Joothi Gali
Author:
Hrishikesh SulabhPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 319.2
₹
399
Available
‘जूठी गली’ जीवनानुभव का एक ऐसा लोक है जिसके भीतर वर्तमान की आँधी में इतिहास की धूल और राख उड़ती रहती है।
जब अठारहवीं सदी के आरम्भ में पटना का नाम अज़ीमाबाद हुआ, उन्हीं दिनों जूठी गली की नींव पड़ी थी। उन दिनों से अब तक यह गली ज़िन्दा है। लोग जनमते और विदा होते रहे, मकान बिकते-ढहते-बनते रहे, जूठी गली अपना रूप बदलती रही और किसी ज़िन्दा इनसान की तरह धड़कती रही। इसके बाशिन्दे ख़बरों के रसिया हैं। ख़बरें इस गली में हवा के पर लगाकर उड़ती हैं। जन्म और मृत्यु दोनों के लिए यहाँ समान भाव से सुख-दुःख उपजता है। प्रेम और नफ़रत एक ही बटुए में रखकर लोग आपस में मिलते-जुलते हैं। जो ज़ुबान प्रशंसा करते नहीं थकती वह पीठ फेरते ही निन्दा रस उड़ेलने लगती है। इस गली में मध्यवर्गीय प्रपंचों के कीचड़ में लिथड़कर जीती स्त्रियों के साथ ऐसी स्त्रियाँ भी हैं जो पुरुषों के वर्चस्व को चुनौती देती हैं और परिदृश्य बदल जाता है। राजनीति ने अपने नाख़ूनों के खरोचों से जूठी गली को जो घाव दिए हैं, लोग उन्हें सहलाते हुए जीते हैं। इस गली में जाति-दंश की ज़हरीली हवा बहती है। प्रेम करनेवाले यहाँ सम्मान नहीं, हँसी के पात्र हैं।
हृषीकेश सुलभ अपनी रचनाओं में स्वयं नहीं बोलते बल्कि उनके पात्रों का जीवन-व्यापार और परिवेश कथ्य को सघनता से प्रकट करता है। अपनी सहज भाषा की मार्मिकता और आत्मीय कहन के हुनर के सहारे वे कथा के बीहड़ में उतरते हैं और जीवन के ऐसे क्षणों को रचते हैं जो मानवीय गरिमा की रक्षा करते हैं। जूठी गली हमारे समय का जीवन्त दस्तावेज़ है।
ISBN: 9789360869526
Pages: 248
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: The person achieves his objective without fretting about anyone if he possesses the yearning and resolves to accomplish something for the society, but then there is that segment in our society that always maintains a negative approach towards everything. They especially strive to distract those who strive for society's betterment and create multiple obstacles in their path. A similar incident transpired with Ambuj to deviate him from his goal. At the same time, vicious circles were structured by the adversaries and by the personnel associated with his organisation. While moving through the path of truthfulness and noble feats, a person often passes through the long haul of sinister, shadowy conduits, where he might ramble in the confusion of his choice. Still, when he approaches the end of the dark tunnel, he encounters the golden rays of pleasant morning rays spreading its light. The novel The Ungrateful is another milestone in the powerful writing of famous litterateur Shri Ramesh Pokhriyal 'Nishank', which exposes both the morally upright, virtuous and ruthless and unscrupulous facets of society. It furnishes the hallmark of bonded, shattered, and reconnected associations.
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Book
‘Jhoothi Gali’ किस बारे में है?
Jhoothi Gali एक ऐसा उपन्यास है जो एक गली के जीवन के जरिये इतिहास, समाज और मानवीय अनुभवों को उजागर करता है, जहाँ समय-समय पर गली अपने रूप बदलती रही है और इंसानों की यादें, भावनाएँ और संघर्ष उसमें बुनते गये हैं।
यह किताब किस शैली की है?
यह किताब समकालीन उपन्यास / साहित्य शैली में आती है, जिसमें जीवन के सामाजिक और ऐतिहासिक पहलुओं को कथात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कौन इस किताब को पढ़ना पसंद करेगा?
यह उपन्यास उन पाठकों के लिए उपयुक्त है जो भारत के सामाजिक बदलाओं, मानवीय अनुभूतियों, इतिहास और जीवन-कथाओं में रुचि रखते हैं।
क्या ‘Jhoothi Gali’ का कोई प्रतीक-विषय है?
हाँ, “Jhoothi Gali” प्रतीकात्मक रूप से जीवन, इतिहास और समाज के बीच स्मृतियों, धूल और बदलते अनुभवों को दर्शाती है, ताकि पाठक अपने जीवन के अनुभवों से उसका सम्बंध महसूस कर सकें.