों को आधार बनाकर ही इस ग्रंथ की रचना हुई है। अतः मूल तो वही ग्रंथ है, किंतु यह पावन ‘श्री शत्रुघ्न चरित’ महाकाव्य इन दोनों ग्रंथों का ज्योतिवाह अर्थात् प्रकाश-स्तंभ है। भारतीय अजेय चिंतनधारा को विकृत करने के आशय से की गई गलत व्याख्याओं को भी यथासंभव सही अर्थों में प्रस्तुत करने का कार्य इस ग्रंथ में हुआ है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Publication year
2016
Weight
353 grams
ISBN-13
9789382901518
Pages
480
Reading time
~16 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
10 × 10 cm
Language
Hindi

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