Daryaganj Via Bazaar Fatte Khan
Author:
SujataPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 440
₹
550
Available
नीनो फ़त्ते ख़ाँ बाज़ार, बहावलपुर ही रह गई होती, तो शायद वैसी ही होती जैसी अब भी वहाँ रह रही हज़ारों औरते हैं। एक हवेली से दूसरी हवेली में दुल्हन बन कर जाती और ढेर सारे पोते-पोतियों की विरासत छोड़ कर दुनिया को विदा कहती। लेकिन 1947 में नीनो दरयागंज पहुँच गई। बसना चाहा। बिखर गई।
एक औरत की यह उजड़न सिर्फ़ उसकी कहानी न रह सकी, राजनीति और इतिहास की अनुगूँजों से भरी हुई वह उसकी सन्तानों में, पोते-पोतियों में रिसती चली गई—तीन पीढ़ियाँ एक अन्तहीन अजनबियत के सिलसिले में बँधी हुईं।
दिल्ली वाले मुल्तानी मिट्टी तो जानते हैं। मुल्तान के लोग भी थे, उनकी ज़बान भी थी, उनकी तहज़ीब भी थी—यह कोई नहीं जानता। वह सब दिल्लीवाला बनने की जल्दबाज़ी में, पाकिस्तान से आए पंजाबी न कहलाने के डर में धीरे-धीरे खोता जा रहा है।
तीन पीढ़ियों का यह आख्यान विभाजन की उस महात्रासदी से आगे बढ़ता है जिसे हम सब जानते हैं। यह उस अनकही दास्तान को खोलता है जिसमें रिफ़्यूजी दिल्ली में बसे और दिल्ली ख़ुद रिफ़्यूजियों से बसी। दोनों ने एक-दूसरे को नया चेहरा दिया—धीरे-धीरे, दर्द के साथ।
मुल्तान की खोई गलियों से दिल्ली के ज़ख़्मी दिल तक, कश्मीर की ख़ामोश, बेचैन वादियों से बॉम्बे की धड़कन तक—यह एक विस्तृत और मार्मिक गाथा है ज़बान की, भूगोल की, और कभी न थमने वाली भटकन की। यह कहानी बताती है कि जब वह सब कुछ जो घर कहलाता है, राख हो जाए, तब भी क्या है जो बचा रह जाता है।
एक बड़े जमाने और उसे जीने वाले बड़ी कद-काठी के लोगों और इतिहास की शक्ल बदलने वाली बड़ी घटनाओं का आख्यान है यह उपन्यास जो एक तरफ अगर क़िस्सागोई की नई उठान को संभव करता है, तो दूसरी ओर भाषा के संयम और सामर्थ्य को एक नई ऊँचाई देता है।
ISBN: 9789360864156
Pages: 440
Avg Reading Time: 15 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Q1. ‘Daryaganj Via Bazaar Fatte Khan’ क्या है?
Daryaganj Via Bazaar Fatte Khan एक ऐतिहासिक-सामाजिक उपन्यास है जो 1947 विभाजन के बाद दिल्ली की दरियागंज में बसे एक परिवार की कहानी बताता है, विशेष रूप से नीनो फ़त्ते ख़ाँ और उसकी संतानों के निजी संघर्ष, पहचान और सामाजिक बदलाव को उजागर करता है।
Q2. इस किताब के मुख्य विषय क्या हैं?
इस उपन्यास में विभाजन, पलायन, सांस्कृतिक पहचान, भाषा, परिवार, और दिल्ली के बदलते सामाजिक ताने-बाने जैसे गहरे और बड़े विषयों को भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।
Q3. यह किताब किसके लिए उपयुक्त है?
यह उपन्यास ऐसे पाठकों के लिए उपयुक्त है जो ऐतिहासिक कथाएँ, सामाजिक कहानियाँ, पारिवारिक स्मृतियाँ और विभाजन के बाद के भारतीय अनुभवों को समझना चाहते हैं।
Q4. क्या यह किताब इतिहास पर आधारित है?
हालाँकि यह उपन्यास कल्पनात्मक रूप से लिखा गया है, लेकिन यह विभाजन के ऐतिहासिक अनुभवों, दिल्ली के समाजिक परिवर्तनों, और सांस्कृतिक संघर्षों को गहरे मानवीय दृष्टिकोण से दर्शाता है।
Q5. उपन्यास का संदेश क्या है?
यह किताब बताती है कि घर, पहचान और भाषा कितनी महत्वपूर्ण होती हैं और कैसे ये तत्व विभाजन और समय के साथ बदलते-बदले समाज में जड़ें बनाते हैं।