Daryaganj Via Bazaar Fatte Khan
Author:
SujataPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 429
₹
550
Available
नीनो फ़त्ते ख़ाँ बाज़ार, बहावलपुर ही रह गई होती, तो शायद वैसी ही होती जैसी अब भी वहाँ रह रही हज़ारों औरते हैं। एक हवेली से दूसरी हवेली में दुल्हन बन कर जाती और ढेर सारे पोते-पोतियों की विरासत छोड़ कर दुनिया को विदा कहती। लेकिन 1947 में नीनो दरयागंज पहुँच गई। बसना चाहा। बिखर गई।
एक औरत की यह उजड़न सिर्फ़ उसकी कहानी न रह सकी, राजनीति और इतिहास की अनुगूँजों से भरी हुई वह उसकी सन्तानों में, पोते-पोतियों में रिसती चली गई—तीन पीढ़ियाँ एक अन्तहीन अजनबियत के सिलसिले में बँधी हुईं।
दिल्ली वाले मुल्तानी मिट्टी तो जानते हैं। मुल्तान के लोग भी थे, उनकी ज़बान भी थी, उनकी तहज़ीब भी थी—यह कोई नहीं जानता। वह सब दिल्लीवाला बनने की जल्दबाज़ी में, पाकिस्तान से आए पंजाबी न कहलाने के डर में धीरे-धीरे खोता जा रहा है।
तीन पीढ़ियों का यह आख्यान विभाजन की उस महात्रासदी से आगे बढ़ता है जिसे हम सब जानते हैं। यह उस अनकही दास्तान को खोलता है जिसमें रिफ़्यूजी दिल्ली में बसे और दिल्ली ख़ुद रिफ़्यूजियों से बसी। दोनों ने एक-दूसरे को नया चेहरा दिया—धीरे-धीरे, दर्द के साथ।
मुल्तान की खोई गलियों से दिल्ली के ज़ख़्मी दिल तक, कश्मीर की ख़ामोश, बेचैन वादियों से बॉम्बे की धड़कन तक—यह एक विस्तृत और मार्मिक गाथा है ज़बान की, भूगोल की, और कभी न थमने वाली भटकन की। यह कहानी बताती है कि जब वह सब कुछ जो घर कहलाता है, राख हो जाए, तब भी क्या है जो बचा रह जाता है।
एक बड़े जमाने और उसे जीने वाले बड़ी कद-काठी के लोगों और इतिहास की शक्ल बदलने वाली बड़ी घटनाओं का आख्यान है यह उपन्यास जो एक तरफ अगर क़िस्सागोई की नई उठान को संभव करता है, तो दूसरी ओर भाषा के संयम और सामर्थ्य को एक नई ऊँचाई देता है।
ISBN: 9789360864156
Pages: 440
Avg Reading Time: 15 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Phoolsunghi
- Author Name:
Gautam Choubey
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘Babu Sahib! You must have heard of a phoolsunghi—the flower-pecker—yes? It can never be held captive in a cage. It sucks nectar from a flower and then flies on to the next.’ When Dhelabai, the most popular tawaif of Muzaffarpur, slights Babu Haliwant Sahay, a powerful zamindar from Chappra, he resolves to build a cage that would trap her forever. Thus, the elusive phoolsunghi is trapped within the four walls of the Red Mansion. Forgetting the past, Dhelabai begins a new life of luxury, comfort, and respect. One day, she hears the soulful voice of Mahendra Misir and loses her heart to him. Mahendra too, feels for her deeply, but the lovers must bear the brunt of circumstances and their own actions which repeatedly pull them apart. The first ever translation of a Bhojpuri novel into English, Phoolsunghi transports readers to a forgotten world filled with mujras and mehfils, court cases and counterfeit currency, and the crashing waves of the River Saryu.
Chhayatmaja
- Author Name:
Sweta Parmar "Nikki"
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक एक लड़की से माँ के सफर की कहानी है, जो लेखिका द्वारा पूरी आत्मा से कागज पर शब्दों द्वारा उकेरी है। इस कहानी को पाठक अपनी जिंदगी से भी जोड़कर देख सकते हैं, क्योंकि इसे दिल की संपूर्ण भावनाओं से ओत-प्रोत कर आत्मा से शब्दों में बाँधा गया है। अगर सच्ची लगन, खुद पर यकीन और हौसला बुलंद हो तो कैसे भी हालात का सामना किया जा सकता है और अंत में जीत सत्य और उम्मीद की होती है। उपन्यास ‘छायात्मजा’ (एक बेटी... माँ सी) अपनी कथावस्तु के चलते पाठकों को नई ताजगी का एहसास करा पाएगा। ऐसी उम्मीद है! इस कहानी में जहाँ प्रेम के कई रंग एक साथ विभिन्न एहसासों से सराबोर करते हैं तो वहीं छाया के प्यार का सहज, निस्स्वार्थ और करुण चेहरा भी दिखता है। कभी दो बहनों के आपसी रोष तो कभी उनके त्याग, समर्पण और संघर्ष की अनूठी कहानी भी दिखती है। इस उपन्यास की कहानी लिखने के पीछे लेखिका की सकारात्मक सोच और हार न मानने का जज्बा है, जो पाठकों को निश्चित ही प्रेरित कर पाएगा।
Sattavara Sollu
- Author Name:
Karthik R +1
- Book Type:

- Description: “ಸ್ತುವರ ಸ್ಲಟಲುೆ”್ಇದು ಪ್ತರಕ್ತೆ ಮತುು ಕ್ತಲಗಾರರಾದ ಆಶುತಲಟೋಷ್ ಭ್ಾರದ್ಾಾಜ್ರ “ಮೃತುಾ ಕ್ಥಾ”್ಎೆಂಬ ಹಿೆಂದಿ ಕ್ೃತ್ತಯ ನಲೋರ ಕ್ನಾಡ ಅನುವಾದ. ಮಾವೋವಾದಿಗಳು ಮತುು ಭ್ಾರತ್ತೋಯ ಪ್ರಭುತಾದ ಮಧ್ಲಾ ನಡಲಯುತ್ತುರುವ ಸ್ೆಂಘಷ್ೆ ಮತುು ಇದರ ನಡುವಲ ಸಿಕ್ತಕಹಾಕ್ತಕಲಟೆಂಡಿರುವ ಆದಿವಾಸಿಗಳ ಬವರ್ಲಯ ಕ್ುರಿತು ಆಶುತಲಟೋಷ್ ಭ್ಾರದ್ಾಾಜ ಕ್ಳಲದ ಒೆಂದು ದಶಕ್ದಿೆಂದಲಟ ಬರಲಯುತಾು ಬೆಂದಿದ್ಾಾರಲ. ಹಲವಾರು ಧ್ವನಿ-ಧ್ಾಟಗಳಲ್ಲೆ ದೆಂಡಕಾರಣ್ಾದ ಸ್ೆಂಕ್ತೋಣ್ೆ ಮತುು ರಕ್ುಸಿಕ್ು ಆತಮವೃತಾುೆಂತವನುಾ ನಿರಟಪಿಸ್ಲು ಹಲಟರಡುವ ಈ ಕ್ೃತ್ತಯಲ್ಲೆ, ಒಬಬ ಪ್ತರಕ್ತೆನ ಶಿಸಿುನ ವರದಿಗಾರಿಕಲ, ಡಲೈರಿಯ ಆತ್ತೀಯತಲ, ಅೆಂಕ್ತಅೆಂಶಗಳ ವಸ್ುುನಿಷ್ಠತಲ ಮತುು ಕ್ತಲಗಾರಿಕಲಯ ಕ್ಲ್ಲ, ಇವಲಲೆವೂ ಸ್ಮಪಾಕ್ದಲ್ಲೆ ಬಲರಲತ್ತವಲ. ದ್ಲೋಶದ ಶಲರೋಷ್ಠ ಲ್ಲೋಖಕ್ರು ಮತುು ವಿಮಶೆಕ್ರ ಮೆಚ್ುುಗಲಗಲ ಪಾತರವಾಗರುವ ಈ ಕ್ೃತ್ತಗಲ ಹಲವಾರು ಪ್ರಶಸಿುಗಳು ಸ್ೆಂದಿವಲ. ಈ ಕ್ೃತ್ತ ಅನಲೋಕ್ ಭ್ಾರತ್ತೋಯ ಭ್ಾಷಲಗಳಿಗಲ ಅನುವಾದಗಲಟೆಂಡಿದ್ಲ.
Baisvin Sadi
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘बाईसवीं सदी’ राहुल सांकृत्यायन का पहला उपन्यास है। गोकि उन्होंने इसे भ्रमण-वृत्तान्त, निबन्ध और शब्दचित्र कहा था। वास्तव में यह अपने ढंग की अनूठी रचना है जो विधागत सीमाओं का अतिक्रमण करने के बावजूद अपनी औपन्यासिकता बचाए रखती है और असाधारण रूप से पठनीय है। इसमें राहुल ने भविष्य का वह चित्र आँका है जिसकी परिकल्पना उनके मन में थी। वे जिस समय—1924 में—यह पुस्तक लिख रहे थे उस समय रूस में साम्यवादी क्रान्ति हो चुकी थी और भारत में आज़ादी की लड़ाई असहयोग आन्दोलन के बाद नए मोड़ पर पहुँच चुकी थी। वे आज़ादी की लड़ाई में ख़ुद सक्रिय थे। ज़ाहिर तौर पर उनके सामने बराबरी और आज़ादी का एक उद्देश्य एक आदर्श था जिसकी प्रेरणा इस कृति में स्पष्ट दिखाई देती है। ‘बाईसवीं सदी’ एक ऐसे समाज का ख़ाका पेश करता है जो ज्ञान-विज्ञान में उन्नति हासिल कर, पुरानी व्यवस्था को आमूल बदलकर अभाव और भेदभाव की समस्त बेड़ियाँ तोड़ चुका है। कहना आवश्यक नहीं कि भावी समय का यह आख्यान पाठक को एक तरफ़, वर्तमान समाज की विषमताओं और बन्धनों के विरुद्ध सचेत करता है तो दूसरी तरफ, बराबरी पर आधारित समाज के स्वप्न को साकार करने के लिए प्रेरित भी। हिन्दी का पहला यूटोपियाई उपन्यास!
Shisha Ghar
- Author Name:
Pratyaksha
- Book Type:

- Description: ‘शीशाघर’ के केन्द्र में एक परिवार है जो सन् सैंतालिस में बिखरना शुरू होता है तो बिखरता ही जाता है। और जब हम एक मुल्क के, एक भरी-पूरी दुनिया के विभाजित होते जाने की त्रासदी से गुज़र रहे होते हैं तब एक इलहाम की तरह यह बात भीतर प्रकट होती है कि यह उपन्यास विभाजन और बिखराव से ज़्यादा उस अन्दरूनी इनसानी एकता के बारे में है जो इसके चरित्रों को बिखरकर भी बिखरने नहीं देती और वे एक-दूसरे से हज़ारों किलोमीटर दूर, दूसरे देशों में अपना रोज़मर्रा का जीवन जीते हुए भी एक-दूसरे से गहरे तौर पर जुड़े हुए हैं। इस उपन्यास के केन्द्र में है प्रेम, जिसका प्रवाह धर्म, नस्ल, राष्ट्र और भूगोल के सिरों को धूमिल करता, साथ ही लोगों के बसने, उजड़ने और फिर बसने की यादों को सहेजता चलता है। केन्द्रीय कथा से इतर भी इसमें बहुतेरे ऐसे चरित्र हैं जो प्रेम की आग में झुलसकर बन और बिगड़ रहे हैं या कि उनका व्यक्तित्व उस प्रेम की याद से बन रहा है। कभी न भूलनेवाले यादगार किरदारों, उनके द्वन्द्व और चाहनाओं, ज़िद और लापरवाहियों से बुनी हुई, देखी-जानी दुनिया के समानान्तर उतनी ही ज़िन्दा, सम्मोहक और मानीख़ेज़ एक दूसरी दुनिया।
Tejo Tungabhadra
- Author Name:
Vasudhendra
- Rating:
- Book Type:

- Description: 15-16 ನೆಯ ಶತಮಾಮನದ ಲಿಸ್ಬನ್, ವಿಜಯನಗರ ಮತ್ತು ಗೋವಾ ನಗರಗಳ ಸಾಮಾಜಿಕ ಮತ್ತು ರಾಜಕೀಯ ಜೀವನವನ್ನು ಆಧರಿಸಿ ಬರೆದ ಜನಸಾಮಾನ್ಯರ ಕಾದಂಬರಿ. ನಿಮ್ಮ ಹೊಸ ಕಾದಂಬರಿಯನ್ನು ಓದಿ ಮೂಕ ವಿಸ್ಮಿತನಾಗಿದ್ದೇನೆ. ಇಂತಹ ಶ್ರೇಷ್ಠ ಕೃತಿಯನ್ನು ಕನ್ನಡಿಗರಿಗೆ ಕೊಟ್ಟಿರುವ ನಿಮಗೆ ಹಾರ್ದಿಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು. – ಡಾ. ಸಿ ಎನ್ ರಾಮಚಂದ್ರನ್
Pachchoon Ka Ghar
- Author Name:
Chandrabhushan
- Book Type:

- Description: लेखक राजनीतिक-सामाजिक रूप से सजग और उद्विग्न हो तो पाठक हर पल कुछ नया पाने की उम्मीद करता है। वह कवि हृदय और पत्रकार भी हो तो यह एक लीथल कॉम्बिनेशन होता है। चंद्रभूषण की राजनीतिक सक्रियता के आरंभिक एक दशक का गवाह होने के नाते मैं भरोसे से कह सकता हूँ कि उनके कहन में अनुभवों का ताप है। विविध विषयों पर लिखने और रमे रहने की उनकी मेधा मुझे ईष्र्या की सीमा तक आकर्षित करती रहती है। मेरे लेखे चंद्रभूषण, जिन्हें हम चंदूभाई कहते हैं, एक दुर्धर्ष पढ़ाकू और घुमंतू व्यक्ति हैं जिसकी अब स्वाभाविक निष्पत्ति लिक्खाड़ की है। चंद्रभूषण की यह कहानी अंतत: एक समय की कहानी है, जो अभी जारी है और जिसमें हम सबका साझा है। —सैयद मोहम्मद इरफान (ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट, एंकर सेलिब्रिटी टॉक शो 'गुफ्तगू') कार्यकर्ता जब कार्यकर्ता है तो उसे पक्षधर होना ही चाहिए। वहीं, पत्रकार से उम्मीद होती है कि वह निष्पक्ष हो जाए। जैसा देखे वैसा रिपोर्ट करे। विश्लेषण में भी तटस्थ रहे। फिर वह कोई छोटी जमात तो है नहीं जो कार्यकर्ता से पत्रकार बनी। गांधीवादी, आंबेडकरवादी, सावरकरवादी, वामपंथी, अति वामपंधी हर धारा के कार्यकर्ता पत्रकार बनते रहे हैं। राजनीतिक कार्यकर्ता से पत्रकार बनने की एक यात्रा चंद्र्रभूषण के भी हिस्से आई है लेकिन पत्रकारिता से जुड़ी तीरंदाजी के किस्से इस किताब में नहीं हैं। यहाँ एक इंसान का जीवन है, जिसकी यात्रा समकालीन इतिहास को आड़े-तिरछे काटती है। एक ऐसा व्यक्ति जो संसार को खुली आँखों देखता है और उसके भद्देपन को अस्वीकार करता है। —दिलीप मंडल (पूर्व संपादक, इंडिया टुडे)
Ordained by fate
- Author Name:
Avatar Singh Judge
- Book Type:

- Description: English translation of Rajinder Singh Bedi's Award-winning Urdu novel Ek Chadar Maili Si by Avatar Singh Judge.
The Hidden Hindu
- Author Name:
Akshat Gupta
- Rating:
- Book Type:

- Description: इक्कीस साल का पृथ्वी एक अधेड़ और रहस्यमयी अघोरी ओम् शास्त्री की तलाश कर रहा है, जिसे पकड़कर भारत के एक सुनसान द्वीप पर अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच भेज दिया गया | विशेषज्ञों की एक टीम ने जब उस अघोरी को नशे की दवा दी और पूछताछ के लिए सम्मोहित किया, तो उसने दावा किया कि वह सभी चार युगों-सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग–(हिंदू धर्म के अनुसार चार युग) को देख चुका है और रामायण तथा महाभारत की घटनाओं में हिस्सा ले चुका है | जीवन के बाद मृत्यु के नियम को भी बेअसर साबित करनेवाले ओम् के अविश्वसनीय अतीत से जुड़े खुलासे सभी को हैरान कर देते हैं। उस टीम को यह भी पता चला कि ओम् हर युग के दूसरे अमर लोगों की भी तलाश कर रहा है। ऐसे विचित्र रहस्य अगर सामने आ गए तो प्राचीन धारणाएँ हिल जाएँगी और भविष्य की दिशा ही बदल जाएगी। तो यह ओम् शास्त्री कौन है? उसे पकड़ा क्यों गया? पृथ्वी उसे क्यों ढूँढ़ रहा है? सवार हो जाइए ओम् शास्त्री के रहस्यों, पृथ्वी की तलाश और हिंदू पौराणिक कथाओं के रहस्यों से भरे अन्य अमर लोगों के कारनामों की इस नाव पर, और चलिए एक रोचक और रोमांचक यात्रा पर|
Amar Desva
- Author Name:
Praveen Kumar
- Rating:
- Book Type:

- Description: कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीतते-न-बीतते उस पर केन्द्रित एक संवेदनशील, संयत और सार्थक औपन्यासिक कृति का रचा जाना एक आश्चर्य ही कहा जाएगा। कहानियों-कविताओं की बात अलग है, पर क्या उपन्यास जैसी विधा के लिए इतनी अल्प पक्वनावधि/जेस्टेशन पीरियड काफ़ी है? और क्या इतनी जल्द पककर तैयार होनेवाले उपन्यास से उस गहराई की उम्मीद की जा सकती है जो ऐसी मानवीय त्रासदियों को समेटनेवाले उपन्यासों में मिलती है? इनका उत्तर पाने के लिए आपको अमर देसवा पढ़नी चाहिए जिसने अपने को न सिर्फ़ सूचनापरक, पत्रकारीय और कथा-कम-रिपोर्ट-ज़्यादा होने से बचाया है, बल्कि दूसरी लहर को केन्द्र में रखते हुए अनेक ऐसे प्रश्नों की गहरी छान-बीन की है जो नागरिकता, राज्यतंत्र, भ्रष्ट शासन-प्रशासन, राजनीतिक निहितार्थों वाली क्रूर धार्मिकता और विकराल संकटों के बीच बदलते मनुष्य के रूपों से ताल्लुक़ रखते हैं। इस छान-बीन के लिए प्रवीण संवादों और वाचकीय कथनों का सहारा लेने से भरसक परहेज करते हैं और पात्रों तथा परिस्थितियों के घात-प्रतिघात पर ज़्यादा भरोसा करते हैं। इसीलिए उनका आख्यान अगर मानवता के विरुद्ध अपराध घोषित किए जाने लायक़ सरकारी संवेदनहीनता और मौत के कारोबार में अपना लाभ देखते बाजार-तंत्र के प्रति हमें क्षुब्ध करता है, तो निरुपाय होकर भी जीवन के पक्ष में अपनी लड़ाई जारी रखनेवाले और शिकार होकर भी अपनी मनुष्यता न खोनेवाले लोगों के प्रति गहरे अपनत्व से भर देता है। संयत और परिपक्व कथाभाषा में लिखा गया अमर देसवा अपने जापानी पात्र ताकियो हाशिगावा के शब्दों में यह कहता जान पड़ता है, ‘कुस अस्ली हे... तबी कुस नकली हे। अस्ली क्या हे... खोज्ना हे।’ असली की खोज कितनी करुण है और करुणा की खोज कितनी असली, इसे देखना हो तो यह उपन्यास आपके काम का है।
Andhre Me Ujale Ki Kiran
- Author Name:
Madhur Kulshreshth
- Book Type:

- Description: MADHUR KULSHRESHTH New Novel
Sachcha Jhooth
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: ‘सच्चा झूठ’ उपन्यास का विषय कोरोना काल है, और यह कहानियाँ सुनाता है उन लोगों की जो अपनी-अपनी जगहों पर, अपनी-अपनी हैसियत और हदों के साथ इस स्याह समय से गुज़रे, जिन्होंने इसकी तकलीफ़ों, डरों, सदमों और दुखों को कभी हिम्मत से तो कभी आशंकाओं के साथ झेला। यानी कथा है हम सब की। बहुत समय नहीं बीता है, जब सारी दुनिया अचानक कोरोना नाम की इस ख़ौफ़नाक महामारी के सामने असहाय हो गई थी। अमीर-ग़रीब, छोटे-बड़े, सब अचानक ऐसे हालात के सामने आ खड़े हुए जिनसे निबटने का तरीका किसी को नहीं आता था। एक नए ढंग की छुआछूत ने हम सबको अपनों तक से दूर कर दिया। शारीरिक दूरी की जगह सामाजिक दूरी ने ले ली और उन तमाम धागों को उधेड़ दिया, जो सामान्य समय में हमें एक समाज बनाते थे। इस उपन्यास में अलग-अलग पात्रों के हवाले से इस पूरे दौर की एक मुकम्मल तस्वीर प्रस्तुत की गई है। यहाँ एक तरफ़ अगर मौत का भय है, तो दूसरी तरफ़ हमारी सामाजिक-धार्मिक-आर्थिक उलझनें। कहीं पारिवारिक सम्बन्धों की दरकन दिखती है तो कहीं मनुष्यता के अनुकरणीय उदाहरण भी–यह उपन्यास इन सभी पहलुओं को बहुत बारीकी से अंकित करता है। एक प्रेम-कथा भी इस उपन्यास का हिस्सा है जो कोरोना के इसी भयानक दौर में धीर-धीरे परवान चढ़ती है, और कोरोना की चुनौती के साथ सामाजिक भेदभाव की बाधा को भी सफलतापूर्वक पार करती है।
Bhulan Kanda
- Author Name:
Sanjeev Buxy
- Book Type:

- Description: novel
Allah Ho Ram
- Author Name:
Sachchidanand Sachchu
- Book Type:

- Description: सब संप्रदायक अपन-अपन देवता छै। ककरो अल्लाह, ककरो राम। एक दोसरा सँ छत्तीसक आँकड़ा! मुदा कहियो एना बुझल जाइ छलै, 'अल्लाह मे राम छै आ राम मे अल्लाह' तेँ अल्लाह हो राम! सहज ग्रामीण अंत:चेतना मे व्याप्त अध्यात्म केँ जीवन-मूल्यक रूप मे लैत आजादी सँ पहिने जुआन होइत पीढ़ी आ आजादीक बादक क्रमश: वर्तमान रुढि़, वैमनस्यक बीच जुआन भेल आजुक पीढ़ी केँ अनायासे तुलनात्मक रूप मे देखै अइ उपन्यासकार आ सविस्तार ओकर कथा कहै अइ। तेँ एहि क्षेत्रक सांस्कृतिक परिवर्तन (सम्यक सँ उन्मादी दिस उन्मुख)क तटस्थ निरूपण संग एक टा ऐतिहासिक दस्तावेज बनि क' प्रस्तुत होइत अइ उपन्यास 'अल्लाह हो राम'। उपन्यासक यात्रा प्राय: सत्तरि-अस्सी बरखक छै। आजादी सँ पहिनेक समय-समाज सँ उपन्यास शुरू होइत छै। एहि विस्तृत अवधिक काल-कथा, एहि अवधि मे बदलैत मनुक्खक कथा, एहन सहज रूप मे गुंफित जे बेसीकाल लोक-कथाक सहोदर बुझाइए। कथा मे कथा, समयक कथा, चरित्रक कथा। सब के सब अपना तरहक रीयल लाइफ कैरेक्टर, अपन (उन्नत कि मलिन) मूल्यक संग जीवंत। आजादीक लड़ाइ, बँटवाराक दाह-दंश-दाग, सुखाड़क डाँग, बाढि़क मूंगरा-मारि, राजनीतिक दखलंदाजीक बीज आ उत्सव-त्योहारक संगहि स्त्रीक स्थिति आ उत्पीडऩ...सब किछु सहज-स्वाभाविक... टाइम-ट्रेन (काल रथ) पर यात्रा करै सन। खास क' पार्टीशन आ वृहत मुस्लिम समाज पर मिथिला-मैथिलीक परिप्रेक्ष्य मे ई पहिल उपन्यास थिक। मुखर सामाजिक सरोकार आ कथा कहबाक आकर्षक शिल्पक संग, उपन्यास 'अल्लाह हो राम' उत्तम रचनाक श्रेणी मे प्रमुख स्थान राखत। एक तरहें मैथिली उपन्यासक एक टा मीलक पाथर सिद्ध हैत, से विश्वास अछि। —कुणाल
Shilakshar Ban Mere Man
- Author Name:
Meena Jha
- Book Type:

- Description: 'शिलाक्षर बन मेरे मन' उपन्यास एक साथ स्त्री-संघर्ष और लड़ते-मरते कृषक समाज की आधुनिक महागाथा है। बिहार के 1967 के विश्व-व्यापी सूखे और अकाल की परिघटनाओं को लेकर मीना झा ने बहुत ही जीवंत और विश्वसनीय ढंग से इस उपन्यास के ताने-बाने को बुना है। अन्नदायिनी धरती की कोख में दरारें पड़ी हैं, खेत में खड़ी फसलें जल गई हैं या उसमें दाने नहीं हैं, नदियों का पानी सूख गया है, मछलियों के जीवन पर भी संकट आ गए हैं और छोटे बच्चों को स्कूलों में मिलने वाली खिचड़ी दुर्लभ पकवान से भी बढ़कर हो गई है और उसी समय सरकारी राशन की कालाबाज़ारी भी चरम पर—ऐसे अमानुषिक अकालबेला के जीवन का चित्रण कथाकार और यात्रा वृत्तांत की सिद्ध लेखिका मीना झा ने इस तरह किया है कि आप उस जीवन के तल में उतरने से खुद को रोक नहीं सकते। यहाँ सूखे और अकाल से जूझते लोगों की भीड़ से मीना झा ने कुछ ऐसे स्त्री-पुरुष, युवक-युवतियों और बच्चों को अपने कैनवस पर उतारा है जो उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र के रूप में सामने आते हैं और जिनके दीर्घ काल तक पाठकों के मन-मस्तिष्क में टिके रहने की प्रबल संभावना है। मिथिला समाज के मिट्टी-पानी में लिथड़े ये पात्र महज़ औपन्यासिक पात्र नहीं, उस समाज के प्रतिनिधि चरित्र हैं—नागार्जुन के 'बलचनमा' और 'वरुण के बेटे' के चरित्रों की तरह। मास्टर काका, विजय, बुढिय़ा दादी, शंभू, रागिनी तक को आप विस्मृत नहीं कर पाएँगे; प्रधान नायिका कुसुम की तो बात ही मत कीजिए। बेहद पठनीय यह उपन्यास जितना ही जीवंत और चाक्षुष है, उतना ही विचारोत्तेजक भी। —श्रीधरम
Mahashweta
- Author Name:
Tarashankar Bandyopadhyay
- Book Type:

- Description: सुविख्यात बांग्ला उपन्यासकार ताराशंकर बंद्योपाध्याय की यह पुस्तक कथावस्तु और रचना-शिल्प की दृष्टि से एक अनूठी और मार्मिक कथाकृति है। माता-पिताविहीन नीरजा नामक एक बालिका का जैसा चरित्र-चित्रण यहाँ हुआ है, वह सिर्फ़ तारा बाबू जैसे कथाकार ही कर सकते हैं। पशुवत् मनुष्यों के लोभ, कुत्सा और समाज की कुरूपताओं से अनथक संघर्ष करती हुई नीरजा मानो तेजोद्दीप्त भारतीय नारी का प्रतीक बनकर उभरती है, जिसमें परदुख-कातरता भी है और उसके लिए आत्मोत्सर्ग की भावना भी। एक ओर वह अनाचार से जूझने के लिए जलती हुई मशाल है, तो दूसरी ओर उसके अन्तर में प्रेम की अन्तःसलिला प्रवाहित हो रही है। नारी की आत्मनिर्भरता उसके जीवन का मूलमंत्र है, जिसे वह सम्मानपूर्वक जीने की पहली शर्त मानती है। वस्तुतः तारा बाबू ने इस उपन्यास में स्थितियों और परिवेश को नाटकीयता प्रदान करके विलक्षण प्रभाव उत्पन्न किया है।
Maa Ke Anpadhe Khat
- Author Name:
Prahlad Narayan Mathur
- Book Type:

- Description: अति प्रिय शीघ्र आने वाले नन्हें मेहमान, कुछ ही दिनों में तुम इस दुनिया में कदम रखोगे और किलकारियाँ मारोगे। उस समय मैं कितनी खुश होऊंगी इसका तुम अंदाजा नहीं लगा सकते। खुशी के आंसुओं से मैं तुम्हारा स्वागत करूंगी। मुझे तो बस उस दिन का बेसब्री से इंतजार है जिस दिन तुम इस दुनिया में आओगे। तुम्हारे पापा तुम्हें देख कर कितने खुश होंगे? तुम्हें पता भी है हमने तुम्हारा नाम पहले से ही सोच रखा है। तुम लड़के हुए तो मृगांक और लड़की हुए तो चांदनी। मगर इन सबसे पहले तुम हमारे लिए फरिश्ता होंगे। तुम्हारी हंसी और मुस्कान कितनी खूबसूरत और मनमोहक होगी। तुम हँसते हुए कितने सुंदर लगोगे, यह सोच कर ही मेरा दिल गदगद हो रहा है। मैं तुमसे वादा करती हूँ तुम्हें इतना प्यार दूंगी की सारी दुनिया का प्यार भी कम पड़ जाएगा। तुम हमारे जीवन में बहार बनकर आओगे। तुम्हारे आने से हमारा घर रौशन हो जायेगा और हमारा जीवन प्रसन्नता और खुशहाली से भर जाएगा। मैं इस खूबसूरत संसार में आने का तुम्हारा इन्तजार क्षण-प्रतिक्षण कर रही हूँ। तुम्हारी माँ, “रश्मि”
Ek Nibandhit Surang
- Author Name:
Mahaprakash
- Book Type:

- Description: Hindi Novel
Peer Nawaz
- Author Name:
Raju Sharma
- Book Type:

- Description: राजू शर्मा मन:स्थितियों की महीन डिटेल्स से अपने कथा-पात्रों का व्यक्तित्व रचते हैं। कहानी को सरपट इतिसिद्धम तक ले आनेवाले कथाकारों से अलग उनकी कहानी एक पूरा वातावरण बुनती हुई चलती है, असंख्य सच्चाइयों का एक विस्तृत ताना-बाना जिसका हर रेशा किसी साधारण कथाकार के लिए एक अलग कहानी या उपन्यास का विषय बन जाए। इसी गझिन बुनावट में उनका कथा-रस निवास करता है जिसमें पाठक उनके पात्रों के साथ अपने ख़ुद के मन की कई परतों को भी आकार लेते महसूस करता है। यह कथा जतिन की है जिसके साथ कथावाचक राघव का रिश्ता कुछ इस तरह से जटिल है: 'एक क्षण के लिए कल्पना कीजिए कि अचानक एक अजनबी सामने प्रकट होता है, जो तीस साल पहले तुम्हारा कॉलेज का सहपाठी था, आम दोस्ती थी...स्वाभाविक था तुम उसे भूल गए। अब वह सामने खड़ा है और एक निरीह नग्नता से अपना नाम, पता बतला रहा है। जैसे ही तुमने उसे पहचाना, एक स्मरण ने तुम्हें बाँध लिया : एक तस्वीर, अधखुले दरवाज़े का एक फ्रेम, जिसके पीछे यही शख़्स तुम्हारी प्रेमिका को बाँहों में बाँधे चूम रहा था।’ सालों बाद हुई इस मुलाक़ात के बाद धीरे-धीरे उसका एक नया रूप सामने आता है। वह बताता है कि उसे कहानी लिखने का वायरस लग गया। वह कहानियाँ लिखता है जो सच हो जाती हैं। वह उसे अपनी कहानियाँ सुनाता है और फिर कहता है... ‘डॉ. राघव रे, प्लीज़ सेव मी, आई एम सिंकिंग।’ ‘उसकी मनोदशा सामान्य नहीं थी, वह बीमार था और नहीं भी था। पर उसका स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया...अन्त में एक वक़्त आया जब जतिन गम्भीर हालत में अस्पताल में भरती हुआ।’ लेकिन फिर एक दिन वह अस्पताल से ग़ायब हो गया...
Mahua Ka Ped
- Author Name:
P. Baidyanath
- Book Type:

- Description: ‘महुआ का पेड़’ गाँव और शहर के विरोधाभास और उनके बीच आवाजाही करते सीधे-सादे पात्रों की ऐसी कहानियों का संग्रह है जो हमारे समय के यथार्थ को एकदम सरल और सहज भाषा में रेखांकित करती हैं। सरल हृदय लोगों की उदारता और स्वार्थ में अन्धे हुए लोगों की विद्रूपता के कई लोमहर्षक चित्र ये कहानियाँ हमारे सामने उपस्थित करती हैं। मनुष्यता को लेकर एक अन्तहीन उम्मीद इन कहानियों का वह आधार है जो कहीं कमजोर नहीं पड़ता। राबिया का सरल समर्पण हो या सुकुल बाबू और सुलक्षणा का मानवता के प्रति उदात्त व्यवहार; लेखक की निगाह अपने सूक्ष्म पर्यवेक्षण से जीवन में उन तन्तुओं की तलाश कर ही लेती है, जिनसे मनुष्य समाज प्रेरणा ग्रहण कर सकता है, और हताशा के अँधेरों में भी अपनी राह पा सकता है। ‘झूठी शान’ कहानी के नितेश और चन्दा अपने समाज की रूढ़ियों को ही किस तरह एक आधुनिक मोड़ देते हैं, यह देखने लायक है, इसी तरह जुम्मन द्वारा अपनी बकरी और उसके बच्चों को बचाने का संघर्ष मानव-मन की जटिल प्रकृति के उजले पक्ष को दिखाता है। इन कहानियों की एक उल्लेखनीय विशेषता इनकी सरल संरचना है जो इन्हें हर पाठक के लिए पठनीय बनाती है। कथाकार ने कहीं भी उपदेश देने का प्रयास नहीं किया, बल्कि जीवन के यथार्थ को एक सुन्दर कथा के रूप में ढालते हुए वे पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि वह अपने परिवेश के स्याह-सफ़ेद को स्वयं देख सके।
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...