🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Rahasyavad

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

इस पुस्तक में रहस्यवाद जैसे गूढ़, गहन और अस्पष्ट विषय पर साहित्य और दर्शन के अध्येता डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी ने स्पष्ट और सांगोपांग विवेचन प्रस्तुत किया है। पुस्तक पाँच अध्यायों में विभक्त है। प्रथम अध्याय—स्वरूप तथा प्रकार; द्वितीय अध्याय—अनुभूत रहस्य तत्त्व का स्वरूप; तृतीय अध्याय—रहस्यानुभूति की प्रक्रिया; चतुर्थ अध्याय—साधनात्मक रहस्यवाद; पंचम अध्याय—रहस्य की अभिव्यक्ति। रहस्यवाद के स्वरूप पर विचार करते हुए लेखक ने स्पष्ट किया है कि रहस्यवाद ‘मिस्टीसिज़्म’ का रूपान्तर नहीं है बल्कि स्वतंत्र शब्द है और स्वतंत्र रूप में यह शब्द भारतीय प्रयोगों के आधार पर सुनिश्चित अर्थ से सम्पन्न है। ‘अनुभूत रहस्य तत्त्व का स्वरूप’ बताते हुए लेखक ने उपनिषद, तंत्र एवं नाथसिद्ध विचार परम्परा के आधार पर रहस्यानुभूति की व्याख्या की है। पुस्तक का सबसे महत्त्वपूर्ण अध्याय ‘रहस्यानुभूति की प्रक्रिया’ है जिसमें लेखक ने कबीर, जायसी आदि प्राचीन सन्त कवियों एवं प्रसाद, महादेवी आदि आधुनिक छायावादी कवियों के काव्य में प्राप्त रहस्यानुभूति के विविध रूपों का विवेचन किया है। रहस्यवादी कवियों की रूपगत और शिल्पगत विशेषताओं के विवेचन की दृष्टि से इस पुस्तक का अन्तिम अध्याय 'रहस्य की अभिव्यक्ति' विशेष रूप से द्रष्टव्य है।

Read more

₹ 450

360 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Rahasyavad This book ₹360
Bhartiya Kavyashastra Ke Nai Chhitij Rammurti Tripathi ₹1,295
Tulsi : Mulyankan (lok) Rammurti Tripathi ₹395
3 books selected ₹2,140 ₹2,050

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

इस पुस्तक में रहस्यवाद जैसे गूढ़, गहन और अस्पष्ट विषय पर साहित्य और दर्शन के अध्येता डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी ने स्पष्ट और सांगोपांग विवेचन प्रस्तुत किया है। पुस्तक पाँच अध्यायों में विभक्त है। प्रथम अध्याय—स्वरूप तथा प्रकार; द्वितीय अध्याय—अनुभूत रहस्य तत्त्व का स्वरूप; तृतीय अध्याय—रहस्यानुभूति की प्रक्रिया; चतुर्थ अध्याय—साधनात्मक रहस्यवाद; पंचम अध्याय—रहस्य की अभिव्यक्ति।

रहस्यवाद के स्वरूप पर विचार करते हुए लेखक ने स्पष्ट किया है कि रहस्यवाद ‘मिस्टीसिज़्म’ का रूपान्तर नहीं है बल्कि स्वतंत्र शब्द है और स्वतंत्र रूप में यह शब्द भारतीय प्रयोगों के आधार पर सुनिश्चित अर्थ से सम्पन्न है। ‘अनुभूत रहस्य तत्त्व का स्वरूप’ बताते हुए लेखक ने उपनिषद, तंत्र एवं नाथसिद्ध विचार परम्परा के आधार पर रहस्यानुभूति की व्याख्या की है।

पुस्तक का सबसे महत्त्वपूर्ण अध्याय ‘रहस्यानुभूति की प्रक्रिया’ है जिसमें लेखक ने कबीर, जायसी आदि प्राचीन सन्त कवियों एवं प्रसाद, महादेवी आदि आधुनिक छायावादी कवियों के काव्य में प्राप्त रहस्यानुभूति के विविध रूपों का विवेचन किया है। रहस्यवादी कवियों की रूपगत और शिल्पगत विशेषताओं के विवेचन की दृष्टि से इस पुस्तक का अन्तिम अध्याय 'रहस्य की अभिव्यक्ति' विशेष रूप से द्रष्टव्य है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
3rd
Publication year
1996
Weight
344 grams
ISBN-13
9789387462205
Pages
168
Reading time
~6 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp